कक्षा 5 हिन्दी पाठबहार (NOTES) पश्चिम बंगाल बोर्ड
पाठ 16अमृत वाणी
हिये तराजू तौलि कै, तब मुख बाहर आनि ।।
पल में परलै होयगी, बहुरि करैगो कब ।।
रसरी आवत-जात तै, सिल पर परत निसान।।
तुलसीदास
जीवन-परिचय - तुलसीदास - गोस्वामी तुलसीदास रामभक्ति शाखा के सर्वश्रेष्ठ कवि हैं। उनका जन्म राजापुर में संवत् 1554 में हुआ था। उनके पिता का नाम आत्माराम दूबे और माता का नाम हुलसी था। उनका विवाह दीनबन्धु पाठक की पुत्री रत्नावली के साथ हुआ। रत्नावली के फटकार से उन्होंने वैराग्य ग्रहण किया। गोस्वामी जी ने अयोध्या आकर 'रामचरितमानस' लिखना प्रारंभ किया। अपने जीवन का अधिकांश समय उन्होंने काशी में बिताया। गोस्वामी तुलसीदास की प्रामाणिक रचनाओं में 'रामलला नहछू', 'जानकी मंगल', 'रामचरितमानस', 'गीतावली', 'विनयपत्रिका', 'कवितावली', आदि प्रमुख ग्रंथ हैं। संवत् 1680 में उनका स्वर्गवास हो गया। तुलसीदास भक्त, समाज सुधारक, लोकनायक थे। उन्होंने शाखसम्मत भक्ति का लोक जीवन के साथ मेल कर उसे सरल और सुलभ बनाया। उन्होंने ऊँच-नीच, अकिनारीव आदि सबमें रामत्व की स्थापना की। गोस्वामी जी ने समाज, साहित्य, संस्कृति आदि का कोई कोना नहीं छोड़ा। भाषा शैली की दृष्टि से देखा जाए तो उन्होंने अवधी और बज दोनों भाषाओं का प्रयोग अपनी रचनाओं में किया है। उन्होंने अनेक छंद-दोहा, चौपाई, सोरठा आदि का प्रयोग किया है। उनकी भाषा सर्ल, सरस, सजीव, सुगठित एवं मार्मिक है। तुलसीदास की विद्धता को देखकर प्रियर्सन ने उन्हें बुद्धदेव के बाद का सबसे बड़ा लोकनायक कहा था।
समय चूकि पुनि का पछिताने ।।
जे आचरहिं ते नर न घनेरे ।।
पर पीड़ा सम नहिं अधमाई ।।
रहीम
जीवन-परिचय - रहीम - मध्यकालीन सामंतवादी संस्कृति के कवि रहीम का मूल नाम अब्दुर्ररहीम खानखाना था। उनका जन्म संवत् 1613 में लाहौर में हुआ था। रहीम की शिक्षा समाप्त होने के बाद लगभग 16 वर्ष की उम्र में अकबर ने उनका विवाह मिर्जा अजीज कोका की बहन माहवानी से करवा दिया था। रहीम कलम और तलवार के धनी थे। उन्हें अकबर से मिर्जा खाँ की उपाधि भी मिली थी। रहीम एक ऐसे कवि थे जिन्होंने हिंदू जीवन को भारतीय जीवन का यथार्थ मानते हुए अपने काव्य में रामायण, महाभारत, पुराण और गीता जैसे ग्रंथों के कथानको को उदाहरणस्वरूप चुना। रहीम के ग्रंथों में रहीम दोहावली, नायिका भेद, शृंगार, सोरठा, राग पंचाध्यायी, फुटकर छंद आदि प्रसिद्ध हैं। उन्होने अवधी और ब्रजभाषा दोनों में ही कविता की है जो सरल, स्वाभाविक और प्रवाहपूर्ण है। उनके काव्य में श्रृंगार, शांत एवं हास्य रस मिलते हैं।
वस्तुतः कहा जा सकता है कि रहीम ने अपनी काव्य रचना द्वारा हिन्दी साहित्य की जो सेवा की उसकी मिसाल विरले ही मिलेगी।
रहिमन बिगरे दूध को, मथे न माखन होय ।।
सुनि अठिलैहैं लोग सब बाँटि न लैहें कोय ।।
रहिमन हीरा कब कहे, लाख टका मो मोल ।।
1. संक्षेप में उत्तर दो।
1.1 किसी से कैसे बोलना चाहिए?
उत्तर : किसी से बोलने के पहले उसे अपने हृदय रूपी तराजू में तौलकर अर्थात् सोच-सम कर बोलना चाहिए।
1.2 किसी काम को कल पर क्यों नहीं टालना चाहिए।
उत्तर : मनुष्य का जीवन क्षण मंगुर है। उसकी मृत्यु कभी भी हो सकती है। अतः किसी काम को कल पर नहीं टालना चाहिए।
1.3 अभ्यास करने का क्या लाभ है?
उत्तर : लगातार अभ्यास करके मूर्ख व्यक्ति भी बुद्धिमान हो जाता है।
1.4 वर्षा के बहुत ज्यादा या कम होने से क्या-क्या नुकसान होता है?
उत्तर : वर्षा के बहुत अधिक या कम होने से कृषि नष्ट हो जाती है।
1.5 दूसरों को उपदेश क्यों नहीं देना चाहिए?
उत्तर : जब तक अपने आचरण में परिवर्तन न लाया जाय दूसरे को उपदेश देने से कोई फायदा नहीं होता अतः दूसरों को उपदेश नहीं देना चाहिए।
1.6 दूसरे की पीड़ा को किसकी पीड़ा समझनी चाहिए?
उत्तर : दूसरे की पीड़ा को अपनी पीड़ा समझनी चाहिए।
1.7 हमारा सच्चा मित्र या शुभचिंतक कौन है? इसका पता कब चलता है?
उत्तर : हमारा सच्चा मित्र या शुभ चितक वही होता है जो हमारे कष्टों को कम करता है।
1.8 बिगड़ी बात क्या बन पाती है?
उत्तर : नहीं, बिगड़ी बात कभी नहीं बन पाती है।
1.9 मन की व्यथा को मन में ही क्यों छिपाए रखना चाहिए?
उत्तर : हमें अपने मन की व्यथा को मन में ही रखना चाहिए क्योंकि कोई सुनकर व्यथा को कम
नहीं करेगा, अपितु हमारी हंसी उड़ायेगा।
1.10 हमें अपनी बड़ाई क्यों नहीं करनी चाहिए?
उत्तर : हमे अपनी बड़ाई स्वयं नहीं करनी चाहिए क्योकि हीरा मूल्यवान होने पर भी अपना मोल नहीं करता और चुप रहता है।
1.11 किसे सबसे अच्छा कार्य कहा गया है?
उत्तर : परोपकार को सबसे अच्छा काम कहा गया है।
2. निम्नलिखित पंक्तियों के भाव स्पष्ट करो।
2.1 हिये तराजू तौलि कै, तब मुख बाहर आनि।
उत्तर : उपर्युक्त पंक्ति का अर्थ यह है कि बिना विचार किए हुए कोई भी बात तुरन्त नहीं कहनी चाहिए। कोई बात कहने के पूर्व उसके लाभ-हानि, उचित-अनुचित के बारे में सोच विचार कर लेना चाहिए।
2.2 परहित सरसि धरम नहि भाई?
उत्तर : परोपकार अर्थात दूसरों की भलाई के समान कोई धर्म नहीं है।
2.3 सुनि अतिलैहै लोग सब बॉटि न लैहें कोय।।
उत्तर : अपना कष्ट किसी से कहने पर लोग उसकी खिल्ली उड़ायेंगे हमारे कष्ट को बाँट नहीं लेंगे।
3. क्या हानि होगी-
3.1 दूसरों से कठोर बात कहने पर।
उत्तर : वह व्यक्ति नाराज होगा और विरोध बढ़ेगा।
3.2 आज का काम कल पर टालने पर।
उत्तर : काम कभी पूरा नहीं होगा।
3.3 मन की व्यथा हर एक से कहने पर।
उत्तर : अपना कष्ट कम नहीं होगा, अपितु दूसरे मजाक उड़ायेगें।
3.4 अपनी बड़ाई अपने आप करने पर।
उत्तर : अपनी इज्जत कम होती है।
3.5 समय को खोने पर।
उत्तर : पछताना पड़ता है।
4. उन्हें कौन सा दोहा सुनाकर समझाएंगे - जब
4.1 तुम्हारे वे मित्र जो पढ़ाई-लिखाई में पीछे पड़ने के कारण दुखी हो जाते हैं।
उत्तर : का वरषा जब कृषि सुखाने, समय चूकि पुनि का पछिताने।
4.2 तुम्हारे वे मित्र जो दूसरों को पीड़ा पहुँचाते हों।
उत्तर : परहित सरिस धर्म नहि भाई, पर पीड़ा सम नहि अधमाई।
4.3 तुम्हारे वे मित्र जो अपनी बड़ाई खुद करते हैं।
उत्तर : रहिमन हीरा कब कहै, लाख टका मो मोल।
5. निम्नलिखित शब्दों के समान अर्थ वाले शब्द लिखो।
बरसा = वर्षा, सरसि = समान, रसरी = रस्सी, अधमाई = नीच कार्य, जड़मत = मूर्ख, पुनि = फिर, माखन = मक्खन, मुख = मुंह
6. इन दोहों से मिलने वाली शिक्षाओं की एक सूची बनाओ।
उत्तर : (1) बहुत सोच समझ कर बोलना चाहिए।
(2) काम कभी कल पर नहीं टालना चाहिए।
(3) अभ्यास से कठिन काम सरल हो जाता है।
(4) समय बीत जाने पर पछताना बेकार है।
(5) दूसरे को उपदेश नहीं देना चाहिए।
(6) परोपकार सबसे बड़ा धर्म है।
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