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कोरोना वायरस (कोविड-19) पर निबंध/ coronavirus kya hai/ bachane ke upay

कोरोना वायरस (Covid-19)



  आज पूरा विश्व कोविड-19 अर्थात कोरोनावायरस से परिचित हो चुका है। सभी लोग इससे बचने के उपाय को ढूंढते और बताते हुए देखे जा सकते हैं। सभी इसके बचाव के उपाय अपना रहे हैं। पर कुछ लोग आज भी निडर होकर जैसे यह एक हव्वा या मजाक हो सा व्यवहार कर रहे हैं। और भीड़-भाड़ वाली जगहों पर भी बिना मास्क के, बिना डरे घूम फिर हैं। उन सभी को सचेत रहना चाहिए तथा इस वायरस को हल्के में नहीं लेेेेना चाहिए।

   इस विषय में आज यहाँ पर एक सुंदर सा निबंध प्रस्तुत है जिसमें पूरा विश्लेषण आपको दी गई है अगर विश्लेषण पसंद आए तो कमेंट करके अवश्य बताएं आपको कैसा लगा। 



Covid-19 (कोरोना वायरस) पर निबन्ध

  प्रस्तावना :कोरोनावायरस अर्थात कोविड-19 बहुत सोचना लेकिन अत्यंत खतरनाक व प्रभाव प्रभावशाली वायरस है। कोविड-19 मानव के बाल की तुलना में लगभग 900 गुना छोटा है, लेकिन इसका संक्रमण दुनिया भर में तेजी से फैला है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (W.H.O.) ने कोरोना वायरस को महामारी घोषित किया है। दुनिया में लगभग सभी देशों में इस वायरस ने अपना तांडव मचाया है।




• कोरोनावायरस क्या है?
  कोरोना वायरस (कोविड-19) का संबंध वायरस के ऐसे परिवार से है जिसके संक्रमण से सर्दी, जुकाम से लेकर, सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्या हो सकती है। इस वायरस को इससे पहले कभी नहीं देखा गया। इस वायरस का संक्रमण दिसंबर 2019 में चीन के वुहान शहर से शुरू हुआ था। W.H.O. के अनुसार बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ इसके प्रमुख लक्षण हैं। सारी दुनिया के वैज्ञानिक इससे बचने के वैक्सीन की खोज कर रहे हैं। लेकिन अब तक इस वायरस को फैलने से रोकने वाला कोई टीका नहीं बना है। 
   इसके संक्रमण के फलस्वरूप सर्दी, जुकाम, बुखार, नाक बहना, सांस लेने में तकलीफ और गले में खराश जैसी समस्याएं होने लगती हैं। यह वायरस एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलता है। इसलिए इससे बचने के लिए बहुत सावधानी बरती जा रही है। जैसे कि हम जानते हैं यह वायरस (कोविड-19) दिसंबर 2019 में सबसे पहले चीन में पकड़ में आया था और धीरे-धीरे, देखते ही देखते यह वायरस दुनिया के दूसरे देशों में भी फैल गया।
   ऐसे वायरस का संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नाक से निकलने वाली हवा अर्थात सांस से तथा खांसी छींक से फैलता है। खांसते समय जो पानी की बूंदे शरीर से निकलती हैं। वह हवा में फैल जाती हैं और इसके साथ वायरस भी फैल जाता है। जो दूसरे इंसान में अपना कब्जा जमा लेता है। कोविड-19 नाम का यह वायरस दुनिया के 70 से ज्यादा देशों में अपना आतंक मचा चुका है। इससे बचाव के लिए हमें सरकार द्वारा बताए गए सावधानियों को बरतनी चाहिए। और वह आवश्यक भी है ताकि इसे फैलने से रोका जा सके।
  
  कोरोना वायरस को कोविड-19 इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह पहली बार 2019 को पहचाना गया।
   • इस बीमारी का लक्षण
   WHO के अनुसार पहले कोविड-19 या कोरोना वायरस में रोगी को पहले बुखार होता है। इसके बाद सर्दी या सूखी खांसी और फिर हफ्ते भर बाद सांस लेने में परेशानी शुरू हो जाती है। परंतु अब इस बीमारी के कोई खास लक्षण नहीं है। अब यह देखा गया है कि रोगी की सूंघने की शक्ति नहीं रहती और भोजन का स्वााद भी नहीं मिलता।
   इसका मतलब यह नहीं है कि जिन व्यक्तियों में यह लक्षण पाए जाते हैं। उनको कोरोनावायरस है, लेकिनयह बात तो है कि जिन व्यक्तियों में कोरोना वायरस (कोविड-19) है उनमें यह लक्षण पाए जाते हैं। कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों के गंभीर मामलों में निमोनिया, सांस लेने में बहुत ज्यादा परेशानी, किडनी फेल होने जैसे मामले पाए जाते हैं। और यहाँ तक की मौत भी हो सकती है। 10 साल से छोटे बच्चे, बुजुर्ग या जिन लोगों को पहले से ही कोई गंभीर बीमारी जैसे-अस्तमा, मधुमेह या ह्रदय की बीमारी है। उनके मामले में इस बीमारी का खतरा और अधिक हो जाता है। जुकाम और फ्लू के वायरस में भी इसी तरह के लक्षण पाए जाते हैं।

• इस वायरस का संक्रमण हो जाए तब क्या करें?
* वर्तमान समय में इस बीमारी का कोई वैक्सीन या सुनिश्चित दवाई नहीं है। फिर भी इसके लक्षण दिखते ही कुछ एंटीबायोटिक दवाइयां दी जा सकती हैं।
* जब तक स्वस्थ न हो जाए दूसरों से दूरी बनाए रखें।
* इसकी वैक्सीन की खोज अभी जारी है। इस साल(2020) के अंत तक वैक्सीन का मानव पर परीक्षण रिपोर्ट भी आ जाएगा।
* इस साल(2020) के अंत तक वैक्सीन आने की संभावना है।
* कुछ डॉक्टर एंटीवायरल दवाओं का भी परीक्षण कर रहे हैं।



• कोरोनावायरस के संक्रमण से बचाव के क्या उपाय हैं? 
  कोविड-19 से बचाव के लिए उपाय
* WH.O./विश्व स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड-19 से बचाव के लिए एक दिशा निर्देश जारी की है।
* इसके अनुसार हाथों को साबुन से बार-बार धोना चाहिए।
* अल्कोहल बेस्ड हैंड सेनीटाइजर द्वारा भी हाथ साफ किया जा सकता है।


* साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें।
* मास्क से नाक और मुंह अच्छी तरह ढकें।
* लोगों से हाथ मिलाने के बजाय दूर से ही हाथ जोड़कर नमस्कार करना चाहिए।
* घर पर लाए गए किसी भी वस्तु को पहले सैनिटाइज करके अलग कमरे में 1 दिन के लिए रख दें तथा दूसरे या तीसरे दिन उस वस्तु का इस्तेमाल करें।
* मोबाइल-लैपटॉप आदि जैसी चीजों को भी समय-समय पर सैनिटाइज या साफ करें।


* नाक, मुंह और आँखों को छूने से बचें।
* संक्रमण से बचने के लिए अपनी इम्यूनिटी सिस्टम को मजबूत बनाना बहुत आवश्यक है। इसके लिए अपने खाद्य सामग्री में पौष्टिक के चीजों को भी सामिल करें।
* प्रतिदिन कम से कम एक बार हल्दी वाला दूध अवश्य लें।
* बार हल्का गुनगुना पानी पीने की आदत बना लें।
* अपने शरीर का तापमान और अन्य लक्षणों की जांच नियमित रूप से करते रहे।
* खांसते या छीकते समय अपने हाथ और मुंह पर रुमाल या टिशू पेपर से अच्छी तरह ढकें तथा इस्तेमाल किए गए मास्क व टिशू पेपर को ढक्कन बंद डस्टबिन में फेंके। जिस व्यक्ति में जुकाम या फ्लू के लक्षण नजर आये, उससे डेढ़-दो मीटर की दूरी अवश्य बनाए रखें।
* मांसाहार (मांस, मछली, अंडे के सेवन से) बचें।
* इसके अलावा जंगली जानवरों के पास भी ना जाए।

• मास्क कैसे और कौन-सा पहनना चाहिए?
* वैसे तो स्वस्थ व्यक्ति को फांसी लगाने की आवश्यकता नहीं है।
* पर कोविड-19 वायरस से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में हैं तो मास्क पहनना आवश्यक है।
* जिनको जुकाम, कफ, बुखार या सांस लेने में समस्या है उन्हें मास्क पहनना आवश्यक है तथा यथा शीघ्र डॉक्टर से मिलना चाहिए।

• मास्क पहनने का सही तरीका :
* मास्क को पहनते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि नाक, मुंह और दाढ़ी अच्छी तरह ढके हों।
* मास्क के ऊपर बाहर की तरफ (सामने से) हाथ न लगाएं।
* गलती से भी यदि हाथ लग जाए तो तुरंत हाथ सैनेटाइटिस्ड करें या साबुन से धो लें।
* मास्क को उतारते समय भी मास्क के ऊपरी भाग को छूने से बचें। उसके रबर या फीते को पकड़ कर उतारना चाहिए।
* मास्क प्रतिदिन बदलना चाहिए।

• कोरोना वायरस के संक्रमण के खतरे को कैसे कम करें  (उपाय) :
विश्व स्वास्थ्य संगठन (W.H.O.), पब्लिक हेल्थ केयर और नेशनल हेल्थ सर्विस (N.H.S.) से मिले सूचनाओं के आधार पर हम यहां कोरोनावायरस से बचाव के तरीके बता रहे हैं।
कोरोना वायरस के जाति के वायरस छींकने या खांसनेे पर शरीर से निकलने वाली पानी की बूंदों सेे ही फैलते हैं।
* इससे बचने के लिए हाथों को बार-बार साबुन से साफ करें।
* छींकते या खांसते समय अपने नाक और मुंह को अच्छी तरह किसी कपड़े, टिशू या रुमाल से ढक लें।
* आँख, नाक और मुंह को बार बार न छुएं।
* कोविड-19 या कोरोना वायरस के बारे में अब तक इस तरह के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं कि यह वायरस पार्सल, चिट्ठियों या खाने-पीने की वस्तुओं द्वारा फैलता है।
*  इस प्रकार के वायरस शरीर के बाहर बहुत ज्यादा समय तक जीवित नहीं रह सकते हैं।

• कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से कैसे रोकें?
• कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के तरीके:
* सार्वजनिक जगह पर जाने से बचें।
* सार्वजनिक वाहनों जैसे बस, ट्रेन, ऑटो-रिक्शा या टैक्सी से यात्रा करने से बचें।
* वर्तमान समय में मेहमान को घर न बुलाएं।
* घर का सामान दूसरे व्यक्ति से न मंगवाए।
* जितना हो सके ऑफिस, स्कूल या सार्वजनिक जगह पर न जाएं।
* यदि आप भीड़-भाड़ वाली जगह पर और लोगों के साथ साझा करके रहते हैं तो आपको अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है।
* जितना हो सके अलग कमरे में रहे। और साझा रसोई तथा बाथरूम को लगातार साफ करते रहे।
* यदि आप किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए हैं या फिर किसी संक्रमित इलाके से आए हैं तो आपको अलग रहने की सलाह दी जाती है।
* इसके अलावा यदि संक्रमण का लक्षण दिखे तो 14 दिनों तक लगातार आपको अकेले तथा दूसरों से दूर ही रहना चाहिए जिससे संक्रमण को रोका जा सके और आगे न बढ़ने दिया जाए।
* अतः जब तक बहुत जरूरी न हो घर से बाहर न निकले और घर पर ही रहे।
  उपसंहार : दुनिया भर  के देश कोरोना वायरस (कोविड-19) नामक वायरस के संक्रमण से बेहाल हुए पड़े हैं। आज भी इसका डर पहले जैसा ही है। दुनिया भर के सरकारें इसके संक्रमण को रोकने के लिए अपने-अपने स्तर पर (तरीके से) कोशिश कर रही हैं, लेकिन अभी तक कोई रास्ता नहीं निकल पाया है। अतः इस महामारी से बचने के लिए हमें सभी उपायों का पालन अच्छी तरह से करना होगा, जिससे हम इस खतरनाक जानलेवा वायरस से बच सके।


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छठ पूजा/छठ की सुहावनी छटा/सूर्य पूजन/पर हिन्दी और अंग्रेजी में निबंध/Essay in Hindi and English on Chhath Puja/worship/ Chhath Ki Suhavni Chhata / Surya Poojan

छठ पूजा

या

छठ की सुहावनी छटा

या

सूर्य पूजन

   प्रतिवर्ष कार्तिक माह में छठ व्रत मनाया जाता है। चैत माह में भी छठ व्रत मनाया जाता है। चैत में गर्मी पड़ती है। इस कारण बहुत कम लोग चैत में छठ व्रत करते हैं। कार्तिक माह में प्रकृति कुछ आर्द हो जाती है। शरद ऋतु का आरंभ (आगमन) हो जाता है। निर्जल उपवास में छठव्रतियों को थोड़ी शीतलता मिलती है। इसलिए कार्तिक माह में छठव्रतियों की संख्या अधिक रहती है।

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   छठ व्रत का बहुत महात्म्य है। यह बहुत पवित्रता से, नियमपूर्वक तथा पूर्ण अनुष्ठान के साथ मनाया जाता है। छठव्रती नियम-धर्म में थोड़ी सी भी चूक नहीं करते हैं । वे विधिपूर्वक तथा पवित्रतापूर्वक भगवान सूर्य की पूजा करते हैं। इसके लिए वे कठोर साधना भी करते हैं।

  इस व्रत का आरंभ 'नहाए-खाए' से हो जाता है। इस दिन अरवा चावल, कद्दू की तरकारी और चने की दाल बनती है। दूसरे दिन 'खरना' होता है। इस दिन रात में खीर और रोटी से पूजा होती है तथा खीर और रोटी को प्रसाद के रूप में खिलाया जाता है।

  तीसरे दिन छठव्रती संध्या समय भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए गंगा या नदी किनारे जाते हैं। इस समय का दृश्य बड़ा ही मनोहारी दिखता है। चारों ओर से छठव्रतियों, उनके संबंधियों तथा दर्शक जनों की भीड़ उमड़ती हुई दिखती है। लोगों के आने का ताँता लगा रहता है। प्रथम अर्घ्य  देखने वाले दर्शकों की लंबी कतार दिख पड़ती है। इस प्रकार एक मेला जैसा दृश्य उपस्थित हो जाता है।

 सिर पर पीले वस्त्र में दौरा लिए लोग घाट किनारे आते हैं। व्रतियों के पीछे महिलाएं पुरुष और बच्चे झुंड के रूप में चलते रहते हैं। रास्ते में औरतें समवेती स्वर में छठ व्रत के गीत गाती जाती हैं। उनके छठ के गीतों की गूंज से पूरा वातावरण छठमय हो जाता है। कुछ लोग ढोलक और माँदल बजवाते हुए घाट किनारे चलते जाते हैं।

 संध्या के समय डूबते सूर्य की लालिमा को छठव्रती प्रथम अर्घ्य देते हैं। इस दृश्य को भक्तिभाव से देखने वालों की लंबी भीड़ दिखाई पड़ती है। धरती पर रंग बिरंगे सज्जित परिधानों से तथा सूर्य के लाल रंग से धरती और आकाश रंगीन दिखने लगते हैं। रंग-बिरंगी छटा से छठ की छटा और सुहावनी हो जाती है। प्रथम वर्ग की संध्या का सौंदर्य अपूर्व हो जाता है।

  दूसरे दिन सूर्योदय के समय उगते सूर्य को अर्घ्य देकर छठव्रत का समापन किया जाता है। इसके बाद प्रसाद वितरण होता है। प्रसाद वितरण और प्रसाद ग्रहण का कार्य दो-तीन दिनों तक चलता रहता है। उत्तर भारत में यह पर्व का बहुत महत्व है। सभी व्रतों में छठ व्रत अति पवित्र व्रत है। इसी से व्रतों में इस व्रत  को  ऊँचा स्थान प्राप्त है।

आदर्श विद्यार्थी पर निबन्ध/Essay on ideal student in hindi

 निबंध 

आदर्श विद्यार्थी



   (रूपरेखा :-भूमिका, आदर्श विद्यार्थी के गुण, आचरण, आदत, लग्नशीलता, समयशील, नियमितता, स्वावलंबन, उपसंहार।)

   भूमिका : आज के विद्यार्थी कल के राष्ट्र निर्माता हैं। देश का भविष्य कल इन्हीं के कंधों पर होगा। अतः आने वाले समय में आज के विद्यार्थी ही देश को दिशा देंगे। ऐसे में यदि विद्यार्थी सुयोग्य होंगे, श्रेष्ठ गुणों से युक्त होंगे, तो देश निरंतर उन्नति करेगा और यदि अर्थहीन गुणहीन हुए तो देश की अवनति को कोई नहीं रोक सकता।

  आदर्श विद्यार्थी के गुण : आदर्श विद्यार्थी से अनेक गुणों की अपेक्षा की जाती है। यह श्रेष्ठ गुणों से युक्त होना चाहिए। यह अनुशासन प्रिय, सुशील और सच्चरित्र हो, विद्वान और धनवान होने पर भी, यदि कोई चरित्रवान नहीं है, तो वह कहीं पर भी आदर नहीं पाता। 

   संक्षेप में आदर्श विद्यार्थी के निम्नलिखित गुण होने चाहिए।

  अनुशासन प्रिय : आदर्श विद्यार्थी का प्रथम पाठ अनुशासन से प्रारंभ होता है। समय पर उठना, बैठना, पढ़ना, गुरु का आदर, माता-पिता का आदर एवं छोटे से स्नेह रखने वाला विद्यार्थी ही आदर्श  किसी से लड़ते झगड़ते हैं वह विनम्रता का प्रतीक होता है। विनम्रता अनेक गुणों की जननी है। उसमें आज्ञाकारी ता के भाव से जन्म लेते हैं

   लग्नशीलता :आदर्श विद्यार्थी प्रत्येक कार्य को बड़ी लगन से करता है। वह कामचोर नहीं होता । वह प्रत्येक कार्य को पूर्ण करके ही दम लेता है।

   संयम शील : एक आदर्श विद्यार्थी संयम शील होता है। संयम से छात्र में एकाग्रता आती है। ऐसा विद्यार्थी भोजन के प्रति स्वाद में, श्रृंगार में, मनोरंजन और क्रोध में संयम से कार्य लेता है

  नियमितता : अनुशासन का ही अन्य गुुण है। आदर्श विद्यार्थी अपने  सभी कार्य जैसे अध्ययन, भोजन, खेलकूद और निद्रा नियमित समय पर ही करता है।

  स्वावलंबन  :आदर्श छात्र के प्रमुख गुणों में से एक होता है। वह अपने कार्यों के लिए किसी पर निर्भर नहीं होता। अपितु अपने कार्य से करता है। आदर्श छात्र का सबसे बड़ा गुण विद्या ग्रहण करना है। वह अपना अधिक समय विद्या ग्रहण करने में ही लगाता है।

  उपसंहार : गुणों के अतिरिक्त सत्य बोलना मधुर भाषण करना सद्गुणों को ग्रहण करने के लिए तत्पर रहना आदर्श छात्र के अन्य गुण हैं। वह दूसरों के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत करता है। वह अपना भविष्य सुधारना है और सब उसे देख कर अपना भविष्य सुधारते हैं। इन सब बातों से देश व समाज निरंतर उन्नति को प्राप्त होते रहते हैं।


      

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हमारा प्यारा भारतवर्ष पर हिन्दी निबंध संग्रह /our lovly india essay in hindi and English

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हमारा प्यारा भारतवर्ष 

      (रूपरेखा- :-भूमिका, नामकरण, भौगोलिक स्थिति, प्राकृतिक सौंदर्य, संस्कृति, स्वतंत्रता के बाद प्रगति तथा उज्जवल भविष्य, देश के प्रति हमारा कर्तव्य, उपसंहार।) 

  भूमिका : महाकवि इकबाल ने हमारे भारत की प्रशंसा करते हुए अपनी पंक्तियों में कहा है 

         "सारे जहां से अच्छा, हिंदुस्ता हमारा        

     हम बुलबुले हैं इसकी, यह गुलसिता हमारा।।"      

 अपनी मातृभूमि सभी को प्रिय लगती है। जिस धरती पर हमने जन्म लिया। जिसका अन्न-जल खा, पीकर हम बड़े हुए। उसके प्रति लगाव होना स्वभाविक ही है। हमारा प्रिय भारतवर्ष विश्व का सातवां सबसे बड़ा देश है और जनसंख्या की दृष्टि से इसका स्थान विश्व में चीन के बाद दूसरा है।

   नामकरण : भारत मेरा देश है, मेरी मातृभूमि है। भारत का प्राचीन नाम आर्यावर्त है। माना जाता है कि महा प्रतापी राजा, दुष्यंत के पुत्र भरत के नाम पर ही हमारे देश का नाम 'भारतवर्ष' पड़ा ।

  भौगोलिक स्थिति : भारत एक विशाल देश है। इसके उत्तर में हिमालय इसके मुकुट की भांति सुशोभित है। मेरा देश तीन ओर से समुद्र से घिरा हुआ है। ऐसा लगता है दक्षिण में हिंद महासागर इसके चरण पखार रहा हो। कश्मीर से कन्याकुमारी तक और असम से लेकर गुजरात तक यह फैला हुआ है।


    प्राकृतिक सौंदर्य : प्रकृति ने मेरे देश को खूब संवारा है। यहां की प्राकृतिक छटा दर्शनीय है। छह ऋतु प्रत्येेक बारी-बारी से आकर इसका श्रृंगार करती हैं। इसी धरा पर पृथ्वी का स्वर्ग कहा जाने वाला 'कश्मीर' विद्यमान है। इस देश की प्राकृतिक सुंदरता अनुपम है। प्राकृतिक सौंदर्य से भरा केरल, हिमाचल, अरुणाचल प्रदेश अत्यंत आकर्षक हैं। नैनीताल, मसूरी, दार्जिलिंग, माउंट आबू, शिमला, कुल्लू-मनाली जैसे अनेक स्मरणीय स्थान इसी देश में मौजूद हैं। 

   संस्कृति :भारत की संस्कृति अत्यंत प्राचीन है। इसी देश ने संपूर्ण मानव जाति को प्रेम, अहिंसा सत्य, धर्म तथा भाईचारे का संदेश दिया। इसी धरती ने वसुधैव कुटुंबकम का संदेश समुचित मानवता को दिया। यह देश ऋषि-मुनियों, संत-महात्माओं का देश है। इसी भूमि पर अनेक धर्मो ने जन्म लिया। जैन-बौद्ध, सिख धर्म यहां से पूरी दुनिया में फैले। सदियों के बाद आज भी भारतीय संस्कृति जीवित है। अनेकता में एकता इसकी प्रमुख विशेषता रही है। यह वेदों, उपनिषदों और गीता-रामायण का देश है।

 

   स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद प्रगति तथा उज्जवल भविष्य : सैकड़ों वर्षो की पराधीनता के बाद भारत ने 15 अगस्त 1947 को आजादी पाई। अत्यंत जर्जर अवस्था में था। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद इस देश में हर क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की। आज हम लगभग हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर हैं। आज हमारा देश परमाणु शक्ति संपदा देश है। जिसकी विश्व में अपनी पहचान है। यद्यपि बेरोजगारी, जनसंख्या की अधिकता, निर्धनता जैसी कुछ समस्याएं अभी भी विद्यमान हैं। परंतु भारत का भविष्य उज्जवल है। हम हर क्षेत्र में निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर हैं।

   देश के प्रति हमारा कर्तव्य : हमारा कर्तव्य है कि हम मिल जुल कर रहे तथा देश की एकता में के लिए कृत संकल्प हो। अनेक धर्मो संप्रदायों आदि के झगड़ों को छोड़ कर हम अपने देश के विकास के लिए कार्य करें।

महात्मा गांधी जी के बारे में 10 पंक्तियां/Mahatma Gandhi par 10 line


"जय हिंद"

  आज इस लेख के माध्यम से गांधीजी के जीवन और परिचय के बारे में मुख्य 10 पंक्तियां प्रस्तुत की गई है जो बच्चों को गांधी जी से परिचित होने में मदद करेगा तो चलिए शुरू करते हैं :


  1. सत्य और अहिंसा के पुजारी, गांधी जी का जन्म 2 अक्टूबर सन् 1869 ई• को गुजरात के पोरबंदर नामक स्थान में हुआ था ।
  2. गाँधी जी महात्मा, बापू और राष्ट्रपिता के नाम से भी प्रसिद्ध हैं । 
  3. गांधी जी के पिता करमचंद गांधी, राजकोट के दीवान तथा माता पुतलीबाई, एक धर्म निष्ठ  महिला थीं ।
  4. इनका विवाह 13 वर्ष की अल्पायु में ही कस्तूरबा बाई से हुई थी और इन के 4 पुत्र भी थे ।
  5. गांधीज ने बैरिस्टर बनने के लिए 'यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन' से कानून की पढ़ाई की थी ।
  6. उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में भारतीय नागरिकों पर अत्याचार होते देख जनता को नागरिक अधिकार दिलाने के लिए कठिन संघर्ष भी किया ।
  7. गांधी जी गोपाल कृष्ण गोखले जी को अपना राजनीतिक गुरु मानते थे ।
  8. गांधीजी के जीवन पर 'सत्यवादी हरिश्चंद्र' नाटक 'श्रवण कुमार' की कहानी 'लियो टालस्टाय की रचनाओं' और 'गीता' का अधिक प्रभाव पढ़ा था ।
  9. इन्होंने अंग्रेजों के विरूद्ध 'असहयोग आंदोलन', 'सविनय-अवज्ञा आंदोलन', 'नमक आंदोलन', 'दांडी यात्रा' तथा 'करो या मरो' व 'अंग्रेजों भारत छोड़ो' जैसे प्रसिद्ध नारे भी दिये।
  10. गांधी जी सत्य, अहिंसा और ब्रह्मचर्य के समर्थक थे, वे भारत में रामराज की स्थापना करना चाहते थे ।
  11. 30 जनवरी, 1948 ईस्वी को नाथूराम गोडसे ने गांधी जी की गोली मारकर हत्या कर दी ।
  12. गांधी जी की समाधि आज भी नई दिल्ली के राजघाट में स्थित है ।
  13. गांधी जी ने कई रचनाएं भी लिखी जिसमें : 'दक्षिण अफ्रीका के सत्याग्रह का इतिहास', 'सत्य के प्रयोग', 'गीता माता', 'हिंद स्वराज' आदि प्रमुख हैं ।
  14. गांधीजी को 'जीवराम कालिदास' ने सबसे पहले 'महात्मा' के नाम से पुकारा था ।
  15. वह भारत के सच्चे स्वतंत्रता सेनानी थे, मुझे गर्व है कि मैंने गांधी जी के देश में जन्म लिया।

शब्द समूह के लिए एक शब्द (450+)

      
  

   अनेक शब्दों के लिए एक शब्द को वाक्यांश के लिए एक शब्द भी कहा जाता है ।  इनके प्रयोग से भाषा संक्षिप्त प्रभावशाली एवं आकर्षक बनती है । वाक्यांश को संक्षेप में सामासिक पद का भी रूप दिया जाता है कुछ ऐसे लाक्षणिक पद या शब्द भी हैं, जो अपने में पूरे एक वाक्य या वाक्यांश का अर्थ रखते हैं। ऐसे शब्दों को शब्द समूह के लिए एक शब्द कहा जाता है ।
 उदाहरण:
 1. मोहन के पिताजी रोगियों का इलाज करते हैं । (इसको हम इस प्रकार भी लिख सकते हैं।)       2. मोहन के पिताजी एक चिकित्सक हैं ।
 उपर्युक्त अनेक शब्दों के लिए एक शब्द के उदाहरण द्वारा स्पष्ट हो जाता है कि यह किस प्रकार भाषा में चमत्कारिक प्रभाव दिखाते हैं । इनके प्रयोग से भाषा संक्षिप्त सुगठित एवं समृद्ध लगती है । 
नीचे कुछ और अनेक शब्दों के लिए एक शब्द दिए गए हैं ।जिन्हें आप पढ़कर याद कर सकते हैं ।  

    शब्द समूह( अनेक शब्द )            एक  शब्द 

  1. सत्य बोलने वाला                       -सत्यवादी
  2.  जिसका जन्म न हुआ हो            -अजन्मा
  3. आज्ञा का पालन करने वाला      - आज्ञाकारी 
  4. जिसे देखकर डर लगे                 -डरावना
  5.  जो दिखाई ना दे               -   अदृश्य 
  6. जो पढ़ा न गया हो            -   अपठित 
  7. जिसका वर्णन ना किया जा सके   -   अवर्णनीय 
  8. जो काम न करें            -    अकर्मण्य 
  9. जो सब जगह हो           -    सर्वव्यापक 
  10. जो समाचार भेजता हो      -   संवाददाता 
  11. जिसका आदि ना हो         -    अनादि
  12. जिसका आकार हो          -    साकार 
  13. अपने पर बीती हुई          -    आपबीती 
  14. जिसमें सहन शक्ति हो      -    सहिष्णु 
  15. भाषण देने वाला              -    वक्ता 
  16. रचना करने वाला           -   रचयिता  
  17. जीने की प्रबल इच्छा      -   जिजीविषा 
  18. जिसे किसी भी स्थिति में टाला न जा सके   - अनिवार्य
  19. जिसमें कोई संदेह न हो      -    निसंदेह 
  20. देखने वाला      -    दर्शक 
  21. जिसके आने की तिथि न हो      -    अतिथि 
  22. जिसकी आयु कम हो      -    अल्पायु 
  23. जिसे करना कठिन हो      -    दुष्कर 
  24. जो दर्शन करना चाहता हो      -    दर्शनार्थी 
  25. जिसमें बल न हो      -    निर्बल 
  26. लेख की नकल      -    प्रतिलिपि 
  27. विभिन्न स्थानों की सैर करने वाला      -    पर्यटक 
  28. रास्ता दिखाने वाला      -    पथप्रदर्शक या मार्गदर्शक 
  29. अभिनय करने वाला      -    अभिनेता 
  30. अभिनय करने वाली      -    अभिनेत्री 
  31. जो झूठ बोलता हो      -    मिथ्याभाषी 
  32. जिसका आचरण अच्छा हो      -    सदाचारी 
  33. शहर में रहने वाला      -   शहरी 
  34. जो विदेश को भेजी जाए      -    निर्यात 
  35. जो विदेश से मंगाई जाए      -   आयात 
  36. भाषाओं की जानकारी रखने वाला      -   भाषाविद 
  37. जिसकी तुलना ना हो सके       -    अतुलनीय 
  38. 6 महीने में एक बार होने वाला  -   छमाही या अर्धवार्षिक 
  39. दूर की सोचने वाला      -    दूरदर्शी 
  40. दो भाषाएँ जानने वाला      -    दुभाषी
  41.  जिसकी बहुत चर्चा हो      -    बहुचर्चित 
  42. जो कड़वा बोलता हो      -   कटुभाषी
  43. जिसके पास कुछ न हो      -    अकिंचन 
  44. जो काम से जी चुराए      -    कामचोर
  45.  जिसका इलाज न हो सके       -    असाध्य 
  46. जिसे कभी लज्जा न आती हो      - निर्लज्ज 
  47. जो पहले कभी नहीं हुआ हो      -   अभूतपूर्व 
  48. शब्दों का भंडार है जिसमें      -   शब्दकोश 
  49. घूमने फिरने वाला      -    घुमक्कड़ 
  50. ठेके पर काम करने वाला      -    ठेकेदार 
  51. जंगल में अपने आप लगने वाली आग    -    दावानल   विलोम शब्द 700+
  52. जो समाचार भेजता हो       -     संवाददाता 
  53. किसी वस्तु का बढ़ा चढ़ाकर वर्णन करना         -   अतिशयोक्ति
  54. दूसरों पर उपकार करने वाला       -उपकारी 
  55. दया करने वाला                         -दयालु 
  56. जो कभी न मरे                   -अमर 
  57. जो वन में घूमता हो                     -वनवासी  
  58. फल फूल खाने वाला                   -शाकाहारी 
  59. नगर में वास करने वाला               -नागरिक 
  60. विद्या प्राप्त करने वाला                 -विद्यार्थी 
  61. प्रतिदिन होने वाला                      -दैनिक 
  62. आकाश में उड़ने वाला                 -नभचर 
  63. जो आलस्य करता हो                  -आलसी 
  64. जो परिचित ना हो और                 -परिचित 
  65. महीने में एक बार होने वाला          -मासिक 
  66. जो विद्यालय में पढ़ता है               -शिक्षक 
  67. गाने वाला                                  -गायक 
  68. मेहनत करने वाला                       -परिश्रमी 
  69. जो बोल नहीं सकता                    -मुख 
  70. जो अधिक बोलता है                    -वाचाल
  71. हित चाहने वाला                          - हितैषी 
  72. 25 वर्ष बाद होने वाला उत्सव  - रजत जयंती
  73. एक सप्ताह में होने वाला        - साप्ताहिक 
  74. कम खर्च करने वाला                -  मितव्ययी
  75. जो कल्पना से परे हो    -   कल्पनातीत/ अकल्पनीय 
  76. जो अपने ऊपर निर्भर हो       - आत्मनिर्भर 
  77. दूसरों के मन की जानने वाला  -  अंतर्यामी  
  78. जिसका अनुभव किया गया हो   - अनुभूत
  79.  जिस पर मुकदमा चल रहा हो   - अभियुक्त
  80.  एक ही समय में होने वाला  -   समकालीन 
  81. अचानक होने वाली घटना    - आकस्मिक
  82.  शुभ चाहने वाला              -  शुभेच्छु
  83.  50 वर्ष बाद होने वाला उत्सव      -  स्वर्ण जयंती 
  84. साथ पढ़ने वाला              -  सहपाठी
  85. किसी के द्वारा किए हुए उपकार को मानने वाला - कृतज्ञ 
  86. ऊपर कहा हुआ           -उपर्युक्त 
  87. नीचे  लिखा हुआ हो         -    निम्नलिखित 
  88. सबको समान दृष्टि से देखने वाला     - समदर्शी 
  89. जहाँ जाने में कठिनाई हो      - दुर्गम 
  90. जहाँ जाने में आसानी हो     -शुगम 
  91. जिसका कोई आधार ना हो     -   निराधार 
  92. जिसकी आशा न की गई हो     -  अप्रत्याशित 
  93. जिसमें जानने की इच्छा हो      -  जिज्ञासु
  94.  जिसका कोई शत्रु न हो            -    अजातशत्रु     
  95. जिसका अंत ना हो                 -     अनंत 
  96. जिसकी बराबरी कोई दूसरा ना कर सके   -  अद्वितीय
  97.  जो बात पूर्व समय में हुई हो     - भूतपूर्व 
  98. जो छिपाने योग्य हो     - गोपनीय 
  99.  जिसका कोई अर्थ ना हो    -  निरर्थक 
  100. दोपहर के बाद का समय     - अपराहन 
  101. जो आँखों के सामने हो      - प्रत्यक्ष 👉रामायण से संबंधित सामान्य ज्ञान 170+ प्रश्नोत्तरी
  102.  संभावित अप्रिय घटना का भय     - आशंका
  103.  जिसके आर पार देखा जा सके   -    पारदर्शी
  104. दूसरे लोक से संबंधित      - पारलौकिक 
  105. हाथ से लिखा हुआ      -   हस्तलिखित
  106. दोपहर से पूर्व का समय       - पूर्वाहन
  107. व्याकरण जानने या लिखने वाला     -  व्यैयाकरण
  108.  जिसका दमन ना हो सके     - अदम्यय 
  109. 15 दिनों में होने वाला         -   पाक्षिक 
  110. जो उत्तर ना दे सके            -      निरुत्तर
  111. जूते बनाने वाला          -       मोची  
  112. कपड़े साफ करने वाला    -  धोबी
  113. कपड़े सिलने वाला        -   दरजी
  114.  मिठाईयां बनाने वाला         -     हलवाई 
  115. डाक (पत्र) पहुँचाने वाला        -    डाकिया 
  116. लकड़ी के काम करने वाला        -   लकड़हारा  
  117. मिट्टी के बर्तन बनाने वाला       -     कुम्हार
  118.  किसी चीज की अत्यधिक इच्छा    -   लालसा
  119. परस्पर एक दूसरे पर आश्रित     -    अन्योन्याश्रित
  120.  साथ काम करने वाला      -        सहकर्मी 
  121. जिसे लुभाया ना जा सके     -     अविस्मरणीय
  122. ईश्वर पर विश्वास करने (रखने) वाला     -    आस्तिक 
  123. ईश्वर पर विश्वास न रखने वाला      -     नास्तिक 
  124. 60 वर्ष बाद होने वाला उत्सव     -     हीरकजयंती
  125. विष्णु को मानने वाला        -      वैष्णव 
  126. किसी के द्वारा किए हुए उपकार को न मानने वाला -कृतज्ञ 
  127. सदा रहने वाला        -      शाश्वत 
  128. जिसके आर पार देखा जा सके      -       पारदर्शी 
  129. जिसके मन में ममता न हो          -       निर्मम 
  130. जो दूसरों से ईर्ष्या रखता हो   -          ईर्ष्यालु 
  131. जो बहुत बोलता हो     -     वाचाल      
  132. जो सरलता से प्राप्त हो        -   सुलभ 
  133. अपने गुण दोष पर विचार करना    - आत्मविश्लेषण 
  134. सीमा से लगा हुआ स्थान         -    सीमांत 
  135. बीते दिनों की यादें           -      संस्मरण 
  136. बहुत समय तक याद रखने योग्य       -  चिरस्मरणीय 
  137. जिसे किसी विषय की जानकारी न हो        -  अनभिज्ञ 
  138. सत्य आचरण के प्रति आग्रह         -     सत्याग्रह 
  139. जिसे देखकर डर लगे         -     डरावना 
  140. जो स्थिर रहे              -      स्थावर 
  141. ज्ञान देने वाला            -       ज्ञानदा 
  142. भूत, वर्तमान, भविष्य को देखने वाले  - त्रिकालदर्शी 
  143. जानने की इच्छा रखने वाला  -  जिज्ञासु 
  144. जिसे क्षमा न किया जा सके       -    अक्षम्य
  145. 15 दिन में एक बार होने वाला      -    पाक्षिक 
  146. अच्छे चरित्र वाला      -    सच्चरित्र 
  147. आज्ञा का पालन करने वाला      -    आज्ञाकारी 
  148. जो रोगी की चिकित्सा करने वाला हो   -    चिकित्सक 
  149. सत्य बोलने वाला      -   सत्यवादी 
  150. दूसरों उपकार करने वाला      -   उपकारी 
  151. जिसे कभी बुढ़ापा न आए      -    अजय 
  152. दया करने वाला      -    दयालु 
  153. जिसका आकार न हो      -    निराकार 
  154. जो आँखों के सामने हो      -    प्रत्यक्ष 
  155. जहाँ पहुँचा न जा सके        -    अगम्य 
  156. बहुत कम जानने वाला      -    अल्पज्ञ 
  157. मास (महीने) में एक बार होने वाला      -    मासिक 
  158. जिसके कोई संतान न हो      -    निस्संतान 
  159. जो कभी ना मरे        -   अमर 
  160. जिसका आचरण अच्छा न हो         -   दुराचारी 
  161. जिसका कोई मूल्य ना हो      -   अमूल्य 
  162. जो वन में घूमता हो       -    वनचर
  163. जो इस लोक के बाहर की बात हो      -    अलौकिक 
  164. जो इस लोक की बात हो       -   लौकिक 
  165. जिसके नीचे रेखा हो      -    रेखांकित 
  166. जिसका संबंध पश्चिम से हो      -    पाश्चात्य 
  167. जो स्थिर रहे       -    स्थावर 
  168. दुखांत नाटक      -    त्रासदी 
  169.  हिंसा करने वाला      -    हिंसक 
  170. हित चाहने वाला      -    हितैषी 
  171. हाथ से लिखा हुआ      -    हस्तलिखित 
  172. सब कुछ जानने वाला      -    सर्वज्ञ 
  173. जो स्वयं पैदा हुआ हो      -    स्वयंभू 
  174. जो शरण में आया हो      -    शरणागत 
  175. जिसका वर्णन न किया जा सके   -    वर्णनातीत 
  176. फल फूल खाने वाला      -    शाकाहारी/फलाहारी 
  177.  सौतेली माँ       -     विमाता 
  178. गाँव में रहने वाला      -    ग्रामीण 
  179. जिसके मन में दया हो        -   दयालु 
  180. खून से रंगा हुआ       -     रक्तरंजित 
  181. अत्यंत सुंदर स्त्री      -    रूपसी 
  182. कीर्तिमान      -    यशस्वी 
  183. कम खर्च करने वाला       -     मीतव्ययी 
  184. मछली की तरह आंखों वाली       -  मीनाक्षी 
  185. मोर की तरह आँखों वाली      -    मयूराक्षी 
  186. बच्चों के लिए काम की वस्तु      -    बालोपयोगी 
  187. जिसकी बहुत अधिक चर्चा हो      -    बहुचर्चित 
  188. जिस स्त्री के कभी संतान न हुई हो      -  बंध्या/बाँझ
  189. फेन से भरा हुआ      -    फेनिल 
  190. प्रिय बोलने वाली स्त्री      -   प्रियंवदा 
  191.  जिसका कोई आधार ना हो      -    निराधार 
  192.  रात में घूमने वाला      -    निशाचर
  193.  जिसके माता-पिता ना हो      -   अनाथ 
  194.  बिल्कुल बर्बाद हो गया हो      -    ध्वस्त
  195.  जो धर्म में निष्ठा रखता हो      -   धर्मनिष्ठ   
  196. देखने योग्य      -    दर्शनीय 
  197. बहुत तेज चलने वाला है      -    द्रुतगामी 
  198. जो किसी पक्ष में ना हो      -    तटस्थ
  199.  तत्व को जानने वाला      -   तत्वज्ञ  
  200. तप करने वाला       -    तपस्वी
  201. चिंता में डूबा हुआ      -    चिंतित 
  202. जो बहुत समय तक ठहरे      -    चिरस्थाई 
  203. जिसकी चार भुजाएँ हो      -    चतुर्भुज 
  204. हाथ में चक्र धारण करने वाला      -    चक्रपाणि
  205. जिससे की गणना की जाए      -   गणित 
  206. इसे गुप्त रखा जाए      -   गोपनीय
  207.  गणित का ज्ञाता      -    गणितज्ञ
  208.  आकाश को चूमने वाला      -    गगनचुंबी 
  209. जो टुकड़े-टुकड़े हो गए हो      -   खंडित 
  210. आकाश में उड़ने वाला      -    नभचर 
  211. तेज बुद्धि वाला      -    कुशाग्रबुद्धि 
  212. कल्पना से परे      -    कल्पनाअतीत 
  213. जो उपकार मानता है       -         कृतज्ञ 
  214. किसी की हंसी उड़ाना          -          उपहास 
  215. ऊपर कहा हुआ             -       उपर्युक्त 
  216. ऊपर लिखा हुआ            -      ऊपरीलिखित 
  217. जिस पर उपकार किया गया हो        
  218. जो कहा ना जा सके         -      अकथनीय  
  219. जिसका कोई शत्रु न जन्मा हो      -   अजातशत्रु 
  220. जिसके समान कोई दूसरा न हो     -   आदित्य 
  221. जो परिचित न हो     -   अपरिचित
  222.  जिसकी कोई उपमा न हो       - अनुपम
  223. जिसके पाणि (हाथ) में चक्र है   - चक्रपाणि /विष्णु 
  224. जिसके हाथ (पाणि) में वज्र है   - वज्रपाणि/ इंद्र 
  225. जिसके पाणि में वीणा है       - वीणापाणि /सरस्वती
  226.  जिसके चार भुजाएं हैं       - चतुर्भुज 
  227. जिसके दस आनन हैं      -  दशानन/ रावण
  228. जिसके आने की तिथि मालूम ना हो - अतिथि 
  229. जिसके शिखर पर चंद्र हो    - चंद्रशेखर/ शिव 
  230. जिसके समान द्वितीय नहीं है    - अद्वितीय 
  231. जिसके पार देखा ना जा सके   - अपारदर्शक 
  232. जिसके पार देखा जा सके   - पारदर्शक 
  233. जिसके हृदय में ममता नहीं है - निर्मम 
  234. जिसके हृदय में दया नहीं है - निर्दय
  235. जानने की इच्छछा       - जिज्ञासा 
  236. जिसकी ग्रीवा सुंदर हो       - सुग्रीव 
  237. जो भू को धारण करता है    -  भूधर
  238. जिसके दो पद हैं           - द्विपद 
  239. जो सर्व शक्ति संपन्न है    - सर्वशक्तिमान 
  240. जिसके चार पद हैं         - चतुष्पद
  241. जिसका कोई नाथ ना हो      - अनाथ 
  242. जिसे भय नहीं है       - निर्भय /निर्भीक 
  243. जिसे ईश्वर या वेद में विश्वास नहीं है  - नास्तिक 
  244. जिसे ईश्वर या वेद में विश्वास है       - आस्तिक
  245.  दो बार जन्म लेने वाला       - द्विज 
  246. जिसका कोई शत्रु नहीं जन्मा है       - अजातशत्रु 
  247. जिसका पति वह मर गया है         - विधवा
  248.  जिसका पति जीवित (साथ) है        - सधवा  
  249. जल में जन्मने वाला              - जलद 
  250. अंडे से जन मने वाला          - अंडज
  251.  जिसका जन्म अनु (पीछे) हुआ हो      - अनुज
  252.  जिसका जन्म अगर (पहले) हुआ हो        - अग्रज 
  253. जिसका कारण पृथ्वी है या जो पृथ्वी से संबंध है -   पार्थिव
  254.  जिसका निर्माण नहीं किया जा सके    - अनिवार्य 
  255. साहित्य रचना या साहित्य सेवा से संबंधित     - साहित्यक
  256. जिसकी उपमा न हो              - अनुपम 
  257. उचित बात के लिए आग्रह      - दुराग्रह 
  258. जो कहा न जा सके       - अकथनीय
  259. जिस की चिंता नहीं हो सकती   - अचिंतनीय /अचिंत्य 
  260.  जो यशवाला हो          - यशस्वी
  261. जो सब कुछ जानता है        - सर्वज्ञ
  262.  जो अल्प (कम) जानता है        - अल्पज्ञ 
  263. जो बहुत जानता है           - बहुज्ञ 
  264. जो कुछ नहीं जानता        - अज्ञ 
  265. जो अग्र (आगे) की बात सोचता है      - अग्रशोची 
  266. जो नया आया हुआ हो         - नवागंतुक 
  267. जो भूखे गर्ग (भीतर) का हाल जानता हो - भूगर्भवेत्ता 
  268. बीता हुआ          - अतीत 
  269. स्वेद से उत्पन्न होने वाला       - श्वेदज 
  270. जो किए गए उपकारों को मानता है      - कृतज्ञ 
  271. जो किए गए उपचरों  को नहीं मानता है     - कृतघ्न 
  272. नहीं मरनेवाला        - अमर 
  273. विष्णु का उपासक या विष्णु से सम्बद्ध       - वैष्णव
  274. शक्ति का उपासक या शक्ति से सम्बद्ध      - शाक्त
  275. शिव का उपासक या शिव से सम्बद्ध       - शैैव
  276. जो अच्छे कुल में जन्म (उत्पन्न) हुआ है     - कुलीन 
  277. जो सब में व्याप्त है          - सर्वव्यापी
  278.  जो किसी की ओर (प्रति) से है        - प्रतिनिधि 
  279. गिरा हुआ           - पतित
  280.  जो बहुत बोलता है         - वाचाल 
  281. जो कम बोलता है      -  मुक 
  282. इन्द्रियों को जीतने वाला         - जितेन्द्रिय 
  283.  अवश्य होने वाला        -  अवश्यम्भावी 
  284. जो स्त्री के वशीभूत या उसके स्वभाव का है      - स्त्रैण 
  285. जो युद्ध में स्थिर रहता है         - युधिष्ठिर 
  286.  जो कर्तव्य से च्युत हो गया है        - कर्तव्यच्युत 
  287. जो क्षमा पाने लायक है        - क्षम्य
  288. जो (बात) वर्णन के अतीत (बाहर) है      - वर्णनातीत
  289. जो स्त्री सूर्य भी ना देख सके      - असूर्यम्पश्या 
  290. जो अत्यंत कष्ट से निवारित किया जा सके       - दूर्निवार 
  291. विदेश में प्रवास करने (रहने) वाला      - प्रवासी 
  292. जो देखा नहीं जा सकता       - अदृश्य/ अलक्ष्य 
  293. जो वचन से परे हो     - वचनातीत
  294.  जो कहा गया है       - कथित 
  295. भविष्य में होने वाला       - भावी
  296.  जो सरों में जन्मता है        - सरसिज  
  297. अतिशय या अति (बढ़ा-चढ़ाकर) उचित( कहना)  -  अतिशयोक्ति /अत्युक्ति 
  298. बढ़ा चढ़ा कर कहना   -  अतिशयोक्ति /अत्युक्ति
  299. जो नहीं हो सकता      - असंभव
  300.  मिष्ट या मधुर भाषण करने वाला - मिष्टभाषी/ मधुरभाषी
  301.  जो  मुकदमा लड़ता है -  मुकदमेबाज
  302. जो आमिष (मांस) नहीं खाता  -  निरामिष 
  303. जो देने योग्य है    -  देय 
  304. जो अक्षर (पढ़ना-लिखना) जानता है  -  साक्षर 
  305. जो पहरा देता है     -   प्रहरी 
  306. बुर (दूर् ) आग्रह       -   दुराग्रह
  307.  जो आग्रह सत्य हो      -  सत्याग्रह 
  308.  जो  पर (दूसरों) का  अर्थी (भला) चाहने वाला है -  परार्थी 
  309. जो स्वयं (खुद) का अर्थी (भला) चाहने वाला है   -  स्वार्थी
  310.  जो अल्प (कम) बोलने वाला      -   अल्पभाषी
  311.  जो मुकदमा दायर करता है       -  वादी/ मुद्दई 
  312.  जो अश्व (घोड़े) का आरोही (सवार) है  -  अस्वारोही
  313.  पथ का प्रदर्शन करने वाला      -   पथप्रदर्शक
  314. आशा से अतीत (अधिक)   -   आशातीत
  315.  जो संगीत जानता है      -   संगीतज्ञ
  316.  जो कला जानता है या कला की रचना करता है   -  कलाविद्/ कलाकार  
  317. जो पर (दूसरों) के अधीन है    -   पराधीन
  318.  जो देखने में प्रिय लगता है      -  प्रियदर्शी 
  319. आया हुआ      -  अगत 
  320. लौटकर आया हुआ     -  प्रत्यागत
  321.  जन्म से अंधा है     -   जन्मांध
  322.  जो पोत (जहाज) युद्ध का है    -  युद्धपोत
  323.  जो चक्र धारण करता है    -  चक्रधर 
  324.  जो नष्ट होने वाला है       -    नश्वर 
  325. जो बहुत कठिनाई से मिलता है       -  दुर्लभ/ दुष्प्राप्य
  326. इस लोक का      -   लौकिक 
  327. परलोक का       -   पारलौकिक 
  328. आँखों के सामने     -  प्रत्यक्ष 
  329. आँखों से परे       -  परोक्ष 
  330. अपने परिवार के साथ     - सहपरिवार 
  331. जो स्त्री कविता रचती हो        - कवयित्री 
  332. जो पुरुष कविता रचता  है      -    कवि 
  333. जो स्त्री अभिनय करे          -    अभिनेत्री 
  334. जो पुरुष अभिनय करें       -   अभिनेता 
  335. जो दूसरों से ईर्ष्या  करता है     - ईर्ष्यालु 
  336. जो शत्रु की हत्या करता है        - शत्रुघ्न 
  337. जो मांस  आहार करता है       -   मांसाहारी 
  338. जो शाक आहार करता है       -  शाकाहारी 
  339. जो फल आहार करता है         - फलाहारी 
  340. जो पिता की हत्या कर चुका       - पितृहन्ता 
  341. जो माता की हत्या कर चुका     -  मातृहन्ता 
  342. जो अपनी हत्या करता है      -  आत्मघाती 
  343. जो  निशा  में विचरण करने वाला       -  निशाचर 
  344. जो नभ या खग (आकाश) में चलता है   - नभचर/खेचर 
  345. घर (गृह) बसाकर रहने वाला     -   गृहस्थ 
  346. कार्य करने वाला   -   कार्यकर्ता 
  347. जो विज्ञान जानता है     -  वैज्ञानिक
  348. हत्या करने वाला     -  हत्यारा 
  349. जो द्वार का पालन (रक्षा) करता है  - द्वारपाल 
  350. जो शास्त्र जानता है    -   शास्त्रज्ञ  
  351. जो कोई वस्तु वहन करता है     -  वाहक 
  352.  बिना वेतन के     -   अवैतनिक 
  353. जो व्याकरण जानता है        -     वैयाकरण   
  354. बिना  अंकुश का     -      निरंकुश 
  355.  बिक्री करने वाला      -      विक्रेता
  356.  हृदय का विदारण करने वाला (दृश्य)   -    हृदयविदारक 
  357. झूठ बोलने वाला         -   झूठा 
  358. धन देने वाला (व्यक्ति या देवता)    -   धनद/ कुबेर
  359. किसी विषय को विशेष विशेष रूप से जानने वाला -  विशेषज्ञ
  360. आकाश या गगन चुम्मे वाला  -  आकाशचुंबी/ गगनचुम्बी  
  361. आलोचना करने वाला  - आलोचक 
  362. जानने की इच्छा रखने वाला   -   जिज्ञासु 
  363. जो विधि या कानून के विरुद्ध है  - अवैध /गैरकानूनी  
  364. वह स्थान, जहाँ मुर्दे जलाए जाते हैं    -  श्मशान   
  365. (वह पुरुष) जिसकी पत्नी साथ है  -  सपत्नीक 
  366. (वह स्त्री) जिसे पति छोड़ दे  -  परित्यक्ता 
  367. जो लोक में सम्भव न हो   -   अलौकिक 
  368. जो मन को हर ले    -   मनोहर 
  369. पाद (पैर) में मस्तक (सिर) तक  -  आपादमस्तक  
  370. शक्ति के अनुसार  -    यथाशक्ति 
  371. सबसे प्रिय      -       प्रियतम
  372. क्षण भर में भंग (नष्ट) होने वाला   -   क्षणभंगुर 
  373. जिस पर विश्वास किया गया है    -   विश्वस्त 
  374. ग्राम का( गांव में रहने वाला)    -    ग्रामीण 
  375. नगर का (नगर में रहने वाला)    -   नागरिक
  376.  याचना करने(मांगने) वाला     -   याचक 
  377. देखने योग्य      -     दर्शनीय/द्रष्टव्य 
  378. पूछने योग्य   -   प्रष्टव्य
  379.  करने योग्य   -    करणीय/ कर्तव्य
  380.  पूजने योग्य     -   पूजनीय/ पूज्य
  381.  सुनने योग्य    -   श्रवणीय/ श्रव्य 
  382. विधि (कानून) द्वारा प्रदत प्राप्त   -    विधिप्रदत 
  383. र्तक के द्वारा जो सम्मत (माना जा चुका) है   -   तर्कसम्मत
  384. पढ़ने योग्य       -    पठनीय /पाठ्य 
  385. आलोचना के योग्य    -    आलोच्य 
  386. जिसे नहीं जीता जा सके    -  अजेय 
  387. खाने योग्य     -    खाद्य 
  388. नहीं खाने योग्य       -     अखाद्य
  389.  विश्वास के योग्य       -        विश्वसनीय 
  390. जो अनुकरण करने योग्य हो       -      अनुकरणीय 
  391. आदि से अंत तक -      आद्योपान्त 
  392. जंगल (दाव) का आग (अनल)   -   दावानल 
  393. जो राजगद्दी का अधिकारी हो    -    युवराज 
  394. पर्ण (पत्ते) की बनी हुई कुटी      -   पर्णकुटी 
  395. बिना आयास (परिश्रम) के    -     अनायास 
  396. जो दायर मुकदमे का प्रतिवाद बचाव या काट करे  - प्रतिवादी
  397. अभी-अभी (नव) जन्मा हुआ     -   नवजात 
  398. रात और संध्या के बीच की वेला    -   गोधूलि
  399.  जहाँ तक सध सके    - यथासाध्य 
  400. वृष्टि का अभाव   -   अनावृष्टि 
  401. अत्यधिक वृष्टि    -   अतिवृष्टि 
  402. पुत्र की वधू       -   पुत्रवधू 
  403. पुत्र का पुत्र     -   पौत्र 
  404. दिन पर दिन    -   दिनानुदिन 
  405. जहाँ खाना मुफ्त मिलता है    -  सदाव्रत 
  406. जहाँ औषधि दान स्वरूप मिलती है    -    दातव्य/ औषधालय 
  407. जो धर्माचरण करता है      -    धर्मात्मा 
  408. जो पुस्तकों की आलोचना या समीक्षा करता है    -   आलोचक/ समीक्षक 
  409. जो व्याख्या करता है       -    व्याख्याता 
  410. मन की वृत्ति (अवस्था)  - मनोवृति 
  411. जो साँप पकड़ता और उसका खेल करता है  -   सँपेरा 
  412. जो यान (सवारी) जल में चलता है     -  जलयान 
  413. क्षुधा से आतुर          -      क्षुधातुर 
  414. जो पांचाल देश की है     -     पांचाली 
  415. द्रुपद की पुत्री         -      द्रोपदी 
  416. जो पुरुष लोहे की तरह बलिष्ठ है   -   लौहपुरुष 
  417. युग का निर्माण करने वाला     -   युगनिर्माता 
  418. यात्रा करने वाला   -    यात्री 
  419. जहाँ लोगों का मिलन हो  - सम्मेलन 
  420. जहाँ नदियों का संगम (मिलन) हो    -   संगम 
  421. सुख देने वाला          -   सुखद 
  422. शयन का आगार (कमरा)     -   शयनागार 
  423. जिसका उदर लम्बा हो    -    लम्बोदर
  424.  दुख देने वाला      -   दु:खद
  425. द्रुत गमन करनेवाला   -   द्रुतगामी 
  426. प्रकृति सम्बन्धी     -    प्राकृतिक
  427.  जिसे या जिसका मूल नहीं है     - निर्मूल 
  428. जो स्मरण रखने योग्य है      -  स्मरणीय 
  429. सुंदर हृदय वाला    -   सुहृद 
  430. जो मोक्ष चाहता हो    -    मुमुक्षु  
  431. जिसकी मति प्रत्युत्पन्न (झट सोचनेवाली) है       -   प्रत्युत्पन्नमति 
  432. जिसकी बुद्धि कुश के अग्र (नोक) की तरह पैनी हो    -   कुशाग्रबुद्धि 
  433. वह जिसकी दृष्टि दूर तक जाए     -  दूरदर्शी/दूरन्देरश/अग्रशोची 
  434. जो सबको समान भाव से देखे     -    समदर्शी 
  435. वह मनुष्य जिस की स्त्री मर गई है अर्थात जिसके परिवार की गाड़ी पत्नी रूपी 'धूर' या धुरे से  विरहित है      -   विधुर 
  436. एक ही समय में  वर्तमान   -   समसामयिक 
  437. वह जिसकी प्रतिज्ञा दृण हो  -    दृणप्रतिज्ञ
  438. जिसने चित्त किसी विषय में दिया (लगाया) है   -  दत्तचित 
  439.  मित (कम) बोलने वाला      -     मितभाषी 
  440. जिसकी  बाहुएँ दीर्घ हैं -      दीर्घबाहु 
  441. जिसका तेज निकल गया है    -     नितेश
  442.  जो भेदा या तोड़ा ना जा सके     - अभेद्य 
  443. जो कठिनाई (दूर) से भेदा या तोड़ा जा सके - दुर्भेद्य  
  444. जिसकी आशा न की गई हो      - अप्रत्याशित 
  445. जो मापा ना जा सके       -  अपरिमेय/अपरिमित 
  446. जो प्रमेय (प्रसार से सिद्ध) न हो     -     अप्रमेय
  447.  जो इच्छा के अधीन हैं       -     इच्छाधीन/ऐच्छिक 
  448. जो दूसरे के स्थान पर अस्थाई रूप से काम करें-  स्थानापन्न 
  449. जो पीने योग्य हो   -    पेय
  450. एक स्थान से दूसरे स्थान को हटाया हुआ- स्थानान्तरित 
  451. जीतने की इच्छा - जीगीसा
  452.  लाभ की इच्छा इच्छा      -  लिप्सा
  453.  खाने की इच्छा      -   बुभुक्षा 
  454.  मरण तक      -  आमरण
  455. जीवन भर  - आजीवन
  456.  बिना पलक या निमिष गिराए निर्णय   - अपलक /एकटक
  457. किसी काम में दूसरे से बढ़ने की इच्छा या उद्योग    -   स्पर्धा 
  458. क्रम के अनुसार      -   यथाक्रम
  459.  जो सव्य (बाएं) हाथ से सधा हुआ है    -     सव्यसाची
  460.  मेघ की तरह नाथ करने वाला      - मेघनाद 
  461. जिस स्त्री को कोई संतान ना हो       -   बंध्या/ बांझ
  462.  समान (एक ही) उदर से जन्म लेने वाला    -  सहोदर