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Essay on Ideal Student in English and Hindi

Ideal Student



 (Outline: - Introduction, qualities of ideal student, behavior, habit, ascendancy, timeliness, regularity, self-reliance, Conclusion.)

 Introduction: Today's students are the nation builders of tomorrow.  The future of the country will be on their shoulders tomorrow.  Therefore, in the coming times only today's students will give direction to the country.  In such a situation, if the students are well qualified, possessing the best qualities, then the country will progress continuously and if the people are meaningless, they cannot stop the degradation of the country.

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 Qualities of the ideal student: Many qualities are expected of the ideal student.  It should be equipped with superior qualities.  This discipline should be dear, good-natured and truthful, even if a scholar and rich, if there is no character, he is not respected anywhere.

 In short, the ideal student should have the following qualities.

 Discipline Dear: The first lesson of the ideal student starts with discipline.  Getting up on time, sitting, reading, respecting the Guru, respecting the parents and fighting with the ideal of someone who fights with someone is a symbol of humility.  Humility is the mother of many qualities.  He is born with a sense of obedience

 Ascendancy : The ideal student does every task diligently.  He is not slacker.  He finishes by completing every task.

 Moderation modesty : An ideal student is moderation modesty.  Concentration brings concentration in the student.  Such a student works with restraint in taste, in food, in entertainment and in anger.

 Regularity : There is another quality of discipline.  The ideal student does all his work such as study, food, sports and sleep only on a regular basis.

 Self-reliance : Ideal is one of the key qualities of a student.  He does not depend on anyone for his actions.  But he does it with his work.  The greatest quality of an ideal student is to acquire knowledge.  He spends most of his time in learning.

 Conclusion : Speaking truth in addition to qualities, making sweet speech, being ready to receive virtues are other qualities of the ideal student.  He sets an example for others.  He has to improve his future and everyone sees it and improves his future.  With all these things, the country and society continue to achieve .

                     आदर्श विद्यार्थी

 (रूपरेखा:- परिचय, आदर्श विद्यार्थी के गुण, व्यवहार, आदत, प्रभुत्व, समयबद्धता, नियमितता, आत्मनिर्भरता, निष्कर्ष।)


 परिचय: आज के छात्र कल के राष्ट्र निर्माता हैं।  कल देश का भविष्य उनके कंधों पर होगा।'  इसलिए आने वाले समय में आज के छात्र ही देश को दिशा देंगे। ऐसी स्थिति में यदि विद्यार्थी सुयोग्य होंगे, श्रेष्ठ गुणों से युक्त होंगे तो देश निरन्तर प्रगति करेगा और यदि लोग निरर्थक होंगे तो वे देश की अवनति को नहीं रोक सकते।

 आदर्श विद्यार्थी के गुण: आदर्श विद्यार्थी से अनेक गुणों की अपेक्षा की जाती है।  उसे श्रेष्ठ गुणों से युक्त होना चाहिए।  यह अनुशासन प्रिय, अच्छे स्वभाव वाला और सच्चा होना चाहिए, भले ही कोई विद्वान और धनवान हो, यदि चरित्रहीन है तो उसका कहीं भी सम्मान नहीं होता है।

 संक्षेप में, आदर्श विद्यार्थी में निम्नलिखित गुण होने चाहिए।


 अनुशासन प्रिय: आदर्श विद्यार्थी का पहला पाठ अनुशासन से शुरू होता है।  समय पर उठना, बैठना, पढ़ना, गुरु का आदर करना, माता-पिता का आदर करना और किसी से झगड़ा करने वाले के आदर्श के साथ लड़ना विनम्रता का प्रतीक है।  विनम्रता अनेक गुणों की जननी है।  वह आज्ञाकारिता की भावना के साथ पैदा हुआ है


 लगन : आदर्श विद्यार्थी प्रत्येक कार्य को लगन से करता है।  वह आलसी नहीं है.  वह हर कार्य को पूरा करके ही दम लेता है।

 संयमित विनय: एक आदर्श विद्यार्थी संयमशील आचरण वाला होता है।  एकाग्रता से विद्यार्थी में एकाग्रता आती है।  ऐसा विद्यार्थी स्वाद में, भोजन में, मनोरंजन में और क्रोध में संयम से काम लेता है।

 नियमितता: अनुशासन का एक और गुण है।  आदर्श विद्यार्थी अपने सभी कार्य जैसे पढ़ाई, भोजन, खेल-कूद और नींद नियमित रूप से ही करता है।

 आत्मनिर्भरता : आदर्श एक विद्यार्थी के प्रमुख गुणों में से एक है।  वह अपने कार्यों के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहता।  लेकिन वह ऐसा अपने काम से करता है.  एक आदर्श विद्यार्थी का सबसे बड़ा गुण ज्ञान अर्जित करना है।  वह अपना अधिकतर समय सीखने में बिताते हैं।

 निष्कर्ष : गुणों के अतिरिक्त सत्य बोलना, मधुर वाणी बोलना, गुणों को ग्रहण करने के लिए तत्पर रहना आदर्श विद्यार्थी के अन्य गुण हैं।  वह दूसरों के लिए एक उदाहरण स्थापित करता है।  उसे अपना भविष्य सुधारना है और सभी लोग इसे देखकर अपना भविष्य सुधारते हैं।  इन सभी चीजों से देश और समाज निरंतर प्रगति करता रहता है।

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विज्ञान के चमत्कार/विज्ञान :अभिशाप या वरदान /विज्ञान के वरदान/विज्ञान का महत्व/विज्ञान और मानव-हित/विज्ञान की देन/विज्ञान के बढ़ते चरण : विकास या विनाश की ओर/पर निबंध

1. विज्ञान के चमत्कार

या

विज्ञान :अभिशाप या वरदान 

या 

विज्ञान के वरदान 

या

 विज्ञान का महत्व 

या 

विज्ञान और मानव-हित 

या 

विज्ञान की देन

 या 

विज्ञान के बढ़ते चरण : विकास या विनाश की ओर

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  [ रूपरेखा - वर्तमान युग तथा विज्ञान, इस युग को विज्ञान की देन, विज्ञान के चमत्कारों का वर्णन -(1)मोटर, रेल, वायुयान आदि। (2) टेलीफोन, रेडियो, समाचार-पत्र, बेतार का तार आदि। (3) चलचित्र, ग्रामोफोन, टेलीविजन आदि। (4) बंदूक, तोप, बम, लड़ाकू विमान, दूरमारक अस्त्र-शस्त्र आदि। (5) विद्युत, नए वस्त्र, अच्छी खाद, अत्तम दवाइयाँ आदि। विज्ञान के चमत्कारों का उपयोग तथा दुरुपयोग, उपसंहार]

   वर्तमान युग को वैज्ञानिक युग कहा जाता है। आज हमारे सारे जीवन पर विज्ञान का प्रभाव दिखाई पड़ता है। यदि विज्ञान की देन को आज हमसे छीन लिया जाए तो हम सभी कठिनाइयों में फंस जाएँगे। विज्ञान ने आज हमको जो सुख-सुविधाएँ प्रदान की हैं। वह सब विज्ञान के चमत्कार ही कहलाते हैं। हमारे शरीर के सुकोमल वस्त्र, घड़ी, ट्रांजिस्टर, पेन, पेंसिल आदि सभी विज्ञान की देन हैं। वायुयान, एटम बम, इंजेक्शन, ट्रेन, रेडियो, चलचित्र, टेलीविजन तथा एक्स-रे आदि सभी विज्ञान की देन है।

विज्ञान के चमत्कारों ने आने-जाने के साधनों में बहुत बड़ा परिवर्तन कर दिया है। प्राचीन काल में मनुष्य अपने घर से 10-20 मील तक जाने में भी घबराता था, किंतु आज तो वह पृथ्वी का चक्कर लगाने में भी नहीं घबराता। हजारों व्यक्ति विश्व का चक्कर लगा चुके हैं और अब मानव मंगल ग्रह तक पहुँच चूका है। यह सब विज्ञान के ही कारण संभव हो सका है। आज जन-साधारण की सेवा के लिए साइकिल, मोटर साइकिल, मोटर कार, ट्रेन, वायुयान आदि हर समय तैयार रहते हैं।

  आजकल समाचार भेजने में भी विज्ञान मानव की बड़ी सहायता कर रहा है। टेलीफोन, बेतार का तार, समाचार-पत्र और रेडियो ये सब विज्ञान ने ही दिए हैं। आज कुछ ही सेकंड में एक समाचार सारे संसार में फैल सकता है। हजारों मील दूर बैठा हुआ एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से इस प्रकार बातचीत कर सकता है मानो वह उसके सामने ही बैठा हो। यह सब कुछ सुविधाएँ विज्ञान ने ही तो दी हैं।

  विज्ञान में मन बहलाने के लिए चलचित्र, रेडियो, ग्रामोफोन और टेलीविजन आदि भी प्रदान किए हैं। अपने काम से थक कर कोई रेडियो सुनता है तो कोई चलचित्र देखने जाता है, कुछ लोग मोबाइल चलाते हैं। बंदूक, तोप, एटम बम, लड़ाकू विमान तथा दूरमारक अस्त्र विज्ञान के अद्भुत चमत्कार हैं। आज एक देश को मिनट में नष्ट किया जा सकता है। आज संसार का बड़े से बड़ा देश भी विज्ञान के इन विनाशकारी चमत्कारों से काँपता है। आज विज्ञान के बल से एक सैनिक पूरी सेना का नाश कर सकता है।

   वास्तव में आज हमारा जीवन विज्ञान के सहारे व्यतीत हो रहा है। विद्युत तो विज्ञान का महान चमत्कारों में से एक है। इससे आज हमें प्रकाश मिलता है, मशीनें चलती है, पंखे चलते हैं, गेहूं पिस्ता है तथा खाना तैयार होता है। हमारे दैनिक जीवन में काम आने वाली सभी वस्तुएं विज्ञान ने दी हैं। हमारे शरीर के लिए उत्तम वस्त्र, पढ़ने के लिए उत्तम पुस्तकें, खेतों के लिए अच्छे खाद, रोगों के लिए उत्तम बधाइयाँ, फोटो खींचने के लिए कैमरा और लिखने के लिए कागज विज्ञान ने ही दिए हैं। आज विज्ञान के चमत्कारों के कारण चेचक, हैजा, पोलियो तथा मलेरिया आदि घातक बीमारियों पर पूरी तरह विजय प्राप्त कर ली गई है। वास्तव में विज्ञान के यह चमत्कार समाज के लिए वरदान ही हैं।

   मनुष्य प्रत्येक वस्तु को अपने मनमाने ढंग से प्रयोग में लाता है। तेज ब्लेड से साफ हजामत भी बनती है और यह जेब भी काटती है। विज्ञान के इन चमत्कारों का मानव ने अनेक स्थानों पर दुरुपयोग भी किया है। महाविनाशक अणु-शक्ति का मानव-कल्याण के लिए भी उपयोग किया जा सकता है। अतः हमारे वैज्ञानिकों को चाहिए कि वह इन चमत्कारों का प्रयोग केवल मानव कल्याण के लिए ही करें।

 संक्षेप में हम कह सकते हैं कि विज्ञान के चमत्कारों ने मानव जाति को बहुत सुख सुविधाएं प्रदान की हैं।

  आज भी समझदार लोग इस बात के लिए प्रयत्न कर रहे हैं कि विज्ञान के ये चमत्कार मानव की सेवा करते रहे। उसे हानि न पहुँचाएँ। आशा है कि मानव इनसे पूरा लाभ  उठाता रहेगा तथा जीवन और अधिक सुखमय हो जाएगा।


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2. विज्ञान के चमत्कार

या

विज्ञान :अभिशाप या वरदान 

या 

विज्ञान के वरदान 

या

 विज्ञान का महत्व 

या 

विज्ञान और मानव-हित 

या 

विज्ञान की देन

 या 

विज्ञान के बढ़ते चरण : विकास या विनाश की ओर

  [रूपरेखा : (1)प्रस्तावना, (2)विभिन्न क्षेत्रों में विज्ञान के चमत्कार -(i) संचार के क्षेत्र में, (ii) यातायात एवं परिवहन के क्षेत्र में, (iii) चिकित्सा के क्षेत्र में, (iv) शिक्षा के क्षेत्र में, (v) कृषि के क्षेत्र में, (vi) मनोरंजन के क्षेत्र में, (vii)दैनिक जीवन में, (viii) उद्योग के क्षेत्र में, (ix) परमाणु शक्ति के क्षेत्र में, (3) विज्ञान के चमत्कारों से लाभ व हानि, (4) विज्ञान और मनुष्य का संबंध, (5) उपसंहार।]

  प्रस्तावना : आधुनिक युग में विज्ञान के नवीन अविष्कारों ने विश्व में क्रांति-सी दी है। विज्ञान के बिना मनुष्य के स्वतंत्र अस्तित्व की कल्पना भी असंभव प्रतीत होती है। विज्ञान की सहायता से मनुष्य प्रकृति पर निरंतर विजय प्राप्त करता जा रहा है। आज से कुछ वर्ष पहले विज्ञान के आविष्कारों की चर्चा से ही लोग आश्चर्यचकित हो जाया करते थे, परंतु आज वही अविष्कार मनुष्य के दैनिक जीवन के अंग बन गए हैं। एक समय था जब मनुष्य इस सृष्टि की प्रत्येक वस्तु को कौतूहल से भरी हुई तथा आश्चर्यजनक समझता था और उनसे भयभीत होकर ईश्वर की प्रार्थना करता था, परंतु आज विज्ञान ने प्रकृति को वश में कर उसे मानव की दासी बना दिया है।

   विभिन्न क्षेत्रों में विज्ञान के चमत्कार - आज जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में विज्ञान के चमत्कारपूर्ण अविष्कारों का प्रभुत्व देखा जा सकता है। इनमें से कुछ प्रमुख क्षेत्रों का संक्षिप्त विवरण हम इस प्रकार दे सकते हैं -

   (i) संचार के क्षेत्र में - प्राचीन काल में संदेशों के आदान-प्रदान में बहुत समय लग जाया करता था; परंतु अब समय की दूरी घट गई है। अब टेलीफोन, सेल्यूलर फोन, टेलीग्राम, पेजर तथा फैक्स के द्वारा क्षण-भर में संदेश व विचारों का आदान प्रदान किया जा सकता है। अब एक समाचार; टेलीप्रिंटर, रेडियो तथा टेलीविजन एवं मोबाइल द्वारा कुछ ही क्षणों में विश्व भर में प्रेषित किया जा सकता है।

  (ii) यातायात एवं परिवहन के क्षेत्र में : पहले व्यक्ति थोड़ी-सी दूरी तय करने में पर्याप्त समय लगा देता था, लंबी यात्राएँ उसे स्वप्न-सी लगती थी; किंतु अब रेलो,मोटरों तथा वायुयानों के अविष्कार ने लंबी यात्राएँ भी अत्यंत सुगम एवं सुलभ कर दी हैं। अब विभिन्न वस्तुएँ एक स्थान से दूसरे स्थान तक अल्प समय में ही भेजी जा सकती हैं।

  (iii)चिकित्सा के क्षेत्र में : अनेक असाध्य बीमारियों का इलाज विज्ञान द्वारा ही संभव हुआ है। आधुनिक चिकित्सा पद्धति इतनी विकसित हो गई है कि अंधे के लिए आँखें और अपंग को अंग मिलना अब असंभव नहीं रह गया है। दवाओं, सैैल्य चिकित्सा, कृत्रिम श्वसन इत्यादि के द्वारा मनुष्य को नया जीवन दिया जाता है। कैंसर, टीवी तथा हृदय-रोग जैसे भयंकर व जानलेवा रोगों पर विजय पाना विज्ञान के माध्यम से ही संभव हुआ है। वस्तुतः विज्ञान ने चिकित्सा की नवीन पद्धतियों के सहारे मनुष्य को दीर्घ जीवी बनाया है।

   (iv) शिक्षा के क्षेत्र में : शिक्षा के प्रसार व प्रचार में विज्ञान ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। विज्ञान के द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में अद्भुत कार्य किए गए हैं। टेलीविजन, रेडियो और सिनेमा ने शिक्षा को सरल बनाया है। छापेखाने तथा अखबारों ने ज्ञान वृद्धि में सहयोग दिया है। छापेखानों के आविष्कार ने पुस्तकों के प्रशासन द्वारा ज्ञान के नए आयाम प्रस्तुत किए हैं। कंप्यूटर के प्रयोग ने तो छापे व शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति ला दी है। आज मोबाइल कंप्यूटर इंटरनेट द्वारा शिक्षा की एक अदभुत ऊंचाई देखने को मिली है। जो आज तक दुर्लभ थी। अब लोग इंटरनेट द्वारा ऑनलाइन शिक्षा प्रदान कर रहे हैं और छात्र उससे लाभान्वित हो रहे हैं।

   (v) कृषि के क्षेत्र में : आज हम अन्न के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होते जा रहे हैं। इसका श्रेय आधुनिक विज्ञान को ही है। विभिन्न प्रकार के उर्वरक, कृत्रिम जल व्यवस्था बुआई तथा कटाई आदि के आधुनिक साधनों एवं कीटनाशक दवाओं ने खेती को सुविधापूर्ण और सरल बना दिया है। इसके कारण ही हम सरलता से पर्याप्त अन्न पैदा कर सके हैं। अन्न को सुरक्षित रखने तथा वितरण की समुचित व्यवस्था के लिए नवीन उपकरणों के आविष्कार भी किए गए हैं।

  (vi) मनोरंजन के क्षेत्र में : मनोरंजन के आधुनिकतम साधन विज्ञान की ही देन हैं। सिनेमा, रेडियो तथा टेलीविजन के अविष्कार ने मानव को उच्च कोटि के सरल और सुलभ मनोरंजन के साधन प्रदान किए हैं। मोबाइल ने तो सोने पर सुहागा कर दिया।

 (vii) दैनिक जीवन में : हमारे दैनिक जीवन में प्रत्येक कार्य विज्ञान पर ही आधारित है। विद्युत का आविष्कार हमारे जीवन का महत्वपूर्ण अंग बन गया है। बिजली के पंखे, प्रेस, गैस, स्टोव, फ्रिज, सिलाई मशीन, मोबाईल आदि अनेक वस्तुओं के निर्माण ने मानव को सुविधापूर्ण जीवन दिया है तथा समय, शक्ति एवं धन की पर्याप्त बचत कराई है।

  (viii) उद्योग के क्षेत्र में : औद्योगिक क्षेत्र में विज्ञान ने क्रांतिकारी परिवर्तन किए हैं। भाँती-भाती के मशीनों ने उत्पादन को बढ़ाया है। कपड़े खाद्य-पदार्थ तथा दैनिक उपभोग की वस्तुओं को बनाने के लिए विज्ञान ने सरलतम साधनों के आविष्कार किए हैं। वस्तुतः विज्ञान ही उद्योगों को प्रगति की ओर अग्रसर किया है।

   (ix) परमाणु शक्ति के क्षेत्र में : वर्तमान युग को 'परमाणु का युग' कहा जाता है। आज अणुशक्ति द्वारा कृत्रिम बादलों के माध्यम से वर्षा की जा सकती है। मानव कल्याण से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण कार्यों के लिए भी अणु शक्ति का विकास किया जा सकता है।

 विज्ञान के चमत्कारों से लाभ व हानि : विज्ञान ने मनुष्य को ऐसे अनेक वरदायिनी शक्तियाँ प्रदान की हैं, जिनके द्वारा मानव जीवन सरल बन गया है। विज्ञान ने मनुष्य को प्रत्येक क्षेत्र में सुविधाएँ उपलब्ध कराई है। उसने उसे बाढ़, अकाल तथा महामारी से बचाया है; मनुष्य को निरोग बनाने में सहायता कर उसे दीर्घायु बनाया है तथा रहन-सहन संबंधी सुविधाएं प्रदान करके उसके जीवन को सुखमय बनाया है। विज्ञान ने अपराधों को कम करने में भी सहायता की है। अब 'लाई-डिटेक्टर' की सहायता से व्यक्ति के अपराध का पता लगाया जा सकता है।

   एक ओर जहाँ मनुष्य को विज्ञान से अनेक लाभ प्राप्त हुए हैं, वहीं इसके कारण समाज को अनेक हानियाँ भी हुई हैं। सुविधाजनक उपकरणों ने मनुष्य को कमजोर बना दिया है तथा यंत्रों के अत्यधिक उपयोग ने बेकारी को जन्म दिया है। नवीन वैज्ञानिक प्रयोगों ने प्राकृतिक वातावरण को दूषित कर दिया है। परमाणु-युद्ध के भय ने मानव को भयभीत कर दिया है। विज्ञान के कारण ही मनुष्य अपनी पुरानी परंपराएँ और आस्थाई भूल गया है तथा उसमें विश्वबंधुत्व की भावना लुप्त हो रही है। वैज्ञानिक आविष्कारों की निरंतर स्पर्धा आज विश्व को खतरनाक मोड़ पर ले जा रही है। परमाणु तथा हाइड्रोजन बम नि:संदेह विश्व शांति के लिए खतरनाक बन गए हैं। इनके प्रयोग से संपूर्ण विश्व की संस्कृति पलभर में नष्ट हो सकती है।

   विज्ञान और मनुष्य का संबंध : मानव और विज्ञान का परस्पर अटूट संबंध है। आज का मानव वैज्ञानिक मानव बन गया है। विज्ञान की शक्ति पाकर वह बर्बर भी होता जा रहा है। इसलिए आज मानव के विवेक को जागृत करने की आवश्यकता है, जिससे वह विज्ञान का वरदान रूप ग्रहण कर सके अभिशप्त रूप नहीं। 

  उपसंहार : विज्ञान के गुणों और विशेषताओं को देखते हुए कहा जा सकता है कि विज्ञान मानव के लिए वरदान ही सिद्ध हुआ है। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में हम वैज्ञानिक चमत्कारों के ऋणी हैं। यदि मानव विवेक से काम लें और विज्ञान का दुरुपयोग न करें, तो धरती को स्वर्ग बनाया जा सकता है। वास्तव में विज्ञान स्वयं में एक चमत्कार है। 

  एमर्सन ने कहा है :- "आज हम विज्ञान के युग में रह रहे हैं और विज्ञान के बिना मानव के अस्तित्व की कल्पना असंभव प्रतीत होती है।"

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Essay on corona virus/Covid-19

  Today, the whole world has become familiar with Kovid-19 ie Coronavirus.  Everybody can be seen looking for and explaining the way to avoid it.  All are adopting its rescue measures.  But some people are still behaving fearlessly as if it were an Eve or a joke.  And in crowded  places, even without masks, there are roaming around without fear.  All of them should be vigilant and this virus should not be taken lightly.



 In this subject, a beautiful essay is presented here in which the complete analysis has been given to you. If you like the analysis, then please comment and tell how you felt.



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 Essay on corona virus


 Preamble: Corona virus ie Kovid-19 is very subtle but very dangerous and effective virus.  covid-19 is about 900 times smaller than human hair, but its infection spreads rapidly worldwide.  The World Health Organization (W.H.O.) has declared the corona virus an epidemic.  In almost all the countries of the world, this virus has created its orgy.


• What is Coronavirus?

   The corona virus (covid-19) belongs to a family of viruses whose infection can range from colds and colds to problems with breathing.  This virus has never been seen before.  The infection of the virus began in December 2019 from Wuhan city of China.  According to the WHO, fever, cough, shortness of breath are its main symptoms.  Scientists from all over the world are searching for vaccines to avoid this, but so far no vaccine has been made to stop the virus from spreading.

 As a result of this infection, problems like cold, cold, fever, runny nose, shortness of breath and sore throat start.  This virus spreads from one person to another.  Therefore, great care is being taken to avoid this.  As we know, this virus (covid-19) first caught in China in December.  And slowly, this virus spread to other countries of the world too.

  Infection of such virus spreads from one person to another through air coming out of the nose ie from breath and cough or sneeze.  The drops of water that come out of the body while coughing.  She spreads in the air, and along with it the virus spreads, capturing another human being.  The virus named Kovid-19 has created terror in more than 70 countries of the world.  To avoid this, we should take precautions given by the government and that is necessary.  So as to prevent it from spreading.

 The corona virus is called covid-19 because it was first identified in 2019.


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 • Symptoms of the disease

  According to the WHO, the first Kovid-19 or corona virus patient first has fever.  After this, a cold or dry cough and then after a week, trouble starts breathing.  But now there is no significant symptom of this disease.  Now it has been seen that the patient does not have the power to smell and does not even get food.

 This does not mean that the people in whom these symptoms are found have coronavirus, but it is known that those symptoms are found in those who have the Karona virus (covid-19).  In severe cases of people infected with the corona virus, pneumonia, excessive breathing, kidney failure, and even death can occur.  Children younger than 10 years, elderly or people who already have a serious illness such as asthma, diabetes or heart disease, the risk of the virus may be higher in the case.  Similar symptoms are also found in colds and flu viruses.


• When this virus is infected?

 At present, there is no vaccine or certain medicines for this disease, yet some antibiotics can be given as soon as symptoms are seen.

* Durga from others till you become healthy.

* The discovery of its vaccine is still in progress.

* By the end of this year, the vaccine's human test report will also arrive.

* Vaccine is expected by the end of this year (2020).

* Some doctors are also testing antiviral medication.


 Measures to protect against Kovid-19:

* WHO / Ministry of Health has issued a guideline for protection from Kovid-19.

* Accordingly, hands should be washed repeatedly with soap.

* Alcohol based hand sanitizer can also be cleaned by hand.

* Take care of cleanliness.




* Keep nose and mouth covered well with mask.

* Instead of joining hands with people, greet them from far away by joining hands.

* Sanitized any items brought at home and put them in a separate room and use these items on the second or third day.

* Clean things like mobile-laptop etc. from time to time.

* Avoid touching the nose, mouth and eyes.

* It is very important to strengthen your immunity system to avoid infection.  For this, include nutritious ingredients in your food.

* Must take turmeric milk at least once daily.

* Make a habit of drinking lukewarm water every time.

* Check your body temperature and other symptoms regularly.

* When coughing or sneezing, cover your nose and mouth with a handkerchief or tessu paper, and throw the masked Islam and tissue paper in the dustbin closed.


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* Keep a distance of one and a half meters from the person who has symptoms of colds or flu.

* Avoid carnivores (meat, fish and eggs).

* Also do not go near wild animals.


• How and which mask should you wear?

* Well, a healthy person does not need to apply mask.  But it is necessary to wear a mask if you are in contact with an infected person with Kovid-19 virus.

* Those who have a cold, phlegm, fever or breathing problems must wear masks and visit a doctor as soon as possible.


• The right way to wear a mask:

* While wearing the mask, it should be noted that the nose, mouth and beard are well covered.

* Do not put your hands outward (from the front) over the mask.

* If accidentally, even if you get hands, immediately sanitize hands or wash them with soap.

* While touching the mask, avoid touching the top of the mask.  Its rubber or lace should be taken off.

* Masks should be changed daily.


• How to reduce the risk of corona virus infection (Remedy):

* Based on information received from the World Health Organization (W.H.O.), Public Health Care and National Health Service (N.H.S.), here we are giving ways to prevent coronavirus.

* Corona virus species of viruses are spread by droplets of water coming out of the body on sneezing or coughing.

* To avoid this, clean hands repeatedly with soap.

* Cover your nose and mouth with a cloth, tissue or handkerchief while sneezing or coughing.

* Do not touch the eyes, nose and mouth frequently.

* No evidence has been found so far about Kovid-19 or Corona virus that the virus is spread by parcels, letters or food items.

* This type of virus cannot survive outside the body for much longer.


• How to prevent the spread of corona virus infection?

• Methods to prevent the spread of corona virus infection:

* Avoid going to public places

* Do not travel by public vehicles such as buses, trains, auto-rickshaws or taxis.

* Do not call the guest home at the present time.

* Do not make household goods from another person.

* Do not go to office, school or public place as much as possible.

* If you live in a crowded place and share it with people, then you need to be more vigilant.

* Stay in separate rooms as much as possible and continuously clean the shared kitchen and bathroom.

* If you have come in contact with an infected person or have come from an infected area, you are advised to stay separate.

* In addition, if you show signs of infection, then you should remain alone and away from others for 14 days, so that the infection can be stopped and not allowed to proceed.  Stay at home.

 Conclusion : Countries around the world have suffered from a virus infection called coronavirus (Kovid-19).  Even today its fear is the same.  Governments around the world are trying (at their own level) to prevent its infection.  But there is no way out yet.  Therefore, to avoid this epidemic, we have to follow all measures well.  So that this dangerous deadly virus can be saved.


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छठ पूजा/छठ की सुहावनी छटा/सूर्य पूजन/पर हिन्दी और अंग्रेजी में निबंध/Essay in Hindi and English on Chhath Puja/worship/ Chhath Ki Suhavni Chhata / Surya Poojan

छठ पूजा

या

छठ की सुहावनी छटा

या

सूर्य पूजन

   प्रतिवर्ष कार्तिक माह में छठ व्रत मनाया जाता है। चैत माह में भी छठ व्रत मनाया जाता है। चैत में गर्मी पड़ती है। इस कारण बहुत कम लोग चैत में छठ व्रत करते हैं। कार्तिक माह में प्रकृति कुछ आर्द हो जाती है। शरद ऋतु का आरंभ (आगमन) हो जाता है। निर्जल उपवास में छठव्रतियों को थोड़ी शीतलता मिलती है। इसलिए कार्तिक माह में छठव्रतियों की संख्या अधिक रहती है।

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   छठ व्रत का बहुत महात्म्य है। यह बहुत पवित्रता से, नियमपूर्वक तथा पूर्ण अनुष्ठान के साथ मनाया जाता है। छठव्रती नियम-धर्म में थोड़ी सी भी चूक नहीं करते हैं । वे विधिपूर्वक तथा पवित्रतापूर्वक भगवान सूर्य की पूजा करते हैं। इसके लिए वे कठोर साधना भी करते हैं।

  इस व्रत का आरंभ 'नहाए-खाए' से हो जाता है। इस दिन अरवा चावल, कद्दू की तरकारी और चने की दाल बनती है। दूसरे दिन 'खरना' होता है। इस दिन रात में खीर और रोटी से पूजा होती है तथा खीर और रोटी को प्रसाद के रूप में खिलाया जाता है।

  तीसरे दिन छठव्रती संध्या समय भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए गंगा या नदी किनारे जाते हैं। इस समय का दृश्य बड़ा ही मनोहारी दिखता है। चारों ओर से छठव्रतियों, उनके संबंधियों तथा दर्शक जनों की भीड़ उमड़ती हुई दिखती है। लोगों के आने का ताँता लगा रहता है। प्रथम अर्घ्य  देखने वाले दर्शकों की लंबी कतार दिख पड़ती है। इस प्रकार एक मेला जैसा दृश्य उपस्थित हो जाता है।

 सिर पर पीले वस्त्र में दौरा लिए लोग घाट किनारे आते हैं। व्रतियों के पीछे महिलाएं पुरुष और बच्चे झुंड के रूप में चलते रहते हैं। रास्ते में औरतें समवेती स्वर में छठ व्रत के गीत गाती जाती हैं। उनके छठ के गीतों की गूंज से पूरा वातावरण छठमय हो जाता है। कुछ लोग ढोलक और माँदल बजवाते हुए घाट किनारे चलते जाते हैं।

 संध्या के समय डूबते सूर्य की लालिमा को छठव्रती प्रथम अर्घ्य देते हैं। इस दृश्य को भक्तिभाव से देखने वालों की लंबी भीड़ दिखाई पड़ती है। धरती पर रंग बिरंगे सज्जित परिधानों से तथा सूर्य के लाल रंग से धरती और आकाश रंगीन दिखने लगते हैं। रंग-बिरंगी छटा से छठ की छटा और सुहावनी हो जाती है। प्रथम वर्ग की संध्या का सौंदर्य अपूर्व हो जाता है।

  दूसरे दिन सूर्योदय के समय उगते सूर्य को अर्घ्य देकर छठव्रत का समापन किया जाता है। इसके बाद प्रसाद वितरण होता है। प्रसाद वितरण और प्रसाद ग्रहण का कार्य दो-तीन दिनों तक चलता रहता है। उत्तर भारत में यह पर्व का बहुत महत्व है। सभी व्रतों में छठ व्रत अति पवित्र व्रत है। इसी से व्रतों में इस व्रत  को  ऊँचा स्थान प्राप्त है।

आदर्श विद्यार्थी पर निबन्ध/Essay on ideal student in hindi

 निबंध 

आदर्श विद्यार्थी



   (रूपरेखा :-भूमिका, आदर्श विद्यार्थी के गुण, आचरण, आदत, लग्नशीलता, समयशील, नियमितता, स्वावलंबन, उपसंहार।)

   भूमिका : आज के विद्यार्थी कल के राष्ट्र निर्माता हैं। देश का भविष्य कल इन्हीं के कंधों पर होगा। अतः आने वाले समय में आज के विद्यार्थी ही देश को दिशा देंगे। ऐसे में यदि विद्यार्थी सुयोग्य होंगे, श्रेष्ठ गुणों से युक्त होंगे, तो देश निरंतर उन्नति करेगा और यदि अर्थहीन गुणहीन हुए तो देश की अवनति को कोई नहीं रोक सकता।

  आदर्श विद्यार्थी के गुण : आदर्श विद्यार्थी से अनेक गुणों की अपेक्षा की जाती है। यह श्रेष्ठ गुणों से युक्त होना चाहिए। यह अनुशासन प्रिय, सुशील और सच्चरित्र हो, विद्वान और धनवान होने पर भी, यदि कोई चरित्रवान नहीं है, तो वह कहीं पर भी आदर नहीं पाता। 

   संक्षेप में आदर्श विद्यार्थी के निम्नलिखित गुण होने चाहिए।

  अनुशासन प्रिय : आदर्श विद्यार्थी का प्रथम पाठ अनुशासन से प्रारंभ होता है। समय पर उठना, बैठना, पढ़ना, गुरु का आदर, माता-पिता का आदर एवं छोटे से स्नेह रखने वाला विद्यार्थी ही आदर्श  किसी से लड़ते झगड़ते हैं वह विनम्रता का प्रतीक होता है। विनम्रता अनेक गुणों की जननी है। उसमें आज्ञाकारी ता के भाव से जन्म लेते हैं

   लग्नशीलता :आदर्श विद्यार्थी प्रत्येक कार्य को बड़ी लगन से करता है। वह कामचोर नहीं होता । वह प्रत्येक कार्य को पूर्ण करके ही दम लेता है।

   संयम शील : एक आदर्श विद्यार्थी संयम शील होता है। संयम से छात्र में एकाग्रता आती है। ऐसा विद्यार्थी भोजन के प्रति स्वाद में, श्रृंगार में, मनोरंजन और क्रोध में संयम से कार्य लेता है

  नियमितता : अनुशासन का ही अन्य गुुण है। आदर्श विद्यार्थी अपने  सभी कार्य जैसे अध्ययन, भोजन, खेलकूद और निद्रा नियमित समय पर ही करता है।

  स्वावलंबन  :आदर्श छात्र के प्रमुख गुणों में से एक होता है। वह अपने कार्यों के लिए किसी पर निर्भर नहीं होता। अपितु अपने कार्य से करता है। आदर्श छात्र का सबसे बड़ा गुण विद्या ग्रहण करना है। वह अपना अधिक समय विद्या ग्रहण करने में ही लगाता है।

  उपसंहार : गुणों के अतिरिक्त सत्य बोलना मधुर भाषण करना सद्गुणों को ग्रहण करने के लिए तत्पर रहना आदर्श छात्र के अन्य गुण हैं। वह दूसरों के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत करता है। वह अपना भविष्य सुधारना है और सब उसे देख कर अपना भविष्य सुधारते हैं। इन सब बातों से देश व समाज निरंतर उन्नति को प्राप्त होते रहते हैं।


      

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हमारा प्यारा भारतवर्ष पर हिन्दी निबंध संग्रह /our lovly india essay in hindi and English

👉रामायण GK QUIZ video

हमारा प्यारा भारतवर्ष 

      (रूपरेखा- :-भूमिका, नामकरण, भौगोलिक स्थिति, प्राकृतिक सौंदर्य, संस्कृति, स्वतंत्रता के बाद प्रगति तथा उज्जवल भविष्य, देश के प्रति हमारा कर्तव्य, उपसंहार।) 

  भूमिका : महाकवि इकबाल ने हमारे भारत की प्रशंसा करते हुए अपनी पंक्तियों में कहा है 

         "सारे जहां से अच्छा, हिंदुस्ता हमारा        

     हम बुलबुले हैं इसकी, यह गुलसिता हमारा।।"      

 अपनी मातृभूमि सभी को प्रिय लगती है। जिस धरती पर हमने जन्म लिया। जिसका अन्न-जल खा, पीकर हम बड़े हुए। उसके प्रति लगाव होना स्वभाविक ही है। हमारा प्रिय भारतवर्ष विश्व का सातवां सबसे बड़ा देश है और जनसंख्या की दृष्टि से इसका स्थान विश्व में चीन के बाद दूसरा है।

   नामकरण : भारत मेरा देश है, मेरी मातृभूमि है। भारत का प्राचीन नाम आर्यावर्त है। माना जाता है कि महा प्रतापी राजा, दुष्यंत के पुत्र भरत के नाम पर ही हमारे देश का नाम 'भारतवर्ष' पड़ा ।

  भौगोलिक स्थिति : भारत एक विशाल देश है। इसके उत्तर में हिमालय इसके मुकुट की भांति सुशोभित है। मेरा देश तीन ओर से समुद्र से घिरा हुआ है। ऐसा लगता है दक्षिण में हिंद महासागर इसके चरण पखार रहा हो। कश्मीर से कन्याकुमारी तक और असम से लेकर गुजरात तक यह फैला हुआ है।


    प्राकृतिक सौंदर्य : प्रकृति ने मेरे देश को खूब संवारा है। यहां की प्राकृतिक छटा दर्शनीय है। छह ऋतु प्रत्येेक बारी-बारी से आकर इसका श्रृंगार करती हैं। इसी धरा पर पृथ्वी का स्वर्ग कहा जाने वाला 'कश्मीर' विद्यमान है। इस देश की प्राकृतिक सुंदरता अनुपम है। प्राकृतिक सौंदर्य से भरा केरल, हिमाचल, अरुणाचल प्रदेश अत्यंत आकर्षक हैं। नैनीताल, मसूरी, दार्जिलिंग, माउंट आबू, शिमला, कुल्लू-मनाली जैसे अनेक स्मरणीय स्थान इसी देश में मौजूद हैं। 

   संस्कृति :भारत की संस्कृति अत्यंत प्राचीन है। इसी देश ने संपूर्ण मानव जाति को प्रेम, अहिंसा सत्य, धर्म तथा भाईचारे का संदेश दिया। इसी धरती ने वसुधैव कुटुंबकम का संदेश समुचित मानवता को दिया। यह देश ऋषि-मुनियों, संत-महात्माओं का देश है। इसी भूमि पर अनेक धर्मो ने जन्म लिया। जैन-बौद्ध, सिख धर्म यहां से पूरी दुनिया में फैले। सदियों के बाद आज भी भारतीय संस्कृति जीवित है। अनेकता में एकता इसकी प्रमुख विशेषता रही है। यह वेदों, उपनिषदों और गीता-रामायण का देश है।

 

   स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद प्रगति तथा उज्जवल भविष्य : सैकड़ों वर्षो की पराधीनता के बाद भारत ने 15 अगस्त 1947 को आजादी पाई। अत्यंत जर्जर अवस्था में था। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद इस देश में हर क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की। आज हम लगभग हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर हैं। आज हमारा देश परमाणु शक्ति संपदा देश है। जिसकी विश्व में अपनी पहचान है। यद्यपि बेरोजगारी, जनसंख्या की अधिकता, निर्धनता जैसी कुछ समस्याएं अभी भी विद्यमान हैं। परंतु भारत का भविष्य उज्जवल है। हम हर क्षेत्र में निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर हैं।

   देश के प्रति हमारा कर्तव्य : हमारा कर्तव्य है कि हम मिल जुल कर रहे तथा देश की एकता में के लिए कृत संकल्प हो। अनेक धर्मो संप्रदायों आदि के झगड़ों को छोड़ कर हम अपने देश के विकास के लिए कार्य करें।

Short Essay In English/अंग्रेजी और हिन्दि लघु निबंध / Mahatma Gandhi /the accident I have seen /an ideal citizen make the nation great /a railway journey /my best friend /the Taj Mahal/ visit to a historical place/ my first day at school/ a journey to the Ganga / महात्मा गांधी / दुर्घटना में मैंने देखा है / एक आदर्श नागरिक राष्ट्र को महान बनाता है / एक रेलवे यात्रा / मेरा सबसे अच्छा दोस्त / ताजमहल / एक ऐतिहासिक जगह की यात्रा / स्कूल में मेरा पहला दिन / एक यात्रा गंगा

  Here, I present some essays for students with their titles, which can they write for their School and learn how to write essay .

          1.   A great freedom fighter 

👉Class 1st GK QUIZ हिन्दी में


 "Mahatma Gandhi"

   Many great leaders are born in our country.They sacrificed their lives for the sake of the country. Mahatma Gandhi was one of the greatest leader of our country. He was born at Porbandar in Gujarat in 1869. His earlier name was  Mohandas Karamchand Gandhi. He went to England for his higher education. He worked as a barrister in South Africa. When he returned to India. He took an active part in the freedom struggle. He lived a very simple life. He believed in truth and nonviolence.

    His birthday falls on 2nd October which is celebrated as 'Gandhi Jayanti'. He was shot died on 13th January 1948. We call him 'Bapu'(the father of the nation).

👉रामायण सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी 300+

  1. एक महान स्वतंत्रता सेनानी

             "महात्मा गांधी"

 हमारे देश में कई महान नेता पैदा हुए हैं। उन्होंने देश की खातिर अपना बलिदान दिया।  महात्मा गांधी हमारे देश के महानतम नेताओं में से एक थे।  उनका जन्म 1869 में गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। उनका पहले का नाम मोहनदास करमचंद गांधी था।  वे अपनी उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड गए।  उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में एक बैरिस्टर के रूप में काम किया।  जब वह भारत लौटा।  उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भाग लिया।  उन्होंने बहुत सादा जीवन जिया।  वह सत्य और अहिंसा में विश्वास करता था।

 उनका जन्मदिन 2 अक्टूबर को पड़ता है जिसे 'गांधी जयंती' के रूप में मनाया जाता है।  13 जनवरी 1948 को उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हम उन्हें 'बापू' (राष्ट्र का पिता) कहते हैं।

महात्मा गांधी पर निबंध/राष्ट्रपिता/अहिंसा के पुजारी/संत/राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पर हिंदी निबंध/ essay in hindi on Mahatma Gandhi/the father of nation

        

 1. एक महान स्वतंत्रता सेनानी (100 words)
महात्मा गांधी पर निबन्ध 

             "महात्मा गांधी"

 हमारे देश में कई महान नेता पैदा हुए हैं। उन्होंने देश की खातिर अपना बलिदान दिया।  महात्मा गांधी हमारे देश के महानतम नेताओं में से एक थे।  उनका जन्म 1869 में गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। उनका पहले का नाम मोहनदास करमचंद गांधी था।  वे अपनी उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड गए।  उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में एक बैरिस्टर के रूप में काम किया।  जब वह भारत लौटा।  उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भाग लिया।  उन्होंने बहुत सादा जीवन जिया।  वह सत्य और अहिंसा में विश्वास करता था।

 उनका जन्मदिन 2 अक्टूबर को पड़ता है जिसे 'गांधी जयंती' के रूप में मनाया जाता है।  13 जनवरी 1948 को उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हम उन्हें 'बापू' (राष्ट्र का पिता) कहते हैं।

  2• महात्मा गांधी (200शब्द)

  गांधी जी का जन्म 2 अक्टूबर सन् 1869 ई• में गुजरात के पोरबंदर नामक स्थान में हुआ था। उनके पिता का नाम मोहनदास करमचंद गांधी था और माता का नाम पुतलीबाई था। इनके पिता राजकोट के दीवान थे।
   गांधीजी की प्रारंभिक शिक्षा पोरबंदर में हुई। प्रवेशिका परीक्षा पास करने के बाद वे बैरिस्टरी  पढ़ने के लिए इंग्लैंड गए। बैरिस्टरी पास कर वे सन 1891 में भारत लौटे और मुंबई में वकालत शुरू की। इसी समय अब्दुल्ला एंड कंपनी के एक मुकदमे की पैरवी के लिए वे दक्षिण अफ्रीका के नेटाल राज्य गये।  वहाँ भारतीयों की दशा देखकर वे बहुत दुखी हुए और सुधार के लिए आंदोलन चलाया।
   भारत लौटने के बाद उन्होंने अन्याय के विरोध में 'असहयोग' आंदोलन और 'सत्याग्रह' आंदोलन शुरु किया। इसके लिए उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा। अंत में 15      अगस्त 1947 में उन्होंने भारत को अंग्रेजी शासन से मुक्त कराया।

      महात्मा गांधी सत्य और अहिंसा के पुजारी थे। वे सभी को प्यार करते थे। वे अन्याय का सदा
विरोध करते थे। उनका जीवन सादा था। वे किसी से घृणा नहीं करते थे। वह हमारे पिता के समान थे। इसलिए लोग उन्हें राष्ट्रपिता या प्यार से बापू कहते थे। सारा देश उनका सम्मान करता था। उनका पूरा जीवन देशवासियों और जन सेवा में व्यतीत हुआ। उनकी मृत्यु 30 जनवरी सन् 1848 ई• में नाथू गोडसे की गोलियों से हुई। किंतु उनका नाम दुनिया में अमर हो गया।

 3 . महात्मा गांधी(350)
 (रूपरेखा - प्रस्तावना,  जन्म परिवार और शिक्षा,  दक्षिण अफ्रीका और भारत में आंदोलन, उपसंहार)
   बीसवीं शताब्दी को जिस अनोखे महापुरुष ने सबसे अधिक प्रभावित किया था। वह थे अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी। आधुनिक भारत के महापुरुषों में इनका नाम अग्रगण्य है। इन्होंने न केवल राजनीतिक व सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक पराधीनता की बेड़ियों से भी अपने देश को मुक्त कराने के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया।
   अहिंसा के पुजारी और करुणा के अवतार राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जन्म गुजरात के पोरबंदर में 2 अक्टूबर 1869 ई• में हुआ था। इनका पूरा का नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। इनके पिता करमचंद गांधी राजकोट रियासद के दीवान तथा वैष्णव भक्त थे। इनकी माता पुतलीबाई अत्यंत धर्म नष्ट महिला थी। इस प्रकार गांधी जी को बचपन में ही वैष्णव भक्त की दीक्षा मिल गई थी। 13 वर्ष की कम आयु में ही इनका विवाह कस्तूरबा से हो गया था। भावनगर के श्यामलाल कॉलेज से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण होने के बाद इन्हें बैरिस्टर पढ़ने विलायत भेजा गया था। 
   बैरिस्टर की पढ़ाई पूरी कर करके वापस आने के बाद, सन्  1893 ई• में एक मुकदमे की पैरवी करने के लिए उन्हें दक्षिण अफ्रीका जाना पड़ा। वहाँ उन्होंने अंग्रेजी सरकार की रंगभेद और निरीह जनता पर दमन, शोषण और अत्याचार को देखकर इन्हें बहुत बुरा लगा। वे स्वयं में भी अंग्रेजों के अत्याचार एवं अनादर का शिकार हुए तथा उन्होंने अंग्रेज शासकों के विरुद्ध दक्षिण अफ्रीका की जनता को संगठित किया और अहिंसात्मक ढंग से संघर्ष भी शुरू कर दिया। यह संघर्ष भारत आने के बाद भी प्रारंभ रहा।
  1942 में गांधीजी ने 'अंग्रेजो भारत छोड़ो' व 'करो या मरो'  जैसे आंदोलनों का शंखनाद किया इस बार जो चिंगारी भड़की वह अंत तक बुझ नहीं पाई और अंततः 15 अगस्त 1947 को भारत को स्वाधीनता मिल गई। अंग्रेजी कूटनीति के कारण भारत दो भागों में विभाजित हो गया तथा देश में सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे। हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए गांधीजी ने उपवास भी किया और संप्रदायिक अग्नि को बुझाने का प्रयास किया। किंतु 30 जनवरी 1948 को प्रार्थना सभा में जाते हुए गांधी जी पर एक पथ भ्रष्ट युवक 'नाथूराम गोडसे' ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी। इस प्रकार भारत का महान संत पंडित महामानव का एकमात्र आश्रय और विश्व का महान व्यक्तित्व संसार से विदा हो गया। किंतु गांधी जी मरकर भी अमर हो गए। पंडित जवाहरलाल नेहरू के शब्दों में  "प्रकाश बुझा नहीं, क्योंकि वह तो हजारों-लाखों व्यक्तियों के हृदय को प्रकाशित कर चुका था।"
   देश ने गांधी जी को राष्ट्रपिता की संज्ञा दी और श्रद्धा तथा प्रेम से बापू कहां। गांधी जी ने हमें सत्य, अहिंसा, स्त्री-शिक्षा, स्वदेशी वस्तुओं के प्रति प्रेम, अछूतों का उद्धार, खादी के प्रति प्रेम, हिंदू-मुस्लिम एकता आदि का संदेश दिया। गांधीजी के आदर्श आज भी हमारा पथ प्रदर्शन करते हैं। गांधीजी को परिजनों के प्रति  बड़ा लगाव था। हरिजनों के प्रति उनकी गहरी आस्था को कवि की वाणी में इस रूप में प्रकट किया जा सकता है :
" यदि हरिजन के छू लेने से, 
मंदिर का है कल्याण नहीं।
तो यही कहूंगा मंदिर में 
बस पत्थर है, भगवान नहीं ।। "

4. महात्मा गांधी(1000+शब्द ) 

(रूपरेखा : 1.प्रस्तावना, 2. जन्म, बाल्यावस्था और शिक्षा, 3.दक्षिण अफ्रीका में गांधी जी, 4.भारत में गांधीजी, 5.स्वतंत्रता आंदोलन और जेल यात्रा, 6महान संत के मृत्यु, 7.गांधी जी के महान आदर्श, 8.समाज सुधार के कार्य, 9.उपसंहार।)
  प्रस्तावना: बीसवीं शताब्दी को जिस अनोखे महापुरुष ने सबसे अधिक प्रभावित किया था, वह थे -महात्मा गांधी। वह आज धरती पर नहीं है किंतु सत्य, अहिंसा और देश प्रेम के सिद्धांतों पर आधारित उनका जीवन संदेश आज भारत की सीमाओं से निकलकर सारे संसार को जीवन प्रदान कर रहा है। न केवल राजनीतिक विवरण सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक पराधीनता की बेड़ियों से भी अपने देश को मुक्त कराने के लिए उन्होंने अपना जीवन बलिदान कर दिया। प्रत्येक भारतीय को  महात्मा गांधी जैसे विभूतियों पर गर्व है। वर्तमान भारत के निर्माता गांधी एक ऐसी ही महान विभूति थे जिन्होंने सत्य एवं अहिंसा का प्रयोग करके यह सिद्ध कर दिया कि आत्मिक बल शारीरिक बल से कहीं अधिक श्रेष्ठ तथा शक्तिशाली है।
  जन्म बाल्यावस्था और शिक्षा : अहिंसा के पुजारी और करुणा के अवतार महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर सन 1869 ई• को गुजरात प्रदेश के पोरबंदर नामक स्थान में हुआ था। उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। उनके पिता करमचंद गांधी, राजकोट रियासत के दीवान तथा वैष्णव भक्त थे। उनकी माता पुतलीबाई अत्यंत धर्मनिष्ठ महिला थी। माता की आस्तिकता और सत्यपरायणता की गहरी छाप गांधीजी पर व्यापक रूप से पड़ी।
  गांधी जी की प्रारंभिक शिक्षा राजकोट में हुई। अपने बचपन में इन्होंने 'सत्यवादी हरिश्चंद्र' नाटक देखा था और 'श्रवण कुमार' नामक नाटक पड़ा था। इन दोनों नाटकों के आदर्शों का उनके जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा। 13 वर्ष की अल्प आयु में उनका विवाह कस्तूरबा के साथ हो गया। इसी वर्ष उन्होंने भावनगर के श्यामलाल कॉलेज से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की और कानून की शिक्षा ग्रहण करने के लिए इंग्लैंड चले गए। भारत लौटने पर इन्होंने अपनी वकालत प्रारंभ की और 'अब्दुल्ला एंड कंपनी' की एक मुकदमे के संबंध में 1893 में अफ्रीका चले गए।
  दक्षिण अफ्रीका में गांधी जी: दक्षिण अफ्रीका में गांधी जी ने भारतीयों की दयनीय दशा देखी। वहाँ भारतीयों के साथ पशुओं जैसा व्यवहार किया जाता था।  गोरे और काले के भेद-भाव ने गांधी जी के हृदय में विद्रोह की ज्वाला उत्पन्न कर दी। वहाँ पर उन्हें भी कई बार अपमानित किया गया। यह सब देखकर उनका हृदय विद्रोह से भर उठा। उन्होंने वैज्ञानिक ढंग से युद्ध छेड़ दिया है। इसके लिए उन्होंने 'सत्याग्रह' और 'अहिंसा' का शस्त्र अपनाया। उनके आंदोलन का अनुकूल प्रभाव हुआ और दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों को सम्मान पूर्ण जीवन मिला। इस प्रकार सफलता प्राप्त करके गांधीजी प्रसिद्धि के शिखर पर पहुँचेे।
  भारत में गांधीजी: गांधीजी दक्षिण अफ्रीका में जनप्रिय हो चुके थे। भारतीय राजनीति उनका स्वागत करने के लिए तैयार थी। उस समय लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और गोपाल कृष्ण गोखले राजनीति के मैदान में थे। उन्होंने गांधी जी का स्वागत किया और गांधीजी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सेनानी बन गए। उन्होंने अहमदाबाद के पास 'साबरमती 'के तट पर अपने आश्रम की स्थापना की और वहीं से भारत की कोटि-कोटि जनता का मार्गदर्शन करने लगे।
 स्वतंत्रता आंदोलन और जेल यात्राएं: गांधीजी ने भारत की स्वतंत्रता के लिए देशव्यापी आंदोलन छेड़ दिया। उन्होंने चरखी को स्वतंत्रता का प्रतीक बनाया और अहिंसा को इस आंदोलन का शस्त्र। स्वतंत्रता आंदोलन के इस कर्मठ सिपाही को अनेक बार जेल यात्राएं भी करनी पड़ी। 1942 ई• में उन्होंने मुंबई अधिवेशन में नारा दिया 'अंग्रेजों, भारत छोड़ो'। अब अंग्रेजों ने मन-ही-मन समझ लिया था कि उन्हें भारत से जाना ही पड़ेगा। अंत में गांधीजी की नीति की विजय हुई और 15 अगस्त 1947 ई• में भारत स्वतंत्र हुआ।
   महान संत की मृत्यु: देश की स्वतंत्रता को अभी 1 वर्ष भी न बीता था कि 30 जनवरी 1948 ईस्वी की संध्या को जब गांधी जी संध्या प्रार्थना सभा के लिए जा रहे थे, नाथूराम गोडसे नामक व्यक्ति ने अपने रिवाल्वर की गोलियों से गांधी जी की हत्या कर दी। इस प्रकार भारत का महान संत, पीड़ित मानवता का एकमात्र आश्रय और विश्व का महान व्यक्तित्व संसार से विदा हो गया। महानुभाव की मृत्यु से सारा संसार अवाक रह गया है। मानवता चीख उठी किंतु गांधीजी मरकर भी अमर हो गए। 'पंडित जवाहरलाल नेहरू' के शब्दों में "प्रकाश बुझा नहीं क्योंकि वह तो हजारों-लाखों व्यक्तियों के हृदय को प्रकाशित कर चुका था।"
  गांधी जी के महान आदर्श: गांधी जी का ईश्वर में अटल विश्वास था। सत्य को उन्होंने ईश्वर का  ही दूसरा नाम बताया। धर्म को उन्होंने सदाचार का नाम दिया और सारेे  धर्मो में सद्भाव पैदा करने के लिए सत्याग्रह का सहारा लिया। गांधी जी ने हिंसा को अहिंसा से और अन्याय को शांतिमय सत्याग्रह से पराजित करने का, अनोखा ढंग निकाला और इस प्रकार उन्होंने अत्याचारी ब्रिटिश शासन की मजबूत नींव हिला दी। वे अहिंसा के पुजारी थे, किंतु उनकी अहिंसा में वीरता, निडरता और दृढ़ संकल्प विद्यमान थे। सत्य, अहिंसा और धर्म का राजनीति में प्रयोग करके गांधी जी ने एक अद्भुत आदर्श प्रस्तुत किया। उनकी कथनी और करनी में कोई भेद नहीं था। उन्होंने राम राज्य को अपना आदर्श घोषित किया, जिसमें आसुरी शक्ति तानाशाही और हिंसा का कोई स्थान न हो।
  समाज सुधार के कार्य: एक समाज सुधारक के रूप में गांधीजी का योगदान अतुलनीय है। गांधीजी छुआछूत, परदा-प्रथा, बहु-विवाह, जातिवाद, नशाखोरी और सांप्रदायिक भेदभाव जैसी बुराइयों को मिटाने के लिए उन्होंने निरंतर संघर्ष किया। जातिवाद और छुआछूत को मिटाने के लिए सबसे अधिक प्रयास किया और अछूतों को 'हरिजन' (हरि के जन) कहकर सामाजिक सम्मान दिलाया।
गांधी जी कहते थे कि "यदि हम भारत की आबादी के पांचवें हिस्से को अस्थाई गुलामी की हालत में रखना चाहते हैं और जान-बूझकर उन्हें राष्ट्रीय संस्कृति के सुफलों से वंचित रखना चाहते हैं तो स्वराज्य एक अर्थहीन शब्द मात्र रह जाएगा।"
  उपसंहार: गांधी जी ने हमें सत्य, अहिंसा, स्त्री-शिक्षा, स्वदेशी वस्तुओं के प्रति प्रेम, अछूतों का उद्धार, खादी के प्रति प्रेम, हिंदू-मुस्लिम एकता आदि का संदेश दिया। गांधीजी के आदर्श आज भी हमारा पथ प्रदर्शन करते हैं। 30 जनवरी को प्रतिवर्ष शहीद दिवस के रूप में गांधीजी के बलिदान का स्मरण किया जाता है। हमारा कर्तव्य है कि हम उनके बताए गए मार्ग पर  चलकर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करें। आज चारों ओर जिस प्रकार सांप्रदायिकता और भ्रष्टाचार का बोलबाला है ।उसमें गांधीजी के आदर्श ही हमें सही दिशा की ओर ले जा सकते हैं। देश ने गांधी जी को राष्ट्रपिता की संज्ञा दी और श्रद्धा तथा प्रेम से बापू कहा। गांधीजी एक राजनीतिक नेता के साथ  सामाज सुधारक भी थे।उन्होंने कोढ़ियोँ की सेवा भी की  और शराबबंदी के लिए आंदोलन किया। उन्होंने हरिजन उद्धार और संप्रदायिक एकता के लिए काम किया गांधीजी इस युग के महानतम पुरुषों में से थे। उन्होंने शताब्दियों से सोए हुए भारतवर्ष को जागृत किया और देश में आत्मसम्मान की लहर दौड़ाई। उनका चरित्र केवल भारतीयों के लिए ही नहीं अपितु विश्व भर के लिए भी अनुकरणीय है।
   हरि जनों के प्रति उनकी गहरी आस्था कवि की इन पंक्तियों में हम देख सकते है: 

"यदि हरिजन के छू लेने से, 
मंदिर का है, कल्याण नहीं।  
तो  यही  कहूंगा  मंदिर  में
बस पत्थर है, भगवान नहीं।।"

राष्ट्रीय एकता/ राष्ट्रीय सुरक्षा एवं एकता/ राष्ट्रीय एकता एवं राष्ट्र प्रेम/ हिंदी निबंध

हिंदी निबंध
राष्ट्रीय एकता
या
राष्ट्रीय सुरक्षा एवं एकता
या
राष्ट्रीय एकता एवं राष्ट्र प्रेम 


 (निबंध 1.  रूपरेखा- भूमिका, महत्ता, भारत में राष्ट्रीय एकता, उपसंघार)
  भूमिका: किसी राष्ट्र के नागरिकों के हृदय में, राष्ट्र के प्रति आने वाली वह अदृश्य सरिता, जो निरंतर देश हित में बहती रहती है, राष्ट्रीय एकता कहलाती है। दूसरे शब्दों में, वह सभी एक ही देश की संतान हैं, देश हम सबका है। यह वैचारिक एकता ही राष्ट्रीय एकता है।
   महत्ता: प्रत्येक राष्ट्र चाहे छोटा हो या बड़ा, यदि उसे विकास पद पर लाना है, हर तरह से मजबूत बनना है, देश की अखंडता कायम रखनी है, तो राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूती देनी होगी। इसके बिना किसी भी क्षेत्र में देश का विकास संभव नहीं है। चाहे युद्ध का मैदान हो या वैज्ञानिकों का अनुसंधान-केंद्र, किसानों की कर्मभूमि हो या कामगारों की कर्मशाला, अगर उनके दिल में देश-विकास की भावना न हो, तो विकास की गति धीमी पड़ जाती है। सैनिकों के बीच यदि यह भावना धूमिल हो जाए, तो तो देश की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी। अगर देश का नेतृत्व करनेे वाले नेताओं केेे मन में यह भावना मंद पड़ जाए, तो देश की दुर्गति को कौन रोक सकता है? इतिहास गवाह है कि इसी राष्ट्रीय एकता के बल पर नन्हा सा देश जापान, रूस  और चीन जैसे बड़े देशों को युद्ध में कई बार शिकस्त दे चुका है।


  भारत में राष्ट्रीय एकता: राष्ट्रीय एकता की भावना जब तक हमारे देश में रही, तब तक यह देश ज्ञान-विज्ञान, कला-साहित्य, सभ्यता-संस्कृति केे हर क्षेत्र में विश्व का मार्गदर्शक रहा। लेकिन   नीचता, अहंकार और आपसी मनमुटाव रूपी विष आज जब इस भावनाा के गर्भ में प्रवेश कर गया। तब मीर जाफर और जयचंदों जैसे देशद्रोहियों का जन्म हुआ, हम मुगलों और  अंग्रेजों के गुलाम हुए, देश केे कई टुकड़े हुए, देश निर्बल हुआ। आज भी हमारे देश में कई विघटनकारी तत्व मौजूद हैं, जिनसे देश की अखंडता को भारी खतरा है ऐसे संगठनों को  समझाना चाहिए कि वे  अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं। सरकार को भी इनकी समस्याओं पर  समुचित ध्यान देना चाहिए। इसके बावजूद यह खुशी की बात है कि पिछले कुछ दशकों से जब कभी कोई विदेशी आक्रमण हुआ है, तब सभी भारत वासियों ने राष्ट्रीय एकता का परिचय दिया हैै और दुश्मनों के छक्के छुड़ाए हैं।
   उपसंहार :  इस प्रकार हम देखते हैं कि देश के मान सम्मान के लिए, प्रगति और खुशहाली के लिए, राष्ट्रीयता की भावना को विकसित करना होगा। जाति, धर्म, ऊंच-नीच और अगड़ी पिछड़ी के सारे भेदभाव मिटाने होंगे। गुरुजनों ने हमें जो पढ़ाया है -"एकता में ही बल है।"  उसे जीवन में अपनाना होगा, तभी हमारा यह देश अपनी खोई हुई गरिमा को फिर से प्राप्त करेगा और देश की अखंडता  बनी रहेगी। जे • डिकिंसन ने सच ही कहा है "United we stand divided we fall." अर्थात साथ रहेंगे तो डटे रहेंगे और अलग रहेंगे तो बिखर जाएंगे।