सामान्य ज्ञान /GK / Nibandh/Bhashan/General Knowledge in Hindi

सामान्य ज्ञान /GK / Nibandh/Bhashan/General Knowledge in Hindi

 इस ब्लॉक के माध्यम से विभिन्नवषयों सामान्य ज्ञान जीके के प्रश्न उत्तर व निबंध तथा भाषण दिए गए हैं। अपने इच्छा अनुसार लिंग पर क्लिक करके अपने विषयक पढ़ सकते हैं :-




👉 कक्षा 1 के लिए सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी 

👉 कक्षा 2 के लिए सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी 

👉 कक्षा 3 के लिए सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी 

👉 कक्षा 4 के लिए सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी 

👉 कक्षा 5 के लिए सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी 

👉 कक्षा के 6 लिए सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी 

👉 शिक्षक दिवस पर छोटे बड़े निबंध व भाषण

👉 शिक्षक दिवस सामान्य ज्ञान 

👉 स्वतंत्र भारत के प्रधानमंत्री

Teachers day GK in Hindi / शिक्षक दिवस सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी

भारत में शिक्षक दिवस हर साल 5 सितंबर को मनाया जाता है । इसके साथ ही सथ विश्व भर में 100 से अधिक देशों में भी उनके तय किये दिन पर शिक्षक दिवस मनाया जाता है। इससे संबंधित प्रश्न उत्तर बच्चों से पूछे जाते हैं। परीक्षाओं में भी आते हैं जिनमें से कुछ मुख्य प्रश्नों को इस ब्लॉग में प्रस्तुत किया गया है, जिससे आप पढ़े और अपने मित्रों में भी शेयर करें। तो चलिए शुरू करते हैं : - 



  1. भारत में शिक्षक दिवस कबमनाया जाता है?- 5 सितंबर को 
  2. किस भारतीय नेता के जन्मदिन को भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है ? - डॉ. सर्वपल्ली रधाकृष्णन
  3. राष्ट्रपति बनने से पहले डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का पेशा क्या था ? - शिक्षक और दर्शनिक 
  4. डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने किस विषय में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल क थी ? - दर्शनशास्त्र 
  5. वर्ष 2024 में कितने लोगों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार मिला ? - 50
  6. भारत की पहली महिला शिक्षिका कौन थी? - सावित्रीबाई फुले
  7. शिक्षक दिवस पहली बार किस देश में मनाया गया ? - चीन 
  8. कौन सा प्राचीन भारतीय विश्वविद्यालय दुनिया भर में शिक्षकों और छात्रों के लिए शिक्षा का केंद्र के रूप में जाना जाता था ? - नालंदा विश्वविद्यालय 
  9. भारत में पहला शिक्षक दिवस कब मनाया गया था ? - 5 सितंबर सन् 1962 में
  10. डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को 1961 में कौन सा पुरस्कार प्राप्त हुआ ? - उन्हें 1961 में जर्मन पुस्तक व्यापार में शांति पुरस्कार मिला था ।
  11. डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को 1954 में कौन सा पुरस्कार प्राप्त हुआ ? - 1954 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। 
  12. भारत में शिक्षक दिवस कब से मनाया जा रहा है ? - 1962 से 
  13. शिक्षक दिवस की शुरुआत कैसे हुई? - डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिवस के उपलक्ष मे भारत में हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। 
  14. डॉ. सर्वपल्ली रधाकृष्णन को किस पुरस्कार से सम्मानित किया गया था ? - भारत का सर्वोच्च पुरस्कार भारत रत्न से 
  15. डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन कितने वर्षों तक उपराष्ट्रपति बने रहे ? - 2 वर्ष 
  16. डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारत के कौन से राष्ट्रपति थे ? - स्वतंत्र भारत के दूसरे राष्ट्रपति
  17. डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारत के राष्ट्रपति कब बने ? - 1962 में 
  18. राष्ट्रपति बनने से पहले डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का पेशा क्या था ? - शिक्षण,  शिक्षक
  19. "शिक्षक एक पैसा नहीं जीवन का एक तरीका है।" यह कथन किसका है ? - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने कहा था शिक्षक एक पैसा नहीं जीवन का एक तरीका है।
  20. विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग का गठन किस वर्ष किया गया था ? - 1948 में 
  21. 1931 में डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन किस विश्वविद्यालय के कुलपति नियुक्त किए गए थे ? - आंध्र विश्वविद्यालय 
  22. भगवान श्री राम के गुरु कौन थे ? - महर्षि वाल्मीकि 
  23. भगवान श्री कृष्ण के गुरु कौन थे ? - गुरु संदीपन जी 
  24. राधा कृष्ण ने किस विषय में स्नातकोत्तर किया था ? -  दर्शनशास्त्र में 
  25. डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की मृत्यु कब और कहां हुई थी? - 17 अप्रैल 1975 में चेन्नई में 
  26. डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन देश के ऊपर राष्ट्रपति के रूप में कब से कब तक बने थे ? -  13 में 1952 से 13 में 1965 तक 
  27. शिक्षक दिवस क्यों मनाया जाता है ? - शिक्षकों के सम्मान के लिए हर साल भारत में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। 
  28. भारत में शिक्षकों के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार पहली बार किस वर्ष शुरू किया गया था ? - सन् 1962 से 
  29. शिक्षक दिवस मनाने का प्राथमिक उद्देश्य क्या है ? - समाज में शिक्षकों के योगदान का सम्मान करना 
  30. यूनाइटेड नेशन किस तारीख को विश्व शिक्षक दिवस मनाता है ? - 5 अक्टूबर को
  31. किस पुरस्कार को अक्सर शिक्षक का नोबेल पुरस्कार कहा जाता है ? - वैश्विक शिक्षक पुरस्कार 
  32. इसी परंपरा के अनुसार शिक्षा का संरक्षक संत किसे माना जाता है ? -  सेंट जॉन बैपटिस्ट डी ला सैलेड को
  33. प्लेटो के गुरु के रूप में जाने जाने वाले प्रसिद्ध यूनानी दार्शनिक कौन थे? - सुकरात
  34. भारत में आधुनिक शिक्षा का जनक किसे माना जाता है ? - राजा राममोहन राय को 
  35. वे शिक्षाविद और बाल अधिकार समर्थक कौन थे जिन्होंने भारत में लड़कियों के लिए पहली आधुनिक स्कूल स्थापित किया था ? -  सावित्रीबाई फुले
  36. भारत में लड़कियों के लिए पहली आधुनिक स्कूल कब खोली गई थी ? - 1848 ईस्वी में पुणे में 
  37. किस भारतीय राज्य ने शिक्षकों को उन्नत डिजिटल कौशल से लैस करने के लिए 2024 में "शिक्षक डिजिटल साक्षरता अभियान" लागू किया ? - केरल 
  38. किस राज्य ने 2024 में शिक्षण कौशल संवर्धन कार्यक्रम शुरू किया ? - तमिलनाडु 
  39. 2024 में सेवा निवृत शिक्षकों को जरूरतमंद स्कूलों से जोड़ने के लिए कौन सी पहल शुरू की गई ? - शिक्षक कनेक्ट 
  40. डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने  वाले शिक्षकों को 2024 में पहली बार कौन सा पुरस्कार दिया गया ? - डिजिटल शिक्षक पुरस्कार 
  41. 2024 में आयोजित "शिक्षक सशक्तिकरण सम्मेलन" का मुख्य फोकस क्या था ? - व्यवसायिक विकास 
  42. 2024 में किस राज्य ने शिक्षकों के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति कार्यक्रम शुरू किया ? - पश्चिम बंगाग

👉 शिक्षक दिवस पर छोटे बड़े भाषण व निबंध

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शिक्षक दिवस पर निबंध / भाषण /स्टेटस /Teachers day per nibandh/ bhashan / status wallpaper

शिक्षक दिवस

शिक्षक दिवस पर छोटे और बड़े ‌भाषण व निबंध के नमूने


  नमस्कार दोस्तों जैसा कि हम जानते हैं पूरे भारत में प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है । छात्रों को इससे संबंधित भाषण व निबंध लिखने को कहा जाता है। तो आज मैं इस पोस्ट के जरिए बच्चों की समस्या का समाधान लेकर आया हूं । इसमें कई छोटे बड़े निबंध व भाषण दे रहा हूं जिसे बच्चे पढ़कर अपने विद्यालय में प्रस्तुत कर सकते है। इमेज वॉलपेपर, शिक्षक दिवस स्टेटस भी दिया गया है। सबसे पहले हम सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन परिचय पर निबंध लिखते हैं  -

डाॅ• सर्वपल्ली राधाकृष्णन

' ज्यों की त्यों घर दिन ही नादीया '
  कबीर की इस पंक्ति को चरितार्थ करते थे - भारत के अद्वितीय राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन। जिस परम पवित्र रूप में वे इस पृथ्वी पर आए थे बिना किसी दाग-धब्बे के, उसी पावन रूप में उन्होंने इस वसुंधरा से विदाई ली। लंबे समय तक भारत के उपराष्ट्रपति और राष्ट्रपति रहकर जब वह दिल्ली से विदा हुए, तो प्रत्येक दिल ने उनका अभिनंदन किया। भारत के राष्ट्रपति पद की सीमा उन्हीं जैसे सादगी की ऊँची जिन्दगी जीने वाले महामानव से सार्थक हुई। अपनी ऋजुल, सौम्यता और संस्कारिता के कारण वह अजातशत्रु हो गए थे।
  वे उन राजनेताओं में से एक थे, जिन्हें अपनी संस्कृति एवं कला से अपार लगाव होता है। वे भारतीय सामाजिक संस्कृति से ओतप्रोत आस्थावान हिन्दू थे। इसके साथ ही अन्य समस्त धर्मावलम्बियों के प्रति भी गहरा आदर भाव रखते थे। जो लोग उनसे वैचारिक मतभेद रखते थे। उनकी बात भी वे बड़े सम्मान एवं धैर्य के साथ सुनते थे। कभी-कभी उनकी इस विनम्रता की लोग उनकी कमजोरी समझने की भूल करते थे, परन्तु उनकी यह उदारता, उनकी दृढ़ निष्ठा से पैदा हुई थी।

 उनका जन्म 5 सितम्बर, 1888 को तमिलनाडु राज्य के तिरूतनी नामक गाँव में हुआ था। जो मद्रास शहर से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। उनका परिवार अत्यन्त धार्मिक था और उनके माता-पिता सगुण उपासक थे। उन्होंने प्राथमिक तथा माध्यमिक शिक्षा मिशन स्कूल तिरूपति तथा बेलौर कॉलेज, बेलौर में प्राप्त की। सन् 1905 में उन्होंने मद्रास के क्रिश्चियन कॉलेज में प्रवेश किया। बी ए. ओर एम. ए. की उपाधि उन्होंने इसी कॉलेज से प्राप्त की। सन् 1909 में मद्रास के ही एक कॉलेज में दर्शनशास्त्र के अध्यापक नियुक्त हुए। इसके बाद वह प्रगति के पथ पर लगातार आगे बढ़ते गए तथा मैसूर एवं कलकत्ता विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर के रूप में कार्य किया। इसके बाद डॉ. राधाकृष्णन ने आन्ध्र विश्व विद्यालय के कुलपति के पद पर कार्य किया। लम्बी अवधि तक वह आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर रहे। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में उन्होंने कुलपति के पद को भी सुशोभित किया। सोवियत संघ में डॉ. राधाकृष्णन भारत के राजदूत भी रहे। अनेक राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों तथा शिष्टमण्डलों का उन्होंने नेतृत्व किया। यूनेस्को के एक्जीक्यूटिव बोर्ड के अध्यक्ष के पद को उन्होंने 1948-49 में गौरवान्वित किया। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का यह एक अत्यन्त महत्वपूर्ण पद है। 1952-62 की अवधि में वह भारत के उपराष्ट्रपति तथा 1962 से 1967 तक राष्ट्रपति रहे। 1962 में भारत-चीन युद्ध तथा 1965 में भारत-पाक युद्ध उन्हीं राष्ट्रपति काल में लड़ा गया था। अपने ओजस्वी भाषणों से भारतीय सैनिकों के मनोबल को ऊँचा उठाने में उनका योगदान सराहनीय था।
  डॉ. राधाकृष्णन भाषण कला के आचार्य थे। विश्व के विभिन्न देशों में भारतीय तथा पाश्चात्य दर्शन पर भाषण देने के लिए उन्हें आमंत्रित किया गया। श्रोता तो उनके भाषणों से मंत्रमुग्ध ही रह जाते थे। डॉ. राधाकृष्णन में विचारों, कल्पना तथा भाषा द्वारा विचित्र ताना-बाना बुनने की अ‌द्भुत क्षमता थी। वस्तुतः उनके प्रवचनों की वास्तविक महत्ता उनके अन्तर में निवास करती थी, जिसकी व्याख्या नहीं की जा सकती है। उनकी यही आध्यात्मिक शक्ति सबको प्रभावित करती थी, अपनी ओर आकर्षित करती थी और संकुचित क्षेत्र से उठाकर उन्मुक्त वातावरण में ले जाती थी।
  हाजिर जवाबी में तो डॉ. राधाकृष्णन गजब के थे। एक बार वह इंग्लैण्ड गए। विश्व में उन्हें हिन्दुत्व के परम् विद्वान के रूप में जाना जाता था। तब देश परतंत्र था। बड़ी संख्या में लोग उनका भाषण सुनने के लिए आए थे। भोजन के दौरान एक अंग्रेज ने डॉ. राधाकृष्णन से पूछा, 'क्या हिन्दू नाम का कोई समाज है ? कोई संस्कृति है? तुम कितने बिखरे हुए हो ? तुम्हारा एक सा रंग नहीं, कोई गोरा, कोई काला, कोई बौना, कोई धोती पहनता है, कोई लुंगी कोई कुर्ता तो कोई कमीज, देखो, हम अंग्रेज एक जैसे हैं सब गोरे-गोरे, लाल-लाल। इस पर डॉ. राधाकृष्णन ने तपाक से उत्तर दिया, 'घोड़े अलग-अलग रंग रूप के होते हैं, पर गधे एक जैसे होते हैं। अलग-अलग रंग और विविधता विकास के लक्षण है।
  गीता में प्रतिपादित कर्मयोग के सिद्धान्तों के अनुसार वे एक निर्विवाद निष्काम कर्मयोगी थे। भारतीय संस्कृति के उपासक तथा राजनीतिज्ञ। इन दोनों ही रूपों में उन्होंने यह प्रयत्न किया कि वह सम्पूर्ण मानव समाज का प्रतिनिधित्व कर सकें और विश्व के नागरिक कहे जा सके। वह एक महान शिक्षाविद् थे और शिक्षक होने का उन्हें गर्व था। उन्होंने अपने राष्ट्रपतित्व काल में अपने जन्म दिवस को शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की इच्छा प्रकट की थी। तभी 5 सितम्बर को 'शिक्षक दिवस' के रूप में मनाया जाता है।
  डॉ. राधाकृष्णन गौतम बुद्ध की तरह हृदय में अपार करूणा लेकर आए थे। उनका दीप्तिमय तथा उज्ज्वल आलोक, भारत के आकाश में तो फैला ही, विश्व की धरती भी उनकी रश्मियों के स्पर्श से धन्य हो गई। पूर्ण आयु एवं यशस्वी जीवन का लाभ प्राप्त करने के बाद, वह 87 वर्ष की आयु में 16 अप्रैल, 1978 को ब्रह्मलीन हो गए।
  कठिन से कठिन परिस्थितियों में, निष्काम एवं समर्पण भाव से कर्म करने के मार्ग को डॉ. राधाकृष्णन, पुरुषार्थ का प्रशस्त मार्ग बताते थे। सदैव परमात्मा को स्मरण रखने का अर्थ ही विश्व सत्ता के साथ स्वयं को जोड़े रखना है। समष्टि की चेतना से अपने को जोड़े रखना, जिससे व्यष्टि का अभिमान कंधे पर सवार न होने पाए और अपने कर्तव्य को प्रभु की विधि मानना भी सक्रिय विसर्जन का मार्ग प्रशस्त करने के लिए है।
  डॉ. राधाकृष्णन हिन्दुस्तान के साधारण आदमी के विश्वास, समझदारी, उदारता, कर्तव्यपरायणता, सनातन मंगल भावना, ईमानदारी और सहजता। इन सबके आकार प्रतिबिम्ब थे। उन्हें बड़े देश का प्रथम नागरिक होने का बोध और अधिक विनम्र बनाता था। उन्हें ऊँचे से ऊँचे पद ने और अधिक सामान्य बनाया तथा राजनीति के हर दाव-पेंच ने और अधिक निश्चल बनाया।
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शिक्षक दिवस पर 10 वाक्य



नमूना 1

  1. भारत में शिक्षकोंके सम्मान में सन 1962 से प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है।
  2. 5 सितंबर को यह पूरे भारत देश में मनाया जाता है।
  3. यह शिक्षकों के सम्मान में मनाया जाता है।
  4. इस दिन डॉ• सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी का जन्म दिवस होता है। 
  5. वह एक महान विद्वान तथा आदर्श शिक्षक क्षक थे।
  6. वे भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति व दूसरे राष्ट्रपति थे।
  7. पहली बार शिक्षक दिवस 5 सितंबर 1962 को मनाया गया था। 
  8. इस दिन कुछ महान शिक्षकों को सम्मानित भी किया जाता है। 
  9. इस दिन छात्र अपने शिक्षक को उपहार भी देते हैं। 
  10. हमें हमेशा अपने शिक्षक का सम्मान करना चाहिए।
नमूना 2
  1. शिक्षक दिवस का उत्सव देश भर में प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को मनाया जाता है। 
  2. शिक्षक दिवस विद्यालयों व कॉलेजों में पूरे जोश के साथ मनाया जाता है। 
  3. यह दिन शिक्षकों और छात्रों दोनों के लिए ही काफी मजेदार होता है ।
  4. शिक्षक दिवस शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त करने का एक अवसर है ।
  5. इस दिन विद्यार्थी अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान प्रकट करते हैं।
  6. शिक्षक दिवस एक ऐसा दिन है, जो छात्र और शिक्षक के इस रिश्ते को और भी दृढ़ता प्रदान करता है ।
  7. इस दिन कई सारे खेलो और अन्य गतिविधियों का आयोजन किया जाता है।
  8.  जिन्हें शिक्षक और छात्र साथ मिलकर खलते हैं।
  9.  जोकि उनके रिश्तों को और भी घनिष्ठता प्रदान करने का कार्य करता है।
  10. विश्व भर में सौ अधिक देश अपने तय तारीख पर शिक्षकों को सम्मानित करने के लिए शिक्षक दिवस मनाते हैं।
नमूना : 3
  1. भारत में शिक्षकों के सम्मान में 1962 से प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है ।
  2.  यह उत्सव डॉ• सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिवस के उपलक्ष में मनाया जाता है।
  3. वे भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति होने के साथ साथ द एक महान शिक्षक भी थे। 
  4. एक महान शिक्षक के रूप में उनके योगदान के लिए इन्हें 1954 में भारत रत्न भी प्राप्त हुआ। 
  5. प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में शिक्षक का एक महत्वपूर्ण योगदान रहता है। 
  6. एक छात्रा को उसके जीवन की सही दिशा तय करने का मार्ग शिक्षक ही दिखता है। 
  7. इस दिन छात्र अपने गुरुओं के सम्मान में उन्हें उपहार देते हैं। 
  8. स्कूल व कॉलेज में छात्र मिलकर शिक्षकों के लिए कार्यक्रम आयोजित करते हैं।
  9. यह समझ शिक्षकों के समर्पण और उपलब्धियों का प्रतीक है।
  10. विश्व भर में 100 से अधिक देश अपने निर्धारित समय पर शिक्षक दिवस मनाते हैं। 

नमूना : 4
  1. शिक्षक दिवस एक महत्वपूर्ण अवसर है, जो हर साल 5 सितंबर को मनाया जाता है। 
  2. यह दिन भारत के दूसरे राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन पर उनकी शिक्षकीय सेवाओं को सम्मानित करने के लिए मनाया जाता है। 
  3. शिक्षक हमारे जीवन के मार्गदर्शक होते हैं, जो हमें ज्ञान के साथ-साथ जीवन के महत्वपूर्ण मूल्य सीखते हैं।
  4. शिक्षक हमें न केवल शिक्षा देते हैं बल्कि हमारे व्यक्तित्व का भी निर्माण करते हैं। 
  5. शिक्षक दिवस के माध्यम से हम उनके अथक प्रयासों और योगदान के प्रति के तायता व्यक्त करते हैं। 
  6. यह दिन हमें हमारे शिक्षकों के महत्व और उनके द्वारा निभाई गई भूमिका की याद दिलाता है। 
  7. विद्यार्थी इस दिन विभिन्न कार्यक्रमों और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से अपने शिक्षकों को सम्मानित करते हैं। 
  8. शिक्षक हमारी सोच को आकार देते हैं और हमारे सपनों को साकार करने में हमारी मदद करते हैं। 
  9. वे हमें जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना करने और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने की प्रेरणा देते हैं।
  10. शिक्षक दिवस का उद्देश्य शिक्षकों के प्रति सम्मान और आभार प्रकट करना है, जो समाज के निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं।
नमूना : 5
  1. शिक्षक दिवस भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन के उपलक्ष में मनाया जाता है। 
  2. यह उत्सव डॉक्टर राधाकृष्णन के सम्मान में मनाया जाता है, जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। 
  3. शिक्षक दिवस शिक्षकों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करने का एक विशेष अवसर है। 
  4. इस दिन छात्र अपने शिक्षकों के सम्मान में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करते हैं। 
  5. शिक्षक राष्ट्र के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  6. शिक्षक छात्रों को ज्ञान प्रदान करते हैं और उन्हें सही मार्गदर्शन देते हैं। 
  7. शिक्षक छात्रों को प्रेरित करते हैं और उन्हें जीवन में सफल होने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। 
  8. यह दिन छात्रों और शिक्षक के बीच एक मजबूत बंधन को दर्शाता है। 
  9. शिक्षक छात्रों के लिए मार्गदर्शन और प्रेरणा के स्रोत होते हैं। 
  10. विश्व भर में विभिन्न देश अपने निर्धारित तारीख को शिक्षक दिवस मनाते हैं।
नमूना : 6
  1. भारत में हर साल 5 सितंबर को विद्यार्थियों द्वारा अपने शिक्षकों को सम्मान देने के लिए शिक्षक दिवस मनाया जाता है।
  2. इसी दिन हमारे पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 1888 ई को हुआ था। 
  3. डॉक्टर सर्वपल्ली रधाकृष्णन भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति रहने के साथ-साथ एक महान शिक्षक भी थे।
  4. शिक्षक और विद्यार्थी के बीच के रिश्तों की खुशी को मनाने के लिए शिक्षक दिवस एक बड़ा अवसर है। 
  5. देश में रहने वाले नागरिकों के भविष्य निर्माण के द्वारा शिक्षक राष्ट्र निर्माण का कार्य करते हैं। 
  6. शिक्षक हमारे व्यक्तित्व विश्वास और कौशल स्तर को भी सुधारते हैं। 
  7. इस दिन को शिक्षकों को सम्मान और आभार प्रकट करने के लिए समर्पित किया गया है। 
  8. इस दिन छात्र-छात्राएं अपने शिक्षकों के लिए ग्रीटिंग कार्ड, फूल और तमाम तरह के कई उपहार आदि हैं। 
  9. इस प्रकार के कार्यक्रम और सम्मान द्वारा छात्रों और शिक्षकों के रिश्तों को और अधिक मजबूती मिलती है।
  10. शिक्षक के योगदान के लिए 5 सितंबर या शिक्षक दिवस ही नहीं, हमें हमेशा उनका आभारी होना चाहिए और उनका आदर देना चाहिए।


नमूना : 7

शिक्षक दिवस पर निबंध 500 शब्द 

शिक्षक दिवस - 5 सितंबर
  समाज को सही दिशा देने में शिक्षक की अहम भूमिका होती है। वह देश के भाभी नागरिकों अर्थात बच्चों के व्यक्तित्व सवारने के साथ-साथ उन्हें शिक्षित भी करता है। इसलिए शिक्षकों द्वारा किए गए श्रेष्ठ कार्यों का मूल्यांकन कर उन्हें सम्मानित करने का दिन ही शिक्षक दिवस कहलाता है। हालांकि डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन जो की 1962 से 1967 तक भारत के राष्ट्रपति भी रहे। उनके जन्मदिवस के अवसर पर ही शिक्षक दिवस मनाया जाता है। वे संस्कृतज्ञ, दार्शनिक होने के साथ-साथ शिक्षा शास्त्री भी थे। राष्ट्रपति बनने से पूर्व वे शिक्षा के क्षेत्र में से ही संबंध रखते थे। 1920 से 1921 तक इन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र के किंग जॉर्ज पंचम पद को सुशोभित किया। 1939 से 1948 तक वे विश्वविख्यात काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति पद पर रहे। राष्ट्रपति बनने के बाद जब लोगों ने उनका जन्म दिवस सार्वजनिक रूप से आयोजित करना चाहा तो उन्होंने जीवन का अधिकतर समय शिक्षक रहने के नाते इस दिवस को शिक्षकों का सम्मान करने हेतु शिक्षक दिवस मनाने की बात कही। उसी समय, 1962 से प्रतिवर्ष यह दिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है।
  शिक्षकों द्वारा किए गए श्रेष्ठ कार्यों का मूल्यांकन कर उन्हें सम्मानित करने का भी यही दिन है। इस दिन स्कूलों कॉलेजों में शिक्षक का कार्य छात्र खुद ही संभालते हैं। इस दिन राज्य सरकारों द्वारा अपने स्तर पर शिक्षक के प्रति समर्पित और छात्र-छात्राओं के प्रति अनुराग रखने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया जाता है। शिक्षक राष्ट्रनिर्माण में मददगार साबित होते हैं वहीं वे राष्ट्रीय संस्कृत के रक्षक भी हैं। वे बालकों में सुसंस्कार तो डालते ही हैं साथ ही उनके अज्ञानता रूपी अहंकार को दूर कर उन्हें देश का श्रेष्ठ नागरिक बनाने का दायित्व भी वहन करते हैं। शिक्षक राष्ट्र के बालकों को न केवल साक्षर ही बनाते हैं बल्कि अपने उपदेश द्वारा उनके ज्ञान का तीसरा चक्षु भी खोलते हैं। वे बालक में हित-अहित, भला बुरा सोचने की शक्ति उत्पन्न करते हैं। इस तरह वे राष्ट्र के समग्र विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  शिक्षक उस दीपक के समान हैं जो अपनी ज्ञान ज्योति से बालकों को प्रकाशमान करते हैं। महर्षि अरविंद ने अपनी एक पुस्तक जिसका शीर्षक 'महर्षि अरविंद के विचार' है में शिक्षक के संबंध में लिखा है - अध्यापक राष्ट्र की संस्कृति के माली होते हैं। वे संस्कार की जड़ो में खाद देते हैं और अपने श्रम से उन्हें सींच-सींच कर महाप्राण शक्तियां बनाते हैं। इटली के एक उपन्यासकार ने शिक्षक के बारे में कहा है कि शिक्षक उस मोमबत्ती के समान है जो स्वयं जलकर दूसरों को प्रकाश देती है। संत कबीर ने तो गुरु को ईश्वर से भी बड़ा मन है। उन्होंने गुरु को ईश्वर से बड़ा मानते हुए कहा है कि -
गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागू पाय।
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो मिलाय।।
  शिक्षक को आदर देना समाज और राष्ट्र में उनकी कीर्ति को फैलाना केंद्र व राज्य सरकारों का कर्तव्य ही नहीं दायित्व भी है। इस दायित्व को पूरा करने का शिक्षक दिवस एक अच्छा दिन है। 
  गुरु से आशीर्वाद लेने की भारत की अत्यंत प्राचीन परिपाटी है। आषाढ़ माह में पड़ने वाली पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा या व्यास पूर्णिमा नाम इसी के निमित्त दिया गया है। स्कूलों-कॉलेजों के अतिरिक्त सरकार की ओर से भी इस दिन समारोह आयोजित किए गए जाते हैं। दिल्ली सरकार द्वारा आयोजित एक बड़े समारोह में राजधानी के स्कूलों से चयनित श्रेष्ठ शिक्षकों को सम्मानित किया जाता है। इसके अलावा स्थानीय निकायों मसलन दिल्ली नगर निगम, नई दिल्ली नगर पालिका परिषद, दिल्ली छावनी परिषद द्वारा भी समारोह आयोजित कर अपने अधीन आने वाले स्कूलों के श्रेष्ठ शिक्षकों को सम्मानित किया जाता है।

शिक्षक दिवस पर भाषण

नमूना : 1

शिक्षक दिवस क्यों मनाया जाता है ?

गुरु बिन होत न ज्ञान, गुरु बिन दिशा अजान।
गुरु बिन इंद्रिय न सधे, गुरु बिन बढ़े न शान।।
  हमारे सभी शिक्षक गणों को सुप्रभात। आज जब हम सब यहां शिक्षक दिवस के अवसर पर एकत्रित हुए हैं, मैं हर उस शिक्षक को धन्यवाद देना चाहता हूॅं, जो हमेशा हमारा मार्गदर्शक बनते रहे हैं। आपने हमें न केवल सीखने का नया तरीका सिखाया है बल्कि कोरोना जैसे महामारी और लॉकडाउन के दौरान भी पढ़ते रहने और सीखने रहने के लिए प्रेरित किया है।
  शिक्षक दवस हर साल 5 सितंबर को मनाया जाता है, इसलिए मैं इस अवसर पर शिक्षक दिवस के इतिहास और इसे मनाने के क्रम के बारे में बात करना चाहूंगा; 


मेहनत की राह पर जो चलना सीखाते हैं,
जुनून की आग में जो जलन सीखाते हैं।
जिनको कितना भी सता लो , नहीं रूठते, 
वही हम बच्चों के शिक्षक कहलाते हैं।

  हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। क्या आप जानते हैं कि यह तारीख क्यों चुनी गई ? यह दिन डॉक्टर सर्वपल्ली रधाकृष्णन जी की जयंती है, जो एक भारतीय विद्वान थे। वे 1962 से 1967 तक भारत के दूसरे राष्ट्रपति भी रहे।
 डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक महान विद्वान थे, जिन्होंने अपना जीवन शिक्षा के लिए समर्पित कर दिया। एक बार उनके छात्रों ने उनसे उनका जन्मदिन मनाने के लिए कहा। इस पर उन्होंने सरलता से उत्तर दिया और कहा 'मेरा जन्मदिन मनाने के बजाय अगर 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाए तो यह मेरे लिए गर्व की बात होगी।'
  तब सभी शिक्षकों को सम्मानित करने के लिए उनके जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में घोषित किया गया था। 1962 से भारत में हर वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। 
अंत में, मैं अपना भाषण डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम के उदाहरण के साथ समाप्त करना चाहूंगा, शिक्षा का उद्देश्य कौशल और विशेषज्ञ वाले अच्छे इंसान बनना है। प्रबुद्ध इंसान शिक्षकों द्वारा ही बनाए जा सकते हैं।
  मेरे सभी शिक्षकों को धन्यवाद जो हमेशा हमारे मार्गदर्शक और सहयोगी रहे हैं। मैं आपके आशीर्वाद को जीवन के हर पड़ाव पर याद रखूंगा। धन्यवाद! हैप्पी टीचर्स डे! जय हिंद!

शिक्षक दिवस पर भाषण - नमूना : 2


"हजारो फूल चाहिए एक माला बनाने के लिए 
हजारों रंग चाहिए एक रंगोली बनाने के लिए 
पर एक शिक्षक ही अकेला काफी है। 
बच्चों के जिंदगी को स्वर्ग बनाने के लिए।"

माननीय मुख्य अतिथि, आदरणीय शिक्षक वर्ग और मेरे प्यारे दोस्तों...
  जैसा कि हम सब जानते हैं कि आज 5 सितंबर को हम सब शिक्षक दिवस का जश्न मनाने के लिए यहां उपस्थित हुए हैं आज मैं आपको शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षक के महत्व पर छोटा सा भाषण देने जा रहा हूं। मेरी आपसे विनती है कि कृपया करके आप मेरा यह भाषण ध्यान पूर्वक और शांतिपूर्वक सुने ।
 आज 5 सितंबर है और हम सभी को पता है कि आज शिक्षक दिवस है। हम सब हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस का उत्सव मनाते हैं‌। आज डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन है। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन हमारे देश के प्रथम उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति रह चुके थे। वे पहले ऐसे महान प्रतिष्ठित शिक्षक थे जो हमारे देश के राष्ट्रपति भी बने। इस दिन शिक्षा के जगत में उनके अतुलनीय योगदान और उपलब्धियों को याद किया जाता है। सर्वपल्ली राधाकृष्णन विख्यात विद्वान, भारतीय संस्कृति के संवाहक और महान दार्शनिक भी थे। यह दिन शिक्षकों के प्रति प्यार और सम्मान व्यक्त करने का दिन है। इस दिन हम अपने शिक्षकों के अथक समर्पण और अटूट प्रयासों के लिए अपनी कृतिका व्यक्त करते हैं। शिक्षक दिवस के दिन स्कूल और कॉलेज में विशेष कार्यक्रम आयोजित होते हैं जिनमें विद्यार्थी शिक्षक से संबंधित भाषण देते हैं। कई स्कूलों में निबंध प्रतियोगिताएं भी होती हैं जिसके माध्यम से विद्यार्थी अपने मनपसंद शिक्षक के प्रति अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हैं। शिक्षक ही हमारे प्रेरणा स्रोत हैं जो हमें हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहते हैं। मैं अपने भाषण का समापन एक दोहे के साथ करना चाहूंगा 
गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागू पाय।
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो मिलाय।।


धन्यवाद! जय हिंद! जय भारत!


शिक्षक दिवस पर भाषण - नमूना : 3

आदरणीय प्रधानाध्यापक महोदय, सभी शिक्षक गण और मेरे प्यारे सहपाठी गण, आप सभी को मेरा प्रणाम! 
  आज 5 सितंबर को हम सब यहां शिक्षक दिवस से अवसर पर एकत्रित हुए हैं। आप सभी को शिक्षक दिवस की ढेर सारी शुभकामनाएं। शिक्षक हमारे जीवन का स्तंभ और मार्गदर्शक होते हैं। वह अपना समय देकर हमारे जीवन को सजते-सवारते हैं और आगे बढ़ते हैं। जिस प्रकार मिट्टी को तरास कर कलाकृति तैयार करने का कार्य कुम्हार करता है। वैसे ही शिक्षक हम बच्चों में निखार लाते हैं। हमें सवारते हैं और जीवन में आने वाली कठिनाइयों का सामना करने का साहस देते हैं। शिक्षक न सिर्फ हमें शिक्षा देते हैं बल्कि वह हमेशा हमें एक अच्छा इंसान बनाने की कोशिश में लगे रहते हैं। उनकी कहीं बातें ही हमारे जीवन में निखार लाती हैं। साथियों इस दिन हमें डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को याद कर उन्हें नमन करना चाहिए जिनकी जयंती 5 सितंबर के दिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। 5 सितंबर शिक्षक दिवस का दिन उन्हें ही समर्पित है। डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन देश के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति होने के साथ-साथ एक महान शिक्षाविद, भारतीय संस्कृति के सवाहक, प्रख्यात शिक्षाविद् और महान दार्शनिक भी थे।
  डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन स्वयं एक बहुत अच्छे शिक्षक थे। 5 सितंबर 1888 को तमिलनाडु के एक छोटे से गांव तिरूमानी में जन्मे डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को 27 बार नोबेल पुरस्कार के लिए नामित किया गया था। 1954 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
  अब मैं बताता हूं। उसे किस के बारे में जिसकी वजह से उनके जन्मदिन को शिक्षक दिवस के तौर पर चुना गया। एक बार जब उनके छात्रों ने आदर सम्मान से उनसे पूछा कि क्या वह उन्हें उनके जन्मदिन पर कोई गिफ्ट दे सकते हैं और उनका जन्मदिन मना सकते हैं। इस पर डॉ. राधाकृष्णन जी ने छात्रों से उपहार लेने से मना कर दिया और कहा कि वह इस दिन को शिक्षक दिवस के रूप में मान सकते हैं। जब बाद में उनका निधन हुआ तो उन्हें श्रद्धांजलि व सम्मान देने के लिए उनके जन्मदिन 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने का फैसला लिया गया।
  शिक्षक हमारे समाज का निर्माण करते हैं। वे ही हमारे मार्गदर्शक होते हैं। शिक्षक का स्थान माता-पिता से भी ऊंचा होता है। माता-पिता बच्चों को जन्म जरूर देते हैं। लेकिन शिक्षक उसके चरित्र को आकार देकर उज्जवल भविष्य का नीव तैयार करते हैं। इसलिए हम चाहे कितने भी बड़े क्यों ना हो जाए, हमें अपने शिक्षकों को कभी नहीं भूलना चाहिए।
यकीन मानिए, हमें जीवन के हर मुश्किल और अच्छे मोड़ पर शिक्षकों के द्वारा सिखाई गई बातें याद आती रहेगी। एक कुम्हार जैसे मिट्टी के बर्तन को आकर देता है वैसे ही शिक्षक हमारे जीवन को सवारते हैं‌। शिक्षक ही हमारे प्रेरणा के स्त्रोत हैं जो हमेशा हमें आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करते हैं। 
अब मैं अपने भाषण को यही दो पंक्तियों के साथ विराम देना चाहूंगा-
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु: गुरुर्देवो महेश्वर: ,
गुरु: साक्षात् परम् ब्रम्ह तस्मै श्री गुरुवे नमः ।।


धन्यवाद! जय हिंद!

15 अगस्त पर निबंध / स्वतंत्रता दिवस पर छोटे बड़े निबंध/ essay in Hindi on 15th August

  हमारा देश भारतवर्ष 15 अगस्त सन् 1947 को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हुआ था। इस आजादी या स्वतंत्रता को प्राप्त करने के लिए कई वीरों ने अपनी जान की बाजी लगा दी। प्रतिवर्ष स्वतंत्रता दिवस अर्थात 5 अगस्त को प्रधानमंत्री नई दिल्ली के लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराते है और हमारे देश को संबोधित करते हुए भाषण देते हैं। 


अक्सर स्कूली बच्चों (विद्यार्थियों) को स्वतंत्रता दिवस पर निबंध लिखने को दिया जाता है जिससे उनका मानसिक विकास हो सके। इस लेख में हम स्वतंत्रता-दिवस जिसे हम 15 अगस्त के रूप में भी जानते हैं के विषय पर छोटी बड़ी कई निबंध के नमूने लाए हैं जिसे आप पढ़कर एक अच्छा निबंध लिखने का प्रयास कर सकते हैं। यदि निबंध पसंद आए अच्छा लगे तो आपसे एक ही अनुरोध है कि हमारे पेज को अपने मित्रों में अवश्य शेयर करें। 

👉 कक्षा 5 के लिए सामान्य ज्ञान GK QUIZ 

कक्षा 1 के विद्यार्थियोंक लिए स्वतंत्रता दिवस पर 5 पंक्तियों का निबंध। 

  1. स्वतंत्रता दिवस प्रति वर्ष  15 अगस्त को मनाया जाता है ।
  2. स्वतंत्रता दिवस पर सभी के लिए राष्ट्रीय अवकाश है।
  3. यह आजादी या स्वतंत्रता हमारे देश को लंबे संघर्ष और बलिदान के बाद प्राप्त हुआ। 
  4. यह हमें हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष, बलिदान और बहादुरी की याद दिलाता है।
  5. हम राष्ट्रीय झंडा तिरंगा फहराकर और राष्ट्रगान गाकर स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं। 
नमूना 2 

15 अगस्त /स्वतंत्रता दिवस पर 10 लाइन 

  1. भारत को 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश शासन से आजादी मिली। 
  2. तभी से भारत हर साल 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाता है।
  3. पूरा देश राष्ट्रीय ध्वज फहराकर स्वतंत्रता दिवस मनाता है।
  4. इस दिन हम अपने स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का सम्मान करते हैं। 
  5. स्वतंत्रता दिवस हमारे देश के लिए एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अवकाश है। 
  6. हमारी छुट्टियां होती हैं लेकिन हम झंडा फहराने के समारोह में भाग लेने के लिए स्कूल जाते हैं।
  7. हम राष्ट्रगान गाते हैं और तिरंगे को सलामी देते हैं। 
  8. स्कूल में स्वतंत्रता दिवस मनाने के बाद हम घर जाते हैं और टेलीविजन पर राजधानी में होने वाली राष्ट्रीय परेड देखते हैं। 
  9. स्वतंत्रता दिवस हमारे देश की विविध संस्कृतियों का उत्सव भी है। 
  10. लोग देशभक्ति के गीत गाकर और झंडा फहराकर देश के प्रति सम्मान अपना प्रेम प्रदर्शित करते हैं।
नमूना  3 (100 शब्द में)

15 अगस्त / स्वतंत्रता दिवस पर निबंध 

  भारत में स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को मनाया जाता है। यह एक विशेष दिन है, क्योंकि इसी दिन 1947 में भारत ब्रिटिश शासन से मुक्त हुआ था। इस स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए कई वीरों ने कड़ी मेहनत की और बलिदान दिए। प्रतिवर्ष इस दिन प्रधानमंत्री नई दिल्ली के लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं और हमारे देश के बारे में भाषण देते हैं। पूरे भारत में विभिन्न संस्कृतियों और पृष्ठभूमियों का प्रतिनिधित्व करने वाले लोग ध्वजारोहण, गायन, नृत्य और परेड के साथ जश्न मनाने के लिए एकत्र होते हैं। यह सभी के लिए भारत का हिस्सा होने पर गर्व और खुशी महसूस करने का दिन है, जो हमारी विविधता में एकता को दर्शाता है। 

नमूना 4 ( 150 शब्द में )

15 अगस्त / स्वतंत्रता दिवस पर निबंध 

  15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस भी कहा जाता है, क्योंकि भारत इसी दिन 1947 में ब्रिटिश शासन से मुक्त हुआ था। यह वही दिन है, जब हम उन वीर स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों को याद करते हैं। जिन्होंने हमारी आजादी के लिए संघर्ष किया।
  इसी दिन 1947 में भारत को ब्रिटिश शासन से आजादी मिली थी। इस दिन के सम्मान में राजधानी, नई दिल्ली में एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। समारोह की शुरुआत ध्वजारोहण समारोह और स्वतंत्रता संग्राम में अपने प्राणों की आहुति देने वालों के बलिदान को सम्मान देने से होती है। 
 हमारी स्कूल इस दिन एक कार्यक्रम आयोजित करती है, जिसमें हम अपने झंडो के रंगों के कपड़े पहनते हैं, और मंच पर गीत और नित्य प्रस्तुत करते हैं।
देशभक्ति पर आयोजित भाषण, कविता पाठ और विभिन्न प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती हैं, जिनमें बच्चों और बड़ों को उत्साह पूर्वक भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। तिरंगे हर जगह लहराते हैं, और लोग गर्व से राष्ट्रगान गाते हैं। जिससे पूरा माहौल देशभक्ति की भावना से भर जाता है। सभी के बीच स्वादिष्ट मिठाइयां बांटी जाती हैं, जिससे यह अवसर सभी के लिए और भी अधिक आनंदमय और यादगार बन जाता है। 

 नमूना 5 ( 200 शब्दों में )

15 अगस्त / स्वतंत्रता दिवस पर निबंध 


   आज से कुछ दिन पहले हमारा देश पराधीन था। यहाँ अंग्रेज राज करते थे, लेकिन 15 अगस्त 1947 को हमारा देश स्वतन्त्र हो गया। उसी समय से हमारे देश में 'स्वतन्त्रता दिवस' मनाया जाता है।
  यह हमारा राष्ट्रीय त्योहार है, इसलिए प्रतिवर्ष हमारे विद्यालय में भी 15 अगस्त को स्वतन्त्रता दिवस मनाते हैं। इस दिन सबेरे 8 बजे सभी छात्र-छात्रायें विद्यालय के मैदान में इकट्ठे हो जाते हैं। सभी अध्यापक-अध्यापिकायें भी उपस्थित रहते हैं, तब प्रधानाचार्य महोदय राष्ट्रीय झंडा फहराते हैं। उस समय सभी एक साथ 'वन्देमातरम्', 'भारतमाता की जय' आदि के नारे लगाते हैं और तिरंगे झंडे को सलामी देते हैं।, परेड होता है।
  इसके बाद शिक्षकों तथा अतिथि महोदय का भाषण होता है। वे स्वतन्त्रता-दिवस का इतिहास बताते हैं। विद्यार्थी राष्ट्रीय कवितायें भी सुनाते हैं। इसके बाद विद्यालय में मिठाई बाँटी जाती है और हमलोग प्रसन्नतापूर्वक घर लौट आते हैं।
   वैसे इस दिन सारे देश में खुशी मनाई जाती है। जगह-जगह उत्सव के साथ झंडा फहराया जाता है। कहीं-कहीं शाम को नाटक, संगीत अथवा कविता पाठ भी होता है।

नमूना 6 (350 शब्दों में)

स्वतंत्रता दिवस पर निबंध

   दो सौ वर्षों की पराधीनता के बाद 1947 ई० के 15 अगस्त को भारत के कालिमामय आंकाश में स्वतंत्रता के सूर्य का उदय हुआ। इसी दिन सात समुद्र पार से आये अँगरेजों ने अपना बोडिया विस्तर बाँधा और भारत की जनता को सत्ता सीपी। भारत के इतिहास में सदा सदा के लिए 'पंद्रह अगस्त' स्वर्णाक्षरों में अंकित हो गया।

  भारतीयों ने अँगरेज शासकों के विरुद्ध 1857 ई० में ही स्वाधीनता का संग्राम छेड़ दिया था। पूरे भारत में फिरंगियों को भगाने के लिए लोगों ने लोहा लिया था। झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, तांत्या टोपे, नाना फडणवीस, वीर कुंवर सिंह सरीखे देशभक्तों ने अँगरेजों के छक्के छुड़ा दिये थे। परंतु संगठित प्रयास, कूटनीतिज्ञता तथा आधुनिक अस्त्र-शस्त्रों के अभाव के कारण 1857 ई० का विद्रोह' असफल हो गया। इसका विपरीत परिणाम यह हुआ कि भारत पर पूर्ण रूप से ब्रितानिया, सरकार का झंडा फहराने लगा अर्थात् भारत पूरी तरह गुलाम हो गया। यदि संगठित प्रयास होता और संपूर्ण भारतीय जनता की साझेदारी होती तो भारत की स्वाधीनता का संग्राम अवश्य सफल होता है और भारत सी वर्ष पहले स्वतंत्र हो गया होता।

  यद्यपि भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम असफल हो गया, तथापि भारत में स्वतंत्रता की धधकती हुई ज्वाला पूरी तरह शांत नहीं हुई। शेष बची चिनगारी ने फिर विस्फोटक रूप धारण किया। दादाभाई नौरोजी, लोकमान्य तिलक, गोखले, आदि नेताओं के नेतृत्व में स्वतंत्रता आंदोलन की लहर बढ़ती गयी। महात्मा गांधी, डॉ राजेंद्र प्रसाद, सरदार वल्लभभाई पटेल, सुभाषचंद्र बोस, जवाहरलाल नेहरू, आदि महान नेताओं ने भारतीय स्वाधीनता आंदोलन को तेज कर दिया। सरदार भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद जैसे महान क्रांतिकारियों ने अपने क्रांतिकारी कार्यों से अँगरेजों की पतलूनें ढीली कर दीं। सुभाषचंद्र बोस ने 'आजाद हिंद फौज' नामक सैन्य संगठन से अंगरेजों की नींद ही हराम नहीं कर दी बल्कि अँगरेजी सत्ता की नींव हिला दी। गांधी जी 1942 ई० में 'करो या मरो' का नारा दे कर स्वतंत्रता की लड़ाई को अंतिम लक्ष्य तक पहुँचा दिया। फलस्वरूप हार कर अँगरेजों को 1947 ई० के 15 अगस्त को भारत छोड़ना पड़ा और विश्व के मानचित्र पर एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में भारत का मानचित्र अंकित हुआ।

  सौ वर्षों के संघर्ष के बाद भारत स्वतंत्र हुआ। असंख्य भारतीय वीरों के अमूल्य बलिदान के बाद भारत को यह सफलता प्राप्त हुई। इसीलिए हम प्रत्येक पंद्रह अगस्त को उल्लासपूर्वक स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं और उस दिन स्वतंत्रता की रक्षा का संकल्प लेते हैं।













Raksha-bandhan per Nibandh /रक्षाबंधन पर सुंदर निबंध

Raksha-bandhan per chhote bade nibandh



स्कूली बच्चों के लिए रक्षाबंधन पर छोटे बड़े निबंध

रक्षाबंधन पर 10 वाक्य 
नमूना :- 1
  1. रक्षाबंधन हिंदुओं का एक पवित्र एवं प्रमुख त्यौहार है। 
  2. रक्षाबंधन प्रत्येक वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। 
  3. यह त्यौहार प्रत्येक वर्ष अगस्त महीने में पड़ता है। 
  4. रक्षाबंधन भाई बहन के बीच प्यार और अटूट रिश्ते का प्रतीक है। 
  5. इस दिन सभी बहनें अपने भाइयों को रक्षा सूत्र अर्थात राखी बांधती हैं। 
  6. राखी बांधने के साथ ही बहने अपने भाइयों की कुशलता की कामना करती हैं।
  7. भाई भी जीवन भर अपनी बहनों की रक्षा करने का वचन देता है।
  8. रक्षाबंधन पर विभिन्न प्रकार के पकवान और मिठाइयां खाने को मिलती हैं। 
  9. राखियों और मिठाइयों की दुकान लोगों की भीड़ से भरे होते हैं। 
  10. सभी धर्मों के लोग इसे बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं।
नमूना :- 2
रक्षाबंधन / राखी पर 10 लाइन 
  1. रक्षाबंधन का शाब्दिक अर्थ रक्षा करने वाला बंधन अर्थात धागा है।
  2. इस पर्व में बहने अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र  अर्थात राखी बांधती हैं और भाई जीवन भर उनकी रक्षा करने का वचन देते हैं। 
  3. यह पर्व प्रत्येक वर्ष श्रावण मास के पूर्णिया में पड़ने वाला हिंदू तथा जैन धर्म का प्रमुख त्यौहार है।
  4. प्राचीन समय में घर की छोटी बेटी द्वारा पिता को राखी बांधी जाती थी। 
  5. इसके साथ ही गुरुओं द्वारा अपने यजमान को भी रक्षा सूत्र बांधा जाता था। 
  6. आज महिलाओं द्वारा देश की सुरक्षा में तैनात सैनिकों को सीमा पर जाकर राखी बांधी जाती है क्योंकि वह बाहरी शक्ति से हमारी रक्षा करते हैं। 
  7. राखी का त्यौहार भाई-बहन को भावनात्मक तौर पर जोड़ता है। 
  8. राखी का पर्व मुख्य रूप से भारत के साथ-साथ नेपाल व मलेशिया तथा अन्य देशों में भी मनाया जाता है।
  9. इस दिन बाजारों में रखी और मिठाइयों की दुकानों पर काफी भीड़ होती है। 

नमूना :- 3 
रक्षाबंधन / राखी पर 10 लाइन 
  1. रक्षाबंधन हिंदुओं का प्रमुख त्यौहार है। 
  2. रक्षाबंधन को राखी का त्यौहार भी कहा जाता है। 
  3. यह त्यौहार सावन माह की पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। 
  4. यह भाई बहन का त्योहार है ।
  5. इस दिन बहन अपने भाई को राखी बनती है और भाई बहन को रक्षा करने का वचन देता है।
  6. इस दिन घरों में ढेर सारे पकवान बनाए जाते हैं। 
  7. इस दिन भाई बहनों को उपहार भी देते हैं। 
  8. इस दिन लोग नए-नए कपड़े पहनते हैं। 
  9. महीने भर पहले से ही बाजारों में सुंदर और रंग बिरंगी राखियां बिकनी लगते हैं।
  10. इस त्यौहार को भारत में मनाने के साथ साथ विदेशों में भी बड़ी धूमधाम से मानते हैं।
नमूना 4
रक्षाबंधन / राखी पर 10 लाइन 

  1. रक्षाबंधन एक महत्वपूर्ण हिंदू त्यौहार है जो भाई-बहन के बीच के बंधन का जश्न मानता है।
  2. इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर 'राखी' बांधती है।
  3. राखी बहन के प्यार और उसके भाई की सलामती की प्रार्थना का प्रतीक है। 
  4. भाई अपने बहनों को राखी बांधने के उपलक्ष में उपहार देते हैं और उनकी रक्षा और देखभाल करने का वादा करते हैं। 
  5. यह त्यौहार हिंदू महीने के अनुसार श्रावण की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है जो अंग्रेजी कैलेंडर में अगस्त महीनेम आता
  6. है।
  7. इस त्योहार से संबंधित इतिहास में कई कहानियां है और यह विभिन्न पौराणिक कथाओं से भी जुड़ा हुआ है।
  8. यह एक ऐसा दिन है जब परिवार एक साथ मिलकर जश्न मनाते हैं और खुशियां बांटते हैं। 
  9. भारत में रक्षाबंधन की परंपरा अलग-अलग क्षेत्र और समुदायों में अलग-अलग प्रकार की है। 
  10. रक्षाबंधन हमें पारिवारिक रिश्तों के महत्व और एक दूसरे की रक्षा और समर्थन के करने के कर्तव्य का याद दिलाता है।
👉 कक्षा 5 के लिए सामान्य ज्ञान GK QUIZ 
नमूना :- 5 

200 शब्दों में रक्षाबंधन पर निबंध (essay on Raksha Bandhan in English - 200 word)

  रक्षाबंधन भारत में मनाया जाने वाला हिंदुओं का एक विशेष त्यौहार है जो भाई-बहन के बीच मजबूत बंधन का सम्मान करता है। रक्षाबंधन का शाब्दिक अर्थ है - "सुरक्षा का बंधन"। यह त्यौहार प्रतिवर्ष हिंदी कैलेंडर के अनुसार श्रावण माह में और अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार अगस्त महीने में पूर्णिमा को पड़ता है। इस दिन बहाने अपने भाइयों की कलाई पर "रक्षा-बंधन" अर्थात "राखी " नामक एक रंगीन सुंदर धागा बांधती हैं। यह राखी बहनों के प्यार का प्रतीक रूप है जिसके द्वारा बहाने अपने भाई की खुशी और लंबी उम्र की कामना करती हैं। 

 बदले में भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं और जीवन भर उनकी रक्षा और देखभाल करने का वादा करते हैं। यह आदान-प्रदान आपसी सम्मान और स्नेह दिखाने का एक प्रतीक या तरीका है। यह त्यौहार पारिवारिक समारोह के रूप में मनाया जाता है, जहां सभी लोग विशेष मिठाइयों और पारंपरिक खाद्य पदार्थों का आनंद लेते हैं।

 रक्षाबंधन सिर्फ खून के रिश्तों तक सीमित नहीं है ; इसे चचेरे भाई-बहनों या  करीबी दोस्तों के बीच भी मनाया जा सकता है, जो भाई-बहनों जैसा बंधन साझा करते हैं । ये खुशी, हंसी और परिवार के साथ गर्म जोशी से भरा दिन रहता है।

  यह त्यौहार हमें पारिवारिक संबंधों के महत्व और प्रेम सुरक्षा और प्रतिबद्धता के मूल्य की याद दिलाता है। यह हमारे जीवन में सबसे महत्वपूर्ण रिश्तो को मजबूत करने का एक सुंदर तरीका है।


नमूना :- 6 

250 शब्दों में रक्षाबंधन पर निबंध (essay on Raksha Bandhan in English - 250 word)


  रक्षाबंधन हिंदुओं का एक पारंपरिक त्यौहार है जो भाई-बहन के बीच प्यार और सुरक्षा के बंधन को दर्शाता है। यह त्यौहार जो आमतौर पर अगस्त में हिंदू महीने के अनुसार श्रावण की पूर्णिमा के दिन पड़ता है इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रखी नामक एक रंगीन पवित्र धागा बांधती है। राखी बहन के प्यार और अपने भाई की भलाई के लिए प्रार्थना का प्रतीक है, जबकि भाई अपनी बहन की रक्षा और देखभाल करने का वादा करता है। रक्षा-बंधन के त्यौहार की जड़ें इतिहास और पौराणिक कथाओं के विभिन्न कहानियों में मिलती है। एक लोकप्रिय कहानी महाकाव्य महाभारत से है, जिसमें ऐसा कहा गया है कि जब भगवान कृष्ण की उंगली में चोट लगी थी, तो पांडवों की पत्नी द्रोपदी ने अपनी साड़ी का एक टुकड़ा पड़ा और खून बहाने से रोकने के लिए कृष्ण की उंगली पर बांध दिया। उसके भाव से प्रभावित होकर कृष्ण ने उसकी रक्षा करने का वादा किया और बाद में उन्होंने उसके बहुत संकट के समय में यह वादा पूरा भी किया। एक और कहानी के अनुसार मेवाड़ की रानी कर्णावती के बारे में यह कहा गया है, कि जब उसे गुजरात के सुल्तान से खतरा महसूस हुआ तो उसने सम्राट हुमायूं को राखी भेजकर इसकी सुरक्षा की गुहार लगाई। राखी के बंधन का सम्मान करते हुए हुमायूं उसकी मदद के लिए आगे आए। 
   रक्षाबंधन एक ऐसा त्यौहार है, जो राखी और उपहार के आदान-प्रदान से कहीं बढ़कर है। यह भाई-बहनों के बीच विश्वास वफादारी और स्थाई प्रेम का प्रतिनिधित्व करता है। यह जरूरत के समय एक दूसरे की रक्षा और सहायता करने के महत्व की भी याद दिलाता है। रक्षाबंधन मनाने से पारिवारिक संबंध मजबूत होते हैं, और हर घर में खुशी तथा एकता बनी रहती है।
आगे और भी निबंध आएंगे....

Class 5 hindi chapter 20 Aakash wale do Mitra Pathbahar West Bengal Board, कक्षा 5 हिंदी पाठबहार पाठ 20 आकाश वाले दो मित्र पश्चिम बंगाल बोर्ड

कक्षा 5 हिन्दी पाठबहार (NOTES) पश्चिम बंगाल बोर्ड

पाठ 20 
आकाश वाले दो मित्र

                                                   ✍️ शैलेंद्र घोष

जीवन परिचय

 शैलेन घोष का जन्म 1928 ई. में हुआ था। किशोरावस्था में ही बच्वों की पत्रिका 'माह पहला' में पहली बार कविता छपी। 'अरुण वरुण-किरण माला, नामक शिशु नाटक ने संगीत नाटक आकादमी पुरस्कार पाया। उनके द्वारा रचित बंगला उपन्यास "मितुल नामक पुतुल, राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित हुआ। विभिन्न रचनाओं में उल्लेखनीय बंगला उपन्यास 'आमार नाम दायरा', 'गल्पेर मिनारेर पाखी', 'भूतेर नाम आक्कूश', 'दुई-दुई' इत्यादि है। इसके अलावा उन्होंने असंख्य बाल कहानियाँ, कविताएँ, नाटकों की रचनाएँ की है। 'हाँसी झल मल राजा', 'स्वप्न देखी रूपकथाये, भालोवासी पशुपाखी', 'गल्पेर रंग रकम रकम' आदि उनकी उल्लेखनीय बंगला साहित्य रचनाएँ हैं।

'आकाश वाले दो मित्र' नामक पाठ उनके 'स्वप्न देखी रूपकथाये' नामक पुस्तक से लिया गया है जिसका हिन्दी अनुवाद पाठ में प्रस्तुत है।

अभ्यासमाला

1. संक्षेप में उत्तर दो।
1.1 आसमान को निहारते समय तुम क्या-क्या देखते हो?
उ० आकाश को निहारते समय हमें अधिक ऊँचाई पर बादल और कम ऊँचाई पर चिड़ियां और पतंग उड़ते हुए दिखायी देते हैं।
1.2 आकाश में तुमने क्या-क्या उड़ते हुए देखा है?
उ० मैंने आकाश में पक्षी और पतंग उड़ते हुए देखे हैं।
1.3 कौन-कौन से उत्सव के दिनों में तुम पतंग उड़ते देखते हो?
उ० हम मकर संक्रान्ति और विश्वकर्मा पूजा उत्सव के दिन विशेष रूप से पतंग उड़ते हुए देखते हैं।
1.4 आकाश कैसा रहने पर पतंग उड़ाने में सुविधा होती है? पतंग उड़ाने के समय किन-किन चीजों के द्वारा पतंग तैयार की जाती है? सूते को माँझा बनाने में क्या-क्या लगता है?
उ० आकाश में जब वायु थोड़ी गतिशील होती है तो पतंग उड़ाने में सुविधा होती है।
 पतंग तैयार करने में कागज, कपड़ा, लेई और पतली मुड़ने वाली लकड़ी की आवश्यकता होती है।
 पतंग तैयार हो जाने पर उसे उड़ाने के लिए माझा से तैयार सूता और लटाई की आवश्यकता होती है। सूते को माझा माझा बनाने में शीशा का चूर्ण, भात और गोद लगता है।

1.5 कौन-कौन सी चीजों के द्वारा पतंग तैयार की जाती है?
उ० कागज, बहुत हल्का कपड़ा, गोंद और मुड़ने वाली बहुत हल्की लकड़ी के द्वारा पतंग तैयार की जाती है।

1.6 'आकाश वाले दो मित्र' कहानी में दो पतंगों ने आपस में बातचीत की है। और दो प्राणियों ने आपस में बात-चीत की है, ऐसी और कोई दूसरी कहानी क्या तुम जानते हो ?
उ•  आजकल नये-नये वैज्ञानिक खोजों के आधार पर विभिन्न प्रकार के हवाई जहाज बन रहे है, जिनमें उड़ान भरते समय आकाश में ही तेल भर दिया जाता है, तथा लड़ाई के समय दुश्मनों पर आक्रमण किया जाता है। उनकी बातचीज कुछ इस प्रकार होती है- 'यार फाइटर, मेरा तेल कम हो रहा है, क्या तुम कोई व्यवस्था कर सकते हो ?
 दूसरा फाइटर कहता है - 'मुझे भी आगे बढ़ना है, चलो बढ़ते हैं, मैं नीचे खबर कर देता हूँ, दोनों थोड़ा-थोड़ा तेल भर लेते हैं।
दूसरा फाइटर ठीक है जब तक तेल आता है, इधर ही घूमते रहें। तेल आ जाने पर हम दोनों पूरा तेल भरकर आगे निगरानी करेंगे।'

2. नीचे दिए बिखरे वर्णों को सजाकर शब्द बनाओ और लिखो।

ढ़ी टेढ़ी मे - टेढ़ीमेढ़ी      स अ हा य - असहाय
प कॉ ठी का - कॉंपकाठी      ब हु ते त उ तेरा - बहुतेरा

शब्दार्थः मुलाकात - भेट, प्राण - जान, असंख्य - अनगिनत,, उत्सव - त्योहार, मुस्कान - हँसी असहाय - निरुपाय, जिसका कोई साथी न हो, मेल - मिले होने की अवस्था, मिलाव।

3. 'क' और 'ख' स्तम्भों को मिलाकर लिखो।

उत्तरः क                  -              ख

बाजे                  -              बज रहे हैं।
बच्चे                  -              किचिर-मिचिर करते निकल पड़े।
धरती नित           -              नई हो रही है।
नदी                   -              बह रही है।
हम बड़े               -              असहाय है न रे!
फूल                   -              खिला है।

4. सही उत्तर को खोज कर प्रत्येक वाक्य को फिर से लिखो ?

4.1 इस तरह धरती नित (पुरानी/नई) हो रही है।
उ० इस तरह धरती नित नई हो रही है।

4.2 तब हम दोनों मित्र (बंदी/मुक्त) हुए।
उ० तब हम दोनो मित्र मुक्त हुए।

4.3 उनके हाथों वाला सूता ही हमारा (भाग्य/दुर्भाग्य) है।
उ० उनके हाथों वाला सूता ही हमारा भाग्य है।

5. नीचे दिए गये अनुच्छेद को देखो और किन-किन शब्दों में लग रहा है कि कार्य समाप्त हो गया है और किन-किन शब्दों द्वारा लग रहा है, कार्य समाप्त नहीं हुआ है, उन्हें छाँट कर लिखो।
उ० उन्हें दुकान से खरीदकर लाया गया है। उत्सव के दिन उड़ेंगी वे दोनों पतंगे। उसके बाद आकाश में लाट खाते-खाते आपस में वे लड़ेगी। भक-काटा होगा कौन कहाँ जा गिरेगा, इसे कोई जानता नहीं। कोई जा जाकर पेड़ में फंस सकता है अथवा बिजली वाले तारों में, किसी की छत पर लुढ़क सकता है नहीं तो नदी के पानी में। नदी के पानी में डूबते-उतराते उसकी छाती में लगे कॉप-काठी के अलग होते ही, वह फटे कागज का एक टुकड़ा मात्र। तब फिर उसे कोई ताकेगा भी नहीं।

कार्य समाप्त हो गया     -    लाया गया है।    -   
कार्य नहीं समाप्त हुआ है।   -  उड़ेगी, लड़ेंगी, गिरेगा, ताकेगा भी नहीं, फंस जा सकता है, लुढ़क सकता है।

6. चाँदियल और पेटकाटा-कहानी में इन दो पतंगों का नाम जानें। पतंगों के और भी तरह-तरह के नाम होते हैं, छोटे-छोटे दलों में बँटकर कक्षा में बातचीत करके देखो न और कितनों का नाम तुम जानते हो या नहीं। अगर नहीं जान पाए तो स्कूल में या घर में अपने से बड़े लोगों से जान लो, फिर लिखो।

उ० पतंगों के नाम एक रंगा, दो रंगा, तीरंगा, पेट कटा आदि।

7. पतंगों के पेंच की लड़ाई में एक अद्भुत बात मिली है। कहानी मनुष्य के रूप में दोनों दल ही हारे हैं, पतंगों की इच्छाशक्ति और मेल कारण वे दो जीते हैं। क्या तुमने कभी पतंगों के बीच लड़ाई देखी है? वास्तव में ऐसी अ‌द्भुत बातें लेकिन देखी नहीं जाती। वास्तव में ऐसी लड़ाई में जो होता है, उसे चार-पाँच वाक्यों में लिखो ?

उ० मैंने अपने जीवन में अनेक बार पतंगों की लड़ाई देखी है। एक पतंग जब लगातार आगे बढ़ती जाती है तो दूसरी पतंग उड़ाने वाला चाहता है कि अपने पतंग की डोरी से पहले पतंग की डोरी को ऊपर नीचे रगड़ कर के काट दे। इस स्थिति में पहली पतंग उड़ाने वाला अपने पतंग को हटाकर डोरी को दूसरी जगह कर देता है। इस प्रकार पतंग उड़ाने वाले एक दूसरे पर आक्रमण करते रहते हैं।

8. चाँदियल और पेटकाटा इन दोनों पतंगों ने आकाश में धरती को निहारते हुए आपस में बहुत सी बातें की हैं। सोचो, तुम भी आकाश में उड़ते जा रहे हो, तुम्हारा मित्र भी तुम्हारे साथ है। आकाश से धरती को देखते समय कौन-कौन सी बातें तुम दोनों करोगे, उसे लिखो ?
 उ ॰ यदि हम दो मित्र आकाश में साथ-साथ उड़े तो इस प्रकार बात करेंगे-
पहला मित्र - यार नीचे से जिस आकाश को हम नीला देखते थे, वह तो रंगहीन है।
 ्दूसरा मित्र- यह बात ठीक है। देखो सामने उड़ती हुयी चिड़ियों की कतार, पास से देखने पर सुन्दर दिखती है।
पहला मित्र - जरा नीचे तो देखो, जो नदी नीचे से देखने में चौड़ी थी, अब बहुत पतली दिखाई दे रही है।
दूसरा मित्र - और बड़े-बड़े पेड़ छोटे पौधों की तरह दिख रहे हैं।
पहला मित्र -चलो थोड़ा और ऊपर चलते हैं।
दूसरा मित्र - चलो आज नील गगन से कुछ बात करें।
9. शब्दों के अर्थ लिखो असहाय, खुशी, मित्र, खतरा।
उ० असहाय = जिसका कोई सहारा न हो। खुशी = आनन्द। मित्र बंधु। खतरा = संकट।
10. समानार्थक शब्द लिखोः नदी, आकाश, पेड़, मित्र समुद्र।
उ० नदी = सरिता, आकाश = आसमान, पेड़ = वृक्ष, मित्र = दोस्त, समुद्र = सागर
11. विपरीतार्थक शब्द लिखो चिल्लाना, खुशी, ठीक, असहाय, ठंडा।
उ० चिल्लाना = शान्त रहना, खुशी दुःख, ठीक बेकार, असहाय सहायक, ठंडा = गर्म।
12. वाक्य बनाओ मित्रता, आँख, दया, भक-काटा, आनंद।
उ० मित्रता बड़ा अनमोल रत्न है। आँख शरीर का महत्वपूर्ण अंग है। गरीबों पर दया करो। भक-काटा मेरी पतंग का नाम है। आनन्द से रहो।
13. कौन वाक्य कैसा है लिखो (एक बना दिया गया है) :
13.1 मन ही मन बोलेंगे, वाह ! विस्मयादिबोधक
13.2 तुमने कैसे जाना ? प्रश्नवाचक
13.3 बर्फ बहुत ठंडी है। विधानार्थवाचक
13.4 जानता है केवल आकाश! विस्मयादिबोधक
13.5 अपनी माँ से खाना माँग रहे है।  विधिवाचक

14. कौन किस प्रकार का शब्द है टोकरी से छाँटकर लिखो। देखा, बड़ा, प्राण, नया, के, ठंडा, हरा, सोचना, बहुत, मुक्त, कोई, सूता, जो, लड़ाइ, और, रखना, वह बुलाना, रक्षा, खिंचाव, उसका, हम।
उ० 

15. क्रिया के नीचे रेखा खींचो।
15.1 नदी टेढ़ी-मेढ़ी बहती जा रही है
15.2 आकाश में लहराते जा रहे है
15.3 वो दोनो पतंगें एक साथ उखड़ गईं।
15.4 खाना मांग रहे हैं माँ से।
15.5 रोज असंख्य प्राणी जन्म ले रहे हैं?
 शैलेन घोष (जन्म 1928) : किशोरावस्था में ही बच्चों की पत्रिका 'माह पहला' में पहली बार कविता छपी। 'अरुण, वरुण-किरण माला' नामक शिशु नाटक ने संगीत नाटक आकादमी पुरस्कार पाया। उनके द्वारा रचित बांग्ला उपन्यास-'मितुल नामक पुतुल' राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मनित। विभिन्न रचनाओं में उल्लेखनीय बांग्ला उपन्यास हैं 'आमार नाम टायरा', 'गल्यैर मिनारेर पाखी', 'भूतेर नाम आक्कूश', 'दुई-दुई' इत्यादि। इसके अलावा उन्होंने असंख्य बाल कहानियाँ, कविताएं, नाटकों की रचनाएं की हैं। 'हाँसी झल मल राजा' 'स्वप्न देखी रूपकथायें', 'भालोवासी पशुपाखी', 'गल्पेर रंग रकम रकम' आदि उनकी उल्लेखनीय बांग्ला साहित्य रचनाएं है। 'आकाश वाले दो मित्र' नामक पाठ उनके स्वपन देखी रूपकथाय नामक पुस्तक से ली गई है। जिसका हिन्दी अनुवाद पाठ में प्रस्तुत है। 
16.1 'अरुण-वरुण' किरण माला' पुस्तक किनके द्वारा लिखी गई है?
उ० 'अरुण-वरुण किरण माला' पुस्तक शैलेन घोष द्वारा लिखी गयी है।
16.2 उनके द्वारा रचित अन्य दो पुस्तकों का नाम लिखो ?
उ० शैलेन घोष द्वारा रचित अन्य दो पुस्तकों के नाम है मितुल नामक पुतुल, आमार नाम टायरा।
16.3 तुम्हारा पाठ 'आकाश वाले दो मित्र' कहानी किस पुस्तक से ली गई है?
उ० 'आकाश वाले दो मित्र' नामक कहानी शैलेन घोष द्वारा रचित 'स्वप्न देखी रुपकथायि नामक पुस्तक से ली गयी है।

17. नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर अपनी भाषा में लिखो।
17.1 कहानी में प्रकृति का विचित्रता से भरा सुन्दर रूप कैसे खिल उठा है?
उ० प्रस्तुत कहानी में प्रकृति की विचित्रता का वर्णन बड़े सुन्दर शब्दों में हुआ है। बीजों से पौधों का जन्मलेना, अंडों से चिड़ियों के बच्चे का जन्म, उनका मां से खाना मांगना और आकाश में उड़ना आदि का वर्णन बड़ा ही सजीव है।
17.2 पेटकाटा और चाँदियल की भेंट किस प्रकार हुई? उनमें मित्रता कैसे हुई?
उ० पेटकाटा और चॉदियल की मुलाकात आकाश में उड़ते समय हुई। दोनों को जब अपना भविष्य कष्टमय लगने लगा तो दोनों ने एक होकर रहने का निश्चिय किया। इस प्रकार दोनों में मित्रता हो गयी।
17.3 मित्रता को अटूट रखने के लिए उन्होंने कौन-सा निर्णय लिया?
उ० मित्रता को अटूट रखने के लिए उन्होंने एक होकर रहने का निर्णय लिया।
17.4 उनकी योजना अंततः किस तरह सफल हुई ?
उ० दोनों एक दूसरे से प्रेम से लिपट गये और एक होकर मजबूत हो गये। सूते की डोर से अलग हो गये। इस प्रकार उनकी योजना सफल हुई।
17.5 कहानी में किस तरह आकाश दोनों का मित्र बना?
उ० जब दोनों मित्र एक दूसरे से मिलते-मिलते मजबूत हो गये और सूते से उखड़ गये तो दोनों खुले आकाश का मजा लेने लगे और आकाश दोनों का मित्र बन गया। अब उन दोनों पर किसी का नियंत्रण नहीं रहा।
18. आकाश में दो पतंगें आस-पास उड़ रही हों ऐसा एक चित्र बनाकर उसमें अपनी इच्छानुसार रंग भरो।
उत्तर: विद्यार्थी स्वयं करें











Path 19 Railgadi Class 5 Hindi Pathbahar West Bengal Board, कक्षा 5 हिंदी पाठ 19 रेलगाड़ी पश्चिम बंगाल बोर्ड

 कक्षा 5 हिन्दी पाठबहार (NOTES) 
पश्चिम बंगाल बोर्ड

पाठ 19 
रेलगाड़ी

                                ✍️हरिन्द्रनाथ चट्टोपाध्या
जीवन परिचय
हरिन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय का जन्म 1898 ई. में हैदराबाद, तेलंगाना में हुआ था। वे एक बहुव्यक्ति वाले विशिष्ट व्यक्ति और सरोजनी नायडू के छोटे भाई थे। वे कवि, नाटककार, गायक, संगीतज्ञ, लेखक तथा बाल कविताओं के सर्जक थे। इन्होंने अंग्रेजी में भी कविताएँ लिखीं। ये सिनेमा के भी अदाकार थे। थे। रेलगाड़ी' कविता का पाठ वे आकाशवाणी पर किया करते थे। ये लोकसभा के सांसद सांसद भी थे। इन्हें पद्म भूषण पुरस्कार भी मिला था। इनकी मृत्यु 1990 ई. में हुई।

शब्दार्थ
तड़क = चमकने की क्रियाः पगडंडी = पतला रास्ता; हाट = सप्ताह मे एक दिन लगने वाला बाजार; स्टेशन = रेलगाड़ी के रुकने की जगह।
छुक छुक, छुक छुक छुक छुक, छुक छुक 
बीच वाले स्टेशन बोलें रुक रुक, रुक रुक
रुक, रुक, रुक रुक सड़क, धड़क
लोहे की सड़क
यहाँ से वहाँ, वहाँ से यहाँ 
छुक छुक, छुक छुक 
छुक छुक, छुक छुक 
फुलाए छाती, पार कर जाती 
बालू रेत, आलू के खेत
बाजरा धान, बुड्डा किसान
हरा मैदान, मंदिर मकान
चाय की दुकान पुल पगडंडी, टीले पे झंडी
पानी के कुंड, पंछी के झुंड
झोपड़ी झाड़ी, खेती बाड़ी
बादल धुआँ, मोठ कुंआ,
कुऐ के पीछे, बाग बगीचे
धोबी का घाट, मंगल की हाट
गाँव का मेला, भीड़ झमेला
टूटी दीवार, टट्टू सवार
धरमपूर करमपूर, करमपुर, धरमपुर
मांडवा खांडवा, खांडवा मांडवा
रायपुर जयपुर, जयपुर, रायपुर
तलेगाँव मलेगाँव, मलेगाँव तलेगाँव
वेल्लोर नेल्लोर, नेल्लोर वेल्लोर
शोलापुर कोल्हापुर, कोल्हापुर, शोलापुर
उत्कल डिडीगल, डिडीगल उत्कल
कोरेगाँव गोरेगाँव, गोरेगाँव कोरेगाँव
मेमदाबाद अहमदाबाद, अहमदाबाद मेमदाबाद
बीच वाले स्टेशन बोलें
रुक, रुक, रुक रुक
छुक छुक, छुक छुक

अर्थः रेलगाड़ी छुक-छुक करते, बीच वाले स्टेशनों पर रुकते, लोहे की सड़क (रेल लाइन) पर छाती फुलाये, बालू, रेत, आलू, बाजरा धान के खेत, बूढ़े किसान, हरे मैदान, मंदिर पानी के कुंड, पक्षी के झुंड, गाँव की भीड़ से होते करमपुर, धरमपुर, मकान, चाय की दुकान, अहमदाबाद, मेमदाबाद आदि स्टेशनों को पार करते आगे बढ़ती जाती है
अभ्यासमाला
1. संक्षेप में उत्तर दो।
1.1 कविता के कवि कौन है?
उ० कविता के कवि हरिन्द्र नाथ चट्टोपाध्याय हैं।
 1.2 रेलगाड़ी की आवाज कैसी है?
उ० रेलगाड़ी की आवाज 'छुक छुक, छुक छुक' करते है।
1.3 लोहे की सड़क कहने का अर्थ क्या है?
उ० लोहे की सड़क कहने का अर्थ रेल की पटरी से है।
1.4 रेलगाड़ी की सड़क किसकी बनी होती है?
उ० रेलगाड़ी की सड़क लोहे की बनी होती है।
1.5 कुँए के पीछे क्या है?
उ॰ कुंए के पीछे बाग-बगीचे है।
1.6 छाती फुलाए कौन पार कर जाती है?
उ० छाती फुलाए रेलगाड़ी पार कर जाती है।
1.7 रेलयात्रा करने समय हमें क्या लेना पड़ता है?
उ० रेलगाड़ी से यात्रा करते समय हमें टिकट लेना पड़ता है।
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर अपनी भाषा में लिखो।
2.1 रेलगाड़ी चलते हुए किन्हें पीछे छोड़ जाती है?
उ० रेलगाड़ी चलते समय मार्ग में पड़ने वाले खेत, मैदान, हाट, बाजार, स्टेशनों आदि सभी वस्तुओं को पीछे छोड़ जाती है।
2.2 रेलगाड़ी के रुकने वाली जगह को क्या कहते हैं?
उ० रेलगाड़ी के रुकने वाली जगह को स्टेशन कहते है।
2.3 तुम्हें हावड़ा से नई दिल्ली जाने में 27 घण्टे लगे। दिल्ली से वापस आने में कितने घण्टे लगेंगे?
उ० दिल्ली से हावड़ा वापस आने में 27 घण्टे लगेंगे।
2.4 पहले रेलगाड़ियां भाप वाले इंजनों से चलती थीं। आजकल कैसे इंजनों से चलती हैं?
उ० आजकल रेलगाड़ी डीजल और बिजली के इंजनों से चलती है।
2.5 हमारे देश में सबसे तेज चलने वाली रेलगाड़ी का नाम जानकर लिखो।
उ० हमारे देश की सबसे तेज चलने वाली रेल गाड़ी 'राजधानी एक्सप्रेस' है।
2.6 सबसे पहले रेल इंजन का आविष्कार किसने किया था, जानकर लिखो ?
उ० सबसे पहले रेल इंजन का आविष्कार जार्ज स्टीफेन ने किया था।
2.7 भारतीय रेल का दुनिया में कौन सा स्थान है, जानकर लिखो।
उ० भारतीय रेल का विश्व में पहला स्थान है।
3. तुमने एक सवारी रेलगाड़ी को देखा। देखने के बाद तुम्हारे मन में उठने वाले कम से कम पाँच प्रश्नों को लिखो।
उ० (1) भारत में रेल लाइन की लम्बाई कितनी है?
(2) भारतीय रेल में कितने लोग काम करते हैं?
(3) भारत में सबसे पहले कब रेल चली।
(4) क्या भारतीय रेल समय से चलती है?
(5) भारतीय रेलों से एक्सीडेंट क्यों होते हैं?

4. 'स्टेशन' एक अंग्रेजी शब्द है। उन अंग्रेजी शब्दों को लिखो जिनका प्रयोग हिन्दी में भी होता है।
उ० मोटरकार, ट्रक, एरोप्लेन, एरोड्रम, साइकिल, गार्ड, ड्राइवर।

5.1 उपरोक्त समय सारिणी से देखकर 37811 नम्बर की गाड़ी को हावड़ा से चलकर बर्द्धमान पहुँचने में कुल कितना समय लगा।
उ० 2 घंटा 20 मिनट
5.2 हावड़ा से बर्द्धमान के बीच की दूरी कितनी है?
उ० 107 किलोमीटर।