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कोरोना वायरस (कोविड-19) पर निबंध/ coronavirus kya hai/ bachane ke upay

कोरोना वायरस (Covid-19)



  आज पूरा विश्व कोविड-19 अर्थात कोरोनावायरस से परिचित हो चुका है। सभी लोग इससे बचने के उपाय को ढूंढते और बताते हुए देखे जा सकते हैं। सभी इसके बचाव के उपाय अपना रहे हैं। पर कुछ लोग आज भी निडर होकर जैसे यह एक हव्वा या मजाक हो सा व्यवहार कर रहे हैं। और भीड़-भाड़ वाली जगहों पर भी बिना मास्क के, बिना डरे घूम फिर हैं। उन सभी को सचेत रहना चाहिए तथा इस वायरस को हल्के में नहीं लेेेेना चाहिए।

   इस विषय में आज यहाँ पर एक सुंदर सा निबंध प्रस्तुत है जिसमें पूरा विश्लेषण आपको दी गई है अगर विश्लेषण पसंद आए तो कमेंट करके अवश्य बताएं आपको कैसा लगा। 



Covid-19 (कोरोना वायरस) पर निबन्ध

  प्रस्तावना :कोरोनावायरस अर्थात कोविड-19 बहुत सोचना लेकिन अत्यंत खतरनाक व प्रभाव प्रभावशाली वायरस है। कोविड-19 मानव के बाल की तुलना में लगभग 900 गुना छोटा है, लेकिन इसका संक्रमण दुनिया भर में तेजी से फैला है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (W.H.O.) ने कोरोना वायरस को महामारी घोषित किया है। दुनिया में लगभग सभी देशों में इस वायरस ने अपना तांडव मचाया है।




• कोरोनावायरस क्या है?
  कोरोना वायरस (कोविड-19) का संबंध वायरस के ऐसे परिवार से है जिसके संक्रमण से सर्दी, जुकाम से लेकर, सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्या हो सकती है। इस वायरस को इससे पहले कभी नहीं देखा गया। इस वायरस का संक्रमण दिसंबर 2019 में चीन के वुहान शहर से शुरू हुआ था। W.H.O. के अनुसार बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ इसके प्रमुख लक्षण हैं। सारी दुनिया के वैज्ञानिक इससे बचने के वैक्सीन की खोज कर रहे हैं। लेकिन अब तक इस वायरस को फैलने से रोकने वाला कोई टीका नहीं बना है। 
   इसके संक्रमण के फलस्वरूप सर्दी, जुकाम, बुखार, नाक बहना, सांस लेने में तकलीफ और गले में खराश जैसी समस्याएं होने लगती हैं। यह वायरस एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलता है। इसलिए इससे बचने के लिए बहुत सावधानी बरती जा रही है। जैसे कि हम जानते हैं यह वायरस (कोविड-19) दिसंबर 2019 में सबसे पहले चीन में पकड़ में आया था और धीरे-धीरे, देखते ही देखते यह वायरस दुनिया के दूसरे देशों में भी फैल गया।
   ऐसे वायरस का संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नाक से निकलने वाली हवा अर्थात सांस से तथा खांसी छींक से फैलता है। खांसते समय जो पानी की बूंदे शरीर से निकलती हैं। वह हवा में फैल जाती हैं और इसके साथ वायरस भी फैल जाता है। जो दूसरे इंसान में अपना कब्जा जमा लेता है। कोविड-19 नाम का यह वायरस दुनिया के 70 से ज्यादा देशों में अपना आतंक मचा चुका है। इससे बचाव के लिए हमें सरकार द्वारा बताए गए सावधानियों को बरतनी चाहिए। और वह आवश्यक भी है ताकि इसे फैलने से रोका जा सके।
  
  कोरोना वायरस को कोविड-19 इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह पहली बार 2019 को पहचाना गया।
   • इस बीमारी का लक्षण
   WHO के अनुसार पहले कोविड-19 या कोरोना वायरस में रोगी को पहले बुखार होता है। इसके बाद सर्दी या सूखी खांसी और फिर हफ्ते भर बाद सांस लेने में परेशानी शुरू हो जाती है। परंतु अब इस बीमारी के कोई खास लक्षण नहीं है। अब यह देखा गया है कि रोगी की सूंघने की शक्ति नहीं रहती और भोजन का स्वााद भी नहीं मिलता।
   इसका मतलब यह नहीं है कि जिन व्यक्तियों में यह लक्षण पाए जाते हैं। उनको कोरोनावायरस है, लेकिनयह बात तो है कि जिन व्यक्तियों में कोरोना वायरस (कोविड-19) है उनमें यह लक्षण पाए जाते हैं। कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों के गंभीर मामलों में निमोनिया, सांस लेने में बहुत ज्यादा परेशानी, किडनी फेल होने जैसे मामले पाए जाते हैं। और यहाँ तक की मौत भी हो सकती है। 10 साल से छोटे बच्चे, बुजुर्ग या जिन लोगों को पहले से ही कोई गंभीर बीमारी जैसे-अस्तमा, मधुमेह या ह्रदय की बीमारी है। उनके मामले में इस बीमारी का खतरा और अधिक हो जाता है। जुकाम और फ्लू के वायरस में भी इसी तरह के लक्षण पाए जाते हैं।

• इस वायरस का संक्रमण हो जाए तब क्या करें?
* वर्तमान समय में इस बीमारी का कोई वैक्सीन या सुनिश्चित दवाई नहीं है। फिर भी इसके लक्षण दिखते ही कुछ एंटीबायोटिक दवाइयां दी जा सकती हैं।
* जब तक स्वस्थ न हो जाए दूसरों से दूरी बनाए रखें।
* इसकी वैक्सीन की खोज अभी जारी है। इस साल(2020) के अंत तक वैक्सीन का मानव पर परीक्षण रिपोर्ट भी आ जाएगा।
* इस साल(2020) के अंत तक वैक्सीन आने की संभावना है।
* कुछ डॉक्टर एंटीवायरल दवाओं का भी परीक्षण कर रहे हैं।



• कोरोनावायरस के संक्रमण से बचाव के क्या उपाय हैं? 
  कोविड-19 से बचाव के लिए उपाय
* WH.O./विश्व स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड-19 से बचाव के लिए एक दिशा निर्देश जारी की है।
* इसके अनुसार हाथों को साबुन से बार-बार धोना चाहिए।
* अल्कोहल बेस्ड हैंड सेनीटाइजर द्वारा भी हाथ साफ किया जा सकता है।


* साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें।
* मास्क से नाक और मुंह अच्छी तरह ढकें।
* लोगों से हाथ मिलाने के बजाय दूर से ही हाथ जोड़कर नमस्कार करना चाहिए।
* घर पर लाए गए किसी भी वस्तु को पहले सैनिटाइज करके अलग कमरे में 1 दिन के लिए रख दें तथा दूसरे या तीसरे दिन उस वस्तु का इस्तेमाल करें।
* मोबाइल-लैपटॉप आदि जैसी चीजों को भी समय-समय पर सैनिटाइज या साफ करें।


* नाक, मुंह और आँखों को छूने से बचें।
* संक्रमण से बचने के लिए अपनी इम्यूनिटी सिस्टम को मजबूत बनाना बहुत आवश्यक है। इसके लिए अपने खाद्य सामग्री में पौष्टिक के चीजों को भी सामिल करें।
* प्रतिदिन कम से कम एक बार हल्दी वाला दूध अवश्य लें।
* बार हल्का गुनगुना पानी पीने की आदत बना लें।
* अपने शरीर का तापमान और अन्य लक्षणों की जांच नियमित रूप से करते रहे।
* खांसते या छीकते समय अपने हाथ और मुंह पर रुमाल या टिशू पेपर से अच्छी तरह ढकें तथा इस्तेमाल किए गए मास्क व टिशू पेपर को ढक्कन बंद डस्टबिन में फेंके। जिस व्यक्ति में जुकाम या फ्लू के लक्षण नजर आये, उससे डेढ़-दो मीटर की दूरी अवश्य बनाए रखें।
* मांसाहार (मांस, मछली, अंडे के सेवन से) बचें।
* इसके अलावा जंगली जानवरों के पास भी ना जाए।

• मास्क कैसे और कौन-सा पहनना चाहिए?
* वैसे तो स्वस्थ व्यक्ति को फांसी लगाने की आवश्यकता नहीं है।
* पर कोविड-19 वायरस से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में हैं तो मास्क पहनना आवश्यक है।
* जिनको जुकाम, कफ, बुखार या सांस लेने में समस्या है उन्हें मास्क पहनना आवश्यक है तथा यथा शीघ्र डॉक्टर से मिलना चाहिए।

• मास्क पहनने का सही तरीका :
* मास्क को पहनते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि नाक, मुंह और दाढ़ी अच्छी तरह ढके हों।
* मास्क के ऊपर बाहर की तरफ (सामने से) हाथ न लगाएं।
* गलती से भी यदि हाथ लग जाए तो तुरंत हाथ सैनेटाइटिस्ड करें या साबुन से धो लें।
* मास्क को उतारते समय भी मास्क के ऊपरी भाग को छूने से बचें। उसके रबर या फीते को पकड़ कर उतारना चाहिए।
* मास्क प्रतिदिन बदलना चाहिए।

• कोरोना वायरस के संक्रमण के खतरे को कैसे कम करें  (उपाय) :
विश्व स्वास्थ्य संगठन (W.H.O.), पब्लिक हेल्थ केयर और नेशनल हेल्थ सर्विस (N.H.S.) से मिले सूचनाओं के आधार पर हम यहां कोरोनावायरस से बचाव के तरीके बता रहे हैं।
कोरोना वायरस के जाति के वायरस छींकने या खांसनेे पर शरीर से निकलने वाली पानी की बूंदों सेे ही फैलते हैं।
* इससे बचने के लिए हाथों को बार-बार साबुन से साफ करें।
* छींकते या खांसते समय अपने नाक और मुंह को अच्छी तरह किसी कपड़े, टिशू या रुमाल से ढक लें।
* आँख, नाक और मुंह को बार बार न छुएं।
* कोविड-19 या कोरोना वायरस के बारे में अब तक इस तरह के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं कि यह वायरस पार्सल, चिट्ठियों या खाने-पीने की वस्तुओं द्वारा फैलता है।
*  इस प्रकार के वायरस शरीर के बाहर बहुत ज्यादा समय तक जीवित नहीं रह सकते हैं।

• कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से कैसे रोकें?
• कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के तरीके:
* सार्वजनिक जगह पर जाने से बचें।
* सार्वजनिक वाहनों जैसे बस, ट्रेन, ऑटो-रिक्शा या टैक्सी से यात्रा करने से बचें।
* वर्तमान समय में मेहमान को घर न बुलाएं।
* घर का सामान दूसरे व्यक्ति से न मंगवाए।
* जितना हो सके ऑफिस, स्कूल या सार्वजनिक जगह पर न जाएं।
* यदि आप भीड़-भाड़ वाली जगह पर और लोगों के साथ साझा करके रहते हैं तो आपको अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है।
* जितना हो सके अलग कमरे में रहे। और साझा रसोई तथा बाथरूम को लगातार साफ करते रहे।
* यदि आप किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए हैं या फिर किसी संक्रमित इलाके से आए हैं तो आपको अलग रहने की सलाह दी जाती है।
* इसके अलावा यदि संक्रमण का लक्षण दिखे तो 14 दिनों तक लगातार आपको अकेले तथा दूसरों से दूर ही रहना चाहिए जिससे संक्रमण को रोका जा सके और आगे न बढ़ने दिया जाए।
* अतः जब तक बहुत जरूरी न हो घर से बाहर न निकले और घर पर ही रहे।
  उपसंहार : दुनिया भर  के देश कोरोना वायरस (कोविड-19) नामक वायरस के संक्रमण से बेहाल हुए पड़े हैं। आज भी इसका डर पहले जैसा ही है। दुनिया भर के सरकारें इसके संक्रमण को रोकने के लिए अपने-अपने स्तर पर (तरीके से) कोशिश कर रही हैं, लेकिन अभी तक कोई रास्ता नहीं निकल पाया है। अतः इस महामारी से बचने के लिए हमें सभी उपायों का पालन अच्छी तरह से करना होगा, जिससे हम इस खतरनाक जानलेवा वायरस से बच सके।


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छठ पूजा/छठ की सुहावनी छटा/सूर्य पूजन/पर हिन्दी और अंग्रेजी में निबंध/Essay in Hindi and English on Chhath Puja/worship/ Chhath Ki Suhavni Chhata / Surya Poojan

छठ पूजा

या

छठ की सुहावनी छटा

या

सूर्य पूजन

   प्रतिवर्ष कार्तिक माह में छठ व्रत मनाया जाता है। चैत माह में भी छठ व्रत मनाया जाता है। चैत में गर्मी पड़ती है। इस कारण बहुत कम लोग चैत में छठ व्रत करते हैं। कार्तिक माह में प्रकृति कुछ आर्द हो जाती है। शरद ऋतु का आरंभ (आगमन) हो जाता है। निर्जल उपवास में छठव्रतियों को थोड़ी शीतलता मिलती है। इसलिए कार्तिक माह में छठव्रतियों की संख्या अधिक रहती है।

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   छठ व्रत का बहुत महात्म्य है। यह बहुत पवित्रता से, नियमपूर्वक तथा पूर्ण अनुष्ठान के साथ मनाया जाता है। छठव्रती नियम-धर्म में थोड़ी सी भी चूक नहीं करते हैं । वे विधिपूर्वक तथा पवित्रतापूर्वक भगवान सूर्य की पूजा करते हैं। इसके लिए वे कठोर साधना भी करते हैं।

  इस व्रत का आरंभ 'नहाए-खाए' से हो जाता है। इस दिन अरवा चावल, कद्दू की तरकारी और चने की दाल बनती है। दूसरे दिन 'खरना' होता है। इस दिन रात में खीर और रोटी से पूजा होती है तथा खीर और रोटी को प्रसाद के रूप में खिलाया जाता है।

  तीसरे दिन छठव्रती संध्या समय भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए गंगा या नदी किनारे जाते हैं। इस समय का दृश्य बड़ा ही मनोहारी दिखता है। चारों ओर से छठव्रतियों, उनके संबंधियों तथा दर्शक जनों की भीड़ उमड़ती हुई दिखती है। लोगों के आने का ताँता लगा रहता है। प्रथम अर्घ्य  देखने वाले दर्शकों की लंबी कतार दिख पड़ती है। इस प्रकार एक मेला जैसा दृश्य उपस्थित हो जाता है।

 सिर पर पीले वस्त्र में दौरा लिए लोग घाट किनारे आते हैं। व्रतियों के पीछे महिलाएं पुरुष और बच्चे झुंड के रूप में चलते रहते हैं। रास्ते में औरतें समवेती स्वर में छठ व्रत के गीत गाती जाती हैं। उनके छठ के गीतों की गूंज से पूरा वातावरण छठमय हो जाता है। कुछ लोग ढोलक और माँदल बजवाते हुए घाट किनारे चलते जाते हैं।

 संध्या के समय डूबते सूर्य की लालिमा को छठव्रती प्रथम अर्घ्य देते हैं। इस दृश्य को भक्तिभाव से देखने वालों की लंबी भीड़ दिखाई पड़ती है। धरती पर रंग बिरंगे सज्जित परिधानों से तथा सूर्य के लाल रंग से धरती और आकाश रंगीन दिखने लगते हैं। रंग-बिरंगी छटा से छठ की छटा और सुहावनी हो जाती है। प्रथम वर्ग की संध्या का सौंदर्य अपूर्व हो जाता है।

  दूसरे दिन सूर्योदय के समय उगते सूर्य को अर्घ्य देकर छठव्रत का समापन किया जाता है। इसके बाद प्रसाद वितरण होता है। प्रसाद वितरण और प्रसाद ग्रहण का कार्य दो-तीन दिनों तक चलता रहता है। उत्तर भारत में यह पर्व का बहुत महत्व है। सभी व्रतों में छठ व्रत अति पवित्र व्रत है। इसी से व्रतों में इस व्रत  को  ऊँचा स्थान प्राप्त है।

आदर्श विद्यार्थी पर निबन्ध/Essay on ideal student in hindi

 निबंध 

आदर्श विद्यार्थी



   (रूपरेखा :-भूमिका, आदर्श विद्यार्थी के गुण, आचरण, आदत, लग्नशीलता, समयशील, नियमितता, स्वावलंबन, उपसंहार।)

   भूमिका : आज के विद्यार्थी कल के राष्ट्र निर्माता हैं। देश का भविष्य कल इन्हीं के कंधों पर होगा। अतः आने वाले समय में आज के विद्यार्थी ही देश को दिशा देंगे। ऐसे में यदि विद्यार्थी सुयोग्य होंगे, श्रेष्ठ गुणों से युक्त होंगे, तो देश निरंतर उन्नति करेगा और यदि अर्थहीन गुणहीन हुए तो देश की अवनति को कोई नहीं रोक सकता।

  आदर्श विद्यार्थी के गुण : आदर्श विद्यार्थी से अनेक गुणों की अपेक्षा की जाती है। यह श्रेष्ठ गुणों से युक्त होना चाहिए। यह अनुशासन प्रिय, सुशील और सच्चरित्र हो, विद्वान और धनवान होने पर भी, यदि कोई चरित्रवान नहीं है, तो वह कहीं पर भी आदर नहीं पाता। 

   संक्षेप में आदर्श विद्यार्थी के निम्नलिखित गुण होने चाहिए।

  अनुशासन प्रिय : आदर्श विद्यार्थी का प्रथम पाठ अनुशासन से प्रारंभ होता है। समय पर उठना, बैठना, पढ़ना, गुरु का आदर, माता-पिता का आदर एवं छोटे से स्नेह रखने वाला विद्यार्थी ही आदर्श  किसी से लड़ते झगड़ते हैं वह विनम्रता का प्रतीक होता है। विनम्रता अनेक गुणों की जननी है। उसमें आज्ञाकारी ता के भाव से जन्म लेते हैं

   लग्नशीलता :आदर्श विद्यार्थी प्रत्येक कार्य को बड़ी लगन से करता है। वह कामचोर नहीं होता । वह प्रत्येक कार्य को पूर्ण करके ही दम लेता है।

   संयम शील : एक आदर्श विद्यार्थी संयम शील होता है। संयम से छात्र में एकाग्रता आती है। ऐसा विद्यार्थी भोजन के प्रति स्वाद में, श्रृंगार में, मनोरंजन और क्रोध में संयम से कार्य लेता है

  नियमितता : अनुशासन का ही अन्य गुुण है। आदर्श विद्यार्थी अपने  सभी कार्य जैसे अध्ययन, भोजन, खेलकूद और निद्रा नियमित समय पर ही करता है।

  स्वावलंबन  :आदर्श छात्र के प्रमुख गुणों में से एक होता है। वह अपने कार्यों के लिए किसी पर निर्भर नहीं होता। अपितु अपने कार्य से करता है। आदर्श छात्र का सबसे बड़ा गुण विद्या ग्रहण करना है। वह अपना अधिक समय विद्या ग्रहण करने में ही लगाता है।

  उपसंहार : गुणों के अतिरिक्त सत्य बोलना मधुर भाषण करना सद्गुणों को ग्रहण करने के लिए तत्पर रहना आदर्श छात्र के अन्य गुण हैं। वह दूसरों के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत करता है। वह अपना भविष्य सुधारना है और सब उसे देख कर अपना भविष्य सुधारते हैं। इन सब बातों से देश व समाज निरंतर उन्नति को प्राप्त होते रहते हैं।


      

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हमारा प्यारा भारतवर्ष पर हिन्दी निबंध संग्रह /our lovly india essay in hindi and English

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हमारा प्यारा भारतवर्ष 

      (रूपरेखा- :-भूमिका, नामकरण, भौगोलिक स्थिति, प्राकृतिक सौंदर्य, संस्कृति, स्वतंत्रता के बाद प्रगति तथा उज्जवल भविष्य, देश के प्रति हमारा कर्तव्य, उपसंहार।) 

  भूमिका : महाकवि इकबाल ने हमारे भारत की प्रशंसा करते हुए अपनी पंक्तियों में कहा है 

         "सारे जहां से अच्छा, हिंदुस्ता हमारा        

     हम बुलबुले हैं इसकी, यह गुलसिता हमारा।।"      

 अपनी मातृभूमि सभी को प्रिय लगती है। जिस धरती पर हमने जन्म लिया। जिसका अन्न-जल खा, पीकर हम बड़े हुए। उसके प्रति लगाव होना स्वभाविक ही है। हमारा प्रिय भारतवर्ष विश्व का सातवां सबसे बड़ा देश है और जनसंख्या की दृष्टि से इसका स्थान विश्व में चीन के बाद दूसरा है।

   नामकरण : भारत मेरा देश है, मेरी मातृभूमि है। भारत का प्राचीन नाम आर्यावर्त है। माना जाता है कि महा प्रतापी राजा, दुष्यंत के पुत्र भरत के नाम पर ही हमारे देश का नाम 'भारतवर्ष' पड़ा ।

  भौगोलिक स्थिति : भारत एक विशाल देश है। इसके उत्तर में हिमालय इसके मुकुट की भांति सुशोभित है। मेरा देश तीन ओर से समुद्र से घिरा हुआ है। ऐसा लगता है दक्षिण में हिंद महासागर इसके चरण पखार रहा हो। कश्मीर से कन्याकुमारी तक और असम से लेकर गुजरात तक यह फैला हुआ है।


    प्राकृतिक सौंदर्य : प्रकृति ने मेरे देश को खूब संवारा है। यहां की प्राकृतिक छटा दर्शनीय है। छह ऋतु प्रत्येेक बारी-बारी से आकर इसका श्रृंगार करती हैं। इसी धरा पर पृथ्वी का स्वर्ग कहा जाने वाला 'कश्मीर' विद्यमान है। इस देश की प्राकृतिक सुंदरता अनुपम है। प्राकृतिक सौंदर्य से भरा केरल, हिमाचल, अरुणाचल प्रदेश अत्यंत आकर्षक हैं। नैनीताल, मसूरी, दार्जिलिंग, माउंट आबू, शिमला, कुल्लू-मनाली जैसे अनेक स्मरणीय स्थान इसी देश में मौजूद हैं। 

   संस्कृति :भारत की संस्कृति अत्यंत प्राचीन है। इसी देश ने संपूर्ण मानव जाति को प्रेम, अहिंसा सत्य, धर्म तथा भाईचारे का संदेश दिया। इसी धरती ने वसुधैव कुटुंबकम का संदेश समुचित मानवता को दिया। यह देश ऋषि-मुनियों, संत-महात्माओं का देश है। इसी भूमि पर अनेक धर्मो ने जन्म लिया। जैन-बौद्ध, सिख धर्म यहां से पूरी दुनिया में फैले। सदियों के बाद आज भी भारतीय संस्कृति जीवित है। अनेकता में एकता इसकी प्रमुख विशेषता रही है। यह वेदों, उपनिषदों और गीता-रामायण का देश है।

 

   स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद प्रगति तथा उज्जवल भविष्य : सैकड़ों वर्षो की पराधीनता के बाद भारत ने 15 अगस्त 1947 को आजादी पाई। अत्यंत जर्जर अवस्था में था। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद इस देश में हर क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की। आज हम लगभग हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर हैं। आज हमारा देश परमाणु शक्ति संपदा देश है। जिसकी विश्व में अपनी पहचान है। यद्यपि बेरोजगारी, जनसंख्या की अधिकता, निर्धनता जैसी कुछ समस्याएं अभी भी विद्यमान हैं। परंतु भारत का भविष्य उज्जवल है। हम हर क्षेत्र में निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर हैं।

   देश के प्रति हमारा कर्तव्य : हमारा कर्तव्य है कि हम मिल जुल कर रहे तथा देश की एकता में के लिए कृत संकल्प हो। अनेक धर्मो संप्रदायों आदि के झगड़ों को छोड़ कर हम अपने देश के विकास के लिए कार्य करें।

महात्मा गांधी जी के बारे में 10 पंक्तियां/Mahatma Gandhi par 10 line


"जय हिंद"

  आज इस लेख के माध्यम से गांधीजी के जीवन और परिचय के बारे में मुख्य 10 पंक्तियां प्रस्तुत की गई है जो बच्चों को गांधी जी से परिचित होने में मदद करेगा तो चलिए शुरू करते हैं :


  1. सत्य और अहिंसा के पुजारी, गांधी जी का जन्म 2 अक्टूबर सन् 1869 ई• को गुजरात के पोरबंदर नामक स्थान में हुआ था ।
  2. गाँधी जी महात्मा, बापू और राष्ट्रपिता के नाम से भी प्रसिद्ध हैं । 
  3. गांधी जी के पिता करमचंद गांधी, राजकोट के दीवान तथा माता पुतलीबाई, एक धर्म निष्ठ  महिला थीं ।
  4. इनका विवाह 13 वर्ष की अल्पायु में ही कस्तूरबा बाई से हुई थी और इन के 4 पुत्र भी थे ।
  5. गांधीज ने बैरिस्टर बनने के लिए 'यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन' से कानून की पढ़ाई की थी ।
  6. उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में भारतीय नागरिकों पर अत्याचार होते देख जनता को नागरिक अधिकार दिलाने के लिए कठिन संघर्ष भी किया ।
  7. गांधी जी गोपाल कृष्ण गोखले जी को अपना राजनीतिक गुरु मानते थे ।
  8. गांधीजी के जीवन पर 'सत्यवादी हरिश्चंद्र' नाटक 'श्रवण कुमार' की कहानी 'लियो टालस्टाय की रचनाओं' और 'गीता' का अधिक प्रभाव पढ़ा था ।
  9. इन्होंने अंग्रेजों के विरूद्ध 'असहयोग आंदोलन', 'सविनय-अवज्ञा आंदोलन', 'नमक आंदोलन', 'दांडी यात्रा' तथा 'करो या मरो' व 'अंग्रेजों भारत छोड़ो' जैसे प्रसिद्ध नारे भी दिये।
  10. गांधी जी सत्य, अहिंसा और ब्रह्मचर्य के समर्थक थे, वे भारत में रामराज की स्थापना करना चाहते थे ।
  11. 30 जनवरी, 1948 ईस्वी को नाथूराम गोडसे ने गांधी जी की गोली मारकर हत्या कर दी ।
  12. गांधी जी की समाधि आज भी नई दिल्ली के राजघाट में स्थित है ।
  13. गांधी जी ने कई रचनाएं भी लिखी जिसमें : 'दक्षिण अफ्रीका के सत्याग्रह का इतिहास', 'सत्य के प्रयोग', 'गीता माता', 'हिंद स्वराज' आदि प्रमुख हैं ।
  14. गांधीजी को 'जीवराम कालिदास' ने सबसे पहले 'महात्मा' के नाम से पुकारा था ।
  15. वह भारत के सच्चे स्वतंत्रता सेनानी थे, मुझे गर्व है कि मैंने गांधी जी के देश में जन्म लिया।

महात्मा गांधी पर निबंध/राष्ट्रपिता/अहिंसा के पुजारी/संत/राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पर हिंदी निबंध/ essay in hindi on Mahatma Gandhi/the father of nation

        

 1. एक महान स्वतंत्रता सेनानी (100 words)
महात्मा गांधी पर निबन्ध 

             "महात्मा गांधी"

 हमारे देश में कई महान नेता पैदा हुए हैं। उन्होंने देश की खातिर अपना बलिदान दिया।  महात्मा गांधी हमारे देश के महानतम नेताओं में से एक थे।  उनका जन्म 1869 में गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। उनका पहले का नाम मोहनदास करमचंद गांधी था।  वे अपनी उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड गए।  उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में एक बैरिस्टर के रूप में काम किया।  जब वह भारत लौटा।  उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भाग लिया।  उन्होंने बहुत सादा जीवन जिया।  वह सत्य और अहिंसा में विश्वास करता था।

 उनका जन्मदिन 2 अक्टूबर को पड़ता है जिसे 'गांधी जयंती' के रूप में मनाया जाता है।  13 जनवरी 1948 को उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हम उन्हें 'बापू' (राष्ट्र का पिता) कहते हैं।

  2• महात्मा गांधी (200शब्द)

  गांधी जी का जन्म 2 अक्टूबर सन् 1869 ई• में गुजरात के पोरबंदर नामक स्थान में हुआ था। उनके पिता का नाम मोहनदास करमचंद गांधी था और माता का नाम पुतलीबाई था। इनके पिता राजकोट के दीवान थे।
   गांधीजी की प्रारंभिक शिक्षा पोरबंदर में हुई। प्रवेशिका परीक्षा पास करने के बाद वे बैरिस्टरी  पढ़ने के लिए इंग्लैंड गए। बैरिस्टरी पास कर वे सन 1891 में भारत लौटे और मुंबई में वकालत शुरू की। इसी समय अब्दुल्ला एंड कंपनी के एक मुकदमे की पैरवी के लिए वे दक्षिण अफ्रीका के नेटाल राज्य गये।  वहाँ भारतीयों की दशा देखकर वे बहुत दुखी हुए और सुधार के लिए आंदोलन चलाया।
   भारत लौटने के बाद उन्होंने अन्याय के विरोध में 'असहयोग' आंदोलन और 'सत्याग्रह' आंदोलन शुरु किया। इसके लिए उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा। अंत में 15      अगस्त 1947 में उन्होंने भारत को अंग्रेजी शासन से मुक्त कराया।

      महात्मा गांधी सत्य और अहिंसा के पुजारी थे। वे सभी को प्यार करते थे। वे अन्याय का सदा
विरोध करते थे। उनका जीवन सादा था। वे किसी से घृणा नहीं करते थे। वह हमारे पिता के समान थे। इसलिए लोग उन्हें राष्ट्रपिता या प्यार से बापू कहते थे। सारा देश उनका सम्मान करता था। उनका पूरा जीवन देशवासियों और जन सेवा में व्यतीत हुआ। उनकी मृत्यु 30 जनवरी सन् 1848 ई• में नाथू गोडसे की गोलियों से हुई। किंतु उनका नाम दुनिया में अमर हो गया।

 3 . महात्मा गांधी(350)
 (रूपरेखा - प्रस्तावना,  जन्म परिवार और शिक्षा,  दक्षिण अफ्रीका और भारत में आंदोलन, उपसंहार)
   बीसवीं शताब्दी को जिस अनोखे महापुरुष ने सबसे अधिक प्रभावित किया था। वह थे अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी। आधुनिक भारत के महापुरुषों में इनका नाम अग्रगण्य है। इन्होंने न केवल राजनीतिक व सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक पराधीनता की बेड़ियों से भी अपने देश को मुक्त कराने के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया।
   अहिंसा के पुजारी और करुणा के अवतार राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जन्म गुजरात के पोरबंदर में 2 अक्टूबर 1869 ई• में हुआ था। इनका पूरा का नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। इनके पिता करमचंद गांधी राजकोट रियासद के दीवान तथा वैष्णव भक्त थे। इनकी माता पुतलीबाई अत्यंत धर्म नष्ट महिला थी। इस प्रकार गांधी जी को बचपन में ही वैष्णव भक्त की दीक्षा मिल गई थी। 13 वर्ष की कम आयु में ही इनका विवाह कस्तूरबा से हो गया था। भावनगर के श्यामलाल कॉलेज से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण होने के बाद इन्हें बैरिस्टर पढ़ने विलायत भेजा गया था। 
   बैरिस्टर की पढ़ाई पूरी कर करके वापस आने के बाद, सन्  1893 ई• में एक मुकदमे की पैरवी करने के लिए उन्हें दक्षिण अफ्रीका जाना पड़ा। वहाँ उन्होंने अंग्रेजी सरकार की रंगभेद और निरीह जनता पर दमन, शोषण और अत्याचार को देखकर इन्हें बहुत बुरा लगा। वे स्वयं में भी अंग्रेजों के अत्याचार एवं अनादर का शिकार हुए तथा उन्होंने अंग्रेज शासकों के विरुद्ध दक्षिण अफ्रीका की जनता को संगठित किया और अहिंसात्मक ढंग से संघर्ष भी शुरू कर दिया। यह संघर्ष भारत आने के बाद भी प्रारंभ रहा।
  1942 में गांधीजी ने 'अंग्रेजो भारत छोड़ो' व 'करो या मरो'  जैसे आंदोलनों का शंखनाद किया इस बार जो चिंगारी भड़की वह अंत तक बुझ नहीं पाई और अंततः 15 अगस्त 1947 को भारत को स्वाधीनता मिल गई। अंग्रेजी कूटनीति के कारण भारत दो भागों में विभाजित हो गया तथा देश में सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे। हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए गांधीजी ने उपवास भी किया और संप्रदायिक अग्नि को बुझाने का प्रयास किया। किंतु 30 जनवरी 1948 को प्रार्थना सभा में जाते हुए गांधी जी पर एक पथ भ्रष्ट युवक 'नाथूराम गोडसे' ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी। इस प्रकार भारत का महान संत पंडित महामानव का एकमात्र आश्रय और विश्व का महान व्यक्तित्व संसार से विदा हो गया। किंतु गांधी जी मरकर भी अमर हो गए। पंडित जवाहरलाल नेहरू के शब्दों में  "प्रकाश बुझा नहीं, क्योंकि वह तो हजारों-लाखों व्यक्तियों के हृदय को प्रकाशित कर चुका था।"
   देश ने गांधी जी को राष्ट्रपिता की संज्ञा दी और श्रद्धा तथा प्रेम से बापू कहां। गांधी जी ने हमें सत्य, अहिंसा, स्त्री-शिक्षा, स्वदेशी वस्तुओं के प्रति प्रेम, अछूतों का उद्धार, खादी के प्रति प्रेम, हिंदू-मुस्लिम एकता आदि का संदेश दिया। गांधीजी के आदर्श आज भी हमारा पथ प्रदर्शन करते हैं। गांधीजी को परिजनों के प्रति  बड़ा लगाव था। हरिजनों के प्रति उनकी गहरी आस्था को कवि की वाणी में इस रूप में प्रकट किया जा सकता है :
" यदि हरिजन के छू लेने से, 
मंदिर का है कल्याण नहीं।
तो यही कहूंगा मंदिर में 
बस पत्थर है, भगवान नहीं ।। "

4. महात्मा गांधी(1000+शब्द ) 

(रूपरेखा : 1.प्रस्तावना, 2. जन्म, बाल्यावस्था और शिक्षा, 3.दक्षिण अफ्रीका में गांधी जी, 4.भारत में गांधीजी, 5.स्वतंत्रता आंदोलन और जेल यात्रा, 6महान संत के मृत्यु, 7.गांधी जी के महान आदर्श, 8.समाज सुधार के कार्य, 9.उपसंहार।)
  प्रस्तावना: बीसवीं शताब्दी को जिस अनोखे महापुरुष ने सबसे अधिक प्रभावित किया था, वह थे -महात्मा गांधी। वह आज धरती पर नहीं है किंतु सत्य, अहिंसा और देश प्रेम के सिद्धांतों पर आधारित उनका जीवन संदेश आज भारत की सीमाओं से निकलकर सारे संसार को जीवन प्रदान कर रहा है। न केवल राजनीतिक विवरण सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक पराधीनता की बेड़ियों से भी अपने देश को मुक्त कराने के लिए उन्होंने अपना जीवन बलिदान कर दिया। प्रत्येक भारतीय को  महात्मा गांधी जैसे विभूतियों पर गर्व है। वर्तमान भारत के निर्माता गांधी एक ऐसी ही महान विभूति थे जिन्होंने सत्य एवं अहिंसा का प्रयोग करके यह सिद्ध कर दिया कि आत्मिक बल शारीरिक बल से कहीं अधिक श्रेष्ठ तथा शक्तिशाली है।
  जन्म बाल्यावस्था और शिक्षा : अहिंसा के पुजारी और करुणा के अवतार महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर सन 1869 ई• को गुजरात प्रदेश के पोरबंदर नामक स्थान में हुआ था। उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। उनके पिता करमचंद गांधी, राजकोट रियासत के दीवान तथा वैष्णव भक्त थे। उनकी माता पुतलीबाई अत्यंत धर्मनिष्ठ महिला थी। माता की आस्तिकता और सत्यपरायणता की गहरी छाप गांधीजी पर व्यापक रूप से पड़ी।
  गांधी जी की प्रारंभिक शिक्षा राजकोट में हुई। अपने बचपन में इन्होंने 'सत्यवादी हरिश्चंद्र' नाटक देखा था और 'श्रवण कुमार' नामक नाटक पड़ा था। इन दोनों नाटकों के आदर्शों का उनके जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा। 13 वर्ष की अल्प आयु में उनका विवाह कस्तूरबा के साथ हो गया। इसी वर्ष उन्होंने भावनगर के श्यामलाल कॉलेज से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की और कानून की शिक्षा ग्रहण करने के लिए इंग्लैंड चले गए। भारत लौटने पर इन्होंने अपनी वकालत प्रारंभ की और 'अब्दुल्ला एंड कंपनी' की एक मुकदमे के संबंध में 1893 में अफ्रीका चले गए।
  दक्षिण अफ्रीका में गांधी जी: दक्षिण अफ्रीका में गांधी जी ने भारतीयों की दयनीय दशा देखी। वहाँ भारतीयों के साथ पशुओं जैसा व्यवहार किया जाता था।  गोरे और काले के भेद-भाव ने गांधी जी के हृदय में विद्रोह की ज्वाला उत्पन्न कर दी। वहाँ पर उन्हें भी कई बार अपमानित किया गया। यह सब देखकर उनका हृदय विद्रोह से भर उठा। उन्होंने वैज्ञानिक ढंग से युद्ध छेड़ दिया है। इसके लिए उन्होंने 'सत्याग्रह' और 'अहिंसा' का शस्त्र अपनाया। उनके आंदोलन का अनुकूल प्रभाव हुआ और दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों को सम्मान पूर्ण जीवन मिला। इस प्रकार सफलता प्राप्त करके गांधीजी प्रसिद्धि के शिखर पर पहुँचेे।
  भारत में गांधीजी: गांधीजी दक्षिण अफ्रीका में जनप्रिय हो चुके थे। भारतीय राजनीति उनका स्वागत करने के लिए तैयार थी। उस समय लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और गोपाल कृष्ण गोखले राजनीति के मैदान में थे। उन्होंने गांधी जी का स्वागत किया और गांधीजी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सेनानी बन गए। उन्होंने अहमदाबाद के पास 'साबरमती 'के तट पर अपने आश्रम की स्थापना की और वहीं से भारत की कोटि-कोटि जनता का मार्गदर्शन करने लगे।
 स्वतंत्रता आंदोलन और जेल यात्राएं: गांधीजी ने भारत की स्वतंत्रता के लिए देशव्यापी आंदोलन छेड़ दिया। उन्होंने चरखी को स्वतंत्रता का प्रतीक बनाया और अहिंसा को इस आंदोलन का शस्त्र। स्वतंत्रता आंदोलन के इस कर्मठ सिपाही को अनेक बार जेल यात्राएं भी करनी पड़ी। 1942 ई• में उन्होंने मुंबई अधिवेशन में नारा दिया 'अंग्रेजों, भारत छोड़ो'। अब अंग्रेजों ने मन-ही-मन समझ लिया था कि उन्हें भारत से जाना ही पड़ेगा। अंत में गांधीजी की नीति की विजय हुई और 15 अगस्त 1947 ई• में भारत स्वतंत्र हुआ।
   महान संत की मृत्यु: देश की स्वतंत्रता को अभी 1 वर्ष भी न बीता था कि 30 जनवरी 1948 ईस्वी की संध्या को जब गांधी जी संध्या प्रार्थना सभा के लिए जा रहे थे, नाथूराम गोडसे नामक व्यक्ति ने अपने रिवाल्वर की गोलियों से गांधी जी की हत्या कर दी। इस प्रकार भारत का महान संत, पीड़ित मानवता का एकमात्र आश्रय और विश्व का महान व्यक्तित्व संसार से विदा हो गया। महानुभाव की मृत्यु से सारा संसार अवाक रह गया है। मानवता चीख उठी किंतु गांधीजी मरकर भी अमर हो गए। 'पंडित जवाहरलाल नेहरू' के शब्दों में "प्रकाश बुझा नहीं क्योंकि वह तो हजारों-लाखों व्यक्तियों के हृदय को प्रकाशित कर चुका था।"
  गांधी जी के महान आदर्श: गांधी जी का ईश्वर में अटल विश्वास था। सत्य को उन्होंने ईश्वर का  ही दूसरा नाम बताया। धर्म को उन्होंने सदाचार का नाम दिया और सारेे  धर्मो में सद्भाव पैदा करने के लिए सत्याग्रह का सहारा लिया। गांधी जी ने हिंसा को अहिंसा से और अन्याय को शांतिमय सत्याग्रह से पराजित करने का, अनोखा ढंग निकाला और इस प्रकार उन्होंने अत्याचारी ब्रिटिश शासन की मजबूत नींव हिला दी। वे अहिंसा के पुजारी थे, किंतु उनकी अहिंसा में वीरता, निडरता और दृढ़ संकल्प विद्यमान थे। सत्य, अहिंसा और धर्म का राजनीति में प्रयोग करके गांधी जी ने एक अद्भुत आदर्श प्रस्तुत किया। उनकी कथनी और करनी में कोई भेद नहीं था। उन्होंने राम राज्य को अपना आदर्श घोषित किया, जिसमें आसुरी शक्ति तानाशाही और हिंसा का कोई स्थान न हो।
  समाज सुधार के कार्य: एक समाज सुधारक के रूप में गांधीजी का योगदान अतुलनीय है। गांधीजी छुआछूत, परदा-प्रथा, बहु-विवाह, जातिवाद, नशाखोरी और सांप्रदायिक भेदभाव जैसी बुराइयों को मिटाने के लिए उन्होंने निरंतर संघर्ष किया। जातिवाद और छुआछूत को मिटाने के लिए सबसे अधिक प्रयास किया और अछूतों को 'हरिजन' (हरि के जन) कहकर सामाजिक सम्मान दिलाया।
गांधी जी कहते थे कि "यदि हम भारत की आबादी के पांचवें हिस्से को अस्थाई गुलामी की हालत में रखना चाहते हैं और जान-बूझकर उन्हें राष्ट्रीय संस्कृति के सुफलों से वंचित रखना चाहते हैं तो स्वराज्य एक अर्थहीन शब्द मात्र रह जाएगा।"
  उपसंहार: गांधी जी ने हमें सत्य, अहिंसा, स्त्री-शिक्षा, स्वदेशी वस्तुओं के प्रति प्रेम, अछूतों का उद्धार, खादी के प्रति प्रेम, हिंदू-मुस्लिम एकता आदि का संदेश दिया। गांधीजी के आदर्श आज भी हमारा पथ प्रदर्शन करते हैं। 30 जनवरी को प्रतिवर्ष शहीद दिवस के रूप में गांधीजी के बलिदान का स्मरण किया जाता है। हमारा कर्तव्य है कि हम उनके बताए गए मार्ग पर  चलकर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करें। आज चारों ओर जिस प्रकार सांप्रदायिकता और भ्रष्टाचार का बोलबाला है ।उसमें गांधीजी के आदर्श ही हमें सही दिशा की ओर ले जा सकते हैं। देश ने गांधी जी को राष्ट्रपिता की संज्ञा दी और श्रद्धा तथा प्रेम से बापू कहा। गांधीजी एक राजनीतिक नेता के साथ  सामाज सुधारक भी थे।उन्होंने कोढ़ियोँ की सेवा भी की  और शराबबंदी के लिए आंदोलन किया। उन्होंने हरिजन उद्धार और संप्रदायिक एकता के लिए काम किया गांधीजी इस युग के महानतम पुरुषों में से थे। उन्होंने शताब्दियों से सोए हुए भारतवर्ष को जागृत किया और देश में आत्मसम्मान की लहर दौड़ाई। उनका चरित्र केवल भारतीयों के लिए ही नहीं अपितु विश्व भर के लिए भी अनुकरणीय है।
   हरि जनों के प्रति उनकी गहरी आस्था कवि की इन पंक्तियों में हम देख सकते है: 

"यदि हरिजन के छू लेने से, 
मंदिर का है, कल्याण नहीं।  
तो  यही  कहूंगा  मंदिर  में
बस पत्थर है, भगवान नहीं।।"

राष्ट्रीय एकता/ राष्ट्रीय सुरक्षा एवं एकता/ राष्ट्रीय एकता एवं राष्ट्र प्रेम/ हिंदी निबंध

हिंदी निबंध
राष्ट्रीय एकता
या
राष्ट्रीय सुरक्षा एवं एकता
या
राष्ट्रीय एकता एवं राष्ट्र प्रेम 


 (निबंध 1.  रूपरेखा- भूमिका, महत्ता, भारत में राष्ट्रीय एकता, उपसंघार)
  भूमिका: किसी राष्ट्र के नागरिकों के हृदय में, राष्ट्र के प्रति आने वाली वह अदृश्य सरिता, जो निरंतर देश हित में बहती रहती है, राष्ट्रीय एकता कहलाती है। दूसरे शब्दों में, वह सभी एक ही देश की संतान हैं, देश हम सबका है। यह वैचारिक एकता ही राष्ट्रीय एकता है।
   महत्ता: प्रत्येक राष्ट्र चाहे छोटा हो या बड़ा, यदि उसे विकास पद पर लाना है, हर तरह से मजबूत बनना है, देश की अखंडता कायम रखनी है, तो राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूती देनी होगी। इसके बिना किसी भी क्षेत्र में देश का विकास संभव नहीं है। चाहे युद्ध का मैदान हो या वैज्ञानिकों का अनुसंधान-केंद्र, किसानों की कर्मभूमि हो या कामगारों की कर्मशाला, अगर उनके दिल में देश-विकास की भावना न हो, तो विकास की गति धीमी पड़ जाती है। सैनिकों के बीच यदि यह भावना धूमिल हो जाए, तो तो देश की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी। अगर देश का नेतृत्व करनेे वाले नेताओं केेे मन में यह भावना मंद पड़ जाए, तो देश की दुर्गति को कौन रोक सकता है? इतिहास गवाह है कि इसी राष्ट्रीय एकता के बल पर नन्हा सा देश जापान, रूस  और चीन जैसे बड़े देशों को युद्ध में कई बार शिकस्त दे चुका है।


  भारत में राष्ट्रीय एकता: राष्ट्रीय एकता की भावना जब तक हमारे देश में रही, तब तक यह देश ज्ञान-विज्ञान, कला-साहित्य, सभ्यता-संस्कृति केे हर क्षेत्र में विश्व का मार्गदर्शक रहा। लेकिन   नीचता, अहंकार और आपसी मनमुटाव रूपी विष आज जब इस भावनाा के गर्भ में प्रवेश कर गया। तब मीर जाफर और जयचंदों जैसे देशद्रोहियों का जन्म हुआ, हम मुगलों और  अंग्रेजों के गुलाम हुए, देश केे कई टुकड़े हुए, देश निर्बल हुआ। आज भी हमारे देश में कई विघटनकारी तत्व मौजूद हैं, जिनसे देश की अखंडता को भारी खतरा है ऐसे संगठनों को  समझाना चाहिए कि वे  अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं। सरकार को भी इनकी समस्याओं पर  समुचित ध्यान देना चाहिए। इसके बावजूद यह खुशी की बात है कि पिछले कुछ दशकों से जब कभी कोई विदेशी आक्रमण हुआ है, तब सभी भारत वासियों ने राष्ट्रीय एकता का परिचय दिया हैै और दुश्मनों के छक्के छुड़ाए हैं।
   उपसंहार :  इस प्रकार हम देखते हैं कि देश के मान सम्मान के लिए, प्रगति और खुशहाली के लिए, राष्ट्रीयता की भावना को विकसित करना होगा। जाति, धर्म, ऊंच-नीच और अगड़ी पिछड़ी के सारे भेदभाव मिटाने होंगे। गुरुजनों ने हमें जो पढ़ाया है -"एकता में ही बल है।"  उसे जीवन में अपनाना होगा, तभी हमारा यह देश अपनी खोई हुई गरिमा को फिर से प्राप्त करेगा और देश की अखंडता  बनी रहेगी। जे • डिकिंसन ने सच ही कहा है "United we stand divided we fall." अर्थात साथ रहेंगे तो डटे रहेंगे और अलग रहेंगे तो बिखर जाएंगे।