हिंदी निबंध
राष्ट्रीय एकता
या
राष्ट्रीय सुरक्षा एवं एकता
या
राष्ट्रीय एकता एवं राष्ट्र प्रेम
(निबंध 1. रूपरेखा- भूमिका, महत्ता, भारत में राष्ट्रीय एकता, उपसंघार)
भूमिका: किसी राष्ट्र के नागरिकों के हृदय में, राष्ट्र के प्रति आने वाली वह अदृश्य सरिता, जो निरंतर देश हित में बहती रहती है, राष्ट्रीय एकता कहलाती है। दूसरे शब्दों में, वह सभी एक ही देश की संतान हैं, देश हम सबका है। यह वैचारिक एकता ही राष्ट्रीय एकता है।
महत्ता: प्रत्येक राष्ट्र चाहे छोटा हो या बड़ा, यदि उसे विकास पद पर लाना है, हर तरह से मजबूत बनना है, देश की अखंडता कायम रखनी है, तो राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूती देनी होगी। इसके बिना किसी भी क्षेत्र में देश का विकास संभव नहीं है। चाहे युद्ध का मैदान हो या वैज्ञानिकों का अनुसंधान-केंद्र, किसानों की कर्मभूमि हो या कामगारों की कर्मशाला, अगर उनके दिल में देश-विकास की भावना न हो, तो विकास की गति धीमी पड़ जाती है। सैनिकों के बीच यदि यह भावना धूमिल हो जाए, तो तो देश की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी। अगर देश का नेतृत्व करनेे वाले नेताओं केेे मन में यह भावना मंद पड़ जाए, तो देश की दुर्गति को कौन रोक सकता है? इतिहास गवाह है कि इसी राष्ट्रीय एकता के बल पर नन्हा सा देश जापान, रूस और चीन जैसे बड़े देशों को युद्ध में कई बार शिकस्त दे चुका है।
भूमिका: किसी राष्ट्र के नागरिकों के हृदय में, राष्ट्र के प्रति आने वाली वह अदृश्य सरिता, जो निरंतर देश हित में बहती रहती है, राष्ट्रीय एकता कहलाती है। दूसरे शब्दों में, वह सभी एक ही देश की संतान हैं, देश हम सबका है। यह वैचारिक एकता ही राष्ट्रीय एकता है।
महत्ता: प्रत्येक राष्ट्र चाहे छोटा हो या बड़ा, यदि उसे विकास पद पर लाना है, हर तरह से मजबूत बनना है, देश की अखंडता कायम रखनी है, तो राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूती देनी होगी। इसके बिना किसी भी क्षेत्र में देश का विकास संभव नहीं है। चाहे युद्ध का मैदान हो या वैज्ञानिकों का अनुसंधान-केंद्र, किसानों की कर्मभूमि हो या कामगारों की कर्मशाला, अगर उनके दिल में देश-विकास की भावना न हो, तो विकास की गति धीमी पड़ जाती है। सैनिकों के बीच यदि यह भावना धूमिल हो जाए, तो तो देश की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी। अगर देश का नेतृत्व करनेे वाले नेताओं केेे मन में यह भावना मंद पड़ जाए, तो देश की दुर्गति को कौन रोक सकता है? इतिहास गवाह है कि इसी राष्ट्रीय एकता के बल पर नन्हा सा देश जापान, रूस और चीन जैसे बड़े देशों को युद्ध में कई बार शिकस्त दे चुका है।
भारत में राष्ट्रीय एकता: राष्ट्रीय एकता की भावना जब तक हमारे देश में रही, तब तक यह देश ज्ञान-विज्ञान, कला-साहित्य, सभ्यता-संस्कृति केे हर क्षेत्र में विश्व का मार्गदर्शक रहा। लेकिन नीचता, अहंकार और आपसी मनमुटाव रूपी विष आज जब इस भावनाा के गर्भ में प्रवेश कर गया। तब मीर जाफर और जयचंदों जैसे देशद्रोहियों का जन्म हुआ, हम मुगलों और अंग्रेजों के गुलाम हुए, देश केे कई टुकड़े हुए, देश निर्बल हुआ। आज भी हमारे देश में कई विघटनकारी तत्व मौजूद हैं, जिनसे देश की अखंडता को भारी खतरा है ऐसे संगठनों को समझाना चाहिए कि वे अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं। सरकार को भी इनकी समस्याओं पर समुचित ध्यान देना चाहिए। इसके बावजूद यह खुशी की बात है कि पिछले कुछ दशकों से जब कभी कोई विदेशी आक्रमण हुआ है, तब सभी भारत वासियों ने राष्ट्रीय एकता का परिचय दिया हैै और दुश्मनों के छक्के छुड़ाए हैं।
उपसंहार : इस प्रकार हम देखते हैं कि देश के मान सम्मान के लिए, प्रगति और खुशहाली के लिए, राष्ट्रीयता की भावना को विकसित करना होगा। जाति, धर्म, ऊंच-नीच और अगड़ी पिछड़ी के सारे भेदभाव मिटाने होंगे। गुरुजनों ने हमें जो पढ़ाया है -"एकता में ही बल है।" उसे जीवन में अपनाना होगा, तभी हमारा यह देश अपनी खोई हुई गरिमा को फिर से प्राप्त करेगा और देश की अखंडता बनी रहेगी। जे • डिकिंसन ने सच ही कहा है "United we stand divided we fall." अर्थात साथ रहेंगे तो डटे रहेंगे और अलग रहेंगे तो बिखर जाएंगे।


1 टिप्पणी:
Very nice thanks sir
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