Pahadiya Varsha ke sur mein Class 5 chapter 12 hindi Pathbahar West Bengal Board, कक्षा 5 हिंदी पाठबहार पाठ 12 पहाड़िया वर्षा के सुर में पश्चिम बंगाल बोर्ड

कक्षा 5 हिन्दी पाठबहार (NOTES) पश्चिम बंगाल बोर्ड

 पाठ 12
पहाड़िया वर्षा के सुर में

श्चिम बंगाल के उत्तर में हिमालय है। उसकी तलहटी में हरे-भरे जंगल है, जिसका पुकारू नाम है-तराई। उस हरे-भरे जंगल की आँचल नीचे मैदानी भू-भाग तक उतर आई है। जंगल से सटकर बहती चली जाती हैं, पहाड़ी नदियाँ तिस्ता, तोरसा, रंगित...। जंगल में इनके टेढ़े-मेढ़े रास्ते के पास मेच, राभा, गारो, लेपचा और टोटो लोगों का निवास है। समुहों में एक साथ मिलकर रहने के बावजूद भी गाँव के आस-पास रहने वाले समाज के अन्य लोगों के साथ भी इनका गहरा आत्मीय संबंध है। इनमें प्रत्येक की अपनी-अपनी भाषा है। उसी भाषा में सैकड़ों वर्षों से इनकी कहानियाँ और गीत लिखे गए हैं।

इन आदिम जनसमाज के पर्व और त्यौहार सजीव हो उठते हैं उनके गीतों के सुर और नृत्यों की ताल पर। दल बनाकर मछलियों को पकड़ने जाना राभा समाज के जीवन का एक आनंददायक पर्व है। उसी समय का एक गीत-

फै लोगो फै ना रोतिया, 
          बौसीर पिदान दि नौयाय 
          चिका पिदानाय लोगो ना लोयेया।
                  हासाम नोकया चिकाऊयाय,
लोगो ना तो लोयेड्या -    
           कुरूया वा क्रोंगाइता 
मासा लांगा पूइमोन         
            ना सानि लामाइ तारे 
इबाई माँझा हावाइ माना    
          फै लोगों ना लो येया।
चलो मछली पकड़ें चलकर 
          नए साल के नए जल में
उफन रही नदी जल भरकर
        जल से भरे खेत मैदान
      कुरूया पंक्षी रोते-रोते उड़ता है
        बगुले उड़ते कतारों में 
         रामचिरैया चोंच मारती बार-बार 
               मछली मिली नहीं किसी बार
खाएगी क्या वह अब।      
                       मछली इधर नहीं तो उधर चल ।।

👉 रक्षाबंधन पर छोटे-बड़े निबंधध

किस तरह बारिश आती है, के बारे में लेपचा समाज में एक प्रचलित लोककथा है। वह लोककथा इसप्रकार है-

एक बार धरती पर भयकंर सूखा पड़ा। मनुष्य, पशु-पक्षी, पेड़-पौधे सभी मरने लगे। धरती के सभी प्राणी मिलकर सोचने लगे कि कैसे बारिश को लाकर धरती को बचाया जाय।

मेढक स्वेच्छानुसार इस कार्य में जुटा। उसने तय किया कि भगवान के पास जाकर उनसे पूहूँगा कि क्यों वह अपनी सृष्टि की इतनी उपेक्षा कर रहे हैं।

एक दिन सुबह की बेला में उसने यात्रा शुरू की। भगवान तो रहते हैं बहुत दूर और उनके राजमहल तक जाने वाला रास्ता बहुत ही थकावट भरा है। रास्ते में चलते हुए उसकी भेंट एक मधुमक्खी से हुई। उसने मेढक से पूछा- "कहाँ जाओगे?" मेढक ने कहा, "भगवान के पास। घोर अकाल पड़ा है।" मधुमक्खी ने कहा, "अच्छा चलो, मैं भी साथ चलूँ।" अकाल से हम भी बेहाल है। पानी नहीं है, फूलों की कमी है, मधु पाऊँगी कहाँ से!"

चलते-चलते रास्ते में मुर्गा भी मिला। उसने मेढक के मुँह से स्वर्ग जाने की बात सुनकर उसने भी कातर स्वर में कहा, "अकाल के चलते सभी फसलें नष्ट हो रही हैं। दानों के बिना बचूँगा कैसे? चलो, मैं भी जाऊँगा।" इसी तरह चलते-चलते घने जंगलों के बीच उनकी भेंट एक भूखे बाघ से हुई। उसने भी वही प्रश्न पूछा, "तुम सभी मिलकर कहाँ जा रहे हो।" उसे भी सब कुछ बताया गया। तब वह बाघ भी उन लोगों के साथ जाने के लिए तुरंत तैयार हो गया, क्योंकि जीव-जन्तुओं के खाये बिना मर जाने पर वह भी तो अकेले बचा नहीं रह सकता।

अन्त में लंबी यात्रा तय करके वे भगवान के राजमहल में पहुँचे और देखे कि वहाँ सभी तरह-तरह के भोज और आनंदोत्सव में मग्न है। उनकी पत्नियाँ, मंत्रीगण सभी मौज-मस्ती में डूबे हुए हैं। मेढक की समझ में अब आ गया कि क्यों राज्य में इतना अभाव और दुख है।

क्रोधित व उत्तेजित अवस्था में भगवान के पास गए। उन्हें देख भगवान ने अपने सिपाहियों को बुलाया। तब मधुमक्खियाँ उन्हें डंक मारने दौड़ीं। बाघ गुर्राया और उन्हें खा जाने का भय दिखाया। हंगामें में मुर्गा भी अपने पंखों से झपट्टा मारकर डराने लगा। तब भगवान ने अपने मंत्रियों को बुलाया और उन्हें उनकी गलतियों के लिए कड़ी डांट-फटकार लगाई।

इसके बाद अपनी जीत से गर्वित मेढक खुश होकर टर्राते हुए तालाब में वापस चला गया। तभी से जब मेढक टर्राता है, तब बारिश होने लगती है।

👉 कक्षा 5 हिन्दी पाठ बहार सम्पूर्ण हल 

शब्दार्थ: तलहटी = तराई; कातर = व्याकुल; मग्न = मस्त; आत्मीय = अपना; बेहाल = दुर्दशा

राभा गीत  'पश्चिमबंग' पत्रिका की 'जलपाईगुड़ी जिला' संख्या के 'जलपाईगुड़ी जिला की वर्णमय लोकसंस्कृतिः नृत्य और गीत" नामक लेख से लिया गया है। इसके लेखक हैं सुनील पाल। गीत का वांग्ला अनुवाद भी उन्होंने किया है। उक्त गीत के मूल-पाठ संकलन और शब्दार्थों के चयन में दयचाँद राभा ने सहयोग दिया है। वे लोकसंस्कृति के एक नामी गवेषक और कई ग्रंथों के प्रणेता है। लेपचाओं की इस प्रचलित लोककया का बांग्ला अनुवाद ऐन्द्रिला भौमिक ने किया है। जिसका हिंदी अनुवाद उपरोक्त पाठ में दिया गया है। ]

 कविता का सारांश 

प्रस्तुत लोकगीत 'पश्चिम बंग' पत्रिका में प्रकाशित 'जलपाईगुड़ी शिक्षा की वर्णभय लोक संस्कृति 'नृत्य और गीत' शीर्षक लेख से ली गई है। इस गीत को लिखने और बांग्ला भाषा में अनुवाद करने का श्रेय सुनील पाल को जाता है।

पश्चिम बंगाल के उत्तर में हिमालय पर्वत और हरे-भरे जंगल हैं। उसी पहाड़ एवं हरे-भरे जंगल से सटे टेढ़े-मेढ़े मार्ग में मेच, राभा, गारो, लेपचा और टोटो जन-जातियों का निवास है। दलों में मिलकर रहने के बावजूद भी आस-पास रहने वाले समाज के अन्य लोगों के साथ इनका गहरा संबंध रहता है। इनमें प्रत्येक की अपनी-अपनी भाषा है। अतः उसी भाषा में सैंकड़ों वर्षों से कहानियों और गीतों को लिखा गया है। यह आदिम जनमानस अपने पर्वो, उत्सवों में दलबद्ध होकर सुख आनंद लेते हैं। इनमें दलबद्ध होकर मछलियों को पकड़ने जाना राभा समाज का आनंददायक पर्व है। इस उत्सव में गाये जाने वाले गीत है -

फै लोगों फै ना रोतिया,   ..................   फै लोगों ना लो येया।'

    लेपचा समाज में वर्षा को लेकर एक लोक प्रचलित क्या है कि एक बार धरती पर भयंकर सूखा पड़ा। धरती के सभी प्राणी मिलकर सोचने लगे कि कैसे बारिश को लाकर धरती को बचाया जाय। मेंढक ने तय किया वह स्वयं भगवान के पास जाकर पूछेगा कि वह अपने सृष्टि की इतनी अवहेलना क्यों कर रहे हैं। एक दिन सुबह के समय उसने यात्रा प्रारंभ की। भगवान तो बहुत दूर रहते हैं। रास्ते में उसकी भेट मधुमक्खी, मुर्गा और बाघ से हुई। तीनों की समस्या समान थी। अतः चारों मिलकर भगवान के राजमहल पहुँचे और देखा कि वहाँ के मंत्रीगण एवं उनकी पंत्नियाँ सभी अपने मौज-मस्ती में लीन हैं। मेंढक अब समझ गया कि राज्य में इतना अभाव और दुःख क्यों है। वह क्रोधित और उत्तेजित होकर भगवान के पास पहुँचा। उन्हें देख भगवान ने अपने सिपाहियों को उन्हें पकड़ने के लिए बुलाया, सिपाही उन्हें जैसे ही पकड़ने के लिए पहुँचे सभी मधुमक्खी डंक मारने दौड़ी, बाघ ने उन्हें खा जाने का भय दिखाया। मुर्गा भी अपने पंखों से झपट्टा मारकर डराने लगा। भगवान इन चारों के पास स्वयं पहुँचकर उनके कष्टों का कारण पूछा। धरतीवासियों के कष्टो को जनने के बनने के पश्चात् भगवान अपने मंत्रियों को बुलाकर उनकी गलतियों के लिए कड़ी डॉट-फटकार लगाई एवं उन्हें निष्ठापूर्वक अपने आप को धरतीवासियों के प्रति समर्पित हो कार्य करने का निर्देश दिया। इस जीत से गर्वित मेढ़क खुश होकर टरतेि हुए तालाब में वापस चला आया। तभी से जब मेढ़क टर्राता है, तो बारिश होती है।

शब्दार्थ : तलहटी = तराई; पुकारु = प्रचलित पुकारने वाला नाम; सुर = स्वर; लोककथा = स्थानीय जनता में प्रचलित कहानी जिसमें कुछ खास संदेश निहित हो; स्वेच्छानुसार = अपनी इच्छा से। कातर = अधीर, व्याकुल; मग्न = मस्त, डूबे हुए; बेहाल = दुर्दशा, परेशान। 


अभ्यासमाला  

1. संक्षेप में उत्तर दो।

1.1 पश्चिम बंगाल के किसी एक पहाड़ का नाम लिखो।

उत्तर : पश्चिम बंगाल का एक पहाड़ सिंगलीला पर्वत है।

1.2 पहाड़ की बात करते ही तुम्हारी आँखों के सामने कैसा दृश्य आता है?

उत्तर : पहाड़ की बात करते ही हमारे सामने ऊँची-ऊँची चोटियों, तीव्र गति से बहती नदियों एवं हरे-भरे वृक्षों का दृश्य उपस्थित हो जाता है।

1.3 वर्षा में मछली पकड़ने की अपनी अनुभूति अथवा मछली पकड़ने से सम्बन्धित कोई कहानी या कविता लिखो।

उत्तर : वर्षात् के मौसम में वर्षा से जब तालाब पानी से भर जाते हैं तो तालाब में वंशी डालकर मछली पकड़ने में बड़ा मजा आता है। एक दिन मैंने एक कहानी पढ़ी थी- शिकारी का शिकार। उस दिन भी मैं मछली मारने गया था। वंशी में फंस कर जब मछली निकली तो वह बड़ी तेजी से तड़ फड़ा रही थी। उसकी तड़ फड़ाहत देखकर मैंने उसे पुनः उसी तालाब में छोड़ दिया। जब मैं घर गया तो यह बात मैंने अपने पिताजी से बतायी, तो वह हंसे और बोले, "जीव जीवस्य भक्षकः।"

1.4 वर्षा काल का प्राकृतिक रूप कैसा होता है? तुम्हारी पाठ्य-पुस्तक में वर्षा से जुड़ी और कौन-कौन सी बातें लिखी हैं?

उत्तर : वर्षा काल का प्रकृतिक दृश्य बड़ा सुहावन लगता है। चारों तरफ नदी-नाले जल से लबा-लब भर जाते हैं, पेड़-पौधे हरे-भरे हो जाते हैं। चारों ओर मैदान हरी घासों से भर जाते हैं जिनमें फुटबाल और कबड्डी खेलने में बड़ा मजा आता है। वर्षा का पानी पड़ते ही धान के पौधे लहराने लगते हैं। किसी दिन अधिक वर्षा होने पर स्कूल की छुट्टी हो जाती है और हम दिन भर खेलते हैं। हमारी पाठ्य पुस्तक में वर्षा से जुड़ी एक कहानी लिखी गयी है जिसमें बतलाया गया है कि मेंढक के टर्र-टर्र आवाज करने पर और अधिक वर्षा होती है।

2. वाक्यों को मिलाओ।

उत्तर :-

क                                                      ख

कुरूया पंक्षी रोते-रोते उड़ता है-----बगुले उड़ते कतारों में

चलो मछली पकड़े चलकर-----नए साल के नए जल में

रामचिरैया चोंच मारती बार-बार---मछली इधर नहीं तो उधर चल

खाएगी क्या वह--------मछली मिली नहीं किसी बार

3. दिए गए सूत्रों के अनुसार गीत से कहानी बनाओ ?

 नए वर्ष में जल में ..। बरसात के सुहाने समय में कितने पक्षी खेत खलिहान मैदान उनमें कोई ....... जब मछली इधर नहीं मिली तो उधर चल।

उत्तर : नये वर्ष में आज पहली बार वर्षा हो रही है। मौसम बड़ा सुहावना हो गया है। चारों तरफ हरियाली ही हरियाली नजर आ रही है। नदी, तालाब सभी जल से भर गये हैं। खेत खलिहानों में चारों तरफ पक्षी चहचहा रहे है। चलो मछली पकड़े। पानी कम होने की वजह से इधर मछली नहीं मिल रही है। चलो दूसरी जगह मछली पकड़ते हैं।

4. किसी उत्सव या कार्यक्रम में तुमने खूब मौज-मस्ती किया और तुम्हें आनंद मिला है। उस दिन तुमने क्या-क्या किया उसे दैनिकी/डायरी के रूप में अपनी कॉपी पर लिखो।

उत्तर : 20 अप्रैल 2016 को मैं अपने मामा की लकड़ी की शादी में उनके घर गया था। मैं, पिताजी और मां के साथ शाम को मामा के घर करीब तीन बजे पहुंचा। मां और पिताजी वहां पर शादी के काम में व्यस्त हो गये। वहां अनेक रिश्तेदारों के और लड़के आये थे। मैं उनके साथ घूमने खेलने लगा। खाने के लिए वहां अनेक चीजें थीं। खेलने के बाद हम लोगों ने जमकर खाना खाया। मुझे आइस्क्रीम बहुत अच्छा लगता है। मैं पांच बार आइस्क्रीम खाया। खाते-खेलते पता नहीं मुझे कब नींद आ गयी और मैं हाल में सो गया। वापस जाने के लिए जब पिताजी ने उठाया तो पता लगा सुबह के पाँच बज रहे है।

5. वैसी दो रचनाओं का नाम लिखो जिनकी मूल कहानी किसी अन्य भाषा में लिखी हो और उसे तुमने अपनी भाषा में पढ़ा और तुम्हें अच्छा लगा हो।

उत्तर : काबुलीवाला और नन्हा संगीतकार

👉 कक्षा 5 हिन्दी पाठ बहार सम्पूर्ण हल 

6. बरसात के किसी एक दिन के अपने अनुभवों के बारे में लिखते हुए अपने मित्र को पत्र लिखो।

उत्तर : 

कोलकाता

20.02.2016

प्रिय विवेक

नमस्कार, 

   आज सुबह जब नींद खुली तो देखा कि बड़े जोर से वर्षा हो रही थी। मेरी खुशी तव और बढ़ गयी जब मां ने कहा कि इस तेज वर्षा में स्कूल जाने की जरूरत नहीं है। विस्तरे से उठकर नहा धोकर, खा पीकर तैयार हुआ और घर पर ही पढ़ने लगा। करीब 2 बजे वर्षा बन्द हो गयी। अब इच्छा हो रही थी कि बाहर जाकर फुटबाल खेलें। माँ ने जाने की स्वीकृति दे दी। मैं जब विद्यालय के बाहर के मैदान में गया तो वहां मेरी कक्षा के कुछ लड़के आ गये थे। हम लोगों ने दो टोली तैयार की और जमकर फुटबॉल खेले। दो घंटा बाद हम लोग थक गये। खेल बन्द कर जब हम लोग घर पहुँचे तो पूरा शरीर और कपड़ा कीचड़ में सना हुआ था।

  मां और पिताजी को मेरा प्रणाम कहना।


तुम्हारा मित्र

अरविन्द

8. नीचे के प्रश्नों का उत्तर अपनी भाषा में लिखो।

8.1 प्रकृति को बारिश किस तरह बचाती है?

उत्तर : प्रकृति में हम अपने चारों ओर खेत-खलिहान, बगीचे, नदी-तालाब आदि देखते हैं। जब बारिश होती है तो नदी, नाले और तालाब पानी से भर जाते हैं। चारों तरफ हरियाली फैल जाती है। पक्षी मस्ती से चहचहाने लगते हैं। जानवरों को खूब भोजन मिलता है। पेड़-पौधे हरे भरे हो जाते है। चारों तरफ खुशी छा जाती है। इस तरह बारिश प्रकृति को बचाती है।

8.2 अकाल या सूखा कहने से क्या समझ में आता है?

उत्तर : जय वर्षा नहीं होती है तो फसलों की बुवाई नहीं हो पाती और जमी हुयी फसल सूख जाती है। अतः लोगों के पास खाने का अभाव हो जाता है। लोग भूखों मरने लगते है। इस भुखमरी को ही सूखा या अकाल कहते हैं।

8.3 बारिश नहीं होने के कारण मनुष्यों, पशु-पक्षियों, पेड़-पौधों की दशा कैसी हो गई थी?

उत्तर : बारिश नहीं होने से भोजन के अभाव में मनुष्यों, पशु-पक्षियों और पेड़-पौधों की हालत खराब हो गयी थी। सभी अत्यंत दुखी हो गये थे।

8.4 भगवान के राजमहल में पहुँच कर मेढक ने क्या देखा?

उत्तर : भगवान के राजमहल में पहुंचकर मेंढक ने देखा कि वहां पर सभी लोग तरह-तरह के भोज और आनंदोत्सव में मग्न थे। उनकी पत्नियां और मंत्रीगण सभी मौज मस्ती में डूबे हुए थे।

8.5 राजमहल के दृश्य को देखकर मेंढक गुस्से में आकर उत्तेजित क्यों हो गया?

उत्तर : पृथ्वी पर पानी नहीं बरस रहा था और यहाँ पर अन्न के अभाव में लोग भूखों मर रहे थे। राजमहल में भगवान के सभी कार्यकर्त्ता और मंत्री मस्ती ले रहे थे। इस दृश्य को देखकर मेढक गुस्से में आकर उत्तेजित हो गया।

8.6 भगवान के सिपाही मधुमक्खी, बाघ और मुरगे के हाथों किस तरह बेहाल हुए?

उत्तर : मधुमक्खी भगवान के सिपाहियों को डंक मारने लगी, बाघ ने उन्हें खा जाने का भय दिखाया और मुर्गा भी अपने पंख फड़फड़ाकर उन्हें डराने लगा।

8.7 शिक्षक/शिक्षिका की सहायता से बारिश से जुड़ी दो कविताएँ और कहानियों का संकलन करो।

उत्तर : (कविता) बरसात

बड़ी निराली ये बरसात,
रिमझिम रिमझिम ये बरसात ! 
ताल तलैया भर जाते हैं, 
मेढक भी तब टर्राते हैं। 
नाच रहा है देखो मोर, 
घूम-घूमकर चारों ओर। 
हरा भरा सब कर देती है, 
सबके मन को हर लेती है।
(कहानी
........

9. कृषि और वर्षा से जुड़े शब्दों को लिखो।

कृषि :- हल, बैल, कुआँ खाद जुआड़ बीज

वर्षा :- नदी पोखर वन गड्ढे हिरयाली बादह

10. कृषि और वर्षा में कैसा मेल है, बताओ।

उत्तर : वर्षा और कृषि एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। जब वर्षा नहीं होती तो भूमि कठोर हो जाती है। उसे जोता नहीं जा सकता। अगर किसी प्रकार भूमि जोत भी दी जाय तो बीज डालने पर वे जमेगे नहीं। यदि बीज उलने के बाद वर्षा रुक जाती है तो पौधे सूख जाते है। जब वर्षा होती है तभी कृषि हो सकेगी। वर्षा के अभाव में कृषि संभव नहीं है।

• टोटो जन-जाति के दो गीतों का हिन्दी अनुवाद नीचे दिया गया है। मनुष्य के साथ प्रकृति के घनिष्ठ संबंधों की बातें इन गीतों में स्पष्ट हैं। सूर्य और चाँद की रोशनी, किरणें लगातार मनुष्यों के ऊपर बरसें – इसी कामना से इन गीतों की उत्पति हुई हैं।


एक

बीता दिन शुरू हुई रात ।
चाँदनी रात ।
है रात पर अंधेरा वैसा नहीं।
अच्छा ही हूँ यहीं।
चाँद बादलों से न ढँक जाए ।
काले बादल न चले आएँ


दो

सबेरे का सूरज निकला, 
नहीं है अब अंधेरा।
इस पर भी इच्छा से,
 अब हम निर्विघ्न,
 जा सकेंगे जगह सब ।
सब पड़ रहा दिखाई अब ।।

(विमलेन्दु मजूमदार की बांग्ला रचना की हिंदी अनुवाद)

👉 कक्षा 5 हिन्दी पाठ बहार सम्पूर्ण हल 

👉 तेरहवां पाठ बादल

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👉Daily Use 100000+ English and Hindi Sentences

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