कक्षा 5 हिन्दी पाठबहार (NOTES) पश्चिम बंगाल बोर्ड
पाठ 17सद्-व्यवहार
🏵️काका कालेलकरजीवन परिचय
काका कालेलकर का जन्म। दिसम्बर, 1885 ई. को महाराष्ट्र के सतारा जिला में हुआ था। उनका पूरा नाम दत्तात्रेय बालकृष्ण कालेलकर था। उन्होंने फर्ग्यूसन कॉलेज, पुणे में शिक्षा प्राप्त कर वहीं से एक शिक्षक के रूप में अपना जीवन आरंभ किया। काका कालेलकर देश की पराधीनता से मुक्ति के लिए सशस्त्र संघर्ष के पक्षपाती थे। उन्होंने तीन वर्ष तक देश के विभिन्न भागों की पैदल यात्रा की। 1915 ई. में शांति निकेतन में काका कालेलकर की भेंट गाँधी जी से हुई और उन्होंने अपना जीवन गाँधी जी के कार्यों में समर्पित कर दिया। 1922 ई. तक गुजराती पत्र 'नवजीवन' के संपादक रहे। इसके उपरांत 1928 ई. से 1955 ई. तक गुजरात विद्यापीठ में कुलपति के रूप में सेवा प्रदान की। काका कालेलकर की 'सप्तसरिता', 'हिन्दुस्तानी की नीति', 'स्वामी रामतीर्थ', 'स्वदेशी धर्म', 'जीवन प्रतोत्सव', आदि कई प्रमुख रचनाएँ है। शिक्षा, साहित्य, संस्कृति, भाषा आदि के क्षेत्रों में उनका योगदान अनुपम है। 1964 ई. में उन्हें 'पद्मविभूषण' से सम्मानित किया गया। सरदार पटेल विश्वविद्यालय तथा काशी विद्यापीठ ने उन्हें मानद डी. लिट् तथा साहित्य अकादमी, नई दिल्ली ने फेलो उपाधि से अलंकृत किया। 21 अगस्त, 1981 ई. को नई दिल्ली में काका कालेलकर का निधन हो गया।👉 कक्षा 5 हिन्दी पाठ बहार सम्पूर्ण हल
शब्दार्थ : बालिश्त भर = बित्ते भरः कदाचित = शायद; सद्बुद्धि = सही बुद्धिः परोपकार = दूसरे की भलाई हक = अधिकार; कुटुम्ब = परिवार, संबंधी। डाह = जलन; ईर्ष्या = दूसरे के सुख को देखकर जलन होना; मंगलाचरण = किसी कार्य का शुभ मुहूर्त; निर्बल = कमजोर; प्रबल = बलवान; प्रतिस्पर्धा = द्वन्द्व-संघर्ष। सर्वव्यापी = सब जगह; दुर्जन = बुरे लोग; असहयोग = सहयोग न करना, बिना किसी के सहयोग के; दीन = गरीब; अपेक्षा = उम्मीद; निर्भय = भयरहित।
1.1 'सज्जनता' कहने से तुम क्या समझते हो?
उ० दूसरों से बोल-चाल एवं बात-व्यवहार के समय किए गए अच्छे आचरण, शालीनता एवं नम्रता को सज्जनता कहते है।
1.2 'स्वार्थी' किसे कहते हैं?
उ० जो व्यक्ति हमेशा केवल अपने लाभ के लिए शोचता एवं काम करता है, उसे स्वार्थी कहते हैं।
1.3 कर्ण कौन था?
उ० कर्ण कुन्ती का पुत्र था जो कौरवों की तरफ से महाभारत का युद्ध लड़ा था। वह अपने समय का महान वीर और सबसे बड़ा दानी था।
1.4 विवाह का मंगलाचरण कैसे होता है?
उ० विवाह का मंगलाचरण ईर्ष्या और डाह से होता है।
1.5 जाति-पाँति का क्या मतलब है?
उ० जाति-पाँति का मतलब जाति के नाम पर भेद-भाव होता है।
1.6 पड़ोसी अगर बलवाला हो तो उसे कैसे रहना चाहिए?
उ० पड़ोसी अगर बलवाला हो तो उसे कमजोर पड़ोसी के साथ नम्रता पूर्वक व्यवहार करते हुए रहना चाहिए?
1.7 प्रतिस्पर्धा कहने से तुम क्या समझते हो ?
उ० एक दूसरे से स्पर्द्धा, द्वन्द्व रखने को प्रतिस्पर्द्धा कहते हैं। इससे द्वेष बढ़ता है।
1.8 किस सिद्धान्त पर अनेक देशों की राजनीति चलती है?
उ० अनेक देशों की राजनीति अन्याय एवं स्वार्थ की प्रतिस्पर्धा पर चलती है?
1.9 सच्ची राजनीति क्या है?
उ० सच्ची राजनीति प्रेम-धर्म और पड़ोसी धर्म में निहित है।
1.10 जो दुर्बल हैं, हमें उनके साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए।
उ० हमें दुर्बल के साथ सहयोग का व्यवहार करना चाहिए।
शब्दार्थ : बालिश्त भर = बित्ते भरः कदाचित = शायद; सद्बुद्धि = सही बुद्धिः परोपकार = दूसरे की भलाई हक = अधिकार; कुटुम्ब = परिवार, संबंधी। डाह = जलन; ईर्ष्या = दूसरे के सुख को देखकर जलन होना; मंगलाचरण = किसी कार्य का शुभ मुहूर्त; निर्बल = कमजोर; प्रबल = बलवान; प्रतिस्पर्धा = द्वन्द्व-संघर्ष। सर्वव्यापी = सब जगह; दुर्जन = बुरे लोग; असहयोग = सहयोग न करना, बिना किसी के सहयोग के; दीन = गरीब; अपेक्षा = उम्मीद; निर्भय = भयरहित।
अभ्यासमाला
1. संक्षेप में उत्तर दो।1.1 'सज्जनता' कहने से तुम क्या समझते हो?
उ० दूसरों से बोल-चाल एवं बात-व्यवहार के समय किए गए अच्छे आचरण, शालीनता एवं नम्रता को सज्जनता कहते है।
1.2 'स्वार्थी' किसे कहते हैं?
उ० जो व्यक्ति हमेशा केवल अपने लाभ के लिए शोचता एवं काम करता है, उसे स्वार्थी कहते हैं।
1.3 कर्ण कौन था?
उ० कर्ण कुन्ती का पुत्र था जो कौरवों की तरफ से महाभारत का युद्ध लड़ा था। वह अपने समय का महान वीर और सबसे बड़ा दानी था।
1.4 विवाह का मंगलाचरण कैसे होता है?
उ० विवाह का मंगलाचरण ईर्ष्या और डाह से होता है।
1.5 जाति-पाँति का क्या मतलब है?
उ० जाति-पाँति का मतलब जाति के नाम पर भेद-भाव होता है।
1.6 पड़ोसी अगर बलवाला हो तो उसे कैसे रहना चाहिए?
उ० पड़ोसी अगर बलवाला हो तो उसे कमजोर पड़ोसी के साथ नम्रता पूर्वक व्यवहार करते हुए रहना चाहिए?
1.7 प्रतिस्पर्धा कहने से तुम क्या समझते हो ?
उ० एक दूसरे से स्पर्द्धा, द्वन्द्व रखने को प्रतिस्पर्द्धा कहते हैं। इससे द्वेष बढ़ता है।
1.8 किस सिद्धान्त पर अनेक देशों की राजनीति चलती है?
उ० अनेक देशों की राजनीति अन्याय एवं स्वार्थ की प्रतिस्पर्धा पर चलती है?
1.9 सच्ची राजनीति क्या है?
उ० सच्ची राजनीति प्रेम-धर्म और पड़ोसी धर्म में निहित है।
1.10 जो दुर्बल हैं, हमें उनके साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए।
उ० हमें दुर्बल के साथ सहयोग का व्यवहार करना चाहिए।
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर अपनी भाषा में लिखो।
2.1 रेल-यात्रा करते समय हमें किन-किन बातों पर ध्यान देना चाहिए?
उ० रेल यात्रा करते समय हमें केवल अपने बैठने भर के लिए जगह लेनी चाहिए और बाकी जगह छोड़ देना चाहिए ताकि दूसरे लोग भी आराम से बैठ सके।
2.2 पास-पड़ोस के विवाद में किन लोगों की बातों पर ध्यान नहीं देना चाहिए और क्यों ?
उ० पास-पड़ोस के विवाद पर उन लोगों की बातों पर ध्यान नहीं देना चाहिए जो स्वार्थ की बात करते हैं। क्योंकि स्वार्थी लोगों की राय लेने पर झगड़ा बढ़ जाता है।
2.3 दो कुटुम्बों के बीच जब विवाह जैसा संबंध जोड़ा जाता है तब कैसा दृश्य उपस्थित होता है?
उ० जब दो कुटुम्बों के बीच विवाह जैसा पवित्र संबंध जोड़ा जाता है तो वहां ईर्ष्या और अहं की बात की जाती है। लड़के के बाप को पूरा दहेज नहीं मिलता है तो दूल्हे को लौटा ले जाने की बात की जाती है।
2.4 पड़ोसी धर्म क्या है? इसका पालन हमें कैसे करना चाहिए?
उ० पड़ोसी धर्म कहता है कि हमें अपनी सामर्थ्य के अनुसार हर प्रकार से पड़ोसी की सहायता करनी चाहिए। इसका पालन हमें पड़ोसी की सहायता करके करना चाहिए।
2.5 जीवन में व्याप्त कटुता और कलह कैसे दूर की जा सकती है?
उ० जीवन में व्याप्त कटुता और कलह को प्रेम-धर्म के पालन द्वारा दूर किया जा सकता है।
2.6 पड़ोसी धर्म और प्रेम धर्म क्या है? इसका पालन हमें कैसे करना चाहिए?
उ० पड़ोसी धर्म पड़ोसी की सहायता करना है। प्रेम धर्म एक सहानुभूति रखता है और सहायता देता है।
2.7 इस पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उ० इस पाठ से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हम सबके साथ प्रेम और सहयोग का भाव रखें और मन में किसी के प्रति ईर्ष्या का भाव न रखें।
2.8 समाज में प्रचलित बुराइयों पर हम कैसे विजय पा सकते हैं? इसका पालन हमें पड़ोसी धर्म और प्रेम-धर्म निभाकर करना चाहिए।
उ० समाज में प्रचलित बुराइयों पर हम आपसी सहयोग और समझदारी से विजय पा सकते हैं।
3. सही शब्द से वाक्य पूरा करो।
2.1 रेल-यात्रा करते समय हमें किन-किन बातों पर ध्यान देना चाहिए?
उ० रेल यात्रा करते समय हमें केवल अपने बैठने भर के लिए जगह लेनी चाहिए और बाकी जगह छोड़ देना चाहिए ताकि दूसरे लोग भी आराम से बैठ सके।
2.2 पास-पड़ोस के विवाद में किन लोगों की बातों पर ध्यान नहीं देना चाहिए और क्यों ?
उ० पास-पड़ोस के विवाद पर उन लोगों की बातों पर ध्यान नहीं देना चाहिए जो स्वार्थ की बात करते हैं। क्योंकि स्वार्थी लोगों की राय लेने पर झगड़ा बढ़ जाता है।
2.3 दो कुटुम्बों के बीच जब विवाह जैसा संबंध जोड़ा जाता है तब कैसा दृश्य उपस्थित होता है?
उ० जब दो कुटुम्बों के बीच विवाह जैसा पवित्र संबंध जोड़ा जाता है तो वहां ईर्ष्या और अहं की बात की जाती है। लड़के के बाप को पूरा दहेज नहीं मिलता है तो दूल्हे को लौटा ले जाने की बात की जाती है।
2.4 पड़ोसी धर्म क्या है? इसका पालन हमें कैसे करना चाहिए?
उ० पड़ोसी धर्म कहता है कि हमें अपनी सामर्थ्य के अनुसार हर प्रकार से पड़ोसी की सहायता करनी चाहिए। इसका पालन हमें पड़ोसी की सहायता करके करना चाहिए।
2.5 जीवन में व्याप्त कटुता और कलह कैसे दूर की जा सकती है?
उ० जीवन में व्याप्त कटुता और कलह को प्रेम-धर्म के पालन द्वारा दूर किया जा सकता है।
2.6 पड़ोसी धर्म और प्रेम धर्म क्या है? इसका पालन हमें कैसे करना चाहिए?
उ० पड़ोसी धर्म पड़ोसी की सहायता करना है। प्रेम धर्म एक सहानुभूति रखता है और सहायता देता है।
2.7 इस पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उ० इस पाठ से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हम सबके साथ प्रेम और सहयोग का भाव रखें और मन में किसी के प्रति ईर्ष्या का भाव न रखें।
2.8 समाज में प्रचलित बुराइयों पर हम कैसे विजय पा सकते हैं? इसका पालन हमें पड़ोसी धर्म और प्रेम-धर्म निभाकर करना चाहिए।
उ० समाज में प्रचलित बुराइयों पर हम आपसी सहयोग और समझदारी से विजय पा सकते हैं।
3. सही शब्द से वाक्य पूरा करो।
(i) संतोष वृत्ति का विकास करें तो किसी को भी दुख न हो। (निकास/विकास)
उ० विकास
(ii) पड़ोसी-पड़ोसी में झगड़ा होता है। (झगड़ा/तगड़ा)
उ० झगड़ा
(iii) सच्ची राजनीति तो प्रेम कर्म और पड़ोसी धर्म में है। (कर्म/शर्म/धर्म/नर्म)
उ० कर्म, धर्म।
(iv) दीन बनकर सहायता की अपेक्षा नहीं करना चाहिए। (अपेक्षा/उपेक्षा)
उ० अपेक्षा
4. वाक्य बनाओ।
सद्बुद्धि, झगड़ा, नीचा, दशा, ताकतवर, प्रबल
सद्बुद्धि = जीवन में शान्ति के लिए सद्बुद्धि आवश्यक है।
झगड़ा = झगड़ा करने से कभी किसी का भला नहीं होता है।
नीचा = किसी को नीचा दिखाना मानव धर्म के विपरीत है।
दशा = उसकी दशा इस समय ठीक नहीं है।
ताकतवर = ताकतवर हमेशा कमजोर को दबातें हैं।
प्रबल = पाकिस्तान और भारत एक दूसरे के प्रबल विरोधी हैं।
5. संज्ञा और विशेषण की जोड़ी मिलाओ। (रेखा खींचकर)
उ० विकास
(ii) पड़ोसी-पड़ोसी में झगड़ा होता है। (झगड़ा/तगड़ा)
उ० झगड़ा
(iii) सच्ची राजनीति तो प्रेम कर्म और पड़ोसी धर्म में है। (कर्म/शर्म/धर्म/नर्म)
उ० कर्म, धर्म।
(iv) दीन बनकर सहायता की अपेक्षा नहीं करना चाहिए। (अपेक्षा/उपेक्षा)
उ० अपेक्षा
4. वाक्य बनाओ।
सद्बुद्धि, झगड़ा, नीचा, दशा, ताकतवर, प्रबल
सद्बुद्धि = जीवन में शान्ति के लिए सद्बुद्धि आवश्यक है।
झगड़ा = झगड़ा करने से कभी किसी का भला नहीं होता है।
नीचा = किसी को नीचा दिखाना मानव धर्म के विपरीत है।
दशा = उसकी दशा इस समय ठीक नहीं है।
ताकतवर = ताकतवर हमेशा कमजोर को दबातें हैं।
प्रबल = पाकिस्तान और भारत एक दूसरे के प्रबल विरोधी हैं।
5. संज्ञा और विशेषण की जोड़ी मिलाओ। (रेखा खींचकर)
6. निम्नलिखित वाक्यों के व्यक्तिवाचक संज्ञा शब्दों को छाँटो।
6.1 रेल में कई बार भीड़ न होने पर भी लोग झगड़ा करते हैं।
6.2 इस तरह कर्ण-सा दानवीर बनकर परोपकार करने लगोगे तो तुझे दिन दहाड़े बाबाजी बना देंगे।
6.3 कुछ बच्चों के लिए रखेगा या नहीं।
6.4 मालिक के यहाँ गालियाँ भी सुननी पड़ती हो तो परवाह नहीं।
7. प्रत्यय 'ई' जोड़ो और संज्ञा से विशेषण बनाओ।
हठ + ई = हठी
सुख + ई = सुखी
बुरा + ई = बुरी
परोपकार + ई = परोपकारी
दान + ई = दानी
रोग + ई = रोगी
8. निम्नलिखित शब्दों से स्त्रीलिंग और पुल्लिंग छाँटो।
जमीन, पड़ोसी, स्वार्थ
जमीन स्त्रीलिंग
पड़ोसी - पुल्लिंग
स्वार्थ - पुल्लिंग
9. पाठ से दस संज्ञा शब्द छाँटकर लिखो।
उ. रेल, मनुष्य, लोग, सज्जनता, घर, जमीन, कर्ण, दिन, बच्चों, कुटुम्ब।
10. पाठ से पाँच विशेषण शब्द छाँटकर लिखो।
सुख, स्वार्थी, दुःख, पाँच, सात, बुरा, निर्बल, छोटा, सच्ची, दुर्बल।
11. पाठ के शब्दों में आए वर्ग - अ, क, ई, प, ट, न, ग, आ, प, स आदि मूल ध्वनियों है। इनके खण्ड नहीं हो सकते। ये वर्ण कहलाते हैं। हमारी भाषा हिन्दी (देवनागरी) के वर्षों को स्वर और व्यंजन वर्ण में बाँटा गया है। स्वर वर्णों का उच्चारण किसी अन्य वर्ण की सहायता के बिना किया जाता है। इनके उच्चारण में हवा मुख से बिना बाधा के निकलती है। स्वर वर्णों की कुल संख्या 11 है तथा इन्हें दो भागों में रखा गया है। पहला ह्रस्व स्वर अ, इ, उ, ऋ तथा दूसरा दीर्घ स्वर आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ। ये स्वर वर्ण ही मात्राओं का रूप ले लेते है। स्वर वर्ण की सहायता से ही व्यंजन वर्णों का उच्चारण किया जाता है।
👉पाठ 16 अमृत वाणी
6.1 रेल में कई बार भीड़ न होने पर भी लोग झगड़ा करते हैं।
6.2 इस तरह कर्ण-सा दानवीर बनकर परोपकार करने लगोगे तो तुझे दिन दहाड़े बाबाजी बना देंगे।
6.3 कुछ बच्चों के लिए रखेगा या नहीं।
6.4 मालिक के यहाँ गालियाँ भी सुननी पड़ती हो तो परवाह नहीं।
7. प्रत्यय 'ई' जोड़ो और संज्ञा से विशेषण बनाओ।
हठ + ई = हठी
सुख + ई = सुखी
बुरा + ई = बुरी
परोपकार + ई = परोपकारी
दान + ई = दानी
रोग + ई = रोगी
8. निम्नलिखित शब्दों से स्त्रीलिंग और पुल्लिंग छाँटो।
जमीन, पड़ोसी, स्वार्थ
जमीन स्त्रीलिंग
पड़ोसी - पुल्लिंग
स्वार्थ - पुल्लिंग
9. पाठ से दस संज्ञा शब्द छाँटकर लिखो।
उ. रेल, मनुष्य, लोग, सज्जनता, घर, जमीन, कर्ण, दिन, बच्चों, कुटुम्ब।
10. पाठ से पाँच विशेषण शब्द छाँटकर लिखो।
सुख, स्वार्थी, दुःख, पाँच, सात, बुरा, निर्बल, छोटा, सच्ची, दुर्बल।
11. पाठ के शब्दों में आए वर्ग - अ, क, ई, प, ट, न, ग, आ, प, स आदि मूल ध्वनियों है। इनके खण्ड नहीं हो सकते। ये वर्ण कहलाते हैं। हमारी भाषा हिन्दी (देवनागरी) के वर्षों को स्वर और व्यंजन वर्ण में बाँटा गया है। स्वर वर्णों का उच्चारण किसी अन्य वर्ण की सहायता के बिना किया जाता है। इनके उच्चारण में हवा मुख से बिना बाधा के निकलती है। स्वर वर्णों की कुल संख्या 11 है तथा इन्हें दो भागों में रखा गया है। पहला ह्रस्व स्वर अ, इ, उ, ऋ तथा दूसरा दीर्घ स्वर आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ। ये स्वर वर्ण ही मात्राओं का रूप ले लेते है। स्वर वर्ण की सहायता से ही व्यंजन वर्णों का उच्चारण किया जाता है।
👉पाठ 16 अमृत वाणी

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