Class 5 hindi Pathbahar chapter 10 bhul Gaya Hai kyon Insan ? West Bengal Board, कक्षा 5 हिंदी पाठबहार पाठ 10 भूल गया है क्यों इंसान ? पश्चिम बंगाल बोर्ड

 कक्षा 5 हिन्दी पाठबहार (NOTES) पश्चिम बंगाल बोर्ड

पाठ 10
भूल गया है क्यों इंसान?


हरिवंश राय 'बच्चन'
[  जीवन परिचय - उत्तर छायावादी युग के प्रख्यात कवि हरिवंश राय 'बच्चन' का जन्म 27 नवम्बर, 1907 ई. को प्रतापगढ़ जिला के एक छोटे से गाँव बाबूपट्टी के कायस्थ परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम प्रताप नारायण श्रीवास्तव एवं माता का नाम सरस्वती देवी था। उन्होंने काशी और इलाहाबाद में शिक्षा प्राप्त कर कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से अंग्रेजी विषय में पी.एच.डी. की उपाधि प्राप्त की।
  बच्चन जी कई वर्षों तक इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के प्राध्यापक रहे। 1955 ई. में हिन्दी विशेषज्ञ होकर विदेश मंत्रालय में दिल्ली चले गये। 1966 ई. में उन्हें राज्यसभा का सदस्य मनोनीत किया गया। 18 जनवरी 2003 ई. को मुंबई में बच्चन जी का निधन हो गया।
 कृतियाँः 'मधुशाला', 'मधुबाला', 'मधुकलश', 'सतरंगिणी', 'मिलनयामिनी', 'निशा निमंत्रण', 'एकांत संगीत', 'दो चट्टानें', (साहित्य अकादमी पुरस्कार से पुरस्कृत) आदि आपकी प्रमुख रचनाएँ हैं।
हरिवंश राय 'बच्चन' जी की भाषा अत्यंत सरल, माधुर्य गुण युक्त खड़ी बोली हिन्दी है। इसमें कहीं-कहीं प्रतीकों का भी सहारा लिया गया है। वस्तुतः हम कह सकते हैं कि मानवीय भावनाओं के सहज चितेरे 'बच्चन' जी का साहित्य में श्रेष्ठ स्थान है। ]
कविता 
भूल गया है क्यों इंसान ? 
सबकी है मिट्टी की काया, 
सब पर नभ की निर्मल छाया, 
यहाँ नहीं कोई आया है, ले विशेष वरदान। 
भूल गया है क्यों इंसान ?
          धरती ने मानव उपजाए, 
          मानव ने ही देश बनाए, 
          बहु देशों में बसी हुई है, एकधरा-संतान। 
          भूल गया है क्यों इंसान ?

                    देश अलग हैं, देश अलग हों, 
                    वेश अलग हैं, वेश अलग हों, 
                    मानव का मानव से लेकिन, अलग न अंतरप्राण।                    भूल गया है क्यों इंसान ?

कविता का सारांश 

  आलोच्य कविता में कवि ने मनुष्य की भौतिकवादी विचारधारा पर करारा व्यंग्य किया है। उनका कहना है कि इस संसार में रहने वाले सभी लोगों का निर्माण प्रकृति द्वारा समान रूप से हुआ है। प्रकृति ने उन्हें समान रूप से अपनी गोद में पाला-पोसा है। अर्थात् किसी में कोई भेद भाव नहीं है। सबके ऊपर एक ही आकाश की स्वच्छ छाया पड़ी है। यहाँ जन्मजात कोई विशेष वरदान लेकर पैदा नहीं हुआ है। तो फिर वह अहंकार में क्यों रहता है। मनुष्य यह क्यों भूल गया है कि इस धरती में ही सभी मनुष्यों को बनाया है। मनुष्य भले ही अलग-अलग देशों का निर्माण कर अलग-अलग नाम दिया हो परन्तु सब धरती माता के ही संतान है। सबका हृदय और प्राण एक-सा है। अतः कवि का संकेत है कि जब प्रकृति ने मनुष्य-मनुष्य के बीच कोई भेद नहीं किया तो हमें भी धर्म, जाति, भाषा आदि का भेद भुलाकर एक साथ शांति से रहना चाहिए।
कविता का शब्दार्थ एवं भावार्थ 
1. भूल गया है क्यों इंसान? 
सबकी है मिट्टी की काया, 
सब पर नभ की निर्मल छाया, 
यहाँ नहीं कोई आया है, ले विशेष वरदान। 
भूल गया है क्यों इंसान ?
शब्दार्थ : इंसान = मनुष्य; काया = शरीर; नभ = आकाशः निर्मल = स्वच्छ ।
अर्थ : प्रस्तुत अंश के माध्यम से कवि हरिवंश राय बच्चन का कहना है कि लोगों को आपस में कोई भेदभाव नहीं करना चाहिए। मनुष्य यह क्यों भूल गया है कि सभी लोगों का शरीर एक ही मिट्टी से बना है। सभी लोगों पर आकाश की स्वच्छ छाया एक समान रूप से पड़ती है। कोई विशेष वरदान लेकर यहां नहीं आया है। प्रकृति ने समान रूप से सबका निर्माण किया है।
2. धरती ने मानव उपजाए, 
मानव ने ही देश, बनाए, 
बहु देशों में बसी हुई है, एकघरा-संतान। 
भूल गया है क्यों इंसान? 
शब्दार्थ : बहु = बहुत, अनेक घरा = पृथ्वी; संतान = पुत्र ।
अर्थ : प्रस्तुत कविता पंक्तियों के माध्यम से कवि बच्चन जी कहते है कि इस पृथ्वी ने मनुष्यो को उत्पत्र किया है और मनुष्य ने ही देश बनाये हैं। विश्व के अनेक देशों में बसे लोग एक ही धरती माता की संतान हैं। यह बात मनुष्य भूल गया है, इसीलिए मनुष्य-मनुष्य में भेद करता है।
3. देश अलग हैं देश अलग हों, 
वेश अलग हैं, वेश अलग हों, 
मानव का मानव से लेकिन, अलग न अंतरप्राण। 
भूल गया है क्यों इंसान ? 
शब्दार्थ : वेश = भेस; अंतरप्राण = हृदय और प्राण।
अर्थ : प्रस्तुत कविता पंक्तियों के माध्यम से कवि हरिवंश राय बच्चन जी कहते हैं कि देश अलग हो सकते है और वेश भी एक मानव का दूसरे मानव से अलग हो सकते हैं। लेकिन प्रत्येक मनुष्य का हृदय और प्राण तो एक ही है। मनुष्य इस बात को क्यों भूल गया है। अतः कवि चाहते है कि मनुष्य से मनुष्य का भेद समाप्त हो।
अभ्यासमाला 

1. संक्षेप में उत्तर दो।

1.1 इस कविता के रचयिता कौन हैं?
उत्तर : इस कविता के रचयिता श्री हरिवंश राय बच्चन हैं।
1.2 कविता में किसके बारे में कहा गया है?
उत्तर : कविता में मनुष्य-मनुष्य के भेद के बारे में कहा गया है।
1.3 हमारी काया किससे बनी है?
उत्तर : हमारी काया मिट्टी से बनी है।
1.4 धरती ने क्या उपजाए?
उत्तर : धरती ने मनुष्य के साथ-साथ सभी जीवों को उपजाए।
1.5 हम पर किसकी छाया है?
उत्तर : हम पर आकाश की निर्मल छाया है।
1.6 बहु देशों में कौन बसे है?
उत्तर :बहु देशों में एक ही पृथ्वी के विभिन्न तरह के मनुष्य बसे हैं।
2. निम्नलिकित प्रश्नों के उत्तर अपनी भाषा में लिखो।
1.2 कविता इंसानों के बारे में क्या कह रही है?
उत्तर : कविता इंसानों के बारे में कह रही है कि प्रत्येक मनुष्य का शरीर एक ही मिट्टी से बना हुआ है। यहां कोई विशेष वरदान लेकर नहीं आया है। धरती ने मनुष्य बनाये हैं और मनुष्य ने देश बनाये है। विभिन्न देशों में एक ही धरती की संताने बसी हैं। इसके बावजूद भी एक ही मिट्टी से बना मानव इस बात को भूल गया है।
2.2 कविता के अनुसार हम कौन सी बात भूल गए हैं?
उत्तर : कविता के अनुसार हम यह बात भूल गये हैं कि हमारा निर्माण एक ही मिट्टी से हुआ है और एक ही आकाश की निर्मल छाया हम सब पर समान रूप से पड़ती है।
2.3 यह कविता हमें कैसा मानव बनने की प्रेरणा दे रही है?
उत्तर : यह कविता हमें भेद-भाव रहित मानव बनने की प्रेरणा दे रही है।
2.4 मानव के साथ मानव का कैसा नाता होना चाहिए?
उत्तर : मानव के साथ मानव का प्रेम और सहयोग का नाता होना चाहिए।
2.5 हमारी धरा पर विभिन्न देशों में क्या बसा हुआ है?
उत्तर : हमारी धरा पर विभिन्न देशों में एक ही धरा की संतान मनुष्य बसा हुआ है।
2.6 'यहाँ नहीं कोई आया है, ले विशेष वरदान।' कहने का अर्थ क्या है?
उत्तर : 'यहाँ' नहीं कोई आया है, ले विशेष वरदान का अर्थ है कि इस पृथ्वी पर प्रत्येक व्यक्ति समान है, उसे भगवान या प्रकृति ने किसी प्रकार की कोई विशिष्टता नहीं प्रदान की है। अतः मनुष्यों को आपस में एक दूसरे से कोई भेद-भाव नहीं करना चाहिए।
2.7 इस कविता का सारांश अपने शब्दों में लिखो।
उत्तर : प्रस्तुत कविता 'भूल गया है क्यों इंसान' में कवि श्री हरिवंश राय 'बच्चन' कहते हैं कि इस विश्व में जितने लोग है सभी का निर्माण प्रकृति द्वारा एक समान रूप से हुआ है तथा प्रकृति सब की देख-रेख भी समान रूप से करती है। प्रकृति ने किसी का निर्माण विशेष रूप से नहीं किया है। मनुष्य ने अलग-अलग देशों का निर्माण किया है। कवि का कहना है कि देश और वेश अलग-अलग हो सकते हैं, पर मनुष्य हृदय और प्राण एक है। अतः मनुष्य को एक होकर रहना चाहिए। धर्म, जाति, भाषा, रंग, विद्वता, और धन के आधार पर आपस में कोई भेद नहीं करना चाहिए।
• यहाँ कविता का आशय यह है कि प्रकृति ने मनुष्य के निर्माण में कोई भेद नहीं किया है। भेद का निर्माण मनुष्य ने ही किया है। यही मानव निर्मित भेद ही हमारे कष्टों का कारण है। अतः भेद-भाव त्यागकर हमें एक होकर शान्ति से रहना चाहिए।
3. निम्नलिखित शब्दों से तुकान्त शब्दों की जोड़ी बनाओ।
इंसान, दानव, छाया, वेश, बनाए, भूल, संतान, मानव, काया, देश, उपजाए, फूल।

उत्तर : इंसान = संतान; दानव = मानवः छाया = काया; वेश = देश; बनाए = उपजाए; भूल = फूल।
4. निम्नलिखित शब्दों का वाक्य में प्रयोग करोः मानव, संतान, विशेष, निर्मल, मिट्टी।
उत्तर : मानवः इस पृथ्वी पर मानव ईश्वर की सर्वोत्तम कृति है।
संतानः अपनी संतान से सब को प्रेम होता है।
विशेषः समाज के गरीबों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
निर्मलः पृथ्वी पर सभी मनुष्यों के ऊपर एक आकाश की निर्मल छाया पड़ती है।
मिट्टीः मिट्टी की देह एक दिन मिट्टी में मिल जायगी।
5. इंसानों में मेल रहे इसके लिए तुम क्या-क्या करना चाहोगे? अपनी भाषा में लिखकर बताओ।
उत्तर : इंसानों में मेल रहे इसके लिए मैं निम्नलिखित कार्य करूँगा-
(1) सब के साथ सदैव नम्रता का व्यवहार करूँगा।
(2) यदि कोई मुझे कड़े शब्द कहेगा तब भी उस पर क्रोध नहीं करूँगा।
(3) कभी किसी व्यक्ति की शिकायत दूसरे से नहीं करूँगा।
(4) सदा सत्य आचरण करूँगा।
(5) हमेशा बड़ों के आदेशों का पालन करूंगा।

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