होली पर सुन्दर निबंध/Holi par nibandh /essay on holi in hindi

हिन्दी में निबंध 

नमूना 1

 होली



  भूमिका :- होली पर्व है-आनन्द-उत्साह का, आमोद-प्रमोद का, हँसी-ठड्डा का, रंग गुलाल का और मौज-मस्ती का। फाल्गुन की पूर्णिमा की रात, होलिका दहन के उपरांत होली हर्षोल्लास एवं सानन्द मनायी जाती है।

  धार्मिक मान्यता :- प्रत्येक पर्व या त्योहार के पीछे कोई-न-कोई धार्मिक मान्यता या घटना अवश्य होती है। कहा जाता है कि जब अत्याचारी हिरण्यकशिपु अपने विष्णु-भक्त, पुत्र प्रह्लाद को किसी भी उपाय से मार न सका, तब उसने अपनी बहन होलिका द्वारा उसकी हत्या का षड्यंत्र रच डाला। होलिका को वरदानस्वरूप एक ऐसी चादर मिली थी, जिसे ओढ़ने के बाद कोई भी व्यक्ति आग में जल नहीं सकता था। होलिका जलती आग में अबोध प्रह्लाद को गोद में लेकर बैठ गयी। किंतु, वाह रे ! प्रभु की लीला ! प्रह्लाद तो नहीं जला, लेकिन होलिका जलकर राख हो गयी। उसी दिन से इस तिथि को, पाप पर पुर्ण्य की विजय के उपलक्ष्य में, वसंतोत्सव के रूप में, होली का यह मदनोत्सव बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है।

  आयोजन :- वैसे तो यह पर्व अपने आने की पूर्व सूचना सरस्वती पूजा के दिन लोगों के गाल और कपाल पर अबीर-गुलाल की रंगीन छटा के रूप में दे जाता है, लेकिन होलिका-दहन के कल होकर यह पर्व अपनी पूर्ण जवानी के आगोश में लेकर, क्या बूढ़े, क्या जवान, क्या बच्चे, क्या नादान, सभी को रंगीन रंगों से हसीन बना देता है। बच्चे तो एक सप्ताह पहले से ही इस रंगीन पर्व का मजा लूटने में अपनी सुध-बुध खो बैठते हैं। अधिकांश लोग रंग और गुलाल का मजा लूटते हैं, लेकिन कुछ लोगों को कीचड़ और नाली के गंदे पानी से भी होली खेलने में आनन्द आता है। इस पर्व में मीठे मीठे पकवान अपनी सुगंध से आस-पास के वातावरण को सुंगधित बना देते हैं। लोग इन मधुर पकवानों को बड़े प्रेम से खाते और खिलाते हैं। कुछ लोग होली के रसीले गीतों पर झूम उठते हैं। मौज मस्ती का ऐसा आलम दिखायी देता है, मानों सभी को कुबेर का खजाना मिल गया ही।

  महत्व :- यह पर्व नीरस जीवन में रस का संचार करता है। जीवन पर छायी दुःख और विषाद की कालिमा, हर्षोल्लास की लालिमा में परिवर्तित हो जाती है। लोग साल भर की दुश्मनी भूलकर एक-दूसरे के गले लग जाते हैं। ऊँच-नीच, अमीर-गरीब, छोटे-बड़े के सारे भेद मिट जाते हैं।

  उपसंहार :- यह पर्व हंसी-खुशी का पर्व है। लेकिन, कुछ लोग इस अवसर पर अधिक शराब या मंदिरा का सेवन कर लेते हैं, जिसके कारण रंग में भंग पड़ जाता है। गलत ढंग से होली खेलने के कारण कुछ लोग एक-दूसरे से झगड़ लेते हैं। हमें इन बातों का ख्याल रखते हुए सौहाद्रपूर्ण वातावरण में होली मनानी चाहिए।


नमूना 2

होली पर निबंध 


 भूमिका : समय-समय पर आने वाले त्यौहार व्यक्ति के व्यस्त एवं नीरस जीवन में उल्लास आनंद एवं उमंग का संचार कर देते हैं। यह त्यौहार एक ओर तो हमें अपनी संस्कृति से जोड़े रखते हैं, तो दूसरी ओर हमें कोई न कोई प्रेरणा एवं संदेश भी दे जाते हैं। त्यौहार की श्रृंखला में होली का विशेष स्थान है।

 मनाने का समय : होली का त्यौहार फागुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह बसंत ऋतु के आगमन का संदेशवाहक है।

  मनाने का कारण : प्रत्येक त्यौहार किसी ना किसी पृष्ठभूमि पर आधारित होता है। होली का संबंध भी एक पौराणिक घटना से है। प्राचीन काल में हिरण कश्यप नाम का एक दैत्य था। जो ब्रह्मा से एक विचित्र वरदान पाकर अत्यंत अहंकारी तथा नास्तिक हो गया था। वह चाहता था कि लोग भगवान को छोड़कर उसकी पूजा करें। पर उसी का पुत्र 'प्रहलाद' भगवान का परम भक्त था। जब पिता के मना करने पर भी प्रहलाद ने ईश्वर भक्ति नहीं छोड़ी, तो हिरण कश्यप ने उसे मारने के अनेक प्रयास किए। मगर प्रहलाद का बाल भी बांका ना हुआ। दैत्य राज की बहन होलिका को यह वरदान मिला हुआ था, कि अग्नि उसे जला नहीं सकती। अपने भाई के आग्रह पर होलिका प्रहलाद को लेकर जलती आग में बैठ गई। पर होलिका भस्म हो गई और प्रहलाद फिर बच गया। तभी से होलिका दहन की परंपरा का जन्म हुआ।

  नाने का ढंग : होली की रात्रि होलिका दहन किया जाता है। किसी खुले स्थान पर लकड़ियों के ढेर तथा  से-पतवार से होली जलाई जाती है। होली की आग में गेहूं तथा जौ की बालियां भून कर एक दूसरे को खिलाते हैं तथा गले मिलते हैं। अगले दिन फाग (फाल्गुन/होली)खेला जाता है अर्थात रंग खेला जाता है। लोग एक-दूसरे पर गुलाल तथा रंग डालते हैं। इस दिन अमीर-गरीब, छोटे-बड़े का भेदभाव मिट जाता है। लोग एक दूसरे के गले मिलते हैं तथा प्रेम सद्भाव एवं मेलजोल का दृश्य उपस्थित हो जाता है। दोपहर के बाद लोग नहा-धोकर एक दूसरे के घर जाते हैं तथा मिठाई खाते खिलाते हैं।

  संदेश : होली का त्योहार प्रेम एवं भाईचारे का संदेश देता है। कुछ लोग इस त्यौहार की पावनता को अपने अनुचित व्यवहार से कलंकित कर देते हैं। वह मद्यपान करके अभद्र व्यवहार करते हैं तथा पानी के रंगों के स्थान पर तेल के रंग कीचड़ आदि का प्रयोग करते हैं। हमारा कर्तव्य है कि होली के त्यौहार को अत्यंत पवित्रता से मनाएं।



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