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क्रिसमस से संबंधित GK/Christmas GK in Hindi


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 1. क्रिसमस किस दिन मनाया जाता है ?

 - 25 दिसंबर को 

2. क्रिसमस किससे बंधित है? 

- ईसा मसीह के जन्म से 

3. ईसा मसीह का जन्म कहां हुआ था ?

 - बेथलहम में 

4. क्रिसमस कौन मनाते हैं ? 

-विशेष कर क्रिश्चियन लोग 

( https://youtu.be/KrEbq1PY01A )

5. क्रिसमस के दिन उपहार कौन देता है ?

- सांता क्लॉस 

6. सांता क्लास को और किस नाम से जाना जाता है 

- सेंट निकोलस 

7. सांता क्लास कहां रहते हैं ?

- उत्तरी ध्रुव पर

8. क्रिसमस के मुख्य रंग कौन-कौन से हैं ?

- लाल और हरा

9. क्रिसमस की पहली छुट्टी कब मनाई गई थी ?

- 336 ईस्वी में 

10. दुनिया का सबसे बड़ा क्रिसमस ट्री  कहां है ?

- ब्राजील के रियो डी जनेरियो में 

11. क्रिसमस पर गिफ्ट देने की परंपरा किस से प्रेरित है ?

- तीन बुद्धिमान पुरुषों से

12. क्रिसमस का मुख्य प्रतीक तारा किसका संकेत है?

 - ईसा मसीह के जन्म का 

13. क्रिसमस को कौन सा गीत गया जाता है ? 

 - जिंगल बेल

14. जिंगल बेल गीत मूल रूप से किस त्यौहार के लिए लिखा गया था ?

 - थैंक्सगिविंग 

15. "सांता क्लोस" की पोशाक किस रंग का है 

 - लाल रंग का 

16. सांता क्लास की पोशाक का रंग लाल क्यों है ?

 - कोका-कोला के विज्ञापनों से प्रेरित 

17. क्रिसमस का कौन सा मीठा व्यंजन सबसे लोकप्रिय है ?

 - प्लम केक 

18. क्रिसमस का दूसरा नाम क्या है ?

 - यूलटाइड या एक्समस (X-MAS)

19. ईसा मसीह के माता का नाम क्या था ?

 - मैरी

20. सांता क्लास के पास कितने रेनडियर है ?

- 9

21. संता के प्रसिद्ध रेनडियर का क्या नाम है ?

 - रुडाॅल्फ

22. सांता क्लाॅस के रेंडियर किससे खींचे जाते हैं ?

- क्लेज़

23. क्रिसमस को "नाटाल" किस देशमें कहा जाता है ?

 - ब्राज़ील

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 1. क्रिसमस 

    जिस प्रकार हिंदू लोग भगवान कृष्ण के जन्म दिवस पर उत्सव मना कर खुश होते हैं। उसी प्रकार ईसाई लोग ईसा मसीह का जन्मोत्सव मनाकर प्रसन्न होते हैं। ईसा मसीह का जन्म 25 दिसंबर को हुआ था। इसलिए इसाई लोग प्रतिवर्ष इसी दिन उत्सव मनाते हैं।

   यह ईसाइयों का त्योहार क्रिसमस कहलाता है। इसे बड़ा दिन भी कहते हैं। इस दिन इसाई लोग गिरजा घर जाते हैं और मोमबत्ती जलाकर अपना हर्ष प्रकट करते हैं। वह आपस में मिलते हैं तथा मिठाइयाँ और केक खिलाते हैं। बहुत से लोग अपने मित्रों और संबंधियों को शुभकामनाएं भेजते हैं ।

  वह इस दिन हरे, लाल, पीले गुब्बारों और खिलौने से क्रिसमस ट्री (वृक्ष) सजाते हैं। यह ईसाइयों के आनंद और उल्लास का दिन होता है।

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2.क्रिसमस 

  [मुख्य बिंदु: भूमिका, जन्म-कथा, आयोजन, महत्ता, महत्ता, उपसंहार]

    जिस प्रकार दशहरा-दीपावली का संबंध पुरुषोत्तम श्रीराम से है और जन्माष्टमी का श्रीकृष्ण से उसी प्रकार क्रिसमस का संबंध ईश्वर-पुत्र ईसा मसीह इसे है। जब-जब इस संसार में आततायियों का अत्याचार अपनी पराकाष्ठा को पार कर जाता है, तब तक जग के पालनहार इस धरा पर अवतरित होते हैं और मानव को दानों की धानोता से मुक्त कराते हैं ईसा मसीह का "इस धरा पर इसी निमित्त हुआ। उन्होंने अपने समकालीन समाज को प्रेम और सेवा का पाठ पढ़ा कर संपूर्ण मानव जाति को मानवता के शाश्वत सत्य से साक्षात्कार कराया। मानव को पाप मुक्त कराने हेतु इन्होंने ईश्वर को सूली पर चढ़ा कर प्राणों की आहुति दी।

  ईसा मसीह की जन्मतिथि को लेकर कुछ भ्रांतियाँ हैं, लेकिन 25 दिसंबर को इनके जन्म दिवस के रूप में क्रिसमस का महापर्व सारे संसार में धूमधाम से मनाया जाता है।

  इनका जन्म यहूदी परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम यूसुफ और माता का नाम मरियम था। उन दिनों रोम में राजा या राज कर्मचारी द्वारा यहूदियों पर तरह-तरह के अमानुषिक अत्याचार किए जाते थे। राजा के दंड के कारण इनके माता-पिता को अपने पुश्तैनी मकान बेथलहम जाना पड़ा। मुसीबत इनके साथ साए की तरह चल रही थी। फलत: वहाँ किसी भी सराय में सर छिपाने को जगह न मिली। पति-पत्नी को हारकर एक पहाड़ी गुफा में शरण लेनी पड़ी। वहीं उसी रात प्रभु ईसा मसीह का जन्म हुआ।

  क्रिसमस के दिन प्रत्येक ईसाई गिरजाघर में जाकर विशेष रूप से आयोजित प्रार्थना में सम्मिलित होते हैं और पादरी के मुख से निकले पवित्र उपदेशों को आत्मसात् करते हैं। लोगों का हृदय करुणा-प्रेम और सेवा-भाव से भर जाता है। इस अवसर पर विशेष रूप से तैयार किया गया 'क्रिसमस ट्री (वृक्ष)' रंगीन बल्बों की रोशनी से जगमगा  उठता है। जब सांताक्लाॅज द्वारा बच्चों को मनभावन उपहार भेंट किए जाते हैं, तब उनकी खुशियां परवान चढ जाती है। हर तरफ आनंद और उत्साह का समा बँध जाता है।

   मनुष्य पाप-कर्म के कारण ईश्वर से अलग हो गया है। ईसामसीह मनुष्य-जाति को पाप से मुक्त कराने आए थे। उनके उपदेशों का सार था - "सभी से प्रेम करो, दूसरों की भलाई करो, अपाहिजों की सेवा करो।"

    प्रभु ईसा का संपूर्ण जीवन गरीब, लाचार, बीमार व्यक्तियों की सेवा में समर्पित रहा। उन्होंने मानवता की खातिर अपने प्राण उत्सर्ग कर दिए। हमें उनके महान आदर्शों -प्रेम, बलिदान, नि:स्वार्थ, सेवा-भाव और त्याग से प्रेरणा लेनी चाहिए।