Class 5 hindi Pathbahar chapter 11 Bachendri Pal West Bengal Board, कक्षा 5 हिंदी पाठबहार पाठ 11 बछेंद्री पाल पश्चिम बंगाल बोर्ड

कक्षा 5 हिन्दी पाठबहार (NOTES) पश्चिम बंगाल बोर्ड

पाठ 11

बछेन्द्री पाल

शेरपा तेननिंग द्वारा एवरेस्ट विजय के ठीक इक्तीस वर्ष बोद एक बार फिर भारतीयों ने एवरेस्ट विजय का इतिहास रचा। यह


अवसर था किसी भारतीय महिला द्वारा एवरेस्ट शिखर पर पहुँचने का। २३ मई, सन् १९८४ का दिन सम्पूर्ण भारत एवं विशेषकर नारी जगत् के लिए गौरव और सम्मान का दिन था। इसी दिन प्रथम भारतीय महिला बछेन्द्री पाल ने एवरेस्ट की चोटी पर कदम रखा।

 उत्तर काशी (उत्तरांचल) के नाकुरी गाँव में जन्मी बछेन्द्री पाल ने साहस और दृढ़ निश्चय का परिचय देते हुए एवरेस्ट शिखर तक पहुँचने में सफलता प्राप्त की। इन्हें बचपन से ही पर्वत बहुत आकर्षित करते थे। जब ये एम०ए० की पढ़ाई कर रहीं थी उनके मन में पर्वतराज हिमालय की सबसे ऊँची चोटी एवरेस्ट पर विजय प्राप्त करने की इच्छा बलवती हुई। अपने इस स्वप्न को पूरा करने के उद्देश्य से इन्होंने नेहरू पर्वतारोहण संस्थान से पर्वतारोहण का प्रशिक्षण प्राप्त किया। इन्होंने बड़ी लगन, मेहनत से पर्वतारोहण के गुर सीखे और कुशलता प्राप्त की। एवरेस्ट यात्रा से पूर्व, इन्होंने नेहरू पर्वतारोहण संस्थान द्वारा आयोजित 'प्री-एवरेस्ट ट्रेनिंग कैम्प-कम-एक्सपीडिशन' में भी भाग लिया।


 आखिरकार २३ मई सन् १९८४ ई० को वह शुभ दिन आ गया जिसका स्वप्न पाल ने बचपन से देखा था, अपने लक्ष्य को पाने के लिए कठिन परिश्रम से प्रशिक्षण प्राप्त किया था। उन्होंने पर्वत विजय करके यह सिद्ध कर दिया कि महिलाएँ किसी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं हैं। उनमें साहस और धैर्य की कमी नहीं है। यदि महिलाएँ ठान लें तो कठिन से कठिन लक्ष्य भी प्राप्त कर सकती है।

 एवरेस्ट विजय अभियान में बछेन्द्री पाल को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। यह साहसिक अभियान बहुत जोखिम भरा था। इसमें कितना जोखिम था इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अंतिम चढ़ाई के दौरान उन्हें साढ़े छः


घंटे तक लगातार चढ़ाई करनी पड़ी। इनकी कठिनाई तब और बढ़ गई जब इनके एक साथी के पाँव में चोट लग गई। इनकी गति मंद पड़ गई थी तब ये पूरी तेजी से आगे नहीं बढ़ सकती थीं। फिर भी ये हर कठिनाई का साहस और धैर्य से मुकाबला करते हुए आगे बढ़ती रहीं। अन्ततः २३ मई, सन् १९८४ को दोपहर एक बजकर सात मिनट पर वे एवरेस्ट के शिखर पर थीं। इन्होंने विश्व के उच्चतम शिखर को जीतने वाली सर्वप्रथम पर्वतारोही भारतीय महिला बनने का अभूतपूर्व गौरव प्राप्त कर लिया था।

 एवरेस्ट विजय के पहले सुश्री बछेन्द्री पाल एक महाविद्यालय में शिक्षिका थीं। एवरेस्ट की सफलता के बाद उनसे प्रेरणा पाकर हमारे देश की सुश्री संतोष यादव नामक एक महिला पुलिस अधिकारी ने सन् १९९२ और १९९३ ई. में लगातार दो बार एवरेस्ट की सफल चढ़ाई की।

[  जीवन परिचय - बछेन्द्री पाल का जन्म 24 मई, 1954 ई. को उत्तर काशी (उत्तराखण्ड) के नाकूरी नामक गाँव के एक खेतिहर परिवार में हुआ था। बछेन्द्री पाल विश्व की सबसे ऊँची चोटी माऊंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली प्रथम भारतीय महिला हैं। इन्होंने बी. एड. करने के उपरांत शिक्षिका बनने के बजाय पेशेवर पर्वतारोही का पेशा अपनाया। इस कार्य के लिए उन्हें अपने परिवार और रिश्तेदारों का विरोध भी सहना पड़ा। पर्वतारोहण का पहला मौका बछेंद्री पाल को 12 वर्ष की उम्र में

आया, जब उन्होंने अपने स्कूल की सहपाठियों के साथ 4000 मीटर की चढ़ाई की। बुलन्द हौंसला, मेधावी और प्रतिभाशाली होने के बावजूद उन्हें कोई अच्छा रोजगार नहीं मिला। जो मिला वह अस्थायी था और मासिक वेतन भी बहुत कम था। इससे बद्री पाल को निराशा हुई और उन्होंने नौकरी के बजाय 'नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग कोर्स' के लिए आवेदन किया। यहाँ से उनके जीवन को नई राह मिली। 1982 ई. में एडवांस वांस कैप कैप के के तौर पर उन्होंने गंगोत्री (6,672 मी.) और रूदुगैरा (5.819 मी.) की चढ़ाई को पूरा किया। इस कैंप में उन्हें ब्रिगेडियर ज्ञान सिंह ने बतौर इंस्ट्रक्टर के रूप में नौकरी दी। 1984 में भारत का चौथा एवरेस्ट अभियान प्रारंभ हुआ। इस अभियान में जो टीम बनी, उसमे बछेद्री के साथ 7 महिलाओं और ।। पुरुषों को शामिल किया गया था। 23 मई, 1984 ई. को दिन के एक बजकर सात मिनट पर 29,028 फुट (8,848 मी.) की ऊँचाई पर 'सागरमाथा (एवरेस्ट)' पर भारत का झंडा लहराकर बछेग्री पाल दुनियाँ की ड्वी महिला बनीं। 1994 है० में बछेंद्री पाल ने महिलाओं के साथ गंगा नदी में हरिद्वार से कोलकाता तक 2,500 500 किमी. लंबे नौका अभियान का नेतृत्व किया। वर्त्तमान समय में बछेन्द्री पाल 'टाटा आयरन एण्ड स्टील' में कार्यरत हैं, जहाँ वह चुने हुए लोगों को रोमांचक अभियानों का प्रशिक्षण देती हैं। केन्द्र सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया है।

शब्दार्थ - अवसर = मौका। गुर = गुण। स्वप्न = सपना। सिद्ध = साबित। जोखिम = खतरा। मंद = धीमा।

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 अभ्यासमाला 

1. संक्षेप में उत्तर दो।

1.1 बछेन्द्री पाल का जन्म कहाँ हुआ था?

उत्तर : बछेन्द्री पाल का जन्म उत्तर काशी (उत्तरांचल) के नाकुरी गांव में हुआ था।

1.2 उन्हें कौन आकर्षित करता था?

उत्तर : उन्हें पर्वत आकर्षित करते थे।

1.3 उनके मन में कौन सी इच्छा बलवती हुई?

उत्तर : उनके मन में पर्वतराज हिमालय की सबसे ऊँची चोटी एवरेस्ट पर विजय प्राप्त करने की इच्छा बलवती हुई।

1.4 कौन सा दिन सम्मान और गौरव का दिन था?

उत्तर : 23 मई 1984 का दिन सम्मान और गौरव का दिन था।

1.5 क्या महिलाएँ पुरुषों से पीछे हैं?

उत्तर : महिलाएं अब किसी मायने में पुरुषों से पीछे नहीं है।

1.6 कितने घंटे उन्होंने लगातार चढ़ाई की?

उत्तर : अन्तिम चढ़ाई में उन्होंने लगातार साढ़े छः घंटे चढ़ाई की।

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर अपनी भाषा में लिखो।

2.1 बछेन्द्री पाल ने किस पर्वतारोहण संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त किया था?

उत्तर : बछेन्द्री पाल ने नेहरू पर्वतारोहण संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त किया था।

2.2 पर्वतारोहण संस्थान कौन सा कार्य करवाता है?

उत्तर : पर्वतारोहण संस्थान पर्वत पर चढ़ने वालों को प्रशिक्षण देता है।

2.3 पर्वतारोहण एक जोखिम भरा काम है, किस प्रकार ?

उत्तर : पर्वतारोहण एक जोखिम भरा काम है क्योकि पर्वतारोही को पर्वत के ऊँचे शिखरों पर सीधे चढ़ना पड़ता है। कोई निश्चित रास्ता नहीं रहता है। पर्वतारोही को कठोर और बर्फ वाले दुर्गम रास्तों पर चढ़ना पड़ता है, जहां से फिसलकर गिरने पर मौत निश्चित होती है। कभी-कभी चट्टाने खिसक जाती हैं या बर्फीले तूफान आ जाते हैं।

2.4 अपने लक्ष्य को पाने के लिए हमें क्या करना पड़ता है?

उत्तर : अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हमें लगन और परिश्रम से अपने काम को करना पड़ता है।

2.5 साहस और दृढ़ निश्चय हमें कहाँ पहुँचा सकते है?

उत्तर : साहस और दृढ़ निश्चय हमे अपने लक्ष्य तक पहुंचा सकते है।

2.6 बछेन्द्री पाल की एवरेस्ट पर मिली सफलता क्या साबित करती है?

उत्तर  : बच्छेन्दी पाल को एवरेस्ट पर मिली सफलता ने यह सिद्ध कर दिया कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं हैं।

3. निम्नलिखित शब्दों का प्रयोग कर वाक्य बनाओ।

शिखर, बचपन, परिश्रम, लक्ष्य, धैर्य

उत्तर : शिखर पर्वत शिखर सदैव बर्फ से ढके रहते हैं।

बचपन बचपन का जीवन चिन्ता मुक्त होता है।

परिश्रम :  परिश्रम ही सफलता की कुंजी है।

लक्ष्य : अपने लक्ष्य को प्राप्त करना ही हमारा ध्येय होना चाहिए।

धैर्य :  धैर्य सभी कष्टों को दूर कर देता है।

4. हिमालय के तीन पर्यायवाची शब्द लिखो

उत्तर  : नगराज, पर्वतराज, गिरिराज।

5. पढ़ो और समझो।

वह धीरे-धीरे चलता है। वह धीरे-धीरे चलती है।

वह कब गया? वे कब गये?

वह बहुत रोया? वह बहुत रोयी।

वह क्यों गया? वे क्यों गये?

वह आया था, परन्तु तुम नहीं मिले।

कपड़े पसन्द थे, लेकिन मेरे पास पैसे कम थे।

काम पूरा हो चुका है इसलिए तुम जा सकते हो।

कुछ शब्दों के रूप में किसी भी दशा में परिवर्तन नहीं होता है। हर जगह एक ही रूप मैं प्रयुक्त होते हैं। ऐसे शब्दों को अव्यय शब्द कहते हैं। जैसे :- कब, अब, तब, यहाँ, धीरे-धीरे, आज-कल, क्यों और किन्तु, परन्तु, लेकिन, इसलिए आदि।

6. नीचे दिए गए अव्यय शब्दों का प्रयोग करते हुए एक-एक वाक्य बनाओ।

और, किन्तु, अब, वहाँ, किन्तु, तथा, इसलिए

उत्तर : और थोड़ा भोजन लाओ। किन्तु वह कुछ खाया नहीं। अब आप अपना काम करो। राम तथा मोहन घर गये। वहाँ क्या कर रहे हो? तुम यहाँ तक आये, इसीलिए मैंने तुमको यह पुस्तक दी।

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7. पर्वतारोहण के समय काम आने वाले विभिन्न उपकरणों को उनके चित्रों द्वारा पहचानो।

उत्तर : स्वयं कीजिए।

8. हमारे देश के विभिन्न पर्वतों/ पहाड़ों का नाम जानकर लिखो।

उत्तर : हिमालय, कंजनजंघा, अरावली, पारसनाथ, महादेव, मैकाल।

9. हमारे राज्य के कुछ प्रमुख पर्वतों / पहाड़ों का नाम जानकर लिखो

उत्तर : सिगलीला पर्वत, कर्सियांग के पहाड़, अयोध्या पहाड़, बिहारी काथा।

10. हमारे राज्य के एक प्रमुख मनोरम पर्वतीय शहर का नाम क्या है?

उत्तर : हमारे राज्य के एक प्रमुख मनोरम पर्वतीय शहर का नामः दार्जिलिंग


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