Class 5 hindi Pathbahar chapter 5 'Kismat Ka Khel' West Bengal Board, कक्षा 5 हिंदी पाठबहार पाठ 5 'किस्मत का खेल' पश्चिम बंगाल बोर्ड

कक्षा 5 हिन्दी पाठबहार (NOTES) पश्चिम बंगाल बोर्ड

पाठ 5
 किस्मत का खेल

*शंकर

र साल एक बड़े मंदिर में वर्षा ऋतु का उत्सव होता था। उत्सव में युद्ध का स्वांग होता था। युद्ध दो दलों में होता था। एक दल मंदिर के पश्चिम की ओर रहने वालों का होता था और दूसरा दल पूर्व की ओर रहने वालों का। ढाल तलवार लिये सैकड़ों लोग मैदान के दोनों ओर इक‌ट्ठा होते थे। इशारा पाते कही वे एक दूसरे की ओर बढ़ते और लड़ना शुरू कर देते। इस लड़ाई में न कोई मरता न कोई घायल होता। सैकड़ों साल पहले उस स्थान पर दो राजाओं के बीच हुए युद्ध की याद में यह नकली युद्ध किया जाता था।

उत्सव के दिनों में बहुत बड़ा मेला भी लगता था। मेला कई दिनों तक चलता था। व्यापारी लोग देश के कई स्थानों से आते। तरह-तरह की चीजें बेचने के लिए सैकड़ों दुकानें होती थीं और कई खुले बाजार भी। लोग साल भर की चीजें खरीदने के लिए इस मेले का इंतजार करते। एक सुई से लेकर हाथी तक तरह-तरह की चीजें वहाँ बिकती थीं।


एक दिन मैं मेले से एक छतरी खरीदने के लिए जाना चाहता था। नाना ने मुझको दो रुपये दिये थे। मैंने अपने मामाजी से कहा कि वह चल कर छतरी खरीदवा दें। मामा ने कहा, 'सिर्फ दो रुपये लेकर मेले जाओगे? दो रुपये से क्या-क्या खरीदोगे? मेले में बहुत सी चीजें खरीदने का मन करेगा।' नाना ने उनकी बात सुनी तो मुझको दो रुपये और देकर कहा, 'तुम्हारी जो मर्जी हो खरीद लेना।'

मामा मुझे मेले में ले गये। हमारा साथी नानू भी हमारे साथ था। मेले में बहुत भीड़ थी। मैं मामा के पीछे-पीछे चल रहा था। रास्ते में उन्हें कुछ दोस्त मिल गये। वह उन्हें अपने साथ ले गये। मामा ने मुझसे कहा जब तक वह लौटें, मैं नानू के साथ घूमता रहूँ। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उनके आने तक कुछ न खरीदूँ।

नानू और मैं हर दुकान को देखने लगे। मैं बहुत सी चीजें खरीदना चाहता था। मुझे मामा के लौटने का इंतजार था। फिर उस दुकान पर आये जहाँ भाग्य का खेल चल रहा था। दुकानदार भला आदमी था। वह सबसे कह रहा था- 'आओ, अपनी किस्मत आजमाओ।' उसने हमें भी समझाया कि किस्मत कैसे आजमायी जाती है। उसने कहा, 'देखो, यहाँ इनाम की छत्तीस चीजें रखी हैं। इन पर एक से लेकर छत्तीस नम्बर पड़े हैं। गोटें उल्टी रखी हैं ताकि नम्बर न दिखायी दें। अब आप को बस यह करना है कि आठ आने दें। और छः गोटें उठा ले। उन पर लिखे नम्बरों को जोड़ लें और जोड़कर हमें बता दें। जिस चीज पर वह नम्बर लिखा होगा वह आपकी हो जायेगी। कोई खाली हाथ नहीं जायेगा। हर एक को कुछ न कुछ जरूर मिलेगा। इनाम की चीजों के दाम चार आने से लेकर पचास रुपये तक हैं। अगर तुम्हारी किस्मत अच्छी हुई तो कोई कीमती चीज मिल जायेगी। यह तो किस्मत का खेल है, किस्मत का खेल।'

एक बूढ़े आदमी ने अपनी किस्मत आजमायी। उसने अठन्नी देकर छः गोटें उठायीं। नम्बर जोड़े तो नौ निकला। उसको नौ नम्बर का इनाम दिया गया। बढ़िया घड़ी उसके हाथ लगी। घड़ी तो सुंदर थी पर बूढ़ा उसे लेना नहीं चाहता था। दुकानदार ने उसकी मदद की और चार रुपये में वह उससे खरीद ली। बूढ़ा खुश होकर चला गया।

फिर एक लड़के ने अपना भाग्य आजमाया। वह मुझसे कुछ ही बड़ा था। उसने भी अठन्नी देकर छः गोटें उठायीं। नम्बर जोड़े तो पन्द्रह निकले, और मिला क्या ? दो आने वाली छोटी सो कंघी, जो मुश्किल से चवन्नी की होगी। दुकानदार को लड़के पर तरस आया। उसने चवन्नी देकर कंघी खरीद ली। लड़के ने एक बार फिर अपनी किस्मत आजमायी। इस बार उसको तीन रुपये का फाउन्टेनपेन मिला। उसने तीसरी बार फिर कोशिश की और दस रुपये की कलाई घड़ी मार ले गया। चौथी बार उसको एक टेबुल-लैम्प मिला जिसकी कीमत कम से कम चालीस रुपये होगी। वह लड़का बहुत ही खुश होकर चला गया।

मैं भी अपनी किस्मत आजमाना चाहता था। मैंने नानू की ओर देखा तो उसने भी हाँ कर दी। मैंने आठ आने देकर छः गोटें उठा लीं। मेरी किस्मत उतनी अच्छी नहीं निकली। मुझको सिर्फ दो

पेंसिलें मिलीं। दुकानदार ने मुझसे वह पेंसिल चवन्नी में खरीद लीं। मैंने फिर कोशिश की। इस बार स्याही की बोतल मिली। वह भी सस्ती चीज थी। दुकानदार ने वह भी चार आने में खरीद ली। मैंने तीसरी बार फिर गोटें उठायीं। किस्मत ने फिर भी साथ नहीं दिया।

मुझे बड़ी उम्मीद थी कि मुझको कोई बड़ा इनाम मिलेगा। मैं बार-बार अठन्नी देकर किस्मत आजमाता रहा। पर हर बार मुझको कोई छोटी सी चीज ही मिलती। अब मेरे पास कुल चार आने बच रहे। लेकिन दुकानदार ने फिर मेरे ऊपर मेहरबानी की। उसने कहा कि मैं आखिरी दाँव चार आने देकर खेलूँ। इनाम मिलने पर हिसाब कर लिया जायेगा। मैंने आखिरी चवन्नी भी दाँव पर लगा दी।

लोग खड़े देख रहे थे। कुछ मेरे ऊपर हँस रहे थे। नानू और मैं उस जगह गये जहाँ हमने मामा को छोड़ा था। मैं मामा के लौटने का इंतजार करने लगा।

मामा आये तो मुझे देखकर बोले, 'क्या बात है, करन ? परेशान क्यों लग रहे हो?' मैं तो चुप रहा लेकिन नानू ने सारी बात बता दी। मामा पहले तो बिगड़े, फिर मुस्करा कर मेरी पीठ थपथपाने लगे। उन्होंने मुझको अपने साथ ले जाकर एक अच्छी सी छतरी, बिस्कुट, मिठाई और कुछ चीजें खरीद दीं। फिर हम घर लौटे।


घर जाते हुए रास्ते में मामा ने बताया कि किस्मत के खेल वाले आदमी ने मुझे ठग लिया था। मैंने कहा, 'नहीं मामा जी, मेरी किस्मत खराब थी तो क्या करता?' मामा ने कहा, 'नहीं बेटे, इसमें अच्छी या बुरी किस्मत का कोई सवाल नहीं था।' मैंने कहा, 'पर मामा जी, मैंने खुद देखा कि एक बुड्‌ढे को घड़ी मिली और एक लड़के को तीन कीमती चीजें मिलीं।'

[  जीवन परिचय : शंकर  :- तमिल भाषा के प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक शंकर का जन्म 17 अगस्त, 1963 ई. को तमिलनाडु के सलेम नामक शहर में हुआ था। इनका पूरा नाम शंकर शुमुगम है। इनके पिता का नाम पणमुगम और माता का नाम मुधुलक्ष्मी है। शंकर ने केन्द्रीय पॉलिटेक्निक कॉलेज से मेकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा की पढ़ाई पूरी करके एस.ए. चन्द्रशेखर और पवितयरन जैसे निर्देशकों की फिल्म से अपने कैरियर की शुरुआत किया था। शंकर की पहली फिल्म जेंटलमैन 1993 ई. में प्रसारित हुई जिसमें अर्जुन सरजा की मुख्य भूमिका थी। इसके बाद उनकी दूसरी रोमांटिक एक्शन फिल्म 'कधालन' आयी जिसमें प्रभु देवा की मुख्य भूमिका थी। ये फिल्म इतनी प्रशंसित हुई कि उसे हिन्दी में डब किया गया। हिन्दी में डब किए गए 'जेंटलमैन' के अभिनेता शाहरुख खान थे। शंकर को 1993 ई. में सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का फिल्म फेयर पुरस्कार एवं 2007 ई. में एम.जी. आर. विश्वविद्यालय द्वारा डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मनित किया गया। वस्तुतः कहा जा सकता है कि शंकर तमिल के एक सफल फिल्म निर्माता-निर्देशक है। ]

शब्दार्थ : स्वांग = ढोंग, नकल; इशारा = संकेत; व्यापारी व्यवसाय करने वाला; सुई से लेकर हाथी तक = छोटी चीजों से लेकर बड़ी चीजों तक; मर्जी = इच्छा; किस्मत = भाग्य; जिक्र = वर्णन, उल्लेख; उम्मीद = आशा; मेहरबानी = दया; आखिरी = अंतिम।

अभ्यासमाला 

1. संक्षेप में उत्तर दो।

1.1 मेला कब लगता था?

उत्तर : मेला वर्षा ऋतु में लगता था।

1.2 मेले का इंतजार लोग क्यों करते थे?

उत्तर :  लोग साल भर के उपयोग की चीजें खरीदने के लिए मेले का इंतजार करते थे।

1.3 नानू किसके साथ मेला गया ?

उत्तर :  नानू अपने मित्र करन के साथ मेला गया।

1.4 भाग्य का खेल कहाँ चल रहा था?

उत्तर :  भाग्य का खेल मेला की एक दुकान पर चल रहा था।

1.5 बूढ़े द्वारा अपनी किस्मत आजमाने पर उसे क्या मिला?

उत्तर :  बूढ़े द्वारा अपनी किस्मत आजमाने पर उसे एक घड़ी मिली।

1.6 बूढ़े के बाद किसने किस्मत आजमाई?

उत्तर :  बूढ़े के बाद एक लड़के ने अपनी किस्मत आजमायी।

1.7 दुकानदार ने पेंसिलें कितने में खरीद लीं?

उत्तर :  दुकानदार ने चवन्त्री में पेसिले खरीद लीं।

1.8 मामा ने क्या कहा?

उत्तर :  मामा ने कहा कि किस्मत का खेल खेलाने वाले आदमी ने तुझको ठग लिया था।

1.9 मैं (लेखक) और नानू मेले में जाकर क्या बने ?

उत्तर :  लेखक और नानू मेले में जाकर मूर्ख बने।

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर अपनी भाषा में लिखो।

2.1 वर्षा ऋतु के उत्सव में लोग युद्ध का स्वांग किस प्रकार करते थे?

उत्तर : युद्ध दो दलों में होता था। ढाल-तलवार लिए सैंकड़ों लोग मैदान के दोनों ओर इकट्ठा होते थे। इशारा पाते ही दोनों दल के लोग एक-दूसरे की ओर बढ़ते और झूठी लड़ाई शुरू कर देते थे। इसमे न कोई घायल होता न मरता।

2.2 करन मेला किसके साथ गया तथा वह मेले से क्या खरीदना चाहता था?

उत्तर :  करन मामा के साथ मेला गया था। वह छतरी खरीदना चाहता था।

2.3 करन के पहले किन-किन लोगों ने बाजी लगायी ?

उत्तर :  करन से पहले एक बूढ़े आदमी एवं एक लड़के ने बाजी लगाई।

2.4 करन के पहले चार बार बाजी लगाने वाले लड़के को क्या चीजें मिलीं ?

उत्तर :  करन से पहले बाजी लगाने वाले लड़के को पहली बार एक कंघी मिली। दूसरी बार उसे फाउण्टेन पेन मिली और तीसरी बार उसे कलाई घड़ी मिली। चौथी बार उसे एक टेबुल लैप मिला।

2.5 मामा ने किस्मत के खेल के विषय में क्या समझाया ?

उत्तर : मामा ने किस्मत के खेल के बारे में बतलाया कि किस्मत के खेल में जिनको अच्छा इनाम मिलता है वे दुकानकार के ही आदमी होते है। उन्होंने यह चाल लोगो को फुसलाने के लिए की थी।

2.6 करन की बाजी हारने के विषय में पहले क्या राय थी?

उत्तर : बाजी हारने के पहले करन की राय थी कि उसका भाग्य खराब था, इसलिए उसे बाजी नहीं मिली।

3. सोचो और बताओ।

3.1 खेल में पहले बाजी लगाने वाले क्यों लगातार बाजी जीतते गये?

उत्तर :  खेल में पहली बाजी लगाने पर दुकानदार बाजी लगाने वाले को लालच में डालने के लिए जिता देता था ताकि वे और बाजी लगायें।

3.2 करन की जगह तुम होते तो क्या बाजी जीत जाते? यदि 'हाँ' तो क्यों और 'नहीं' तो क्यों ?

उत्तर :  करन की जगह पर कोई दूसरा होता तो उसे बाजी हारनी ही होती क्योंकि दुकानकार ट्रिक लगाकर किसी को भी हरा जिता सकता था। अतः यदि मैं बाजी लगाता तो मैं भी हार जाता।

3.3 यदि बूढ़ा आदमी और एक छोटा लड़का पहले बाजी नहीं जीतते तो किस्मत के खेल पर क्या प्रभाव पड़ता ?

उत्तर :  यदि बूढ़ा आदमी और पहला लड़का बाजी नहीं जीतते तो करन भी बाजी नहीं लगाता।

4. ऐसे वाक्य की रचना करो।

4.1 जिसका प्रारम्भ सर्वनाम शब्द से हो।

उत्तर :  वह मेला देखने गया।

4.2 जिसका प्रारम्भ कर्ता शब्द से हो।

उत्तर :  राम बाजार गया।

4.3 जिसके अंत में प्रश्नवाचक चिह्न (?) का प्रयोग हुआ हो।

उत्तर :  क्या राम गया ?

4.4 जिसमें अल्पविराम चिह्न (,) का प्रयोग हुआ हो।

उत्तर :  मैंने पुस्तक पढ़ा, पर कुछ समझा नहीं।

4.5 जिसमें विस्मयादि बोधक चिह्न (1) का प्रयोग हुआ हो।

उत्तर :  अरे राजू ! तुम फेल हो गये।

5. नीचे लिखे हुए शब्दों का प्रयोग कर वाक्य बनाओ। तरह-तरह, धीरे-धीरे, भागते-भागते, रोते-रोते, हँसते-हँसते।

उत्तर : (1) बाजार में तरह तरह की वस्तुएं मिलती है। (ii) धीरे-धीरे चलो। (ii) भागते-भागते वह थक गया। (iv) रोते-रोते उसके प्राण निकल गये। (v) हँसते-हँसते हम सभी लोग लोट-पोट हो गये।

6. नीचे कुछ वाक्य दिये गये हैं, इन्हें प्रश्नवाचक वाक्य में बदलो। (क्यों, कहाँ, किससे, किसके, किसकी आदि)।

6.1 दो राजाओं के बीच हुए युद्ध की याद में नकली युद्ध किया जाता था।

उत्तर : दो राजाओं के बीच हुए युद्ध की याद में क्या किया जाता था ?

6.2 वह मामा के पीछे-पीछे चल रहा था?

उत्तर :  वह किसके पीछे-पीछे चल रहा था?

6.3 नानू ने मामा से सारी बात बता दी।

उत्तर :  नानू ने किससे सारी बात बता दिया?

7. इन उदाहरणों को पढ़ो और समझो।

7.1 दीपिका और गीतिका ने अलग-अलग चित्र बनाए।

7.2 यह गीत दीपिका या गीतिका सुना सकती है।

7.3 दीपिका ने कहानी सुनायी, परन्तु गीतिका ने नहीं।

7.4 मैं कल आया था, लेकिन तुम नहीं आये।

7.5 बादल खूब गरजे, किन्तु वर्षा नहीं हुई।

अब एक-एक वाक्य बनाओ जिसमें 'और', 'अथवा', किन्तु 'परन्तु' और 'लेकिन' का प्रयोग हुआ हो।

उत्तर : (i) राम और लक्ष्मण वन गये। ⅱ) तुम जाओ अथवा तुम्हारा दोस्त जाये। (ii) 1947 में भारत स्वतंत्र हुआ परन्तु श्रीलंका नहीं। (iv) वह तेज है, परन्तु पढ़ता नहीं। (v) में इस बात को समझ गया, लेकिन सुरेश नहीं समझा।

8. नीचे कुछ पंक्तियाँ दी गयी है। इन्हें कहानी के क्रम में लिखो।

8.1 घर जाते हुए रास्ते में मामा ने बताया कि किस्मत के खेल वाले आदमी ने तुझको ठग लिया था।
8.2 मैं बार-बार अठत्री देकर किस्मत आजमाता रहा।
8.3 उत्सव के दिनों में बहुत बड़ा मेला भी लगता।
8.4 एक बूढ़े आदमी ने अपनी किस्मत आजमायी।
8.5 मामा मुझे मेला ले गये।
8.6 फिर उस दुकान पर आये जहाँ भाग्य का खेल चल रहा था।

उत्तर : (1) उत्सव के दिनों में बहुत बड़ा मेला भी लगता।
(2) मामा मुझे मेला ले गये।
(3) फिर उस दुकान पर आये जहाँ भाग्य का खेल चल रहा था। (4) एक बूढ़े आदमी ने अपनी किस्मत आजमायी। (5) मैं बार-बार अठन्नी देकर किस्मत आजमाता रहा। (6) घर जाते हुए रास्ते में मामा ने बताया कि किस्मत के खेल वाले आदमी ने तुझको ठग लिया था।

9. दिए गए अंश में उचित विराम चिह्न लगाओ।

9.1 फाटक से ही शंख घड़ियाल नगाड़ा ढोल और खंजड़ी की आवाज सुनायी पड़ने लगी। पुजारी गला फाड़फाड़ कर मंत्र पाठ करने लगे।

उत्तर : फाटक से ही शंख, घड़ियाल, नगाड़ा-ढोल और खंजड़ी की आवाज सुनायी पड़ने लगी। पुजारी गला फाड़-फाड़ कर मंत्र पाठ करने लगे।

9.2 भतीजों ने मुस्काराकर कहा महाराज इस सबके बारे में आपका क्या ख्याल है 

उत्तर : भतीजों ने मुस्कराकर कहा, "महाराज, इस सबके बारे में आपका क्या ख्याल है?"

9.3 राजा बोले यह तो शिक्षा का बड़ा सिद्धान्त जान पड़ता है

उत्तर : राजा बोले, 'यह तो शिक्षा का बड़ा सिद्धान्त जान पड़ता है।'

9.4 पीछे से किसी ने कहा महाराज आपने चिड़िया को भी देखा

उत्तर : पीछे से किसी ने कहा, 'महाराज आपने चिड़िया को भी देखा?'

10. नीचे बायाँ स्तम्भ कारण और दायाँ कारण गायब है तो कहीं परिणाम। स्तम्भ परिणाम के लिए बना है, किन्तु कहीं पाठ के आधार पर सोचो और भरो।

उत्तर : क्योंकि (कारण).      -      इसीलिए (परिणाम)

उत्सव में युद्ध का स्वांग होता था।   - इसलिए लड़ाई में न कोई घायल होता और न कोई मरता था।

तरह-तरह की चीजों को बेचने के लिए सैकड़ों दुकाने होती थीं ।  -  लोग सालभर की चीजें खरीदने के लिए मेले का इंतजार करते।

रास्ते में मामा के कुछ दोस्त मिल गये। -  मामा दोस्तों को साथ लेकर गये।

दुकानदार ने बूढ़े की घड़ी चार रुपये में खरीद ली।  -  बूढ़ा खुश होकर चला गया।

लोग मेरे ऊपर हँस रहे थे।  -  मैंने अखिरी चवनी भी दाँव पर लगा दी।

बूढ़ा और लड़का खुश होकर चले गये।  - बूढे़ को घड़ी और एक लड़के को दो-तीन कीमती जीचें मिलीं।

11. निम्नलिखित कार्यों में कौन-कौन सी सावधानी बरतोगे उसे अपनी कॉपी पर लिखो।

11.1 मेला जाते समय रास्ते में।

उत्तर : सड़क के बांये चलूँगा।

11.2 मेले में घूमते समय।

उत्तर : अपने पॉकेट का ध्यान रखूँगा।

11.3 मेले में कुछ खाते-पीते समय ।

उत्तर : कोई गंदी चीज नहीं खाऊँगा।

11.4 मेले में कुछ खरीदते समय।

उत्तर : वस्तु एवं उसके मूल्य की जांच कर लूंगा।

11.5 मेले के खेल-तमाशों को देखते समय।

उत्तर : किसी की चालाकी में नहीं पडूंगा।

12. अब कुछ करो।

12.2 किसी मेले में इस तरह के कितने खेल तुमने देखे हैं जिनमें कुछ लोग ठगते है? उनकी सूची बनाओ।

उत्तर : गोपाष्टी मेला (ⅰ) रिंग फेंकने का खेल (ii) तास का खेल

(iii) पत्ता उठाने का खेल।

12.3 तुम कहाँ-कहाँ मेले में गये हो तथा क्या-क्या खरीदा है? सूची बनाओ।

उत्तर : मै हावड़ा के गुलमोहर पार्क मैदान में मेला देखने गया हूँ। वहाँ मैने जो वस्तुएं खरीदी उनकी सूची- (i) बैलून (ii) मोटरगाड़ी (iii) खिलौना पिस्तौल।

👉कक्षा 5 पाठ 6 ओलंपिक खेल 

👉कक्षा 5 हिन्दी पाठबहार (NOTES) पश्चिम बंगाल बोर्ड

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