Pahadiya Varsha ke sur mein Class 5 chapter 12 hindi Pathbahar West Bengal Board, कक्षा 5 हिंदी पाठबहार पाठ 12 पहाड़िया वर्षा के सुर में पश्चिम बंगाल बोर्ड

कक्षा 5 हिन्दी पाठबहार (NOTES) पश्चिम बंगाल बोर्ड

 पाठ 12
पहाड़िया वर्षा के सुर में

श्चिम बंगाल के उत्तर में हिमालय है। उसकी तलहटी में हरे-भरे जंगल है, जिसका पुकारू नाम है-तराई। उस हरे-भरे जंगल की आँचल नीचे मैदानी भू-भाग तक उतर आई है। जंगल से सटकर बहती चली जाती हैं, पहाड़ी नदियाँ तिस्ता, तोरसा, रंगित...। जंगल में इनके टेढ़े-मेढ़े रास्ते के पास मेच, राभा, गारो, लेपचा और टोटो लोगों का निवास है। समुहों में एक साथ मिलकर रहने के बावजूद भी गाँव के आस-पास रहने वाले समाज के अन्य लोगों के साथ भी इनका गहरा आत्मीय संबंध है। इनमें प्रत्येक की अपनी-अपनी भाषा है। उसी भाषा में सैकड़ों वर्षों से इनकी कहानियाँ और गीत लिखे गए हैं।

इन आदिम जनसमाज के पर्व और त्यौहार सजीव हो उठते हैं उनके गीतों के सुर और नृत्यों की ताल पर। दल बनाकर मछलियों को पकड़ने जाना राभा समाज के जीवन का एक आनंददायक पर्व है। उसी समय का एक गीत-

फै लोगो फै ना रोतिया, 
          बौसीर पिदान दि नौयाय 
          चिका पिदानाय लोगो ना लोयेया।
                  हासाम नोकया चिकाऊयाय,
लोगो ना तो लोयेड्या -    
           कुरूया वा क्रोंगाइता 
मासा लांगा पूइमोन         
            ना सानि लामाइ तारे 
इबाई माँझा हावाइ माना    
          फै लोगों ना लो येया।
चलो मछली पकड़ें चलकर 
          नए साल के नए जल में
उफन रही नदी जल भरकर
        जल से भरे खेत मैदान
      कुरूया पंक्षी रोते-रोते उड़ता है
        बगुले उड़ते कतारों में 
         रामचिरैया चोंच मारती बार-बार 
               मछली मिली नहीं किसी बार
खाएगी क्या वह अब।      
                       मछली इधर नहीं तो उधर चल ।।

👉 रक्षाबंधन पर छोटे-बड़े निबंधध

किस तरह बारिश आती है, के बारे में लेपचा समाज में एक प्रचलित लोककथा है। वह लोककथा इसप्रकार है-

एक बार धरती पर भयकंर सूखा पड़ा। मनुष्य, पशु-पक्षी, पेड़-पौधे सभी मरने लगे। धरती के सभी प्राणी मिलकर सोचने लगे कि कैसे बारिश को लाकर धरती को बचाया जाय।

मेढक स्वेच्छानुसार इस कार्य में जुटा। उसने तय किया कि भगवान के पास जाकर उनसे पूहूँगा कि क्यों वह अपनी सृष्टि की इतनी उपेक्षा कर रहे हैं।

एक दिन सुबह की बेला में उसने यात्रा शुरू की। भगवान तो रहते हैं बहुत दूर और उनके राजमहल तक जाने वाला रास्ता बहुत ही थकावट भरा है। रास्ते में चलते हुए उसकी भेंट एक मधुमक्खी से हुई। उसने मेढक से पूछा- "कहाँ जाओगे?" मेढक ने कहा, "भगवान के पास। घोर अकाल पड़ा है।" मधुमक्खी ने कहा, "अच्छा चलो, मैं भी साथ चलूँ।" अकाल से हम भी बेहाल है। पानी नहीं है, फूलों की कमी है, मधु पाऊँगी कहाँ से!"

चलते-चलते रास्ते में मुर्गा भी मिला। उसने मेढक के मुँह से स्वर्ग जाने की बात सुनकर उसने भी कातर स्वर में कहा, "अकाल के चलते सभी फसलें नष्ट हो रही हैं। दानों के बिना बचूँगा कैसे? चलो, मैं भी जाऊँगा।" इसी तरह चलते-चलते घने जंगलों के बीच उनकी भेंट एक भूखे बाघ से हुई। उसने भी वही प्रश्न पूछा, "तुम सभी मिलकर कहाँ जा रहे हो।" उसे भी सब कुछ बताया गया। तब वह बाघ भी उन लोगों के साथ जाने के लिए तुरंत तैयार हो गया, क्योंकि जीव-जन्तुओं के खाये बिना मर जाने पर वह भी तो अकेले बचा नहीं रह सकता।

अन्त में लंबी यात्रा तय करके वे भगवान के राजमहल में पहुँचे और देखे कि वहाँ सभी तरह-तरह के भोज और आनंदोत्सव में मग्न है। उनकी पत्नियाँ, मंत्रीगण सभी मौज-मस्ती में डूबे हुए हैं। मेढक की समझ में अब आ गया कि क्यों राज्य में इतना अभाव और दुख है।

क्रोधित व उत्तेजित अवस्था में भगवान के पास गए। उन्हें देख भगवान ने अपने सिपाहियों को बुलाया। तब मधुमक्खियाँ उन्हें डंक मारने दौड़ीं। बाघ गुर्राया और उन्हें खा जाने का भय दिखाया। हंगामें में मुर्गा भी अपने पंखों से झपट्टा मारकर डराने लगा। तब भगवान ने अपने मंत्रियों को बुलाया और उन्हें उनकी गलतियों के लिए कड़ी डांट-फटकार लगाई।

इसके बाद अपनी जीत से गर्वित मेढक खुश होकर टर्राते हुए तालाब में वापस चला गया। तभी से जब मेढक टर्राता है, तब बारिश होने लगती है।

👉 कक्षा 5 हिन्दी पाठ बहार सम्पूर्ण हल 

शब्दार्थ: तलहटी = तराई; कातर = व्याकुल; मग्न = मस्त; आत्मीय = अपना; बेहाल = दुर्दशा

राभा गीत  'पश्चिमबंग' पत्रिका की 'जलपाईगुड़ी जिला' संख्या के 'जलपाईगुड़ी जिला की वर्णमय लोकसंस्कृतिः नृत्य और गीत" नामक लेख से लिया गया है। इसके लेखक हैं सुनील पाल। गीत का वांग्ला अनुवाद भी उन्होंने किया है। उक्त गीत के मूल-पाठ संकलन और शब्दार्थों के चयन में दयचाँद राभा ने सहयोग दिया है। वे लोकसंस्कृति के एक नामी गवेषक और कई ग्रंथों के प्रणेता है। लेपचाओं की इस प्रचलित लोककया का बांग्ला अनुवाद ऐन्द्रिला भौमिक ने किया है। जिसका हिंदी अनुवाद उपरोक्त पाठ में दिया गया है। ]

 कविता का सारांश 

प्रस्तुत लोकगीत 'पश्चिम बंग' पत्रिका में प्रकाशित 'जलपाईगुड़ी शिक्षा की वर्णभय लोक संस्कृति 'नृत्य और गीत' शीर्षक लेख से ली गई है। इस गीत को लिखने और बांग्ला भाषा में अनुवाद करने का श्रेय सुनील पाल को जाता है।

पश्चिम बंगाल के उत्तर में हिमालय पर्वत और हरे-भरे जंगल हैं। उसी पहाड़ एवं हरे-भरे जंगल से सटे टेढ़े-मेढ़े मार्ग में मेच, राभा, गारो, लेपचा और टोटो जन-जातियों का निवास है। दलों में मिलकर रहने के बावजूद भी आस-पास रहने वाले समाज के अन्य लोगों के साथ इनका गहरा संबंध रहता है। इनमें प्रत्येक की अपनी-अपनी भाषा है। अतः उसी भाषा में सैंकड़ों वर्षों से कहानियों और गीतों को लिखा गया है। यह आदिम जनमानस अपने पर्वो, उत्सवों में दलबद्ध होकर सुख आनंद लेते हैं। इनमें दलबद्ध होकर मछलियों को पकड़ने जाना राभा समाज का आनंददायक पर्व है। इस उत्सव में गाये जाने वाले गीत है -

फै लोगों फै ना रोतिया,   ..................   फै लोगों ना लो येया।'

    लेपचा समाज में वर्षा को लेकर एक लोक प्रचलित क्या है कि एक बार धरती पर भयंकर सूखा पड़ा। धरती के सभी प्राणी मिलकर सोचने लगे कि कैसे बारिश को लाकर धरती को बचाया जाय। मेंढक ने तय किया वह स्वयं भगवान के पास जाकर पूछेगा कि वह अपने सृष्टि की इतनी अवहेलना क्यों कर रहे हैं। एक दिन सुबह के समय उसने यात्रा प्रारंभ की। भगवान तो बहुत दूर रहते हैं। रास्ते में उसकी भेट मधुमक्खी, मुर्गा और बाघ से हुई। तीनों की समस्या समान थी। अतः चारों मिलकर भगवान के राजमहल पहुँचे और देखा कि वहाँ के मंत्रीगण एवं उनकी पंत्नियाँ सभी अपने मौज-मस्ती में लीन हैं। मेंढक अब समझ गया कि राज्य में इतना अभाव और दुःख क्यों है। वह क्रोधित और उत्तेजित होकर भगवान के पास पहुँचा। उन्हें देख भगवान ने अपने सिपाहियों को उन्हें पकड़ने के लिए बुलाया, सिपाही उन्हें जैसे ही पकड़ने के लिए पहुँचे सभी मधुमक्खी डंक मारने दौड़ी, बाघ ने उन्हें खा जाने का भय दिखाया। मुर्गा भी अपने पंखों से झपट्टा मारकर डराने लगा। भगवान इन चारों के पास स्वयं पहुँचकर उनके कष्टों का कारण पूछा। धरतीवासियों के कष्टो को जनने के बनने के पश्चात् भगवान अपने मंत्रियों को बुलाकर उनकी गलतियों के लिए कड़ी डॉट-फटकार लगाई एवं उन्हें निष्ठापूर्वक अपने आप को धरतीवासियों के प्रति समर्पित हो कार्य करने का निर्देश दिया। इस जीत से गर्वित मेढ़क खुश होकर टरतेि हुए तालाब में वापस चला आया। तभी से जब मेढ़क टर्राता है, तो बारिश होती है।

शब्दार्थ : तलहटी = तराई; पुकारु = प्रचलित पुकारने वाला नाम; सुर = स्वर; लोककथा = स्थानीय जनता में प्रचलित कहानी जिसमें कुछ खास संदेश निहित हो; स्वेच्छानुसार = अपनी इच्छा से। कातर = अधीर, व्याकुल; मग्न = मस्त, डूबे हुए; बेहाल = दुर्दशा, परेशान। 


अभ्यासमाला  

1. संक्षेप में उत्तर दो।

1.1 पश्चिम बंगाल के किसी एक पहाड़ का नाम लिखो।

उत्तर : पश्चिम बंगाल का एक पहाड़ सिंगलीला पर्वत है।

1.2 पहाड़ की बात करते ही तुम्हारी आँखों के सामने कैसा दृश्य आता है?

उत्तर : पहाड़ की बात करते ही हमारे सामने ऊँची-ऊँची चोटियों, तीव्र गति से बहती नदियों एवं हरे-भरे वृक्षों का दृश्य उपस्थित हो जाता है।

1.3 वर्षा में मछली पकड़ने की अपनी अनुभूति अथवा मछली पकड़ने से सम्बन्धित कोई कहानी या कविता लिखो।

उत्तर : वर्षात् के मौसम में वर्षा से जब तालाब पानी से भर जाते हैं तो तालाब में वंशी डालकर मछली पकड़ने में बड़ा मजा आता है। एक दिन मैंने एक कहानी पढ़ी थी- शिकारी का शिकार। उस दिन भी मैं मछली मारने गया था। वंशी में फंस कर जब मछली निकली तो वह बड़ी तेजी से तड़ फड़ा रही थी। उसकी तड़ फड़ाहत देखकर मैंने उसे पुनः उसी तालाब में छोड़ दिया। जब मैं घर गया तो यह बात मैंने अपने पिताजी से बतायी, तो वह हंसे और बोले, "जीव जीवस्य भक्षकः।"

1.4 वर्षा काल का प्राकृतिक रूप कैसा होता है? तुम्हारी पाठ्य-पुस्तक में वर्षा से जुड़ी और कौन-कौन सी बातें लिखी हैं?

उत्तर : वर्षा काल का प्रकृतिक दृश्य बड़ा सुहावन लगता है। चारों तरफ नदी-नाले जल से लबा-लब भर जाते हैं, पेड़-पौधे हरे-भरे हो जाते हैं। चारों ओर मैदान हरी घासों से भर जाते हैं जिनमें फुटबाल और कबड्डी खेलने में बड़ा मजा आता है। वर्षा का पानी पड़ते ही धान के पौधे लहराने लगते हैं। किसी दिन अधिक वर्षा होने पर स्कूल की छुट्टी हो जाती है और हम दिन भर खेलते हैं। हमारी पाठ्य पुस्तक में वर्षा से जुड़ी एक कहानी लिखी गयी है जिसमें बतलाया गया है कि मेंढक के टर्र-टर्र आवाज करने पर और अधिक वर्षा होती है।

2. वाक्यों को मिलाओ।

उत्तर :-

क                                                      ख

कुरूया पंक्षी रोते-रोते उड़ता है-----बगुले उड़ते कतारों में

चलो मछली पकड़े चलकर-----नए साल के नए जल में

रामचिरैया चोंच मारती बार-बार---मछली इधर नहीं तो उधर चल

खाएगी क्या वह--------मछली मिली नहीं किसी बार

3. दिए गए सूत्रों के अनुसार गीत से कहानी बनाओ ?

 नए वर्ष में जल में ..। बरसात के सुहाने समय में कितने पक्षी खेत खलिहान मैदान उनमें कोई ....... जब मछली इधर नहीं मिली तो उधर चल।

उत्तर : नये वर्ष में आज पहली बार वर्षा हो रही है। मौसम बड़ा सुहावना हो गया है। चारों तरफ हरियाली ही हरियाली नजर आ रही है। नदी, तालाब सभी जल से भर गये हैं। खेत खलिहानों में चारों तरफ पक्षी चहचहा रहे है। चलो मछली पकड़े। पानी कम होने की वजह से इधर मछली नहीं मिल रही है। चलो दूसरी जगह मछली पकड़ते हैं।

4. किसी उत्सव या कार्यक्रम में तुमने खूब मौज-मस्ती किया और तुम्हें आनंद मिला है। उस दिन तुमने क्या-क्या किया उसे दैनिकी/डायरी के रूप में अपनी कॉपी पर लिखो।

उत्तर : 20 अप्रैल 2016 को मैं अपने मामा की लकड़ी की शादी में उनके घर गया था। मैं, पिताजी और मां के साथ शाम को मामा के घर करीब तीन बजे पहुंचा। मां और पिताजी वहां पर शादी के काम में व्यस्त हो गये। वहां अनेक रिश्तेदारों के और लड़के आये थे। मैं उनके साथ घूमने खेलने लगा। खाने के लिए वहां अनेक चीजें थीं। खेलने के बाद हम लोगों ने जमकर खाना खाया। मुझे आइस्क्रीम बहुत अच्छा लगता है। मैं पांच बार आइस्क्रीम खाया। खाते-खेलते पता नहीं मुझे कब नींद आ गयी और मैं हाल में सो गया। वापस जाने के लिए जब पिताजी ने उठाया तो पता लगा सुबह के पाँच बज रहे है।

5. वैसी दो रचनाओं का नाम लिखो जिनकी मूल कहानी किसी अन्य भाषा में लिखी हो और उसे तुमने अपनी भाषा में पढ़ा और तुम्हें अच्छा लगा हो।

उत्तर : काबुलीवाला और नन्हा संगीतकार

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6. बरसात के किसी एक दिन के अपने अनुभवों के बारे में लिखते हुए अपने मित्र को पत्र लिखो।

उत्तर : 

कोलकाता

20.02.2016

प्रिय विवेक

नमस्कार, 

   आज सुबह जब नींद खुली तो देखा कि बड़े जोर से वर्षा हो रही थी। मेरी खुशी तव और बढ़ गयी जब मां ने कहा कि इस तेज वर्षा में स्कूल जाने की जरूरत नहीं है। विस्तरे से उठकर नहा धोकर, खा पीकर तैयार हुआ और घर पर ही पढ़ने लगा। करीब 2 बजे वर्षा बन्द हो गयी। अब इच्छा हो रही थी कि बाहर जाकर फुटबाल खेलें। माँ ने जाने की स्वीकृति दे दी। मैं जब विद्यालय के बाहर के मैदान में गया तो वहां मेरी कक्षा के कुछ लड़के आ गये थे। हम लोगों ने दो टोली तैयार की और जमकर फुटबॉल खेले। दो घंटा बाद हम लोग थक गये। खेल बन्द कर जब हम लोग घर पहुँचे तो पूरा शरीर और कपड़ा कीचड़ में सना हुआ था।

  मां और पिताजी को मेरा प्रणाम कहना।


तुम्हारा मित्र

अरविन्द

8. नीचे के प्रश्नों का उत्तर अपनी भाषा में लिखो।

8.1 प्रकृति को बारिश किस तरह बचाती है?

उत्तर : प्रकृति में हम अपने चारों ओर खेत-खलिहान, बगीचे, नदी-तालाब आदि देखते हैं। जब बारिश होती है तो नदी, नाले और तालाब पानी से भर जाते हैं। चारों तरफ हरियाली फैल जाती है। पक्षी मस्ती से चहचहाने लगते हैं। जानवरों को खूब भोजन मिलता है। पेड़-पौधे हरे भरे हो जाते है। चारों तरफ खुशी छा जाती है। इस तरह बारिश प्रकृति को बचाती है।

8.2 अकाल या सूखा कहने से क्या समझ में आता है?

उत्तर : जय वर्षा नहीं होती है तो फसलों की बुवाई नहीं हो पाती और जमी हुयी फसल सूख जाती है। अतः लोगों के पास खाने का अभाव हो जाता है। लोग भूखों मरने लगते है। इस भुखमरी को ही सूखा या अकाल कहते हैं।

8.3 बारिश नहीं होने के कारण मनुष्यों, पशु-पक्षियों, पेड़-पौधों की दशा कैसी हो गई थी?

उत्तर : बारिश नहीं होने से भोजन के अभाव में मनुष्यों, पशु-पक्षियों और पेड़-पौधों की हालत खराब हो गयी थी। सभी अत्यंत दुखी हो गये थे।

8.4 भगवान के राजमहल में पहुँच कर मेढक ने क्या देखा?

उत्तर : भगवान के राजमहल में पहुंचकर मेंढक ने देखा कि वहां पर सभी लोग तरह-तरह के भोज और आनंदोत्सव में मग्न थे। उनकी पत्नियां और मंत्रीगण सभी मौज मस्ती में डूबे हुए थे।

8.5 राजमहल के दृश्य को देखकर मेंढक गुस्से में आकर उत्तेजित क्यों हो गया?

उत्तर : पृथ्वी पर पानी नहीं बरस रहा था और यहाँ पर अन्न के अभाव में लोग भूखों मर रहे थे। राजमहल में भगवान के सभी कार्यकर्त्ता और मंत्री मस्ती ले रहे थे। इस दृश्य को देखकर मेढक गुस्से में आकर उत्तेजित हो गया।

8.6 भगवान के सिपाही मधुमक्खी, बाघ और मुरगे के हाथों किस तरह बेहाल हुए?

उत्तर : मधुमक्खी भगवान के सिपाहियों को डंक मारने लगी, बाघ ने उन्हें खा जाने का भय दिखाया और मुर्गा भी अपने पंख फड़फड़ाकर उन्हें डराने लगा।

8.7 शिक्षक/शिक्षिका की सहायता से बारिश से जुड़ी दो कविताएँ और कहानियों का संकलन करो।

उत्तर : (कविता) बरसात

बड़ी निराली ये बरसात,
रिमझिम रिमझिम ये बरसात ! 
ताल तलैया भर जाते हैं, 
मेढक भी तब टर्राते हैं। 
नाच रहा है देखो मोर, 
घूम-घूमकर चारों ओर। 
हरा भरा सब कर देती है, 
सबके मन को हर लेती है।
(कहानी
........

9. कृषि और वर्षा से जुड़े शब्दों को लिखो।

कृषि :- हल, बैल, कुआँ खाद जुआड़ बीज

वर्षा :- नदी पोखर वन गड्ढे हिरयाली बादह

10. कृषि और वर्षा में कैसा मेल है, बताओ।

उत्तर : वर्षा और कृषि एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। जब वर्षा नहीं होती तो भूमि कठोर हो जाती है। उसे जोता नहीं जा सकता। अगर किसी प्रकार भूमि जोत भी दी जाय तो बीज डालने पर वे जमेगे नहीं। यदि बीज उलने के बाद वर्षा रुक जाती है तो पौधे सूख जाते है। जब वर्षा होती है तभी कृषि हो सकेगी। वर्षा के अभाव में कृषि संभव नहीं है।

• टोटो जन-जाति के दो गीतों का हिन्दी अनुवाद नीचे दिया गया है। मनुष्य के साथ प्रकृति के घनिष्ठ संबंधों की बातें इन गीतों में स्पष्ट हैं। सूर्य और चाँद की रोशनी, किरणें लगातार मनुष्यों के ऊपर बरसें – इसी कामना से इन गीतों की उत्पति हुई हैं।


एक

बीता दिन शुरू हुई रात ।
चाँदनी रात ।
है रात पर अंधेरा वैसा नहीं।
अच्छा ही हूँ यहीं।
चाँद बादलों से न ढँक जाए ।
काले बादल न चले आएँ


दो

सबेरे का सूरज निकला, 
नहीं है अब अंधेरा।
इस पर भी इच्छा से,
 अब हम निर्विघ्न,
 जा सकेंगे जगह सब ।
सब पड़ रहा दिखाई अब ।।

(विमलेन्दु मजूमदार की बांग्ला रचना की हिंदी अनुवाद)

👉 कक्षा 5 हिन्दी पाठ बहार सम्पूर्ण हल 

👉 तेरहवां पाठ बादल

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Class 5 hindi Pathbahar chapter 11 Bachendri Pal West Bengal Board, कक्षा 5 हिंदी पाठबहार पाठ 11 बछेंद्री पाल पश्चिम बंगाल बोर्ड

कक्षा 5 हिन्दी पाठबहार (NOTES) पश्चिम बंगाल बोर्ड

पाठ 11

बछेन्द्री पाल

शेरपा तेननिंग द्वारा एवरेस्ट विजय के ठीक इक्तीस वर्ष बोद एक बार फिर भारतीयों ने एवरेस्ट विजय का इतिहास रचा। यह


अवसर था किसी भारतीय महिला द्वारा एवरेस्ट शिखर पर पहुँचने का। २३ मई, सन् १९८४ का दिन सम्पूर्ण भारत एवं विशेषकर नारी जगत् के लिए गौरव और सम्मान का दिन था। इसी दिन प्रथम भारतीय महिला बछेन्द्री पाल ने एवरेस्ट की चोटी पर कदम रखा।

 उत्तर काशी (उत्तरांचल) के नाकुरी गाँव में जन्मी बछेन्द्री पाल ने साहस और दृढ़ निश्चय का परिचय देते हुए एवरेस्ट शिखर तक पहुँचने में सफलता प्राप्त की। इन्हें बचपन से ही पर्वत बहुत आकर्षित करते थे। जब ये एम०ए० की पढ़ाई कर रहीं थी उनके मन में पर्वतराज हिमालय की सबसे ऊँची चोटी एवरेस्ट पर विजय प्राप्त करने की इच्छा बलवती हुई। अपने इस स्वप्न को पूरा करने के उद्देश्य से इन्होंने नेहरू पर्वतारोहण संस्थान से पर्वतारोहण का प्रशिक्षण प्राप्त किया। इन्होंने बड़ी लगन, मेहनत से पर्वतारोहण के गुर सीखे और कुशलता प्राप्त की। एवरेस्ट यात्रा से पूर्व, इन्होंने नेहरू पर्वतारोहण संस्थान द्वारा आयोजित 'प्री-एवरेस्ट ट्रेनिंग कैम्प-कम-एक्सपीडिशन' में भी भाग लिया।


 आखिरकार २३ मई सन् १९८४ ई० को वह शुभ दिन आ गया जिसका स्वप्न पाल ने बचपन से देखा था, अपने लक्ष्य को पाने के लिए कठिन परिश्रम से प्रशिक्षण प्राप्त किया था। उन्होंने पर्वत विजय करके यह सिद्ध कर दिया कि महिलाएँ किसी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं हैं। उनमें साहस और धैर्य की कमी नहीं है। यदि महिलाएँ ठान लें तो कठिन से कठिन लक्ष्य भी प्राप्त कर सकती है।

 एवरेस्ट विजय अभियान में बछेन्द्री पाल को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। यह साहसिक अभियान बहुत जोखिम भरा था। इसमें कितना जोखिम था इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अंतिम चढ़ाई के दौरान उन्हें साढ़े छः


घंटे तक लगातार चढ़ाई करनी पड़ी। इनकी कठिनाई तब और बढ़ गई जब इनके एक साथी के पाँव में चोट लग गई। इनकी गति मंद पड़ गई थी तब ये पूरी तेजी से आगे नहीं बढ़ सकती थीं। फिर भी ये हर कठिनाई का साहस और धैर्य से मुकाबला करते हुए आगे बढ़ती रहीं। अन्ततः २३ मई, सन् १९८४ को दोपहर एक बजकर सात मिनट पर वे एवरेस्ट के शिखर पर थीं। इन्होंने विश्व के उच्चतम शिखर को जीतने वाली सर्वप्रथम पर्वतारोही भारतीय महिला बनने का अभूतपूर्व गौरव प्राप्त कर लिया था।

 एवरेस्ट विजय के पहले सुश्री बछेन्द्री पाल एक महाविद्यालय में शिक्षिका थीं। एवरेस्ट की सफलता के बाद उनसे प्रेरणा पाकर हमारे देश की सुश्री संतोष यादव नामक एक महिला पुलिस अधिकारी ने सन् १९९२ और १९९३ ई. में लगातार दो बार एवरेस्ट की सफल चढ़ाई की।

[  जीवन परिचय - बछेन्द्री पाल का जन्म 24 मई, 1954 ई. को उत्तर काशी (उत्तराखण्ड) के नाकूरी नामक गाँव के एक खेतिहर परिवार में हुआ था। बछेन्द्री पाल विश्व की सबसे ऊँची चोटी माऊंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली प्रथम भारतीय महिला हैं। इन्होंने बी. एड. करने के उपरांत शिक्षिका बनने के बजाय पेशेवर पर्वतारोही का पेशा अपनाया। इस कार्य के लिए उन्हें अपने परिवार और रिश्तेदारों का विरोध भी सहना पड़ा। पर्वतारोहण का पहला मौका बछेंद्री पाल को 12 वर्ष की उम्र में

आया, जब उन्होंने अपने स्कूल की सहपाठियों के साथ 4000 मीटर की चढ़ाई की। बुलन्द हौंसला, मेधावी और प्रतिभाशाली होने के बावजूद उन्हें कोई अच्छा रोजगार नहीं मिला। जो मिला वह अस्थायी था और मासिक वेतन भी बहुत कम था। इससे बद्री पाल को निराशा हुई और उन्होंने नौकरी के बजाय 'नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग कोर्स' के लिए आवेदन किया। यहाँ से उनके जीवन को नई राह मिली। 1982 ई. में एडवांस वांस कैप कैप के के तौर पर उन्होंने गंगोत्री (6,672 मी.) और रूदुगैरा (5.819 मी.) की चढ़ाई को पूरा किया। इस कैंप में उन्हें ब्रिगेडियर ज्ञान सिंह ने बतौर इंस्ट्रक्टर के रूप में नौकरी दी। 1984 में भारत का चौथा एवरेस्ट अभियान प्रारंभ हुआ। इस अभियान में जो टीम बनी, उसमे बछेद्री के साथ 7 महिलाओं और ।। पुरुषों को शामिल किया गया था। 23 मई, 1984 ई. को दिन के एक बजकर सात मिनट पर 29,028 फुट (8,848 मी.) की ऊँचाई पर 'सागरमाथा (एवरेस्ट)' पर भारत का झंडा लहराकर बछेग्री पाल दुनियाँ की ड्वी महिला बनीं। 1994 है० में बछेंद्री पाल ने महिलाओं के साथ गंगा नदी में हरिद्वार से कोलकाता तक 2,500 500 किमी. लंबे नौका अभियान का नेतृत्व किया। वर्त्तमान समय में बछेन्द्री पाल 'टाटा आयरन एण्ड स्टील' में कार्यरत हैं, जहाँ वह चुने हुए लोगों को रोमांचक अभियानों का प्रशिक्षण देती हैं। केन्द्र सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया है।

शब्दार्थ - अवसर = मौका। गुर = गुण। स्वप्न = सपना। सिद्ध = साबित। जोखिम = खतरा। मंद = धीमा।

👉 कक्षा 5 हिन्दी पाठ बहार सम्पूर्ण हल

 अभ्यासमाला 

1. संक्षेप में उत्तर दो।

1.1 बछेन्द्री पाल का जन्म कहाँ हुआ था?

उत्तर : बछेन्द्री पाल का जन्म उत्तर काशी (उत्तरांचल) के नाकुरी गांव में हुआ था।

1.2 उन्हें कौन आकर्षित करता था?

उत्तर : उन्हें पर्वत आकर्षित करते थे।

1.3 उनके मन में कौन सी इच्छा बलवती हुई?

उत्तर : उनके मन में पर्वतराज हिमालय की सबसे ऊँची चोटी एवरेस्ट पर विजय प्राप्त करने की इच्छा बलवती हुई।

1.4 कौन सा दिन सम्मान और गौरव का दिन था?

उत्तर : 23 मई 1984 का दिन सम्मान और गौरव का दिन था।

1.5 क्या महिलाएँ पुरुषों से पीछे हैं?

उत्तर : महिलाएं अब किसी मायने में पुरुषों से पीछे नहीं है।

1.6 कितने घंटे उन्होंने लगातार चढ़ाई की?

उत्तर : अन्तिम चढ़ाई में उन्होंने लगातार साढ़े छः घंटे चढ़ाई की।

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर अपनी भाषा में लिखो।

2.1 बछेन्द्री पाल ने किस पर्वतारोहण संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त किया था?

उत्तर : बछेन्द्री पाल ने नेहरू पर्वतारोहण संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त किया था।

2.2 पर्वतारोहण संस्थान कौन सा कार्य करवाता है?

उत्तर : पर्वतारोहण संस्थान पर्वत पर चढ़ने वालों को प्रशिक्षण देता है।

2.3 पर्वतारोहण एक जोखिम भरा काम है, किस प्रकार ?

उत्तर : पर्वतारोहण एक जोखिम भरा काम है क्योकि पर्वतारोही को पर्वत के ऊँचे शिखरों पर सीधे चढ़ना पड़ता है। कोई निश्चित रास्ता नहीं रहता है। पर्वतारोही को कठोर और बर्फ वाले दुर्गम रास्तों पर चढ़ना पड़ता है, जहां से फिसलकर गिरने पर मौत निश्चित होती है। कभी-कभी चट्टाने खिसक जाती हैं या बर्फीले तूफान आ जाते हैं।

2.4 अपने लक्ष्य को पाने के लिए हमें क्या करना पड़ता है?

उत्तर : अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हमें लगन और परिश्रम से अपने काम को करना पड़ता है।

2.5 साहस और दृढ़ निश्चय हमें कहाँ पहुँचा सकते है?

उत्तर : साहस और दृढ़ निश्चय हमे अपने लक्ष्य तक पहुंचा सकते है।

2.6 बछेन्द्री पाल की एवरेस्ट पर मिली सफलता क्या साबित करती है?

उत्तर  : बच्छेन्दी पाल को एवरेस्ट पर मिली सफलता ने यह सिद्ध कर दिया कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं हैं।

3. निम्नलिखित शब्दों का प्रयोग कर वाक्य बनाओ।

शिखर, बचपन, परिश्रम, लक्ष्य, धैर्य

उत्तर : शिखर पर्वत शिखर सदैव बर्फ से ढके रहते हैं।

बचपन बचपन का जीवन चिन्ता मुक्त होता है।

परिश्रम :  परिश्रम ही सफलता की कुंजी है।

लक्ष्य : अपने लक्ष्य को प्राप्त करना ही हमारा ध्येय होना चाहिए।

धैर्य :  धैर्य सभी कष्टों को दूर कर देता है।

4. हिमालय के तीन पर्यायवाची शब्द लिखो

उत्तर  : नगराज, पर्वतराज, गिरिराज।

5. पढ़ो और समझो।

वह धीरे-धीरे चलता है। वह धीरे-धीरे चलती है।

वह कब गया? वे कब गये?

वह बहुत रोया? वह बहुत रोयी।

वह क्यों गया? वे क्यों गये?

वह आया था, परन्तु तुम नहीं मिले।

कपड़े पसन्द थे, लेकिन मेरे पास पैसे कम थे।

काम पूरा हो चुका है इसलिए तुम जा सकते हो।

कुछ शब्दों के रूप में किसी भी दशा में परिवर्तन नहीं होता है। हर जगह एक ही रूप मैं प्रयुक्त होते हैं। ऐसे शब्दों को अव्यय शब्द कहते हैं। जैसे :- कब, अब, तब, यहाँ, धीरे-धीरे, आज-कल, क्यों और किन्तु, परन्तु, लेकिन, इसलिए आदि।

6. नीचे दिए गए अव्यय शब्दों का प्रयोग करते हुए एक-एक वाक्य बनाओ।

और, किन्तु, अब, वहाँ, किन्तु, तथा, इसलिए

उत्तर : और थोड़ा भोजन लाओ। किन्तु वह कुछ खाया नहीं। अब आप अपना काम करो। राम तथा मोहन घर गये। वहाँ क्या कर रहे हो? तुम यहाँ तक आये, इसीलिए मैंने तुमको यह पुस्तक दी।

👉 कक्षा 5 हिन्दी पाठ बहार सम्पूर्ण हल 

7. पर्वतारोहण के समय काम आने वाले विभिन्न उपकरणों को उनके चित्रों द्वारा पहचानो।

उत्तर : स्वयं कीजिए।

8. हमारे देश के विभिन्न पर्वतों/ पहाड़ों का नाम जानकर लिखो।

उत्तर : हिमालय, कंजनजंघा, अरावली, पारसनाथ, महादेव, मैकाल।

9. हमारे राज्य के कुछ प्रमुख पर्वतों / पहाड़ों का नाम जानकर लिखो

उत्तर : सिगलीला पर्वत, कर्सियांग के पहाड़, अयोध्या पहाड़, बिहारी काथा।

10. हमारे राज्य के एक प्रमुख मनोरम पर्वतीय शहर का नाम क्या है?

उत्तर : हमारे राज्य के एक प्रमुख मनोरम पर्वतीय शहर का नामः दार्जिलिंग


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👉 बारहवां पाठ. पहाड़िया वर्षा के सुर में

👉 तेरहवां पाठ बादल

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Class 5 hindi Pathbahar chapter 10 bhul Gaya Hai kyon Insan ? West Bengal Board, कक्षा 5 हिंदी पाठबहार पाठ 10 भूल गया है क्यों इंसान ? पश्चिम बंगाल बोर्ड

 कक्षा 5 हिन्दी पाठबहार (NOTES) पश्चिम बंगाल बोर्ड

पाठ 10
भूल गया है क्यों इंसान?


हरिवंश राय 'बच्चन'
[  जीवन परिचय - उत्तर छायावादी युग के प्रख्यात कवि हरिवंश राय 'बच्चन' का जन्म 27 नवम्बर, 1907 ई. को प्रतापगढ़ जिला के एक छोटे से गाँव बाबूपट्टी के कायस्थ परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम प्रताप नारायण श्रीवास्तव एवं माता का नाम सरस्वती देवी था। उन्होंने काशी और इलाहाबाद में शिक्षा प्राप्त कर कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से अंग्रेजी विषय में पी.एच.डी. की उपाधि प्राप्त की।
  बच्चन जी कई वर्षों तक इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के प्राध्यापक रहे। 1955 ई. में हिन्दी विशेषज्ञ होकर विदेश मंत्रालय में दिल्ली चले गये। 1966 ई. में उन्हें राज्यसभा का सदस्य मनोनीत किया गया। 18 जनवरी 2003 ई. को मुंबई में बच्चन जी का निधन हो गया।
 कृतियाँः 'मधुशाला', 'मधुबाला', 'मधुकलश', 'सतरंगिणी', 'मिलनयामिनी', 'निशा निमंत्रण', 'एकांत संगीत', 'दो चट्टानें', (साहित्य अकादमी पुरस्कार से पुरस्कृत) आदि आपकी प्रमुख रचनाएँ हैं।
हरिवंश राय 'बच्चन' जी की भाषा अत्यंत सरल, माधुर्य गुण युक्त खड़ी बोली हिन्दी है। इसमें कहीं-कहीं प्रतीकों का भी सहारा लिया गया है। वस्तुतः हम कह सकते हैं कि मानवीय भावनाओं के सहज चितेरे 'बच्चन' जी का साहित्य में श्रेष्ठ स्थान है। ]
कविता 
भूल गया है क्यों इंसान ? 
सबकी है मिट्टी की काया, 
सब पर नभ की निर्मल छाया, 
यहाँ नहीं कोई आया है, ले विशेष वरदान। 
भूल गया है क्यों इंसान ?
          धरती ने मानव उपजाए, 
          मानव ने ही देश बनाए, 
          बहु देशों में बसी हुई है, एकधरा-संतान। 
          भूल गया है क्यों इंसान ?

                    देश अलग हैं, देश अलग हों, 
                    वेश अलग हैं, वेश अलग हों, 
                    मानव का मानव से लेकिन, अलग न अंतरप्राण।                    भूल गया है क्यों इंसान ?

कविता का सारांश 

  आलोच्य कविता में कवि ने मनुष्य की भौतिकवादी विचारधारा पर करारा व्यंग्य किया है। उनका कहना है कि इस संसार में रहने वाले सभी लोगों का निर्माण प्रकृति द्वारा समान रूप से हुआ है। प्रकृति ने उन्हें समान रूप से अपनी गोद में पाला-पोसा है। अर्थात् किसी में कोई भेद भाव नहीं है। सबके ऊपर एक ही आकाश की स्वच्छ छाया पड़ी है। यहाँ जन्मजात कोई विशेष वरदान लेकर पैदा नहीं हुआ है। तो फिर वह अहंकार में क्यों रहता है। मनुष्य यह क्यों भूल गया है कि इस धरती में ही सभी मनुष्यों को बनाया है। मनुष्य भले ही अलग-अलग देशों का निर्माण कर अलग-अलग नाम दिया हो परन्तु सब धरती माता के ही संतान है। सबका हृदय और प्राण एक-सा है। अतः कवि का संकेत है कि जब प्रकृति ने मनुष्य-मनुष्य के बीच कोई भेद नहीं किया तो हमें भी धर्म, जाति, भाषा आदि का भेद भुलाकर एक साथ शांति से रहना चाहिए।
कविता का शब्दार्थ एवं भावार्थ 
1. भूल गया है क्यों इंसान? 
सबकी है मिट्टी की काया, 
सब पर नभ की निर्मल छाया, 
यहाँ नहीं कोई आया है, ले विशेष वरदान। 
भूल गया है क्यों इंसान ?
शब्दार्थ : इंसान = मनुष्य; काया = शरीर; नभ = आकाशः निर्मल = स्वच्छ ।
अर्थ : प्रस्तुत अंश के माध्यम से कवि हरिवंश राय बच्चन का कहना है कि लोगों को आपस में कोई भेदभाव नहीं करना चाहिए। मनुष्य यह क्यों भूल गया है कि सभी लोगों का शरीर एक ही मिट्टी से बना है। सभी लोगों पर आकाश की स्वच्छ छाया एक समान रूप से पड़ती है। कोई विशेष वरदान लेकर यहां नहीं आया है। प्रकृति ने समान रूप से सबका निर्माण किया है।
2. धरती ने मानव उपजाए, 
मानव ने ही देश, बनाए, 
बहु देशों में बसी हुई है, एकघरा-संतान। 
भूल गया है क्यों इंसान? 
शब्दार्थ : बहु = बहुत, अनेक घरा = पृथ्वी; संतान = पुत्र ।
अर्थ : प्रस्तुत कविता पंक्तियों के माध्यम से कवि बच्चन जी कहते है कि इस पृथ्वी ने मनुष्यो को उत्पत्र किया है और मनुष्य ने ही देश बनाये हैं। विश्व के अनेक देशों में बसे लोग एक ही धरती माता की संतान हैं। यह बात मनुष्य भूल गया है, इसीलिए मनुष्य-मनुष्य में भेद करता है।
3. देश अलग हैं देश अलग हों, 
वेश अलग हैं, वेश अलग हों, 
मानव का मानव से लेकिन, अलग न अंतरप्राण। 
भूल गया है क्यों इंसान ? 
शब्दार्थ : वेश = भेस; अंतरप्राण = हृदय और प्राण।
अर्थ : प्रस्तुत कविता पंक्तियों के माध्यम से कवि हरिवंश राय बच्चन जी कहते हैं कि देश अलग हो सकते है और वेश भी एक मानव का दूसरे मानव से अलग हो सकते हैं। लेकिन प्रत्येक मनुष्य का हृदय और प्राण तो एक ही है। मनुष्य इस बात को क्यों भूल गया है। अतः कवि चाहते है कि मनुष्य से मनुष्य का भेद समाप्त हो।
अभ्यासमाला 

1. संक्षेप में उत्तर दो।

1.1 इस कविता के रचयिता कौन हैं?
उत्तर : इस कविता के रचयिता श्री हरिवंश राय बच्चन हैं।
1.2 कविता में किसके बारे में कहा गया है?
उत्तर : कविता में मनुष्य-मनुष्य के भेद के बारे में कहा गया है।
1.3 हमारी काया किससे बनी है?
उत्तर : हमारी काया मिट्टी से बनी है।
1.4 धरती ने क्या उपजाए?
उत्तर : धरती ने मनुष्य के साथ-साथ सभी जीवों को उपजाए।
1.5 हम पर किसकी छाया है?
उत्तर : हम पर आकाश की निर्मल छाया है।
1.6 बहु देशों में कौन बसे है?
उत्तर :बहु देशों में एक ही पृथ्वी के विभिन्न तरह के मनुष्य बसे हैं।
2. निम्नलिकित प्रश्नों के उत्तर अपनी भाषा में लिखो।
1.2 कविता इंसानों के बारे में क्या कह रही है?
उत्तर : कविता इंसानों के बारे में कह रही है कि प्रत्येक मनुष्य का शरीर एक ही मिट्टी से बना हुआ है। यहां कोई विशेष वरदान लेकर नहीं आया है। धरती ने मनुष्य बनाये हैं और मनुष्य ने देश बनाये है। विभिन्न देशों में एक ही धरती की संताने बसी हैं। इसके बावजूद भी एक ही मिट्टी से बना मानव इस बात को भूल गया है।
2.2 कविता के अनुसार हम कौन सी बात भूल गए हैं?
उत्तर : कविता के अनुसार हम यह बात भूल गये हैं कि हमारा निर्माण एक ही मिट्टी से हुआ है और एक ही आकाश की निर्मल छाया हम सब पर समान रूप से पड़ती है।
2.3 यह कविता हमें कैसा मानव बनने की प्रेरणा दे रही है?
उत्तर : यह कविता हमें भेद-भाव रहित मानव बनने की प्रेरणा दे रही है।
2.4 मानव के साथ मानव का कैसा नाता होना चाहिए?
उत्तर : मानव के साथ मानव का प्रेम और सहयोग का नाता होना चाहिए।
2.5 हमारी धरा पर विभिन्न देशों में क्या बसा हुआ है?
उत्तर : हमारी धरा पर विभिन्न देशों में एक ही धरा की संतान मनुष्य बसा हुआ है।
2.6 'यहाँ नहीं कोई आया है, ले विशेष वरदान।' कहने का अर्थ क्या है?
उत्तर : 'यहाँ' नहीं कोई आया है, ले विशेष वरदान का अर्थ है कि इस पृथ्वी पर प्रत्येक व्यक्ति समान है, उसे भगवान या प्रकृति ने किसी प्रकार की कोई विशिष्टता नहीं प्रदान की है। अतः मनुष्यों को आपस में एक दूसरे से कोई भेद-भाव नहीं करना चाहिए।
2.7 इस कविता का सारांश अपने शब्दों में लिखो।
उत्तर : प्रस्तुत कविता 'भूल गया है क्यों इंसान' में कवि श्री हरिवंश राय 'बच्चन' कहते हैं कि इस विश्व में जितने लोग है सभी का निर्माण प्रकृति द्वारा एक समान रूप से हुआ है तथा प्रकृति सब की देख-रेख भी समान रूप से करती है। प्रकृति ने किसी का निर्माण विशेष रूप से नहीं किया है। मनुष्य ने अलग-अलग देशों का निर्माण किया है। कवि का कहना है कि देश और वेश अलग-अलग हो सकते हैं, पर मनुष्य हृदय और प्राण एक है। अतः मनुष्य को एक होकर रहना चाहिए। धर्म, जाति, भाषा, रंग, विद्वता, और धन के आधार पर आपस में कोई भेद नहीं करना चाहिए।
• यहाँ कविता का आशय यह है कि प्रकृति ने मनुष्य के निर्माण में कोई भेद नहीं किया है। भेद का निर्माण मनुष्य ने ही किया है। यही मानव निर्मित भेद ही हमारे कष्टों का कारण है। अतः भेद-भाव त्यागकर हमें एक होकर शान्ति से रहना चाहिए।
3. निम्नलिखित शब्दों से तुकान्त शब्दों की जोड़ी बनाओ।
इंसान, दानव, छाया, वेश, बनाए, भूल, संतान, मानव, काया, देश, उपजाए, फूल।

उत्तर : इंसान = संतान; दानव = मानवः छाया = काया; वेश = देश; बनाए = उपजाए; भूल = फूल।
4. निम्नलिखित शब्दों का वाक्य में प्रयोग करोः मानव, संतान, विशेष, निर्मल, मिट्टी।
उत्तर : मानवः इस पृथ्वी पर मानव ईश्वर की सर्वोत्तम कृति है।
संतानः अपनी संतान से सब को प्रेम होता है।
विशेषः समाज के गरीबों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
निर्मलः पृथ्वी पर सभी मनुष्यों के ऊपर एक आकाश की निर्मल छाया पड़ती है।
मिट्टीः मिट्टी की देह एक दिन मिट्टी में मिल जायगी।
5. इंसानों में मेल रहे इसके लिए तुम क्या-क्या करना चाहोगे? अपनी भाषा में लिखकर बताओ।
उत्तर : इंसानों में मेल रहे इसके लिए मैं निम्नलिखित कार्य करूँगा-
(1) सब के साथ सदैव नम्रता का व्यवहार करूँगा।
(2) यदि कोई मुझे कड़े शब्द कहेगा तब भी उस पर क्रोध नहीं करूँगा।
(3) कभी किसी व्यक्ति की शिकायत दूसरे से नहीं करूँगा।
(4) सदा सत्य आचरण करूँगा।
(5) हमेशा बड़ों के आदेशों का पालन करूंगा।

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👉कक्षा 5 हिन्दी पाठबहार पाठ 11 बछेंद्री पाल

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Class 5 hindi Pathbahar chapter 9 Vividhta Mein Ekta West Bengal Board, कक्षा 5 हिंदी पाठबहार पाठ 9 विविधता में एकता पश्चिम बंगाल बोर्ड

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पाठ 9

विविधता में एकता

 मारा देश भारत विश्व के मानचित्र पर अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। हमारे देश की संस्कृति प्राचीन एवं महान है। जनसंख्या की दृष्टि से हमारा देश विश्व का दूसरा सबसे बड़ा देश है। हमारे देश में अनेक धर्मों के मानने वाले लोग रहते हैं। वे सभी आपस में प्रेमपूर्वक तथा मिल-जुल कर रहते हैं। पर्वतों

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एवं नदियों ने भारत को भीतर से विभाजित कर कई क्षेत्र बना दिए हैं। इस देश के उत्तरी छोर पर कश्मीर है। कश्मीर की जलवायु मध्य एशिया की जलवायु के समान है। कश्मीर को 'धरती का स्वर्ग' कहा जाता है। वहाँ को हरी-भरी घाटियाँ सैलानियों का मन मोह लेती हैं। डल झील में तैरते शिकारे हमें कल्पना लोक में ले जाते हैं। शालीमार और निशात बाग अपने अनुपम सौंदर्य के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध हैं।

 इसके विपरीत भारत के दक्षिणी छोर पर कुमारी अंतरीप है, जहाँ के घरों की रचना और लोगों का रंग-रूप श्रीलंका के निवासियों के समान है। इस प्रकार भारत के दोनों छोरों की जलवायु में पर्याप्त अंतर दिखाई पड़ता है।


 जलवायु की इस भिन्नता ने लोगों के रहन-सहन, वेशभूषा एवं खान-पान में भी काफी अंतर ला दिया है।

 पहाड़ी एवं रेगिस्तानी क्षेत्र के लोगों को अधिक परिश्रम करना पड़ता है फलतः वे साहसी एवं निडर होते हैं। मराठों एवं राजपूतों की वीरता का साक्षी हमारा इतिहास भी है।

 जलवायु का प्रभाव वेशभूषा पर भी पड़ता है। पर्वतीय भागों में अधिक ठंड पड़ती है, अतः वहाँ के निवासी ऊनी वस्त्रों का प्रयोग करते हैं। समुद्र तट के निकट बसे लोगों को ऊनी वस्त्रों की आवश्यकता ही नहीं पड़ती। इसी प्रकार खान-पान में भी काफी भिन्नता है। समुद्रतटीय इलाकों में मछली-भात उनका प्रिय भोजन है तो उत्तरी भारत में दाल-रोटी और सब्जी बड़े चाव के साथ खायी जाती है।


 भारत में अनेक भाषाएँ बोली और समझी जाती हैं। हिंदी अधिकांश भारतीयों की भाषा है, अतः इसे राष्ट्रभाषा स्वीकार किया गया है। यही एक भाषा है जो सारे भारत की एकता के सूत्र में पिरोने का कार्य कर सकती है।

 यह तो हुई विविधता की कहानी। अब हम इनके पीछे छिपी एकता पर नजर डालें।

 यदि हम ध्यानपूर्वक देखें तो ये विविधताएँ ऊपरी हैं। विभिन्नता में एकता भारत की विशेषता है। भारत विश्व का अनोखा देश है। यहाँ के निवासी धर्म-संप्रदाय, रीति-रिवाज, रहन-सहन आदि के भेदों को भूलकर देश की एकता और अखंडता में विश्वास रखते हैं। भारतीय संस्कृति में विभिन्न धर्मों का मिला-जुला रूप झलकता है। चाहे हम भिन्न-भिन्न भाषाएँ बोलते हों, किंतु इन भाषाओं के भीतर बहने वाली विचारधारा समान है। एक ही विषय को लेकर लेखकों ने अपनी-अपनी भाषा में साहित्य की रचना की है। भारत की अधिकांश भाषाओं पर संस्कृत का प्रभाव है।

 हमारी एकता के उदाहरण है-हमारे धार्मिक स्थल।

 उत्तर अथवा दक्षिण आप कहीं भी चले जाइए, आपको जगह-जगह एक ही संस्कृति के मंदिर दिखाई देंगे। मंदिरों का वास्तुशास्त्र हो

 अथवा उनकी मूर्तियाँ सभी में पर्याप्त समानता दिखाई देगी। इसी प्रकार मस्जिद, गुरुद्वारे और चर्च भी सारे भारत में लगभग एक ही जैसे दिखायी देंगे। विभिन्न धार्मिक विधियों में भी काफी समानता है।

 हमारे देश में प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म के अनुसार धार्मिक विधियों को करने और उसी के अनुसार जीवन व्यतीत करने की पूरी स्वतंत्रता है। हमें सदैव यह स्मरण रखना चाहिए कि हमारे किसी व्यवहार से दूसरे धर्म के अनुयायी की भावना को ठेस न पहुँचे। जब हम इस प्रकार का ध्यान नहीं रखते तभी दो संप्रदायों के मध्य कटुता बढ़ती है और सांप्रदायिक दंगे होते हैं। इन दंगों में निदर्दोष व्यक्ति मारे जाते हैं। हमें 'जियो और जीने दो' का रास्ता अपनाना चाहिए।

 हमें सदैव यह याद रखना चाहिए कि हम एक महान देश के निवासी हैं। हमें इस महान देश की हर कीमत पर रक्षा करनी है। देश की एकता को बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। हमें अपने देश के साथ प्रेम करना चाहिए। देश के साथ प्रेम करने के लिए देश के स्वरूप को जानना अति आवश्यक है। बिना परिचय के प्रेम नहीं हो सकता। देश के मनुष्यों, पर्वतों, नदियों, पशु-पक्षियों एवं पेड़-पौधों के साथ प्रेम करना ही देश-प्रेम है। अपने देश की एकता को अक्षुण्ण बनाए रखना हमारा परम कर्तव्य है।

शब्दार्थ - मानचित्र = नक्शाः विश्व = संसार; साक्षी = गवाह; अनुयायी = माननेवाले; प्राचीन = पुरानीः विभाजित = बँटा हुआ; दृष्टिपात = नज़र डालना; अधिकांश =अधिकतर; सौंदर्य = सुंदरताः अनुपम = जिसकी उपमा न हो; वास्तुशास्व = भवन निर्माण कला; कटुता = कड़वापनः व्यतीत = वितानी; सांप्रदायिक = अलग-अलग संप्रदायों के या गुटों के।
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अभ्यासमाला 

1. संक्षेप में उत्तर दो।

1.1 विश्व के मानचित्र में भारत का क्या स्थान है?

उत्तर : भारत का विश्व के मानचित्र में एक महत्वपूर्ण स्थान है।

1.2 जनसंख्या की दृष्टि से भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है?

उत्तर : भारत का जनसंख्या की दृष्टि से विश्व में दूसरा स्थान है।

1.3 किस स्थान को भारत का स्वर्ग कहा जाता है?

उत्तर : कश्मीर को भारत का स्वर्ग कहा जाता है।

1.4 कश्मीर के दो प्रसिद्ध बागों के नाम लिखो।

उत्तर : कश्मीर के दो प्रसिद्ध बागों के नाम शालीमार बाग और निशात बाग है।

1.5 भारत में सबसे अधिक बोली जानेवाली भाषा का नाम बताओ?

उत्तर : भारत में सबसे अधिक बोली जानेवाली भाषा का नाम हिन्दी है।

1.6 'विविधता में एकता' कहने से तुम क्या समझते हो?

उत्तर : विविधता में एकता' कहने का तात्पर्य धर्म-संप्रदाय, रीति-रिवाज, रहन-सहन आदि के भेदों के बावजुद देश की एकता और अखंडता में विश्वास।

1.7 भारत के दक्षिणी छोर के बारे में बताओ।

उत्तर : भारत के दक्षिणी छोर पर कुमारी अंतरीप है। यहाँ के घरों की रचना और लोगों का रंग रूप भी लंका के निवासियों के समान है।

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर अपनी भाषा में लिखो।

2.1 जलवायु का प्रभाव किस पर पड़ता है? और किस प्रकार ?

उत्तर : जलवायु का प्रभाव हमारे प्रत्येक कार्य पर पड़ता है। जलवायु ही हमारी पोशाक, वेष-भूषा एवं खान-पान का निर्धारण करती है। पहाड़ी तथा रेगिस्तानी भागों के लोगों को अधिक दूर तक भ्रमण करना पड़ता है। अतः इन क्षेत्रों के लोग अपेक्षाकृत अधिक परिश्रमी और साहसी होते है। मराठों और राजपूतों की वीरता किसी से छिपी नहीं है। पर्वतीय भागों में अधिक ठंडक पड़ती है। अतः यहाँ के लोग ऊनी वस्त्रों का प्रयोग करते है। समुद्र तटीय भागों में ठंडक नहीं पड़ती। अतः यहां के लोग साधारण कपड़ा पहनते हैं। समुद्र तटीय भाग के लोग मछली भात खाते हैं तथा उत्तरी भारत के लोग रोटी-सब्जी एवं दाल खाते हैं। इस प्रकार हम देखते हैं कि जलवायु हमारे खान-पान एवं वेश-भूषा का निर्धारण करती है।

2.2 'विभिधता में एकता भारत की विशेषता है।' कैसे ?

उत्तर : भारत में विभिधता में एकता विद्यमान है। यहाँ जाति, धर्म, जलवायु तथा संस्कृति के आधार पर पर्याप्त विभिन्नता पायी जाती है। पर इस विविधता में भी भारत की सांस्कृतिक एकता निहित है। पूरे देश में अनेक भाषाएँ बोली जाती है, पर संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है तथा हिन्दी भारत की राजभाषा है। भारत में हिन्दू, मुसलमान, सिख, इसाई आदि विविध धर्मों के लोग रहते हैं, पर प्रत्येक धर्मावलम्बी एक दूसरे का आदर करते हैं एवं प्रेम से रहते हैं। सभी भाषाओं के लेखक एक ही विचार के अनुसार लेखन कार्य करते है। यहां के मन्दिरों एवं मस्जिदों की बनावट अपने-अपने धर्म की वास्तुकला के अनुसार है। पूरे देश के हिन्दू एक ही परम ईश्वर का विश्वास करते है। लोगों के पूजा पाठ में भी समानता दिखाई देती है।

• इस प्रकार हम देखते हैं कि भारत की विभिन्नता में भी एकता है।

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2.3 धार्मिक दृष्टि से भारत वर्ष में क्या-क्या विविधताएँ हैं और क्या-क्या समानताएँ हैं?

उत्तर : भारत में हिन्दू, मुसलमान, ईसाई, सिख, जैन, बौद्ध आदि विविध धर्मों के लोग रहते हैं। उनके पूजा स्थलों की बनावट एवं मूर्तियों को देखते हैं तो कुछ विविधता होते हुए भी उनमें मूल रूप से एकता पायी जाती है। पूरे देश के हिन्दू विविध देवी-देवताओं की पूजा करते हैं, पर वे मानते हैं कि ईश्वर एक ही है, जिसकी पूजा विविध रूपों में होती है। मन्दिर की वस्तुएँ हों अथवा उनकी मूर्तियाँ सब में पर्याप्त समानता दिखाई देगी। इसी प्रकार मस्जिद, गुरुद्वारे और चर्च भी भारत में एक ही प्रकार के दिखायी देंगे।

• भारत में प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म के अनुसार पूजा करने और उसी के अनुसार जीवन व्यतीत करने की पूरी स्वतंत्रता है।

2.4 हमें सदैव क्या बात याद रखनी चाहिए?

उत्तर : हमें सदैव यह बात याद रखनी चाहिए कि हम भारत जैसे एक महान देश के निवासी हैं। हमें अपने इस महान देश की हर कीमत पर रक्षा करनी है। अपने देश की एकता को बनाए रखने की जिम्मेदारी हमारे ऊपर है। हमें अपने देश से प्यार करना चाहिए।

2.5 भारत विश्व का अनोखा देश है? किस प्रकार ?

उत्तर : भारत विश्व का अनोखा देश है क्योंकि यहां पर विविध प्रकार की जलवायु तथा विविध भू-स्वरूप पाया जाता है। भारत् भारत में अनेक धर्मों के लोग एक साथ रहते हैं, हैं, अनेक भाषाएं बोलते हैं, अनेक प्रकार का भोजन करते है और विविध प्रकार की पोशाक पहनते हैं। इतनी विविधताओं के होते हुए भी भारत सांस्कृतिक दृष्टि से एक है, तथा पूरे देश के लोग एक साथ मिलकर भाई-भाई की तरह प्रेम से रहते हैं।

2.6 हमारे देश में किस बात की स्वतंत्रता है?

उत्तर : हमारे देश में अनेक धर्मों के लोग निवास करते हैं. पर सबको यह स्वतंत्रता है कि वे अपनी इच्छा के अनुसार अपने-अपने धर्म का पालन करें।

2.7 सारे भारत को एकता के सूत्र में पिरोने का कार्य हिन्दी किस प्रकार कर सकती है?

उत्तर : पुरे भारत वर्ष में अनेक प्रकार की भाषाएं बोली जाती हैं, परन्तु पुरे देश के अधिकतर लोग हिन्दी बोलते-लिखते और समझते हैं। इसीलिए हिन्दी को राजभाषा के रूप में मान्यता प्राप्त है। इस प्रकार सारे भारत को एकता के सूत्र में पिरोने का काम हिन्दी करती है।

2.8 भारतीय संस्कृति में विभिन्न धर्मों का मिला-जुला रूप झलकता है। कैसे?

उत्तर : भारतीय संस्कृति में विभिन्न धर्मो का एक मिला-जुला स्वरूप झलकता है। चाहे आप जितनी ही भिन्न-भित्र भाषा क्यों न बोलते हो किन्तु इन सभी भाषाओं के भीतर बहने जितनी विचारधारा एक समान है। भारत के अधिकतर धर्म ईश्वर की सत्ता को स्वीकार करते हैं। यही बात हमारी संस्कृति में भी परिलक्षित होती है।

2.9 क्या तुमने दक्षिण भारत का भ्रमण किया है? वहाँ की किन-किन बातों ने तुमको आकर्षित किया है?

उत्तर : हमने दक्षिण भारत का भ्रमण किया है। दक्षिण भारत के भ्रमण के समय मैंने देखा कि उत्तर भारत की अपेक्षा दक्षिण भारत प्राचीन संस्कृति के विचार से अधिक सम्पन्न है। वहां के मन्दिरों की बनावट भी उत्कृष्ट कोटि की है। यहां के लोग अधिक परम्परा प्रिय हैं एवं धार्मिक दृष्टि से उदार होते हुए भी वे अपने धर्म के प्रति गहरी श्रद्धा रखते हैं।

2.10 विभिन्न धर्मों की धार्मिक-विधियों में तुम्हें क्या समानता दिखाई देती है?

उत्तर : विभित्र धर्मो की धार्मिक विधियों में हमें जो समानता दिखाई देती है उसके अनुसार हिन्दू धर्म के मन्दिरों की वास्तुकला पूरे देश में एक समान है। पूरे देश के चर्चा, मस्जिदों और गुरुद्वारों का निर्माण भी एक प्रकार से ही हुआ है।

2.11 'जलवायु का प्रभाव वेशभूषा पर पड़ता है।' - क्यों?

उत्तर : किसी देश की जलवायु का सबसे अधिक प्रभाव वहाँ के लोगों की वेशभूषा पर पड़ता है, क्योंकि जलवायु के अनुसार ही लोग अपनी पोशाक पहनते हैं। ठण्डी जलवायु में साधारण सूती वस्त्र शरीर की रक्षा नहीं कर सकते। इसी प्रकार गर्म जलवायु में ऊनी कपड़ा पहनना कष्टदायक होगा। अतः हम कह सकते हैं कि जलवायु का प्रभाव वेशभूषा पर पड़ता है।

2.12 देश की एकता को बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। क्यों?

उत्तर : हम सब एक ही भारत के निवासी है। हमारा अस्तित्व तभी तक कायम है जब तक हमारा देश सुरक्षित है। अपने देश की सुरक्षा हमें ही करनी है और हम अपने देश की सुरक्षा एक होकर ही कर सकते है। अतः अपने अस्तित्व तथा अपने देश की रक्षा के लिए यह आवश्यक है कि हम सभी भारतवासी एक दूसरे को अपना भाई मानें और सबसे प्रेम करें।

3. इन प्रत्ययों को अलग करके लिखो। (ता, ईय, क, इक) जैसे - एकता = एक + ता

तटीय = तट + ईय

भारतीय = भारत + ईय

विभिन्नता = विभिन्न + ता

सांप्रदायिक = सम्प्रदाय + इक

आवश्यकता = आवश्यक + ता

समानता = समान + ता

4. बिखरे वर्षों को सजाकर शब्दों को उनके नीचे लिखो।

उत्तर : 

प वि री त  - विपरीत, त र भा  - भारत, न चि मा त्र  - मानचित्र, हि सा त्य - साहित्य, क ए ता - एकता।

5. विपरीतार्थक शब्द लिखो।

प्राचीन - नवीन, एकता - अनेकता, प्रिय - अप्रिय, वीरता - कायरता

6. दिए गए शब्दों का वाक्य में प्रयोग करो।

व्यतीत- सुभाष चन्द्र बोस ने भारतीयों के उत्थान में अपना पूरा जीवन व्यतीत कर दिया।

विभिन्नता - भारत की विभिन्नता में भी एकता मौजूद है।

पर्याप्त - जाड़े के मौसम में पर्याप्त गर्म कपड़ों की आवश्यकता होती है।

अधिकांश - अधिकांश भारतीय लोग हिन्दू धर्म मानते हैं।

7. दिए गए बहुवचन के एकवचन वाले रूप लिखो।

उत्तर :  विविधताएँ - विविधता, इलाकों - इलाका,  भागों-  भाग, घाटियाँ - घाटी, नदियां - नदी, भाषाएँ - भाषा।

8. पाठ के विभिन्न शब्द युग्मों को चुनकर नीचे दी गई तालिका अनुसार लिखो

उत्तर: समान शब्द का दो प्रयोग - जैसे - तरह-तरह, साथ-साथ, समय-समय, रात-रात

दो अर्थपूर्ण शब्द - जैसे-हरे-भरे, दिन-रात, अच्छा-बुरा, सत्य-असत्य, 

एक अर्थपूर्ण दूसरा अर्थहीन - जैसे-खाना-वाना, सोना-वोना, रचना-वचना, हंसना-वसना।

9. नीचे लिखे अनुच्छेद में उचित स्थान पर विराम चिह्नों (,) (1) का प्रयोग करो।

उत्तर : यदि हम ध्यानपूर्वक देखें तो ये विविधताएँ ऊपरी हैं। विभिन्नता में एकता भारत की विशेषता है। भारत विश्व का अनोखा देश है। यहाँ के निवासी धर्म-सम्प्रदाय, रीति-रिवाज, रहन-सहन आदि के भेदों को भूलकर देश की एकता और अखंडता में विश्वास रखते हैं। भारतीय संस्कृति में विभिन्न धर्मों का मिला-जुला रूप झलकता है। चाहे हम भिन्न-भिन्न भाषाएँ बोलते हैं, किन्तु इन भाषाओं के भीतर बहने वाली विचारधारा समान है। एक ही विषय को लेकर लेखकों ने अपनी-अपनी भाषा में साहित्य की रचना की है। भारत की अधिकांश भाषाओं पर संस्कृत का प्रभाव है।

10. दिए गए वाक्य को प्रश्नवाचक (?) वाक्य बनाओ। (क्या, कब, कहाँ, कौन, कैसे, कितने आदि जोड़कर)।

पहाड़ी लोग साहसी एवं निडर होते हैं।
कश्मीर की वादियाँ हमारा मन मोह लेती हैं।
भारत में अनेक भाषाएं बोली जाती है।
भारत विश्व का अनोखा देश है।

उत्तर : 

पहाड़ी लोग कैसे होते हैं?
कौन हमारा मन मोह लेती हैं?
भारत में कितनी भाषाएं बोली जाती है?
भारत विश्व का कैसा देश है?

11. बिखरे शब्दों को जोड़कर वाक्य बनाओ।

प्रश्नः भागों/अधिक/में/पड़ती/है/ठंड

उत्तर: अधिक भागों में ठंड पड़ती है।

प्रश्नः कश्मीर/स्वर्ग/को/कहा/धरती/का/जाता/है।

उत्तर : कश्मीर को धरती का स्वर्ग कहा जाता है।

प्रश्नः महान/निवासी/एक/देश/हम/के/हैं

उत्तर  : हम एक महान देश के निवासी हैं।

प्रश्नः अपने/हमें/प्रेम/देश/से/चाहिए/करना

उत्तर : हमें अपने देश से प्रेम करना चाहिए।

12. दिया गया उदाहरण देखो, समझो और करो।

उदाहरण - कश्मीर भारत का स्वर्ग है। कश्मीर को भारत का स्वर्ग कहा जाता है।

12.1 पश्चिम बंगाल का लोकनृत्य छौ है। 

- छौ को पश्चिम बंगाल का लोक नृत्य माना जाता है।

12.2 मसूरी पर्वतों की रानी है। 

- मसूरी पर्वतों की रानी कही जाती है।

12.3 हिमालय पर्वतों का राजा है।

- हिमालय को पर्वतों का राजा माना जाता है।

13. हमारे देश की विभिन्न भाषाओं/बोलियों का नाम नीचे दिए मानस मानचित्र में लिखो

उत्तर : 

14. विभिन्न धर्मों की विशेषताओं के बारे में जानकारी प्राप्त करो। विभिन्नता में एकता विषय पर अपनी कक्षा में परिचर्चा का आयोजन करो। अपने राज्य के सांस्कृतिक जीवन के बारे में बताओ।

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Class 5 hindi Pathbahar chapter 8 Shahid Bhagat Singh West Bengal Board, कक्षा 5 हिंदी पाठबहार पाठ 8 शहीद भगतसिंह पश्चिम बंगाल बोर्ड

कक्षा 5 हिन्दी पाठबहार (NOTES) पश्चिम बंगाल बोर्ड

पाठ 8
शहीद भगतसिंह

उस दिन वीरा स्कूल के लिए घर से निकला था। संध्या होने पर भी जब वह घर नहीं लौटा तो सभी घरवाले घबरा उठे क्योंकि जलियांवाला बाग की घटना से सभी घबराए हुए थे। काफी रात


बीतने पर वीरा बड़ा उदास-सा घर लौटा तो उसकी बड़ी बहन बोली, "कहाँ गया था वीरा? सब जगह तुझे ढूँढ़ा, चल फल खा ले।" वह फफक कर रो उठा। उसने अपनी जेब से एक शोशी निकाली जिसमें मिट्टी भरी हुई थी। उसने कहा, "यह मिट्टी नहीं, अमर शहीदों का खून है।" वह रोज उस शीशी में भरी हुई मिट्टी से तिलक लगाता फिर स्कूल जाता।

 'वीरा' नाम का यह बालक बाद में महान क्रांतिकारी भगतसिंह के नाम से प्रसिद्ध हुआ। भारतीय स्वतंत्रता की बलिवेदी पर जिन सपूतों ने अपने प्राणों का बलिदान किया, उनमें सरदार भगतसिंह का नाम सुनहरे अक्षरों में लिखा है।

 सरदार भगतसिंह का जन्म लायलपुर (जो अब पाकिस्तान में है) में २७ सितंबर, १९०७ में हुआ था। उनकी माता का नाम विद्यावती और पिता का नाम किशन सिंह था। उनकी बड़ी बहन का नाम अमरो था। माँ विद्यावती ने उनका लालन-पालन बहुत ही प्यार दुलार से किया। राष्ट्रीयता से ओत-प्रोत उनके परिवार के वातावरण ने बालक भगतसिंह पर अमिट छाप डाली और उनमें क्रांतिकारी भावनाओं का जन्म हुआ।

 एक बार की बात है, भगतसिंह अपने पिता के साथ कहीं जा रहे थे। रास्ते में पिता के एक घनिष्ठ मित्र मिल गए जो खेत में बुवाई का काम कर रहे थे। उनके पिता अपने मित्र से वार्तालाप में लग गए तो भगतसिंह खेत में छोटे-छोटे तिनके रोपने लगे। बालक के इस कार्य को देखकर पिता ने पूछा, "यह क्या कर रहे हो भगतसिंह?" " बंदूकें बो रहा हूँ।" बालक ने उत्तर दिया।

 भगतसिंह जैसे-जैसे बड़े होते गए, उनकी असाधारण प्रतिभा दिखाई पड़ने लगी। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गाँव की पाठशाला में हुई। फिर आगे की शिक्षा के लिए नेशनल कॉलेज लाहौर गए। वहीं उनकी मुलाकात सुखदेव और यशपाल से हुई। तीनों मित्र बन गए और क्रांतिकारी गतिविधियों में भाग लेने लगे।

 ३० अक्टूबर, सन् १९२८ को लाहौर में 'साइमन कमीशन' आने वाला था। भगतसिंह ने कमीशन के बहिष्कार की योजना बनाई। लाला लाजपतराय की अध्यक्षता में उन्होंने साइमन कमीशन का विरोध किया। 'साइमन वापस जाओ', 'इनकलाब जिंदाबाद' के नारे लगाए। पुलिस ने क्रूरतापूर्वक लाठी चार्ज किया। इसी घटना के कारण लाला लाजपतराय की मृत्यु हो गई। क्रोध में आकर उसी दौरान भगतसिंह ने पुलिस कमिश्नर सांडर्स की हत्या कर दी। भगतसिंह और उनके साथियों को गिरफ्तार कर लिया गया। २३ मार्च, १९३१ को राजगुरु, सुखदेव और भगतसिंह को फाँसी की सजा दी गई। यह दिन 'शहीद दिवस' के रूप में मनाया जाता है। उन जैसे हजारों-लाखों वीरों की शहादत और क्रांतिकारी आंदोलनों के कारण ही आज हम आजाद भारत में साँस ले रहे हैं।


 भगतसिंह ने फाँसी पर चढ़ते वक्त अंतिम इच्छा जाहिर की थी- सभी अंग्रेज अधिकारी मेरे सामने खड़े हो जाएं। सिपाही से जेलर, सुपरिटेंडेंट सभी अधिकारी उनके सामने खड़े हो गए। तब उन्होंने कहा- मैं बोलूंगा - 'इन्कलाब' और तुम बोलोगे 'जिन्दाबाद'। फिर सभी उपस्थितों के सामने भगत सिंह ने कहा 'इन्कलाब' तथा उन अंग्रेजों ने 'जिंदाबाद' कहा तब भगत सिंह ने कहा- अब आजादी को कोई रोक नहीं सकता।

शब्दार्थ - संध्या = साम का समय, क्रांतिकारी = अंग्रेजी सत्ता के विरोधी; वार्तालाप = बातचीतः असाधारण = विशेषः राष्ट्रीयता = देशभक्ति की भावना, घनिष्ट = बहुत नजदीक, प्रारंभिक = शुरुआती बहिष्कार = अस्वीकार, विरोध।

 अभ्यासमाला 

1. संक्षेप में उत्तर दो।

1.1 वीरा किसके बचपन का नाम था ?

उत्तर : वीरा भगत सिंह के बचपन का नाम था।

1.2 कौन सी घटना से सब घबड़ाए हुए थे?

उत्तर : जालियांवाला बाग की घटना से सब घबड़ाये हुए थे।

1.3 साइमन ने लाठी चार्ज में क्या दिखाई?

उत्तर : साइमन ने लाठी चार्ज में क्रूरता दिखाई।

1.4 भगत सिंह की प्रारंभिक शिक्षा कहाँ हुई?

उत्तर : भगत सिह की प्रारम्भिक शिक्षा गांव की पाठशाला में हुई।

1.5 उनके घर का वातावरण किससे ओत-प्रोत था?

उत्तर : उनके घर का वातावरण राष्ट्रीयता से ओतप्रोत था।

1.6 भगत सिंह के पिता ने क्या पूछा?

उत्तर : "भगत सिंह के पिता ने पूछा यह क्या कर रहे हो, भगत सिंह।"

1.7 शहीद दिवस कब मनाया जाता है?

उत्तर : शहीद दिवस 23 मार्च को मनाया जाता है।

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर अपनी भाषा में लिखो।

2.1 वीरा स्कूल से देर में क्यों लौटा ? उसके हाथ में क्या था?

उत्तर : वीरा जालियांवाला बाग में चला गया था। अतः वह स्कूल से देर से लौटा। उसके हाथ में एक सीसी थी जिसमें जलियांवालाबाग के शहीदों के खून से सनी मिट्टी थी।

2.2 भगत सिंह पर राष्ट्रीयता से ओत-प्रोत अमिट छाप किसने डाली ?

उत्तर : भगत सिंह पर राष्ट्रीयता से ओत-प्रोत अमिट छाप उनके परिवार के वातावरण ने डाली।

2.3 सरदार भगत सिंह का जन्म कब और कहाँ हुआ था?

उत्तर : भगत सिंह का जन्म 27 सितम्बर सन् 1907 को लायलपुर (पाकिस्तान) में हुआ था।

2.4 नेशनल कॉलेज में उनकी मित्रता किससे हो गई?

उत्तर : नेशनल कालेज में उनकी मित्रता सुखदेव और यशपाल से हो गयी।

2.5 'शहीद दिवस' क्यों मनाया जाता है?

उत्तर : शहीदों के प्रति श्रद्धा अर्पित करने के लिए शहीद दिवस मनाया जाता है।

2.6 आजाद भारत में हम साँस ले रहे हैं किसके कारण?

उत्तर : हम आजाद भारत में शहीदों के बलिदान के कारण साँस ले रहे हैं।

3. रेखा खींचकर आधूरे वाक्यों को मिलाओ।

उत्तर : 

भगतसिह जैसे-जैसे बड़े होते गए ..... उनकी असाधारण प्रतिभा दिखाई पड़ने लगी।

भगतसिह ने कहा .......  मैं बंदूकें बो रहा हूँ।

तीनों मित्र बन गए और ........ क्रांतिकारी गतिविधियों में भाग लेने लगे।

इन्ही शहीदों के कारण हम  .......  आजाद भारत में साँस ले रहे हैं।

4. निम्नलिखित शब्दों के विलोम पाठ में से छाँटकर लिखो।

रात - दिन, सपूत - कपूत, मृत्यु - जन्म, घृणा - प्रेम, साधारण - असाधारण, अंतिम - प्रारम्भिक, शत्रु - मित्र, गुलाम - स्वतंत्र, उदास - खुश

5. कोष्ठक में दिए गए शब्दों में प्रश्नवाचक वाक्य बनाकर प्रश्नवाचक चिह्न (?) लगाओ।

5.1 वीरा काफी रात होने पर उदास सा घर लौटा। (कब)
5.2 भगतसिंह की माता का नाम विद्यावती था। (किसकी)
5.3 रास्ते में पिता के एक घनिष्ठ मित्र मिल गए। (कौन)
5.4 तुम बंदूकें बो रहे हो। (क्या)
5.5 नेशनल कॉलेज में उनकी मुलाकात सुखदेव और यशपाल से हुई। (किससे)

उत्तर : 

5.1 वीरा कब उदास सा घर लौटा ?
5.2 किसकी माता का नाम विद्यावती था?
5.3 रास्ते में कौन मिल गये?
5.4 तुम क्या बो रहे हो?
5.5 नेशनल कॉलेज में उनकी मुलाकात किससे हुई?

6. "कहाँ गया था वीरा? सब जगह तुझे ढूँढ़ा, चल फल खा ले।"

किसने कहा ---- बड़ी बहन ने,        किससे कहा --- वीरा से

"यह क्या कर रहे हो भगतसिंह?"

किसने कहा ---  पिता ने।         किससे कहा - भगत सिह से

7. श्रुतलेखः

क्रान्तिकारी, स्वर्णाक्षर, विद्यावती, राष्ट्रीयता, ओत-प्रोत, घनिष्ठ, वार्तालाप, प्रतिभाएँ, गतिविधियाँ, बहिष्कार,अध्यक्षता, आन्दोलन, फलस्वरूप।

8. नीचे दिए गए शब्द समूह में सही शब्द पर घेरा लगाओ।

राष्ट्रियता, राष्ट्रीयता,राष्ट्रीयता --- रासट्रीयता

घनिसट, घनिषठ, घनिस्ठ --- घनिष्ठ

र्वातालाप, वारतालाप, वार्रतालाप --- वार्तालाप

संध्या, सन्धा, सनधा ---  संधया

9. नीचे दिए गए बहुवचन शब्दों को एकवचन में बदलो।

उत्तर -

भावनाएँ - भावना, प्रतिभाएं - प्रतिभा, पाठशालाएँ - पाठशाला, कामनाएँ - कामना, लाठियाँ - लाठी, बंदूकें - बंदूक

10. नीचे दिए गए शब्दों को अलग-अलग समूह में छाँटकर लिखो? हर समूह में एक-एक शब्द अपनी ओर से भी लिखो।

अध्यक्षता, वार्तालाप, स्वर्णाक्षरों, क्रान्तिकारी, प्रतिभा, शिक्षा, मृत्यु क्रूरता, क्रोध, विद्यालय, परिश्रम, क्षण, वर्ष, उद्योग, वाद्य, श्रमिक, उत्तीर्ण, मूग, आश्रय, उद्योग।

उत्तर - शब्द समूह

क्ष - अध्यक्षता, शिक्षा, क्षण - पक्षी

द्य (द्रद्य) - विद्यालय, उद्योग, वाद्य - उद्यान

श्र - परिश्रम, श्रमिक, आश्रय, क्रांतिकारी, क्रोध, प्रतिभा क्रूरता - क्रमशः

ऋ - मृत्यु, मृग, क्रूरता - मृत्यु 

र् -  वार्तालाप, स्वर्णाक्षरों, वर्ष, उत्तीर्ण - निर्माण

11. नीचे दिए गए वाक्यों में कौन सा काल आया है? पास में लिखो।

11.1 यह क्या कर रहे हो भगत सिह। - वर्तमान काल

11.2 उस दिन वीरा घर से स्कूल के लिए निकला था। - भूतकाल

11.3 लाहौर में साइमन कमीशन आने वाला था। - भविष्यत काल

11.4 आज हम आजाद भारत में साँस ले रहे हैं। - वर्तमान काल

12. पढ़ो, समझो और उदाहरण के अनुसार कार्य करो। 

वीरा स्कूल गया था। वह घर नहीं लौटा।

संज्ञा  - वीरा,    सर्वनाम - वह  

यह क्या कर रहे हो भगत सिंह?

संज्ञा -  भगत सिंह         सर्वनाम -  क्या 

सोहन गाँव जाएगा। उसके दादा जी से मिलने।

संज्ञा - सोहन       सर्वनाम -  उसके 

भगत सिंह जैसे-जैसे बड़े होते गए, उनकी असाधारण प्रतिभा

दिखाई पड़ने लगी।

संज्ञा - भगत सिंह      सर्वनाम - उनकी  

13. पढ़ो, समझो और क्रिया के मूल रूप को काल के अनुसार बदलो।

मूल रप,    वर्तमान काल,     भूतकाल,    भविष्यत काल, 

देना,       -      देता        -      दिया     -     देगा
जाना     -     जाता       -       गया      -    जायेगा
खाना     -    खाता       -      खाया     -    खायेगा
करना     -    करता       -     किया     -     करेगा
पढ़ना     -    पढ़ता       -      पढ़ा      -     पढ़ेगा
लेना       -     लेता       -      लिया      -     लेगा
होना      -       है        -        था        -      होगा

14. नीचे दिए गए स्वतंत्रता सेनानियों के चित्र पहचानकर उनके नाम लिखो।

उत्तर : 


15. हमारे देश के विभिन्न स्वतंत्रता सेनानियों के चित्रों का एक चार्ट बनाकर कक्षा में टांगों।

उत्तर - विद्यार्थी स्वयं करें 

👉 नौवां पाठ. विविधता में एकता

👉कक्षा 5 हिन्दी पाठबहार (NOTES) पश्चिम बंगाल बोर्ड

👉Daily Use 100000+ English and Hindi Sentences