Class 5 chapter 14 Murkh Magarmacch Ki Kahani hindi Pathbahar West Bengal Board, कक्षा 5 हिंदी पाठबहार पाठ 14 मुर्ख मगरमच्छ की कहानी पश्चिम बंगाल बोर्ड

कक्षा 5 हिन्दी पाठबहार (NOTES) पश्चिम बंगाल बोर्ड

 पाठ 14
मुर्ख मगरमच्छ की कहानी

🏵️उपेन्द्रकिशोर रायचौधरी 
गरमच्छ और सियार दोनों मिलकर खेती करने गए। किसकी खेती करेंगे? आलू की खेती। आलू मिट्टी के नीचे होता है और उसका पौधा रहता है मिट्टी के ऊपर, जो किसी काम नहीं आता। परन्तु मूर्ख मगरमच्छ को इस बात का पता नहीं था। उसने सोचा आलू शायद उस पौधे का फल होगा।
अतः उसने सियार को ठगने की नीयत से कहा कि, "पौधे का ऊपरी हिस्सा लेकिन मेरा, और निचला हिस्सा तुम्हारा।"

सुनकर सियार ने हँसते हुए कहा, "अच्छा, वैसा ही होगा।"
इसके बाद जब आलू पैदा हुआ, तब मगरमच्छ उन पौधों के ऊपरी भाग को काटकर अपने घर ले आया। लाकर उसने देखा कि उनमें एक भी आलू नहीं है। तब वह खेत में गया और देखा कि सियार मिट्टी खोदकर सब आलू निकाल कर अपने घर ले गया है। मगरमच्छ ने सोचा, "अच्छा, तो इस बार तो मैं पूरी तरह से ठगा गया हूँ। चलो अगली बार देखूंगा!"
इसके बाद धान की खेती हुई। मगरमच्छ ने मन ही मन सोचा, अब और ठगा जाऊँगा नहीं। अतः उसने पहले ही सियार से कहा, "भाई, इस बार लेकिन मैं ऊपरी हिस्सा नहीं लूँगा। अबकी बार मुझे निचला हिस्सा देना होगा।"
सुनकर सियार ने हँसते हुए कहा, "अच्छा, वैसा ही होगा!"
इसके बाद जब धान पैदा हुआ, तब सियार धान समेत पौधे के ऊपरी हिस्से को काट कर ले गया। मगरमच्छ के मन में बहुत खुशी हुई। सोचा, मिट्टी खोदकर सब धान निकाल लूँगा।
हाय री किस्मत ! मिट्टी खोदकर देखा, वहाँ तो कुछ भी नहीं है। मुनाफे का पुआल भी गया। तब मगरमच्छ बहुत गुस्से में आया, और कहा, "रूको सियार के बच्चे, मैं तुम्हें दिखाता हूँ। इस बार मैं तुम्हें ऊपरी हिस्सा नहीं लेने दूँगा। पूरा ऊपरी हिस्सा मैं ही ले जाऊँगा!" तीसरी बार गन्ने की खेती हुई।
मगरमच्छ ने तो पहले ही कह रखा है कि इस बार वह ऊपरी भाग लिए बिना नहीं रहेगा। अतएव सियार ने उसे ऊपरी हिस्सा देकर स्वयं गन्नों को लेकर घर में बैठा मौज से खाने लगा।
मगरमच्छ खुश होता हुआ गन्ने के ऊपरी भाग को अपने घर लाया तथा उसने गन्ने को चबाकर देखा, नमकीन ही नमकीन स्वाद, उसमें थोड़ी सी भी मिठास नहीं। तब गुस्से में आकर उसने सब फेंक कर सियार को कहा, "नहीं भाई, तुम्हारे साथ अब मैं और खेती नहीं करूंगा; तुम बहुत ठगते हो !"

 उपेन्द्रकिशोर रायचौधरी 

[ जीवन परिचय -उपेन्द्रकिशोर रायचौधरी का जन्म 10 मई, 1863 ई. को अखण्ड बंगाल के मैमनसिंह जिला के मशुआ नामक ग्राम (वर्तमान बंगलादेश) में हुआ था। उनके पिता का नाम कालीनाथ राय था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा जिला स्कूल में हुई। सत्पश्चात् उच्च शिक्षा के लिए कलकता के प्रेसिडेंसी कॉलेज में दाखिल हुए। उपेन्द्रकिशोर बचपन से ही मेधावी छात्र थे। उन्होंने शिशु साहित्य की रचनाएँ लिखनी प्रारंभ कर दीष। उपेन्द्रकिशोर की रचनाएँ जोड़ासाँकू स्थित ठाकुरबाड़ी से प्रकाशित मासिक पत्रिका 'बालक' में छपती थी। उपेन्द्रकिशोर रायचौधरी द्वारा रचित रचनाओं में छेलेदेर रामायण (बच्चों की रामायण) 'सकालेर कथा', 'टूनटुनीर बोई', 'गुपी-गाइन बाधा बाइन', आदि प्रमुख हैं। उपेन्द्रकिशोर ने 1885 ई. में आधुनिकतम मुद्रण यंत्रों का आयात किया तथा यू स की नींव रखी। यही नहीं बल्कि उन्होंने अपने एस. राय एण्ड सन्स के नाम से आधुनिक प्रेस की द्वारा बनाए गए चित्रों का एक स्टूडियो भी खोला। 20 मई, 1915 ई. को इस महान व्यक्तित्व और प्रतिभावान का निधन हो गया। उपेन्द्रकिशोर रायचौधरी की विरासत को समृद्ध करने में उनके पौत्र सत्यजीत राय ने अग्रणी भूमिका निभाई है। ]

कहानी का सारांश

  प्रस्तुत कहानी काल्पनिक पात्र मगरमच्छ और सियार से संबंधित है। मगरमच्छ और सियार के बीच गहरी मित्रता थी। एक समय की बात है। दोनों मिलकर एक साथ आलू की खेती की। मूर्ख मगरमच्छ ने सियार को ठगने की नीयत से कहा कि, पौधे का ऊपरी हिस्सा मेरा होगा और निचला हिस्सा तुम्हारा होगा। मगरमच्छ की बात सुनकर सियार तैयार हो गया। इसके बाद जब आलू पैदा हुआ, तब मगरमच्छ को पौधे का ऊपरी भाग भाग मिला और सियार को निचला हिस्सा आलू मिला। इसके बाद धान की खेती हुई। इस बार मगरमच्छ ने कहा कि भाई इस बार मैं मिट्टी का निचला हिस्सा लूँगा। मगरमच्छ को पुआल मिला और सियार को धान । इसके बाद गन्ने की खेती हुई। मगरमच्छ ने सियार से कहा कि मैं इस बार एकदम ऊपरी भाग लूँगा। इस बार भी उसे केवल उपरी भाग मिला और चबाकर देखा कि गन्ने में नमकीन स्वाद के अलावा कुछ भी नहीं है। तब गुस्से में आकर उसने सियार से कहा, नहीं भाई, तुम्हारे साथ अब अब मैं और खेती नहीं करूँगा, तुम बहुत ठगते हो। कहने का तात्पर्य है कि स्वार्थ का भाव रखना सबसे बुरी आदत है।
शब्दार्थ - नीयत = इरादा; हिस्सा = भाग; ठगना = धोखा दोना; मूर्ख = बेवकूफ; किस्मत = भाग्य; मौज = मजा।

अभ्यासमाला 

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर अपनी भाषा में लिखो।
1.1 उन उभयचर प्राणियों का नाम लिखों जिन्हें तुम जानते हो?
उत्तर : उभयचर प्राणी मेंढक, घोंघा, कछुआ, मगरमच्छ।

1.2 सरककर चलने वाले कुछ प्राणियों का नाम लिखो जिन्हें तुम जानते हो?
उत्तर : सरककर चलने वाले प्राणी छिपकली, साँप, केचुआ।

1.3 बच्चों हेतु लिखी गई पशु-पक्षियों की कहानियों में सबसे चालाक प्राणी तुम किसे समझते हो ?
उत्तर : बच्चों हेतु लिखी जाने वाली पशु पक्षियों की कहानियों में मैं सियार को सबसे चालाक प्राणी समझता हूँ।

1.4 मिट्टी के नीचे होनेवाली कुछ फसलों के नाम लिखो ?
उत्तर : मिट्टी के नीचे होने वाली फसलें आलू, मूली, हल्दी, चुकन्दर, सूरन।

1.5 धान के पौधे से हमें क्या मिलता है?
उत्तर : धान के पौधे से हमें चावल एवं पुवाल मिलता है।

1.6 मगरमच्छ और सियार से संबंधित और कोई कहानी को कुछ वाक्यों में लिखो।
उत्तर : ऊपर की कहानी में हमने पढ़ा कि मगरमच्छी तीनों बार धोखा खाया था, अतः उसने सोचा कि आलू, चावल और ईख खाकर सियार का कलेजा बहुत स्वादिष्ट हो गया होगा, अतः सियार को ही खाऊं। एक दिन उसने मगरमच्छ से कहा, "अब तो हम मित्र हो गये। नदी के बीच में एक द्वीप है, चलो वहां चलकर हमलोगकुछ दिन आनन्द मनायें। वहां खाने को भी बहुत अच्छी-अच्छी चीजे हैं।" सियार मगरमच्छ की पीठ पर बैठ द्वीप पर जाने को तैयार हो गया। जब सियार मगरमच्छ की पीठ पर बैठ गया तो मगरमच्छ से बोला, "भीतर पानी की धारा तेज होगी, धीरे-धीरे चलना।" मगरमच्छ ने कहा डरो नहीं, पीठ ठीक से पकड़े रहो। किनारे पहुंचने से पहले मगरमच्छ ने कहा, 'सियार मामा' तुमने बहुत आलू, चावल और ईख खाई है। अब मैं तुम्हारा मीठा कलेजा खाऊंगा।' सियार चालाक होता है। उसने एक चाल चली। उसने मगरमच्छ से कहा, 'अरे भांजे तुमने पहले क्यों नहीं बतलाया? मैंने अपना दिल तो उसी पार छोड़ दिया है। चलो उसे ले आता हूँ। फिर हम द्वीप पर चलेंगे, और तुम आनन्द से मेरा कलेजा खाना।' मगरमच्छ सीधा था, वह किनारे की तरह लौट पड़ा। किनारे पहुँचते ही सियार कूदकर यह कहते हुए भाग गया, "अखिर मूर्ख मूर्ख ही होता है।"

2. 'क' स्तम्भ के साथ 'ख' स्तम्भ को मिलाकर देखो।

उत्तर : क               ख
मगरमच्छ ...............नदी
सियार ...................जंगल
आलू ......................खेत
गन्ना ......................चीनी
गाय .....................पुआल

3. कहानी के घटनाक्रमों को सजाकर लिखो -
3.1 अतः उसने सियार को ठगने की नीयत से कहा कि, 'लेकिन पौधे का ऊपरी हिस्सा मेरा
और निचला हिस्सा तुम्हारा।'
3.2 मगरमच्छ और सियार दोनों मिलकर खेती करने गए। किसकी खेती करेंगे? आलू की खेती।
3.3 अब की बार गन्ने की खेती हुई। मगरमच्छ ऊपरी हिस्से को लेकर उसे चबाकर देखा बहुत नमकीन लगा।
3.4 इसके बाद धान की खेती हुई। मगरमच्छ ने निचले हिस्से को पाकर समझा कि वह बहुत ठगा गया है।
3.5 मगरमच्छ ने सियार से कहा, नहीं भाई, तुम्हारे साथ अब मैं और खेती करने नहीं जाऊँगा, तुम बहुत ठगते हो।
उत्तर : 3.2, 3.1, 3.4, 3.3, 3.5 होगा।

4. खाली स्थानों को पूरा करोः
4.1 सियार और मगरमच्छ दोनों मिलकर खेती करने लगे।
4.2 उसने सोचा आलू शायद उस पौधे का ऊपरी हिस्सा होगा।
4.3 सियार धान समेत पौधे के धान को काटकर ले गया।
4.4 अबकी बार गन्ने की खोती हुई।
4.5 सियार मिट्टी से सब आलू निकाल कर अपने घर ले गया।

5. पास वाली टोकरी से शब्दों को खोजकर समान अर्थ वाले शब्दों को बगल में लिखो।
खेती = कृषि
गत्रा = ईख
ऊपरी हिस्सा = शीर्ष भाग
मिट्टी = मृत्तिका

6. वाक्यों को पूरा करो।
6.1 'मूर्ख मगरमच्छ की कहानी' पढ़कर मुझे लग रहा है कि वह  मुर्ख  था।
6.2 कहानी का सियार वास्तव में बहुत चालाक  है।
6.3 मगरमच्छ कहानी में में कुल 3 बार ठगा गया है। पहली बार ठगाया, क्योंकि आलू की खेती हुई । दूसरी बार ठगे जाने का कारण है धान की खेती हुई  उसके बाद फिर ईख के बारे में नहीं जानने के कारण वह ठगा गया। 
6.4 सियार बार-बार (हमेशा) फायदे में रहा, क्योंकि वह चालाक था

7. वाक्यों के रंगीन शब्दों में कौन-किस तरह का शब्द है, लिखो।
7.1 मगरमच्छ और सियार मिलकर खेती करने गए। - संज्ञा
7.2 उसने सोचा आलू शायद उस पौधे का फल होगा। - सर्वनाम
7.3 अच्छा अगली बार देखूँगा। - क्रिया
7.4 सोचा है, मिट्टी खोदकर सब धान निकाल लूँगा। - क्रिया
7.5 इस बार मुझे निचला हिस्सा लेना होगा। - विशेषण

8. सही वाक्यों के आगे (✔) निशान और गलत वाक्यों के आगे (x) निशान दो।

उ० 8.1 कहानी का मगरमच्छ बहुत ही चालक और चतुर था।  [x]
8.2 मगरमच्छ सियार को ठगना चाहता था।  [√]
8.3 आलू की खेती में निचले हिस्से को पाकर सियार ठगा गया।  [x]
8.4 धान की खेती के समय मगरमच्छ को फसल का ऊपरी हिस्सा मिला।  [x]
8.5 मगरमच्छ गन्ने के पौधों को घर ले जाकर आराम से खाने लगा।  [x]

9. वाक्य बनाओ। ऊपरी हिस्सा, निचला हिस्सा, खेती, गन्ना, नमकीन।
उत्तर : गन्ना के पौधे का ऊपरी हिस्सा नीरस होता है। आलू के पौधे का निचला हिस्सा ठीक होता है। खेती से हमें भोजन के लिए अन्न मिलता है। गन्ने से गुण और चीनी बनती है। गन्ना के पौधे का ऊपरी हिस्सा नमकीन होता है।

10. विपरीतार्थक शब्द लिखो। फायदा, मीठा, नीचे, काम, मजा।

उत्तर : फायदा - नुकशान,  मीठा - तीता, नीचे - ऊपर, काम - - बेकाम, मजा - बेमजा

उपेन्द्रिकिशोर रायचौधरी (1863-1915): वर्तमान बांग्लादेश के मयमनसिंह जिले के मशुआ नामक स्थान में इनका जन्म हुआ था। उन्होंने शिशु तथा किशोरों हेतु उपयोगी भाषा में कविताएँ, कहानियाँ, उप-कथाएँ, मनोरंजक तथा वैज्ञानिक कहानियों की बंग्ला भाषा में रचनाएँ की हैं। उनकी रचनाओं में 'बच्चों की रामायण', 'बच्चों का महाभारत', 'सेकालेर कथा', 'टुनटुनीर बोई', 'गुपी-गाइन बाघा बाइन' प्रसिद्ध हैं। 1913 ई. में उन्होंने बाल पत्रिका 'संदेश' प्रकाशित किया। संगीत तथा चित्रकला में भी वे पारंगत थे। उनकी संतानों में सुखलता राव, पुण्यलता चक्रवर्ती, सुकुमार राय, सुविनय राय और पौत्र सत्यजीत राय-सभी बांग्ला शिक्षा बाल साहित्य के प्रतिष्ठित रचनाकारों में से हैं। प्रस्तुत पाठ की कहानी बांग्ला पुस्तक 'टुनटुनीर बोई' से ली गई रचना का हिन्दी अनुवाद है।

11.1 उपेन्द्रिकिशोर राय चौधुरी द्वारा लिखित दो प्रसिद्ध पुस्तकों का नाम लिखो।
उत्तर : बच्चों की रामायण, बच्चों की महाभारत।

11.2 उन्होंने बच्चों की कौन सी पत्रिका प्रकाशित की थी?
उत्तर : उन्होंने बच्चों की संदेश पत्रिका प्रकाशित की थी।

11.3 उनकी संतानों में शिशु बाल-साहित्यकार के रूप में कौन-कौन अति परिचित है?
उत्तर : उनकी संतानों में शिशु बाल-साहित्यकार के रूप में सुखलता राव, पुण्यलता चक्रवर्ती, सुकुमार राय, सुविनय राय अति परिचित हैं।

12. नीचे दिए गए प्रश्नों का उत्तर लिखोः

12.1 कहानी में कौन-कौन खेती करने गए ?
उत्तर : कहानी में मगरमच्छ और सियार खेती करने गये।

12.2 उन्होंने कौन-कौन सी फसलों की खेती की ?
उत्तर : उन्होंने आलू, धान और गन्ना की खेती की।

12.3 खेती करने में किसे फायदा और किसे नुकसान हुआ?
उत्तर : खेती करने में सियार को फायदा और मगरमच्छ को नुकसान हुआ।

12.4 गन्ने की खेती के समय सियार को ठगने के लिए मगरमच्छ ने कौन सा फंदा रचा था?
उत्तर : गन्ने की खेती के समय सियार को ठगने के लिए मगरमच्छ ने अपने ऊपरी हिस्सा लेने को कहा।

12.5 "मूर्ख मगरमच्छ की कहानी में गमरमच्छ ने सियार को 'तुम बहुत ठगते हो' कहकर दोष लगाने के बाद भी, वास्तव में वह अपनी मूर्खता के कारण ही बार-बार ठगा गया।"-कहानी को पढ़ने के बा बाद यदि ऐसा ही ल लगता है, तो क्यों ऐसा लगा, इसे बताने के लिए कहानी से खोजकर तीन वाक्य लिखो।
उत्तर : (i) पौधे का ऊपरी हिस्सा मेरा और निचला हिस्सा तुम्हारा। (ii) लेकिन इस बार मैं ऊपरी हिस्सा नहीं लूँगा। इस बार निचला हिस्सा देना होगा। (iii) इस बार तुम्हें ऊपरी हिस्सा नहीं लेने दूंगा। पूरा ऊपरी हिस्सा मैं ही ले जाऊँगा।














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