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हमारा प्यारा भारतवर्ष पर हिन्दी निबंध संग्रह /our lovly india essay in hindi and English

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हमारा प्यारा भारतवर्ष 

      (रूपरेखा- :-भूमिका, नामकरण, भौगोलिक स्थिति, प्राकृतिक सौंदर्य, संस्कृति, स्वतंत्रता के बाद प्रगति तथा उज्जवल भविष्य, देश के प्रति हमारा कर्तव्य, उपसंहार।) 

  भूमिका : महाकवि इकबाल ने हमारे भारत की प्रशंसा करते हुए अपनी पंक्तियों में कहा है 

         "सारे जहां से अच्छा, हिंदुस्ता हमारा        

     हम बुलबुले हैं इसकी, यह गुलसिता हमारा।।"      

 अपनी मातृभूमि सभी को प्रिय लगती है। जिस धरती पर हमने जन्म लिया। जिसका अन्न-जल खा, पीकर हम बड़े हुए। उसके प्रति लगाव होना स्वभाविक ही है। हमारा प्रिय भारतवर्ष विश्व का सातवां सबसे बड़ा देश है और जनसंख्या की दृष्टि से इसका स्थान विश्व में चीन के बाद दूसरा है।

   नामकरण : भारत मेरा देश है, मेरी मातृभूमि है। भारत का प्राचीन नाम आर्यावर्त है। माना जाता है कि महा प्रतापी राजा, दुष्यंत के पुत्र भरत के नाम पर ही हमारे देश का नाम 'भारतवर्ष' पड़ा ।

  भौगोलिक स्थिति : भारत एक विशाल देश है। इसके उत्तर में हिमालय इसके मुकुट की भांति सुशोभित है। मेरा देश तीन ओर से समुद्र से घिरा हुआ है। ऐसा लगता है दक्षिण में हिंद महासागर इसके चरण पखार रहा हो। कश्मीर से कन्याकुमारी तक और असम से लेकर गुजरात तक यह फैला हुआ है।


    प्राकृतिक सौंदर्य : प्रकृति ने मेरे देश को खूब संवारा है। यहां की प्राकृतिक छटा दर्शनीय है। छह ऋतु प्रत्येेक बारी-बारी से आकर इसका श्रृंगार करती हैं। इसी धरा पर पृथ्वी का स्वर्ग कहा जाने वाला 'कश्मीर' विद्यमान है। इस देश की प्राकृतिक सुंदरता अनुपम है। प्राकृतिक सौंदर्य से भरा केरल, हिमाचल, अरुणाचल प्रदेश अत्यंत आकर्षक हैं। नैनीताल, मसूरी, दार्जिलिंग, माउंट आबू, शिमला, कुल्लू-मनाली जैसे अनेक स्मरणीय स्थान इसी देश में मौजूद हैं। 

   संस्कृति :भारत की संस्कृति अत्यंत प्राचीन है। इसी देश ने संपूर्ण मानव जाति को प्रेम, अहिंसा सत्य, धर्म तथा भाईचारे का संदेश दिया। इसी धरती ने वसुधैव कुटुंबकम का संदेश समुचित मानवता को दिया। यह देश ऋषि-मुनियों, संत-महात्माओं का देश है। इसी भूमि पर अनेक धर्मो ने जन्म लिया। जैन-बौद्ध, सिख धर्म यहां से पूरी दुनिया में फैले। सदियों के बाद आज भी भारतीय संस्कृति जीवित है। अनेकता में एकता इसकी प्रमुख विशेषता रही है। यह वेदों, उपनिषदों और गीता-रामायण का देश है।

 

   स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद प्रगति तथा उज्जवल भविष्य : सैकड़ों वर्षो की पराधीनता के बाद भारत ने 15 अगस्त 1947 को आजादी पाई। अत्यंत जर्जर अवस्था में था। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद इस देश में हर क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की। आज हम लगभग हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर हैं। आज हमारा देश परमाणु शक्ति संपदा देश है। जिसकी विश्व में अपनी पहचान है। यद्यपि बेरोजगारी, जनसंख्या की अधिकता, निर्धनता जैसी कुछ समस्याएं अभी भी विद्यमान हैं। परंतु भारत का भविष्य उज्जवल है। हम हर क्षेत्र में निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर हैं।

   देश के प्रति हमारा कर्तव्य : हमारा कर्तव्य है कि हम मिल जुल कर रहे तथा देश की एकता में के लिए कृत संकल्प हो। अनेक धर्मो संप्रदायों आदि के झगड़ों को छोड़ कर हम अपने देश के विकास के लिए कार्य करें।

महात्मा गांधी जी के बारे में 10 पंक्तियां/Mahatma Gandhi par 10 line


"जय हिंद"

  आज इस लेख के माध्यम से गांधीजी के जीवन और परिचय के बारे में मुख्य 10 पंक्तियां प्रस्तुत की गई है जो बच्चों को गांधी जी से परिचित होने में मदद करेगा तो चलिए शुरू करते हैं :


  1. सत्य और अहिंसा के पुजारी, गांधी जी का जन्म 2 अक्टूबर सन् 1869 ई• को गुजरात के पोरबंदर नामक स्थान में हुआ था ।
  2. गाँधी जी महात्मा, बापू और राष्ट्रपिता के नाम से भी प्रसिद्ध हैं । 
  3. गांधी जी के पिता करमचंद गांधी, राजकोट के दीवान तथा माता पुतलीबाई, एक धर्म निष्ठ  महिला थीं ।
  4. इनका विवाह 13 वर्ष की अल्पायु में ही कस्तूरबा बाई से हुई थी और इन के 4 पुत्र भी थे ।
  5. गांधीज ने बैरिस्टर बनने के लिए 'यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन' से कानून की पढ़ाई की थी ।
  6. उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में भारतीय नागरिकों पर अत्याचार होते देख जनता को नागरिक अधिकार दिलाने के लिए कठिन संघर्ष भी किया ।
  7. गांधी जी गोपाल कृष्ण गोखले जी को अपना राजनीतिक गुरु मानते थे ।
  8. गांधीजी के जीवन पर 'सत्यवादी हरिश्चंद्र' नाटक 'श्रवण कुमार' की कहानी 'लियो टालस्टाय की रचनाओं' और 'गीता' का अधिक प्रभाव पढ़ा था ।
  9. इन्होंने अंग्रेजों के विरूद्ध 'असहयोग आंदोलन', 'सविनय-अवज्ञा आंदोलन', 'नमक आंदोलन', 'दांडी यात्रा' तथा 'करो या मरो' व 'अंग्रेजों भारत छोड़ो' जैसे प्रसिद्ध नारे भी दिये।
  10. गांधी जी सत्य, अहिंसा और ब्रह्मचर्य के समर्थक थे, वे भारत में रामराज की स्थापना करना चाहते थे ।
  11. 30 जनवरी, 1948 ईस्वी को नाथूराम गोडसे ने गांधी जी की गोली मारकर हत्या कर दी ।
  12. गांधी जी की समाधि आज भी नई दिल्ली के राजघाट में स्थित है ।
  13. गांधी जी ने कई रचनाएं भी लिखी जिसमें : 'दक्षिण अफ्रीका के सत्याग्रह का इतिहास', 'सत्य के प्रयोग', 'गीता माता', 'हिंद स्वराज' आदि प्रमुख हैं ।
  14. गांधीजी को 'जीवराम कालिदास' ने सबसे पहले 'महात्मा' के नाम से पुकारा था ।
  15. वह भारत के सच्चे स्वतंत्रता सेनानी थे, मुझे गर्व है कि मैंने गांधी जी के देश में जन्म लिया।