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An ideal Student essay

Ideal Student



 (Outline: - Introduction, qualities of ideal student, behavior, habit, ascendancy, timeliness, regularity, self-reliance, Conclusion.)

 Introduction: Today's students are the nation builders of tomorrow. The future of the country will be on their shoulders tomorrow. Therefore, in the coming times only today's students will give direction to the country. In such a situation, if the students are well qualified, possessing the best qualities, then the country will progress continuously and if the people are meaningless, they cannot stop the degradation of the country.

 Qualities of the ideal student: Many qualities are expected of the ideal student. It should be equipped with superior qualities. This discipline should be dear, good-natured and truthful, even if a scholar and rich, if there is no character, he is not respected anywhere.

 In short, the ideal student should have the following qualities.

  Discipline Dear : The first lesson of the ideal student starts with discipline. Getting up on time, sitting, reading, respecting the Guru, respecting the parents and fighting with the ideal of someone who fights with someone is a symbol of humility. Humility is the mother of many qualities. He is born with a sense of obedience

  Ascendancy : The ideal student does every task diligently. He is not slacker. He finishes by completing every task.

  Moderation modesty : An ideal student is moderation modesty. Concentration brings concentration in the student. Such a student works with restraint in taste, in food, in entertainment and in anger.

   Regularity : There is another quality of discipline. The ideal student does all his work such as study, food, sports and sleep only on a regular basis.

 Self-reliance : Ideal is one of the key qualities of a student. He does not depend on anyone for his actions. But he does it with his work. The greatest quality of an ideal student is to acquire knowledge. He spends most of his time in learning.

 Conclusion : Speaking truth in addition to qualities, making sweet speech, being ready to receive virtues are other qualities of the ideal student. He sets an example for others. He has to improve his future and everyone sees it and improves his future. With all these things, the country and society continue to achieve .

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विज्ञान के चमत्कार/विज्ञान :अभिशाप या वरदान /विज्ञान के वरदान/विज्ञान का महत्व/विज्ञान और मानव-हित/विज्ञान की देन/विज्ञान के बढ़ते चरण : विकास या विनाश की ओर/पर निबंध

1. विज्ञान के चमत्कार

या

विज्ञान :अभिशाप या वरदान 

या 

विज्ञान के वरदान 

या

 विज्ञान का महत्व 

या 

विज्ञान और मानव-हित 

या 

विज्ञान की देन

 या 

विज्ञान के बढ़ते चरण : विकास या विनाश की ओर

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  [ रूपरेखा - वर्तमान युग तथा विज्ञान, इस युग को विज्ञान की देन, विज्ञान के चमत्कारों का वर्णन -(1)मोटर, रेल, वायुयान आदि। (2) टेलीफोन, रेडियो, समाचार-पत्र, बेतार का तार आदि। (3) चलचित्र, ग्रामोफोन, टेलीविजन आदि। (4) बंदूक, तोप, बम, लड़ाकू विमान, दूरमारक अस्त्र-शस्त्र आदि। (5) विद्युत, नए वस्त्र, अच्छी खाद, अत्तम दवाइयाँ आदि। विज्ञान के चमत्कारों का उपयोग तथा दुरुपयोग, उपसंहार]

   वर्तमान युग को वैज्ञानिक युग कहा जाता है। आज हमारे सारे जीवन पर विज्ञान का प्रभाव दिखाई पड़ता है। यदि विज्ञान की देन को आज हमसे छीन लिया जाए तो हम सभी कठिनाइयों में फंस जाएँगे। विज्ञान ने आज हमको जो सुख-सुविधाएँ प्रदान की हैं। वह सब विज्ञान के चमत्कार ही कहलाते हैं। हमारे शरीर के सुकोमल वस्त्र, घड़ी, ट्रांजिस्टर, पेन, पेंसिल आदि सभी विज्ञान की देन हैं। वायुयान, एटम बम, इंजेक्शन, ट्रेन, रेडियो, चलचित्र, टेलीविजन तथा एक्स-रे आदि सभी विज्ञान की देन है।

विज्ञान के चमत्कारों ने आने-जाने के साधनों में बहुत बड़ा परिवर्तन कर दिया है। प्राचीन काल में मनुष्य अपने घर से 10-20 मील तक जाने में भी घबराता था, किंतु आज तो वह पृथ्वी का चक्कर लगाने में भी नहीं घबराता। हजारों व्यक्ति विश्व का चक्कर लगा चुके हैं और अब मानव मंगल ग्रह तक पहुँच चूका है। यह सब विज्ञान के ही कारण संभव हो सका है। आज जन-साधारण की सेवा के लिए साइकिल, मोटर साइकिल, मोटर कार, ट्रेन, वायुयान आदि हर समय तैयार रहते हैं।

  आजकल समाचार भेजने में भी विज्ञान मानव की बड़ी सहायता कर रहा है। टेलीफोन, बेतार का तार, समाचार-पत्र और रेडियो ये सब विज्ञान ने ही दिए हैं। आज कुछ ही सेकंड में एक समाचार सारे संसार में फैल सकता है। हजारों मील दूर बैठा हुआ एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से इस प्रकार बातचीत कर सकता है मानो वह उसके सामने ही बैठा हो। यह सब कुछ सुविधाएँ विज्ञान ने ही तो दी हैं।

  विज्ञान में मन बहलाने के लिए चलचित्र, रेडियो, ग्रामोफोन और टेलीविजन आदि भी प्रदान किए हैं। अपने काम से थक कर कोई रेडियो सुनता है तो कोई चलचित्र देखने जाता है, कुछ लोग मोबाइल चलाते हैं। बंदूक, तोप, एटम बम, लड़ाकू विमान तथा दूरमारक अस्त्र विज्ञान के अद्भुत चमत्कार हैं। आज एक देश को मिनट में नष्ट किया जा सकता है। आज संसार का बड़े से बड़ा देश भी विज्ञान के इन विनाशकारी चमत्कारों से काँपता है। आज विज्ञान के बल से एक सैनिक पूरी सेना का नाश कर सकता है।

   वास्तव में आज हमारा जीवन विज्ञान के सहारे व्यतीत हो रहा है। विद्युत तो विज्ञान का महान चमत्कारों में से एक है। इससे आज हमें प्रकाश मिलता है, मशीनें चलती है, पंखे चलते हैं, गेहूं पिस्ता है तथा खाना तैयार होता है। हमारे दैनिक जीवन में काम आने वाली सभी वस्तुएं विज्ञान ने दी हैं। हमारे शरीर के लिए उत्तम वस्त्र, पढ़ने के लिए उत्तम पुस्तकें, खेतों के लिए अच्छे खाद, रोगों के लिए उत्तम बधाइयाँ, फोटो खींचने के लिए कैमरा और लिखने के लिए कागज विज्ञान ने ही दिए हैं। आज विज्ञान के चमत्कारों के कारण चेचक, हैजा, पोलियो तथा मलेरिया आदि घातक बीमारियों पर पूरी तरह विजय प्राप्त कर ली गई है। वास्तव में विज्ञान के यह चमत्कार समाज के लिए वरदान ही हैं।

   मनुष्य प्रत्येक वस्तु को अपने मनमाने ढंग से प्रयोग में लाता है। तेज ब्लेड से साफ हजामत भी बनती है और यह जेब भी काटती है। विज्ञान के इन चमत्कारों का मानव ने अनेक स्थानों पर दुरुपयोग भी किया है। महाविनाशक अणु-शक्ति का मानव-कल्याण के लिए भी उपयोग किया जा सकता है। अतः हमारे वैज्ञानिकों को चाहिए कि वह इन चमत्कारों का प्रयोग केवल मानव कल्याण के लिए ही करें।

 संक्षेप में हम कह सकते हैं कि विज्ञान के चमत्कारों ने मानव जाति को बहुत सुख सुविधाएं प्रदान की हैं।

  आज भी समझदार लोग इस बात के लिए प्रयत्न कर रहे हैं कि विज्ञान के ये चमत्कार मानव की सेवा करते रहे। उसे हानि न पहुँचाएँ। आशा है कि मानव इनसे पूरा लाभ  उठाता रहेगा तथा जीवन और अधिक सुखमय हो जाएगा।


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2. विज्ञान के चमत्कार

या

विज्ञान :अभिशाप या वरदान 

या 

विज्ञान के वरदान 

या

 विज्ञान का महत्व 

या 

विज्ञान और मानव-हित 

या 

विज्ञान की देन

 या 

विज्ञान के बढ़ते चरण : विकास या विनाश की ओर

  [रूपरेखा : (1)प्रस्तावना, (2)विभिन्न क्षेत्रों में विज्ञान के चमत्कार -(i) संचार के क्षेत्र में, (ii) यातायात एवं परिवहन के क्षेत्र में, (iii) चिकित्सा के क्षेत्र में, (iv) शिक्षा के क्षेत्र में, (v) कृषि के क्षेत्र में, (vi) मनोरंजन के क्षेत्र में, (vii)दैनिक जीवन में, (viii) उद्योग के क्षेत्र में, (ix) परमाणु शक्ति के क्षेत्र में, (3) विज्ञान के चमत्कारों से लाभ व हानि, (4) विज्ञान और मनुष्य का संबंध, (5) उपसंहार।]

  प्रस्तावना : आधुनिक युग में विज्ञान के नवीन अविष्कारों ने विश्व में क्रांति-सी दी है। विज्ञान के बिना मनुष्य के स्वतंत्र अस्तित्व की कल्पना भी असंभव प्रतीत होती है। विज्ञान की सहायता से मनुष्य प्रकृति पर निरंतर विजय प्राप्त करता जा रहा है। आज से कुछ वर्ष पहले विज्ञान के आविष्कारों की चर्चा से ही लोग आश्चर्यचकित हो जाया करते थे, परंतु आज वही अविष्कार मनुष्य के दैनिक जीवन के अंग बन गए हैं। एक समय था जब मनुष्य इस सृष्टि की प्रत्येक वस्तु को कौतूहल से भरी हुई तथा आश्चर्यजनक समझता था और उनसे भयभीत होकर ईश्वर की प्रार्थना करता था, परंतु आज विज्ञान ने प्रकृति को वश में कर उसे मानव की दासी बना दिया है।

   विभिन्न क्षेत्रों में विज्ञान के चमत्कार - आज जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में विज्ञान के चमत्कारपूर्ण अविष्कारों का प्रभुत्व देखा जा सकता है। इनमें से कुछ प्रमुख क्षेत्रों का संक्षिप्त विवरण हम इस प्रकार दे सकते हैं -

   (i) संचार के क्षेत्र में - प्राचीन काल में संदेशों के आदान-प्रदान में बहुत समय लग जाया करता था; परंतु अब समय की दूरी घट गई है। अब टेलीफोन, सेल्यूलर फोन, टेलीग्राम, पेजर तथा फैक्स के द्वारा क्षण-भर में संदेश व विचारों का आदान प्रदान किया जा सकता है। अब एक समाचार; टेलीप्रिंटर, रेडियो तथा टेलीविजन एवं मोबाइल द्वारा कुछ ही क्षणों में विश्व भर में प्रेषित किया जा सकता है।

  (ii) यातायात एवं परिवहन के क्षेत्र में : पहले व्यक्ति थोड़ी-सी दूरी तय करने में पर्याप्त समय लगा देता था, लंबी यात्राएँ उसे स्वप्न-सी लगती थी; किंतु अब रेलो,मोटरों तथा वायुयानों के अविष्कार ने लंबी यात्राएँ भी अत्यंत सुगम एवं सुलभ कर दी हैं। अब विभिन्न वस्तुएँ एक स्थान से दूसरे स्थान तक अल्प समय में ही भेजी जा सकती हैं।

  (iii)चिकित्सा के क्षेत्र में : अनेक असाध्य बीमारियों का इलाज विज्ञान द्वारा ही संभव हुआ है। आधुनिक चिकित्सा पद्धति इतनी विकसित हो गई है कि अंधे के लिए आँखें और अपंग को अंग मिलना अब असंभव नहीं रह गया है। दवाओं, सैैल्य चिकित्सा, कृत्रिम श्वसन इत्यादि के द्वारा मनुष्य को नया जीवन दिया जाता है। कैंसर, टीवी तथा हृदय-रोग जैसे भयंकर व जानलेवा रोगों पर विजय पाना विज्ञान के माध्यम से ही संभव हुआ है। वस्तुतः विज्ञान ने चिकित्सा की नवीन पद्धतियों के सहारे मनुष्य को दीर्घ जीवी बनाया है।

   (iv) शिक्षा के क्षेत्र में : शिक्षा के प्रसार व प्रचार में विज्ञान ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। विज्ञान के द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में अद्भुत कार्य किए गए हैं। टेलीविजन, रेडियो और सिनेमा ने शिक्षा को सरल बनाया है। छापेखाने तथा अखबारों ने ज्ञान वृद्धि में सहयोग दिया है। छापेखानों के आविष्कार ने पुस्तकों के प्रशासन द्वारा ज्ञान के नए आयाम प्रस्तुत किए हैं। कंप्यूटर के प्रयोग ने तो छापे व शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति ला दी है। आज मोबाइल कंप्यूटर इंटरनेट द्वारा शिक्षा की एक अदभुत ऊंचाई देखने को मिली है। जो आज तक दुर्लभ थी। अब लोग इंटरनेट द्वारा ऑनलाइन शिक्षा प्रदान कर रहे हैं और छात्र उससे लाभान्वित हो रहे हैं।

   (v) कृषि के क्षेत्र में : आज हम अन्न के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होते जा रहे हैं। इसका श्रेय आधुनिक विज्ञान को ही है। विभिन्न प्रकार के उर्वरक, कृत्रिम जल व्यवस्था बुआई तथा कटाई आदि के आधुनिक साधनों एवं कीटनाशक दवाओं ने खेती को सुविधापूर्ण और सरल बना दिया है। इसके कारण ही हम सरलता से पर्याप्त अन्न पैदा कर सके हैं। अन्न को सुरक्षित रखने तथा वितरण की समुचित व्यवस्था के लिए नवीन उपकरणों के आविष्कार भी किए गए हैं।

  (vi) मनोरंजन के क्षेत्र में : मनोरंजन के आधुनिकतम साधन विज्ञान की ही देन हैं। सिनेमा, रेडियो तथा टेलीविजन के अविष्कार ने मानव को उच्च कोटि के सरल और सुलभ मनोरंजन के साधन प्रदान किए हैं। मोबाइल ने तो सोने पर सुहागा कर दिया।

 (vii) दैनिक जीवन में : हमारे दैनिक जीवन में प्रत्येक कार्य विज्ञान पर ही आधारित है। विद्युत का आविष्कार हमारे जीवन का महत्वपूर्ण अंग बन गया है। बिजली के पंखे, प्रेस, गैस, स्टोव, फ्रिज, सिलाई मशीन, मोबाईल आदि अनेक वस्तुओं के निर्माण ने मानव को सुविधापूर्ण जीवन दिया है तथा समय, शक्ति एवं धन की पर्याप्त बचत कराई है।

  (viii) उद्योग के क्षेत्र में : औद्योगिक क्षेत्र में विज्ञान ने क्रांतिकारी परिवर्तन किए हैं। भाँती-भाती के मशीनों ने उत्पादन को बढ़ाया है। कपड़े खाद्य-पदार्थ तथा दैनिक उपभोग की वस्तुओं को बनाने के लिए विज्ञान ने सरलतम साधनों के आविष्कार किए हैं। वस्तुतः विज्ञान ही उद्योगों को प्रगति की ओर अग्रसर किया है।

   (ix) परमाणु शक्ति के क्षेत्र में : वर्तमान युग को 'परमाणु का युग' कहा जाता है। आज अणुशक्ति द्वारा कृत्रिम बादलों के माध्यम से वर्षा की जा सकती है। मानव कल्याण से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण कार्यों के लिए भी अणु शक्ति का विकास किया जा सकता है।

 विज्ञान के चमत्कारों से लाभ व हानि : विज्ञान ने मनुष्य को ऐसे अनेक वरदायिनी शक्तियाँ प्रदान की हैं, जिनके द्वारा मानव जीवन सरल बन गया है। विज्ञान ने मनुष्य को प्रत्येक क्षेत्र में सुविधाएँ उपलब्ध कराई है। उसने उसे बाढ़, अकाल तथा महामारी से बचाया है; मनुष्य को निरोग बनाने में सहायता कर उसे दीर्घायु बनाया है तथा रहन-सहन संबंधी सुविधाएं प्रदान करके उसके जीवन को सुखमय बनाया है। विज्ञान ने अपराधों को कम करने में भी सहायता की है। अब 'लाई-डिटेक्टर' की सहायता से व्यक्ति के अपराध का पता लगाया जा सकता है।

   एक ओर जहाँ मनुष्य को विज्ञान से अनेक लाभ प्राप्त हुए हैं, वहीं इसके कारण समाज को अनेक हानियाँ भी हुई हैं। सुविधाजनक उपकरणों ने मनुष्य को कमजोर बना दिया है तथा यंत्रों के अत्यधिक उपयोग ने बेकारी को जन्म दिया है। नवीन वैज्ञानिक प्रयोगों ने प्राकृतिक वातावरण को दूषित कर दिया है। परमाणु-युद्ध के भय ने मानव को भयभीत कर दिया है। विज्ञान के कारण ही मनुष्य अपनी पुरानी परंपराएँ और आस्थाई भूल गया है तथा उसमें विश्वबंधुत्व की भावना लुप्त हो रही है। वैज्ञानिक आविष्कारों की निरंतर स्पर्धा आज विश्व को खतरनाक मोड़ पर ले जा रही है। परमाणु तथा हाइड्रोजन बम नि:संदेह विश्व शांति के लिए खतरनाक बन गए हैं। इनके प्रयोग से संपूर्ण विश्व की संस्कृति पलभर में नष्ट हो सकती है।

   विज्ञान और मनुष्य का संबंध : मानव और विज्ञान का परस्पर अटूट संबंध है। आज का मानव वैज्ञानिक मानव बन गया है। विज्ञान की शक्ति पाकर वह बर्बर भी होता जा रहा है। इसलिए आज मानव के विवेक को जागृत करने की आवश्यकता है, जिससे वह विज्ञान का वरदान रूप ग्रहण कर सके अभिशप्त रूप नहीं। 

  उपसंहार : विज्ञान के गुणों और विशेषताओं को देखते हुए कहा जा सकता है कि विज्ञान मानव के लिए वरदान ही सिद्ध हुआ है। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में हम वैज्ञानिक चमत्कारों के ऋणी हैं। यदि मानव विवेक से काम लें और विज्ञान का दुरुपयोग न करें, तो धरती को स्वर्ग बनाया जा सकता है। वास्तव में विज्ञान स्वयं में एक चमत्कार है। 

  एमर्सन ने कहा है :- "आज हम विज्ञान के युग में रह रहे हैं और विज्ञान के बिना मानव के अस्तित्व की कल्पना असंभव प्रतीत होती है।"

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Essay on Mahatma Gandhi

 



Here, I present some essays for students with their titles, which can they write for their School and learn how to write essay .

          1.   A great freedom fighter 

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1 • "Mahatma Gandhi"(100 words)

   Many great leaders are born in our country.They sacrificed their lives for the sake of the country. Mahatma Gandhi was one of the greatest leader of our country. He was born at Porbandar in Gujarat in 1869. His earlier name was  Mohandas Karamchand Gandhi. He went to England for his higher education. He worked as a barrister in South Africa. When he returned to India. He took an active part in the freedom struggle. He lived a very simple life. He believed in truth and nonviolence.

    His birthday falls on 2nd October which is celebrated as 'Gandhi Jayanti'. He was shot died on 13th January 1948. We call him 'Bapu'(the father of the nation).

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2• Mahatma Gandhi (200 words)

 Gandhi was born on 2 October 1869 in a place called Porbandar in Gujarat.  His father's name was Mohandas Karamchand Gandhi and mother's name was Putlibai.  His father was the Diwan of Rajkot.
 Gandhiji had his early education in Porbandar.  After passing the entrance examination, he went to England to study baristry.  He returned to India in 1891 after passing the baristry and started practicing in Mumbai.  At the same time, he went to the Natal state of South Africa to plead a case by Abdullah & Co.  Seeing the condition of Indians there, he was very sad and started a movement for reform.
 After returning to India, he started the 'Non-cooperation' movement and 'Satyagraha' movement to protest against injustice.  For this, he had to go to jail many times.  Finally, on 15 August 1947, he liberated India from British rule.
 Mahatma Gandhi was a priest of truth and non-violence.  They loved everyone.  They are always unjust Used to protest.  His life was simple.  He did not hate anyone.  He was like our father.  That's why people called him the Father of the Nation or Bapu.  The whole country respected him.  His entire life was spent in countrymen and public service.  He died in Nathu Godse on 30 January 1848.  But his name became immortal in the world.


3. Mahatma Gandhi (350) 

 (Profile - Preface, Birth Family and Education, Movements in South Africa and India, Epilogue)
 The unique great man who was most influenced by the twentieth century.  He was Mahatma Gandhi, a priest of non-violence.  His name is foremost among the great men of modern India.  Not only did he sacrifice his life to free his country from the shackles of political and social, economic and religious subjugation.
 Mahatma Gandhi, a priest of non-violence and an incarnation of compassion, was born on 2 October 1869 in Porbandar, Gujarat.  His full name was Mohandas Karamchand Gandhi.  His father Karamchand Gandhi was a Diwan and a Vaishnava devotee of Rajkot Riyasad.  His mother Putlibai was a highly religious woman.  Thus Gandhi was initiated into Vaishnava devotee in his childhood.  He was married to Kasturba at the young age of 13.  After passing the matriculation examination from Shyamlal College, Bhavnagar, he was sent to Barristar to study abroad.
 After completing his barrister's studies and returning, he had to go to South Africa in 1893 to plead a case.  There, he felt very bad seeing apartheid and oppression on the apartheid and innocent people of the British Government.  He himself was a victim of British tyranny and dishonor and he organized the people of South Africa against the British rulers and started a non-violent manner.  This struggle started even after coming to India.
 In 1942, Gandhiji started the movements like 'Quit India' and 'Do or Die', this time the spark which was blown out could not be extinguished till the end and on 15 August 1947 India finally got independence.  Due to English diplomacy, India got divided into two parts and communal riots broke out in the country.  Gandhi also fasted for Hindu-Muslim unity and tried to extinguish the communal fire.  But on 30 January 1948, while going to a prayer meeting, Gandhiji was shot dead by a path-breaking young man 'Nathuram Godse'.  Thus the great saint of India, Pandit, the only shelter of the great man and the great personality of the world, departed from the world.  But Gandhiji became immortal even after his death.  In the words of Pandit Jawaharlal Nehru "Prakash did not extinguish, because he had illuminated the hearts of thousands and millions of people".
 The country has named Gandhiji as the Father of the Nation and where is Bapu with reverence and love.  Gandhiji gave us the message of truth, non-violence, women education, love for indigenous things, salvation of untouchables, love for Khadi, Hindu-Muslim unity etc.  Gandhi's ideals still guide us today.  Gandhiji had a great affection for his family.  His deep faith in Harijans can be expressed in the poet's speech as follows:
 "If Harijan is touched,
 The temple has no welfare.
 So this will say in the temple
 It is just stone, not God.  "


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 4. Mahatma Gandhi (1000+ words)

   Preface: The unique great man who was most influenced by the twentieth century was Mahatma Gandhi.  He is not on the earth today, but his life message based on the principles of truth, non-violence and patriotism is going out of India's borders and giving life to the whole world.  Not only did he sacrifice his life to free his country from the shackles of political, social, economic and religious subordination.  Every Indian is proud of personalities like Mahatma Gandhi.  Gandhi, the creator of present-day India, was one such great figure who, using truth and non-violence, proved that spiritual force is superior and powerful than physical force.
  Birth Childhood and Education: Mahatma Gandhi, a priest of non-violence and an avatar of compassion, was born on 2 October 1869, in a place called Porbandar in the state of Gujarat.  His full name was Mohandas Karamchand Gandhi.  His father was Karamchand Gandhi, Diwan of the princely state of Rajkot and a Vaishnava devotee.  His mother Putlibai was a very devout woman.  A deep impression of mother's theism and faithfulness was widely spread on Gandhiji.
 Gandhiji had his early education in Rajkot.  In his childhood, he saw the play 'Satyavadi Harishchandra' and a drama called 'Shravan Kumar'.  The ideals of both these plays had a profound impact on his life.  At the young age of 13, he was married to Kasturba.  In the same year, he passed the matriculation examination from Shyamlal College, Bhavnagar and went to England to study law.  On his return to India, he started his advocacy and went to Africa in 1843 in connection with a lawsuit by 'Abdullah & Company'.
  Gandhiji in South Africa: Gandhiji saw the pitiable condition of Indians in South Africa.  Indians were treated like animals there.  The discrimination of whites and blacks created a flame of rebellion in Gandhiji's heart.  He was also humiliated many times there.  Seeing all this, his heart was filled with rebellion.  They have waged war scientifically.  For this, they adopted the weapons of 'Satyagraha' and 'Ahimsa'.  His movement had a favorable impact and Indians were respected in South Africa.  In this way, Gandhiji reached the pinnacle of fame by achieving success.
  Gandhiji in India: Gandhiji had become popular in South Africa.  Indian politics was ready to welcome him.  At that time, Lokmanya Bal Gangadhar Tilak and Gopal Krishna Gokhale were in the field of politics.  He welcomed Gandhiji and Gandhi became a fighter of the Indian freedom struggle.  He established his ashram on the banks of 'Sabarmati' near Ahmedabad and from there he started guiding the people of India.
  Freedom Movement and Jail Visits: Gandhiji launched a nationwide movement for India's independence.  He made Charkhi a symbol of freedom and non-violence was the weapon of this movement.  This diligent soldier of the freedom movement also had to undertake several prison visits.  In 1942, he gave the slogan 'British, Quit India' at the Mumbai session.  Now the British had understood in their own minds that they would have to leave India.  In the end, Gandhi's policy prevailed and India became independent on 15 August 1947.
  Death of the great saint: The independence of the country had not yet passed for 1 year that on the evening of 30 January 1948 AD, when Gandhiji was going for the evening prayer meeting, a man named Nathuram Godse killed Gandhiji with the bullets of his revolver.  She did it.  Thus the great saint of India, the only shelter of suffering humanity and the great personality of the world, departed from the world.  The whole world has become speechless due to the death of a noble man.  Humanity screamed but Gandhiji became immortal even after death.  In the words of 'Pandit  Jawaharlal Nehru' "Prakash did not extinguish because he had illuminated the hearts of thousands and millions of people".
  Great ideals of Gandhiji: Gandhiji had a strong belief in God.  He called Sathya another name for God.  He gave the name of virtue to religion and resorted to satyagraha to create harmony among all religions.  Gandhiji devised a unique way of defeating violence with non-violence and injustice with a peaceful satyagraha, thus shaking the strong foundations of tyrannical British rule.  He was a priest of non-violence, but his non-violence contained valor, fearlessness and determination.  By using truth, non-violence and religion in politics, Gandhiji presented an amazing ideal.  There was no difference between his words and his actions.  He declared Ram Rajya as his ideal, in which devilish power dictatorship and violence have no place.
  Social reforms: Gandhi's contribution as a social reformer is incredible.  Gandhiji fought relentlessly to eradicate evils like untouchability, purdah, polygamy, casteism, intoxication and communal discrimination.  Most tried to eradicate casteism and untouchability and gave social respect to the untouchables by calling them 'Harijans' (people of Hari).
  Gandhiji used to say that "If we want to keep a fifth of India's population in a state of temporary slavery and willfully deprive them of the Sufra of national culture, then Swarajya will remain a meaningless word."
  Epilogue: Gandhiji gave us the message of truth, non-violence, women education, love for indigenous things, salvation of untouchables, love for Khadi, Hindu-Muslim unity etc.  Gandhi's ideals still guide us today.  Gandhiji's sacrifice is remembered every year on 30 January as Martyr's Day.  It is our duty to pay true tribute to him by following his stated path.  The manner in which communalism and corruption are prevalent today all around, only the ideals of Gandhiji can take us to the right direction.  The country called Gandhi ji as the Father of the Nation and called Bapu with reverence and love.  Gandhi was a political leader as well as a social reformer. He also served lepers and agitated for prohibition.  He worked for Harijan salvation and communal unity. Gandhiji was one of the greatest men of this era.  He awakened the sleeping India for centuries and instilled a wave of self-respect in the country.  His character is exemplary not only for Indians but also around the world.
 In these lines of the poet we can see his deep faith in Hari people.
    "If Harijan is touched,
     The temple has no welfare.
      So this will say in the temple
     It is just stone, not God.  "

राष्ट्रीय एकता पर हिंदी निबंध https://premchandrasolutionpoint com/2020/08/blog-post.html

महात्मा गांधी जी के बारे में 10 पंक्तियां/Mahatma Gandhi par 10 line


"जय हिंद"

  आज इस लेख के माध्यम से गांधीजी के जीवन और परिचय के बारे में मुख्य 10 पंक्तियां प्रस्तुत की गई है जो बच्चों को गांधी जी से परिचित होने में मदद करेगा तो चलिए शुरू करते हैं :


  1. सत्य और अहिंसा के पुजारी, गांधी जी का जन्म 2 अक्टूबर सन् 1869 ई• को गुजरात के पोरबंदर नामक स्थान में हुआ था ।
  2. गाँधी जी महात्मा, बापू और राष्ट्रपिता के नाम से भी प्रसिद्ध हैं । 
  3. गांधी जी के पिता करमचंद गांधी, राजकोट के दीवान तथा माता पुतलीबाई, एक धर्म निष्ठ  महिला थीं ।
  4. इनका विवाह 13 वर्ष की अल्पायु में ही कस्तूरबा बाई से हुई थी और इन के 4 पुत्र भी थे ।
  5. गांधीज ने बैरिस्टर बनने के लिए 'यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन' से कानून की पढ़ाई की थी ।
  6. उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में भारतीय नागरिकों पर अत्याचार होते देख जनता को नागरिक अधिकार दिलाने के लिए कठिन संघर्ष भी किया ।
  7. गांधी जी गोपाल कृष्ण गोखले जी को अपना राजनीतिक गुरु मानते थे ।
  8. गांधीजी के जीवन पर 'सत्यवादी हरिश्चंद्र' नाटक 'श्रवण कुमार' की कहानी 'लियो टालस्टाय की रचनाओं' और 'गीता' का अधिक प्रभाव पढ़ा था ।
  9. इन्होंने अंग्रेजों के विरूद्ध 'असहयोग आंदोलन', 'सविनय-अवज्ञा आंदोलन', 'नमक आंदोलन', 'दांडी यात्रा' तथा 'करो या मरो' व 'अंग्रेजों भारत छोड़ो' जैसे प्रसिद्ध नारे भी दिये।
  10. गांधी जी सत्य, अहिंसा और ब्रह्मचर्य के समर्थक थे, वे भारत में रामराज की स्थापना करना चाहते थे ।
  11. 30 जनवरी, 1948 ईस्वी को नाथूराम गोडसे ने गांधी जी की गोली मारकर हत्या कर दी ।
  12. गांधी जी की समाधि आज भी नई दिल्ली के राजघाट में स्थित है ।
  13. गांधी जी ने कई रचनाएं भी लिखी जिसमें : 'दक्षिण अफ्रीका के सत्याग्रह का इतिहास', 'सत्य के प्रयोग', 'गीता माता', 'हिंद स्वराज' आदि प्रमुख हैं ।
  14. गांधीजी को 'जीवराम कालिदास' ने सबसे पहले 'महात्मा' के नाम से पुकारा था ।
  15. वह भारत के सच्चे स्वतंत्रता सेनानी थे, मुझे गर्व है कि मैंने गांधी जी के देश में जन्म लिया।

महात्मा गांधी पर निबंध/राष्ट्रपिता/अहिंसा के पुजारी/संत/राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पर हिंदी निबंध/ essay in hindi on Mahatma Gandhi/the father of nation

        

 1. एक महान स्वतंत्रता सेनानी (100 words)
महात्मा गांधी पर निबन्ध 

             "महात्मा गांधी"

 हमारे देश में कई महान नेता पैदा हुए हैं। उन्होंने देश की खातिर अपना बलिदान दिया।  महात्मा गांधी हमारे देश के महानतम नेताओं में से एक थे।  उनका जन्म 1869 में गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। उनका पहले का नाम मोहनदास करमचंद गांधी था।  वे अपनी उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड गए।  उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में एक बैरिस्टर के रूप में काम किया।  जब वह भारत लौटा।  उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भाग लिया।  उन्होंने बहुत सादा जीवन जिया।  वह सत्य और अहिंसा में विश्वास करता था।

 उनका जन्मदिन 2 अक्टूबर को पड़ता है जिसे 'गांधी जयंती' के रूप में मनाया जाता है।  13 जनवरी 1948 को उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हम उन्हें 'बापू' (राष्ट्र का पिता) कहते हैं।

  2• महात्मा गांधी (200शब्द)

  गांधी जी का जन्म 2 अक्टूबर सन् 1869 ई• में गुजरात के पोरबंदर नामक स्थान में हुआ था। उनके पिता का नाम मोहनदास करमचंद गांधी था और माता का नाम पुतलीबाई था। इनके पिता राजकोट के दीवान थे।
   गांधीजी की प्रारंभिक शिक्षा पोरबंदर में हुई। प्रवेशिका परीक्षा पास करने के बाद वे बैरिस्टरी  पढ़ने के लिए इंग्लैंड गए। बैरिस्टरी पास कर वे सन 1891 में भारत लौटे और मुंबई में वकालत शुरू की। इसी समय अब्दुल्ला एंड कंपनी के एक मुकदमे की पैरवी के लिए वे दक्षिण अफ्रीका के नेटाल राज्य गये।  वहाँ भारतीयों की दशा देखकर वे बहुत दुखी हुए और सुधार के लिए आंदोलन चलाया।
   भारत लौटने के बाद उन्होंने अन्याय के विरोध में 'असहयोग' आंदोलन और 'सत्याग्रह' आंदोलन शुरु किया। इसके लिए उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा। अंत में 15      अगस्त 1947 में उन्होंने भारत को अंग्रेजी शासन से मुक्त कराया।

      महात्मा गांधी सत्य और अहिंसा के पुजारी थे। वे सभी को प्यार करते थे। वे अन्याय का सदा
विरोध करते थे। उनका जीवन सादा था। वे किसी से घृणा नहीं करते थे। वह हमारे पिता के समान थे। इसलिए लोग उन्हें राष्ट्रपिता या प्यार से बापू कहते थे। सारा देश उनका सम्मान करता था। उनका पूरा जीवन देशवासियों और जन सेवा में व्यतीत हुआ। उनकी मृत्यु 30 जनवरी सन् 1848 ई• में नाथू गोडसे की गोलियों से हुई। किंतु उनका नाम दुनिया में अमर हो गया।

 3 . महात्मा गांधी(350)
 (रूपरेखा - प्रस्तावना,  जन्म परिवार और शिक्षा,  दक्षिण अफ्रीका और भारत में आंदोलन, उपसंहार)
   बीसवीं शताब्दी को जिस अनोखे महापुरुष ने सबसे अधिक प्रभावित किया था। वह थे अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी। आधुनिक भारत के महापुरुषों में इनका नाम अग्रगण्य है। इन्होंने न केवल राजनीतिक व सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक पराधीनता की बेड़ियों से भी अपने देश को मुक्त कराने के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया।
   अहिंसा के पुजारी और करुणा के अवतार राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जन्म गुजरात के पोरबंदर में 2 अक्टूबर 1869 ई• में हुआ था। इनका पूरा का नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। इनके पिता करमचंद गांधी राजकोट रियासद के दीवान तथा वैष्णव भक्त थे। इनकी माता पुतलीबाई अत्यंत धर्म नष्ट महिला थी। इस प्रकार गांधी जी को बचपन में ही वैष्णव भक्त की दीक्षा मिल गई थी। 13 वर्ष की कम आयु में ही इनका विवाह कस्तूरबा से हो गया था। भावनगर के श्यामलाल कॉलेज से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण होने के बाद इन्हें बैरिस्टर पढ़ने विलायत भेजा गया था। 
   बैरिस्टर की पढ़ाई पूरी कर करके वापस आने के बाद, सन्  1893 ई• में एक मुकदमे की पैरवी करने के लिए उन्हें दक्षिण अफ्रीका जाना पड़ा। वहाँ उन्होंने अंग्रेजी सरकार की रंगभेद और निरीह जनता पर दमन, शोषण और अत्याचार को देखकर इन्हें बहुत बुरा लगा। वे स्वयं में भी अंग्रेजों के अत्याचार एवं अनादर का शिकार हुए तथा उन्होंने अंग्रेज शासकों के विरुद्ध दक्षिण अफ्रीका की जनता को संगठित किया और अहिंसात्मक ढंग से संघर्ष भी शुरू कर दिया। यह संघर्ष भारत आने के बाद भी प्रारंभ रहा।
  1942 में गांधीजी ने 'अंग्रेजो भारत छोड़ो' व 'करो या मरो'  जैसे आंदोलनों का शंखनाद किया इस बार जो चिंगारी भड़की वह अंत तक बुझ नहीं पाई और अंततः 15 अगस्त 1947 को भारत को स्वाधीनता मिल गई। अंग्रेजी कूटनीति के कारण भारत दो भागों में विभाजित हो गया तथा देश में सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे। हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए गांधीजी ने उपवास भी किया और संप्रदायिक अग्नि को बुझाने का प्रयास किया। किंतु 30 जनवरी 1948 को प्रार्थना सभा में जाते हुए गांधी जी पर एक पथ भ्रष्ट युवक 'नाथूराम गोडसे' ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी। इस प्रकार भारत का महान संत पंडित महामानव का एकमात्र आश्रय और विश्व का महान व्यक्तित्व संसार से विदा हो गया। किंतु गांधी जी मरकर भी अमर हो गए। पंडित जवाहरलाल नेहरू के शब्दों में  "प्रकाश बुझा नहीं, क्योंकि वह तो हजारों-लाखों व्यक्तियों के हृदय को प्रकाशित कर चुका था।"
   देश ने गांधी जी को राष्ट्रपिता की संज्ञा दी और श्रद्धा तथा प्रेम से बापू कहां। गांधी जी ने हमें सत्य, अहिंसा, स्त्री-शिक्षा, स्वदेशी वस्तुओं के प्रति प्रेम, अछूतों का उद्धार, खादी के प्रति प्रेम, हिंदू-मुस्लिम एकता आदि का संदेश दिया। गांधीजी के आदर्श आज भी हमारा पथ प्रदर्शन करते हैं। गांधीजी को परिजनों के प्रति  बड़ा लगाव था। हरिजनों के प्रति उनकी गहरी आस्था को कवि की वाणी में इस रूप में प्रकट किया जा सकता है :
" यदि हरिजन के छू लेने से, 
मंदिर का है कल्याण नहीं।
तो यही कहूंगा मंदिर में 
बस पत्थर है, भगवान नहीं ।। "

4. महात्मा गांधी(1000+शब्द ) 

(रूपरेखा : 1.प्रस्तावना, 2. जन्म, बाल्यावस्था और शिक्षा, 3.दक्षिण अफ्रीका में गांधी जी, 4.भारत में गांधीजी, 5.स्वतंत्रता आंदोलन और जेल यात्रा, 6महान संत के मृत्यु, 7.गांधी जी के महान आदर्श, 8.समाज सुधार के कार्य, 9.उपसंहार।)
  प्रस्तावना: बीसवीं शताब्दी को जिस अनोखे महापुरुष ने सबसे अधिक प्रभावित किया था, वह थे -महात्मा गांधी। वह आज धरती पर नहीं है किंतु सत्य, अहिंसा और देश प्रेम के सिद्धांतों पर आधारित उनका जीवन संदेश आज भारत की सीमाओं से निकलकर सारे संसार को जीवन प्रदान कर रहा है। न केवल राजनीतिक विवरण सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक पराधीनता की बेड़ियों से भी अपने देश को मुक्त कराने के लिए उन्होंने अपना जीवन बलिदान कर दिया। प्रत्येक भारतीय को  महात्मा गांधी जैसे विभूतियों पर गर्व है। वर्तमान भारत के निर्माता गांधी एक ऐसी ही महान विभूति थे जिन्होंने सत्य एवं अहिंसा का प्रयोग करके यह सिद्ध कर दिया कि आत्मिक बल शारीरिक बल से कहीं अधिक श्रेष्ठ तथा शक्तिशाली है।
  जन्म बाल्यावस्था और शिक्षा : अहिंसा के पुजारी और करुणा के अवतार महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर सन 1869 ई• को गुजरात प्रदेश के पोरबंदर नामक स्थान में हुआ था। उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। उनके पिता करमचंद गांधी, राजकोट रियासत के दीवान तथा वैष्णव भक्त थे। उनकी माता पुतलीबाई अत्यंत धर्मनिष्ठ महिला थी। माता की आस्तिकता और सत्यपरायणता की गहरी छाप गांधीजी पर व्यापक रूप से पड़ी।
  गांधी जी की प्रारंभिक शिक्षा राजकोट में हुई। अपने बचपन में इन्होंने 'सत्यवादी हरिश्चंद्र' नाटक देखा था और 'श्रवण कुमार' नामक नाटक पड़ा था। इन दोनों नाटकों के आदर्शों का उनके जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा। 13 वर्ष की अल्प आयु में उनका विवाह कस्तूरबा के साथ हो गया। इसी वर्ष उन्होंने भावनगर के श्यामलाल कॉलेज से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की और कानून की शिक्षा ग्रहण करने के लिए इंग्लैंड चले गए। भारत लौटने पर इन्होंने अपनी वकालत प्रारंभ की और 'अब्दुल्ला एंड कंपनी' की एक मुकदमे के संबंध में 1893 में अफ्रीका चले गए।
  दक्षिण अफ्रीका में गांधी जी: दक्षिण अफ्रीका में गांधी जी ने भारतीयों की दयनीय दशा देखी। वहाँ भारतीयों के साथ पशुओं जैसा व्यवहार किया जाता था।  गोरे और काले के भेद-भाव ने गांधी जी के हृदय में विद्रोह की ज्वाला उत्पन्न कर दी। वहाँ पर उन्हें भी कई बार अपमानित किया गया। यह सब देखकर उनका हृदय विद्रोह से भर उठा। उन्होंने वैज्ञानिक ढंग से युद्ध छेड़ दिया है। इसके लिए उन्होंने 'सत्याग्रह' और 'अहिंसा' का शस्त्र अपनाया। उनके आंदोलन का अनुकूल प्रभाव हुआ और दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों को सम्मान पूर्ण जीवन मिला। इस प्रकार सफलता प्राप्त करके गांधीजी प्रसिद्धि के शिखर पर पहुँचेे।
  भारत में गांधीजी: गांधीजी दक्षिण अफ्रीका में जनप्रिय हो चुके थे। भारतीय राजनीति उनका स्वागत करने के लिए तैयार थी। उस समय लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और गोपाल कृष्ण गोखले राजनीति के मैदान में थे। उन्होंने गांधी जी का स्वागत किया और गांधीजी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सेनानी बन गए। उन्होंने अहमदाबाद के पास 'साबरमती 'के तट पर अपने आश्रम की स्थापना की और वहीं से भारत की कोटि-कोटि जनता का मार्गदर्शन करने लगे।
 स्वतंत्रता आंदोलन और जेल यात्राएं: गांधीजी ने भारत की स्वतंत्रता के लिए देशव्यापी आंदोलन छेड़ दिया। उन्होंने चरखी को स्वतंत्रता का प्रतीक बनाया और अहिंसा को इस आंदोलन का शस्त्र। स्वतंत्रता आंदोलन के इस कर्मठ सिपाही को अनेक बार जेल यात्राएं भी करनी पड़ी। 1942 ई• में उन्होंने मुंबई अधिवेशन में नारा दिया 'अंग्रेजों, भारत छोड़ो'। अब अंग्रेजों ने मन-ही-मन समझ लिया था कि उन्हें भारत से जाना ही पड़ेगा। अंत में गांधीजी की नीति की विजय हुई और 15 अगस्त 1947 ई• में भारत स्वतंत्र हुआ।
   महान संत की मृत्यु: देश की स्वतंत्रता को अभी 1 वर्ष भी न बीता था कि 30 जनवरी 1948 ईस्वी की संध्या को जब गांधी जी संध्या प्रार्थना सभा के लिए जा रहे थे, नाथूराम गोडसे नामक व्यक्ति ने अपने रिवाल्वर की गोलियों से गांधी जी की हत्या कर दी। इस प्रकार भारत का महान संत, पीड़ित मानवता का एकमात्र आश्रय और विश्व का महान व्यक्तित्व संसार से विदा हो गया। महानुभाव की मृत्यु से सारा संसार अवाक रह गया है। मानवता चीख उठी किंतु गांधीजी मरकर भी अमर हो गए। 'पंडित जवाहरलाल नेहरू' के शब्दों में "प्रकाश बुझा नहीं क्योंकि वह तो हजारों-लाखों व्यक्तियों के हृदय को प्रकाशित कर चुका था।"
  गांधी जी के महान आदर्श: गांधी जी का ईश्वर में अटल विश्वास था। सत्य को उन्होंने ईश्वर का  ही दूसरा नाम बताया। धर्म को उन्होंने सदाचार का नाम दिया और सारेे  धर्मो में सद्भाव पैदा करने के लिए सत्याग्रह का सहारा लिया। गांधी जी ने हिंसा को अहिंसा से और अन्याय को शांतिमय सत्याग्रह से पराजित करने का, अनोखा ढंग निकाला और इस प्रकार उन्होंने अत्याचारी ब्रिटिश शासन की मजबूत नींव हिला दी। वे अहिंसा के पुजारी थे, किंतु उनकी अहिंसा में वीरता, निडरता और दृढ़ संकल्प विद्यमान थे। सत्य, अहिंसा और धर्म का राजनीति में प्रयोग करके गांधी जी ने एक अद्भुत आदर्श प्रस्तुत किया। उनकी कथनी और करनी में कोई भेद नहीं था। उन्होंने राम राज्य को अपना आदर्श घोषित किया, जिसमें आसुरी शक्ति तानाशाही और हिंसा का कोई स्थान न हो।
  समाज सुधार के कार्य: एक समाज सुधारक के रूप में गांधीजी का योगदान अतुलनीय है। गांधीजी छुआछूत, परदा-प्रथा, बहु-विवाह, जातिवाद, नशाखोरी और सांप्रदायिक भेदभाव जैसी बुराइयों को मिटाने के लिए उन्होंने निरंतर संघर्ष किया। जातिवाद और छुआछूत को मिटाने के लिए सबसे अधिक प्रयास किया और अछूतों को 'हरिजन' (हरि के जन) कहकर सामाजिक सम्मान दिलाया।
गांधी जी कहते थे कि "यदि हम भारत की आबादी के पांचवें हिस्से को अस्थाई गुलामी की हालत में रखना चाहते हैं और जान-बूझकर उन्हें राष्ट्रीय संस्कृति के सुफलों से वंचित रखना चाहते हैं तो स्वराज्य एक अर्थहीन शब्द मात्र रह जाएगा।"
  उपसंहार: गांधी जी ने हमें सत्य, अहिंसा, स्त्री-शिक्षा, स्वदेशी वस्तुओं के प्रति प्रेम, अछूतों का उद्धार, खादी के प्रति प्रेम, हिंदू-मुस्लिम एकता आदि का संदेश दिया। गांधीजी के आदर्श आज भी हमारा पथ प्रदर्शन करते हैं। 30 जनवरी को प्रतिवर्ष शहीद दिवस के रूप में गांधीजी के बलिदान का स्मरण किया जाता है। हमारा कर्तव्य है कि हम उनके बताए गए मार्ग पर  चलकर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करें। आज चारों ओर जिस प्रकार सांप्रदायिकता और भ्रष्टाचार का बोलबाला है ।उसमें गांधीजी के आदर्श ही हमें सही दिशा की ओर ले जा सकते हैं। देश ने गांधी जी को राष्ट्रपिता की संज्ञा दी और श्रद्धा तथा प्रेम से बापू कहा। गांधीजी एक राजनीतिक नेता के साथ  सामाज सुधारक भी थे।उन्होंने कोढ़ियोँ की सेवा भी की  और शराबबंदी के लिए आंदोलन किया। उन्होंने हरिजन उद्धार और संप्रदायिक एकता के लिए काम किया गांधीजी इस युग के महानतम पुरुषों में से थे। उन्होंने शताब्दियों से सोए हुए भारतवर्ष को जागृत किया और देश में आत्मसम्मान की लहर दौड़ाई। उनका चरित्र केवल भारतीयों के लिए ही नहीं अपितु विश्व भर के लिए भी अनुकरणीय है।
   हरि जनों के प्रति उनकी गहरी आस्था कवि की इन पंक्तियों में हम देख सकते है: 

"यदि हरिजन के छू लेने से, 
मंदिर का है, कल्याण नहीं।  
तो  यही  कहूंगा  मंदिर  में
बस पत्थर है, भगवान नहीं।।"