शिक्षक दिवस
शिक्षक दिवस पर छोटे और बड़े भाषण व निबंध के नमूने
नमस्कार दोस्तों जैसा कि हम जानते हैं पूरे भारत में प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है । छात्रों को इससे संबंधित भाषण व निबंध लिखने को कहा जाता है। तो आज मैं इस पोस्ट के जरिए बच्चों की समस्या का समाधान लेकर आया हूं । इसमें कई छोटे बड़े निबंध व भाषण दे रहा हूं जिसे बच्चे पढ़कर अपने विद्यालय में प्रस्तुत कर सकते है। इमेज वॉलपेपर, शिक्षक दिवस स्टेटस भी दिया गया है। सबसे पहले हम सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन परिचय पर निबंध लिखते हैं -
👉शिक्षक दिवस पर 10 वाक्य - (Youtube)
👉 शिक्षक दिवस पर सुंदर निबंध (Youtube)
डाॅ• सर्वपल्ली राधाकृष्णन
' ज्यों की त्यों घर दिन ही नादीया '
कबीर की इस पंक्ति को चरितार्थ करते थे - भारत के अद्वितीय राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन। जिस परम पवित्र रूप में वे इस पृथ्वी पर आए थे बिना किसी दाग-धब्बे के, उसी पावन रूप में उन्होंने इस वसुंधरा से विदाई ली। लंबे समय तक भारत के उपराष्ट्रपति और राष्ट्रपति रहकर जब वह दिल्ली से विदा हुए, तो प्रत्येक दिल ने उनका अभिनंदन किया। भारत के राष्ट्रपति पद की सीमा उन्हीं जैसे सादगी की ऊँची जिन्दगी जीने वाले महामानव से सार्थक हुई। अपनी ऋजुल, सौम्यता और संस्कारिता के कारण वह अजातशत्रु हो गए थे।
वे उन राजनेताओं में से एक थे, जिन्हें अपनी संस्कृति एवं कला से अपार लगाव होता है। वे भारतीय सामाजिक संस्कृति से ओतप्रोत आस्थावान हिन्दू थे। इसके साथ ही अन्य समस्त धर्मावलम्बियों के प्रति भी गहरा आदर भाव रखते थे। जो लोग उनसे वैचारिक मतभेद रखते थे। उनकी बात भी वे बड़े सम्मान एवं धैर्य के साथ सुनते थे। कभी-कभी उनकी इस विनम्रता की लोग उनकी कमजोरी समझने की भूल करते थे, परन्तु उनकी यह उदारता, उनकी दृढ़ निष्ठा से पैदा हुई थी।
उनका जन्म 5 सितम्बर, 1888 को तमिलनाडु राज्य के तिरूतनी नामक गाँव में हुआ था। जो मद्रास शहर से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। उनका परिवार अत्यन्त धार्मिक था और उनके माता-पिता सगुण उपासक थे। उन्होंने प्राथमिक तथा माध्यमिक शिक्षा मिशन स्कूल तिरूपति तथा बेलौर कॉलेज, बेलौर में प्राप्त की। सन् 1905 में उन्होंने मद्रास के क्रिश्चियन कॉलेज में प्रवेश किया। बी ए. ओर एम. ए. की उपाधि उन्होंने इसी कॉलेज से प्राप्त की। सन् 1909 में मद्रास के ही एक कॉलेज में दर्शनशास्त्र के अध्यापक नियुक्त हुए। इसके बाद वह प्रगति के पथ पर लगातार आगे बढ़ते गए तथा मैसूर एवं कलकत्ता विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर के रूप में कार्य किया। इसके बाद डॉ. राधाकृष्णन ने आन्ध्र विश्व विद्यालय के कुलपति के पद पर कार्य किया। लम्बी अवधि तक वह आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर रहे। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में उन्होंने कुलपति के पद को भी सुशोभित किया। सोवियत संघ में डॉ. राधाकृष्णन भारत के राजदूत भी रहे। अनेक राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों तथा शिष्टमण्डलों का उन्होंने नेतृत्व किया। यूनेस्को के एक्जीक्यूटिव बोर्ड के अध्यक्ष के पद को उन्होंने 1948-49 में गौरवान्वित किया। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का यह एक अत्यन्त महत्वपूर्ण पद है। 1952-62 की अवधि में वह भारत के उपराष्ट्रपति तथा 1962 से 1967 तक राष्ट्रपति रहे। 1962 में भारत-चीन युद्ध तथा 1965 में भारत-पाक युद्ध उन्हीं राष्ट्रपति काल में लड़ा गया था। अपने ओजस्वी भाषणों से भारतीय सैनिकों के मनोबल को ऊँचा उठाने में उनका योगदान सराहनीय था।
डॉ. राधाकृष्णन भाषण कला के आचार्य थे। विश्व के विभिन्न देशों में भारतीय तथा पाश्चात्य दर्शन पर भाषण देने के लिए उन्हें आमंत्रित किया गया। श्रोता तो उनके भाषणों से मंत्रमुग्ध ही रह जाते थे। डॉ. राधाकृष्णन में विचारों, कल्पना तथा भाषा द्वारा विचित्र ताना-बाना बुनने की अद्भुत क्षमता थी। वस्तुतः उनके प्रवचनों की वास्तविक महत्ता उनके अन्तर में निवास करती थी, जिसकी व्याख्या नहीं की जा सकती है। उनकी यही आध्यात्मिक शक्ति सबको प्रभावित करती थी, अपनी ओर आकर्षित करती थी और संकुचित क्षेत्र से उठाकर उन्मुक्त वातावरण में ले जाती थी।
हाजिर जवाबी में तो डॉ. राधाकृष्णन गजब के थे। एक बार वह इंग्लैण्ड गए। विश्व में उन्हें हिन्दुत्व के परम् विद्वान के रूप में जाना जाता था। तब देश परतंत्र था। बड़ी संख्या में लोग उनका भाषण सुनने के लिए आए थे। भोजन के दौरान एक अंग्रेज ने डॉ. राधाकृष्णन से पूछा, 'क्या हिन्दू नाम का कोई समाज है ? कोई संस्कृति है? तुम कितने बिखरे हुए हो ? तुम्हारा एक सा रंग नहीं, कोई गोरा, कोई काला, कोई बौना, कोई धोती पहनता है, कोई लुंगी कोई कुर्ता तो कोई कमीज, देखो, हम अंग्रेज एक जैसे हैं सब गोरे-गोरे, लाल-लाल। इस पर डॉ. राधाकृष्णन ने तपाक से उत्तर दिया, 'घोड़े अलग-अलग रंग रूप के होते हैं, पर गधे एक जैसे होते हैं। अलग-अलग रंग और विविधता विकास के लक्षण है।
गीता में प्रतिपादित कर्मयोग के सिद्धान्तों के अनुसार वे एक निर्विवाद निष्काम कर्मयोगी थे। भारतीय संस्कृति के उपासक तथा राजनीतिज्ञ। इन दोनों ही रूपों में उन्होंने यह प्रयत्न किया कि वह सम्पूर्ण मानव समाज का प्रतिनिधित्व कर सकें और विश्व के नागरिक कहे जा सके। वह एक महान शिक्षाविद् थे और शिक्षक होने का उन्हें गर्व था। उन्होंने अपने राष्ट्रपतित्व काल में अपने जन्म दिवस को शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की इच्छा प्रकट की थी। तभी 5 सितम्बर को 'शिक्षक दिवस' के रूप में मनाया जाता है।
डॉ. राधाकृष्णन गौतम बुद्ध की तरह हृदय में अपार करूणा लेकर आए थे। उनका दीप्तिमय तथा उज्ज्वल आलोक, भारत के आकाश में तो फैला ही, विश्व की धरती भी उनकी रश्मियों के स्पर्श से धन्य हो गई। पूर्ण आयु एवं यशस्वी जीवन का लाभ प्राप्त करने के बाद, वह 87 वर्ष की आयु में 16 अप्रैल, 1978 को ब्रह्मलीन हो गए।
कठिन से कठिन परिस्थितियों में, निष्काम एवं समर्पण भाव से कर्म करने के मार्ग को डॉ. राधाकृष्णन, पुरुषार्थ का प्रशस्त मार्ग बताते थे। सदैव परमात्मा को स्मरण रखने का अर्थ ही विश्व सत्ता के साथ स्वयं को जोड़े रखना है। समष्टि की चेतना से अपने को जोड़े रखना, जिससे व्यष्टि का अभिमान कंधे पर सवार न होने पाए और अपने कर्तव्य को प्रभु की विधि मानना भी सक्रिय विसर्जन का मार्ग प्रशस्त करने के लिए है।
डॉ. राधाकृष्णन हिन्दुस्तान के साधारण आदमी के विश्वास, समझदारी, उदारता, कर्तव्यपरायणता, सनातन मंगल भावना, ईमानदारी और सहजता। इन सबके आकार प्रतिबिम्ब थे। उन्हें बड़े देश का प्रथम नागरिक होने का बोध और अधिक विनम्र बनाता था। उन्हें ऊँचे से ऊँचे पद ने और अधिक सामान्य बनाया तथा राजनीति के हर दाव-पेंच ने और अधिक निश्चल बनाया।👉स्वतंत्रता दिवस पर निबंध
शिक्षक दिवस पर 10 वाक्य
नमूना 1
- भारत में शिक्षकोंके सम्मान में सन 1962 से प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है।
- 5 सितंबर को यह पूरे भारत देश में मनाया जाता है।
- यह शिक्षकों के सम्मान में मनाया जाता है।
- इस दिन डॉ• सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी का जन्म दिवस होता है।
- वह एक महान विद्वान तथा आदर्श शिक्षक क्षक थे।
- वे भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति व दूसरे राष्ट्रपति थे।
- पहली बार शिक्षक दिवस 5 सितंबर 1962 को मनाया गया था।
- इस दिन कुछ महान शिक्षकों को सम्मानित भी किया जाता है।
- इस दिन छात्र अपने शिक्षक को उपहार भी देते हैं।
- हमें हमेशा अपने शिक्षक का सम्मान करना चाहिए।
नमूना 2
- शिक्षक दिवस का उत्सव देश भर में प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को मनाया जाता है।
- शिक्षक दिवस विद्यालयों व कॉलेजों में पूरे जोश के साथ मनाया जाता है।
- यह दिन शिक्षकों और छात्रों दोनों के लिए ही काफी मजेदार होता है ।
- शिक्षक दिवस शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त करने का एक अवसर है ।
- इस दिन विद्यार्थी अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान प्रकट करते हैं।
- शिक्षक दिवस एक ऐसा दिन है, जो छात्र और शिक्षक के इस रिश्ते को और भी दृढ़ता प्रदान करता है ।
- इस दिन कई सारे खेलो और अन्य गतिविधियों का आयोजन किया जाता है।
- जिन्हें शिक्षक और छात्र साथ मिलकर खलते हैं।
- जोकि उनके रिश्तों को और भी घनिष्ठता प्रदान करने का कार्य करता है।
- विश्व भर में सौ अधिक देश अपने तय तारीख पर शिक्षकों को सम्मानित करने के लिए शिक्षक दिवस मनाते हैं।
नमूना : 3
- भारत में शिक्षकों के सम्मान में 1962 से प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है ।
- यह उत्सव डॉ• सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिवस के उपलक्ष में मनाया जाता है।
- वे भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति होने के साथ साथ द एक महान शिक्षक भी थे।
- एक महान शिक्षक के रूप में उनके योगदान के लिए इन्हें 1954 में भारत रत्न भी प्राप्त हुआ।
- प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में शिक्षक का एक महत्वपूर्ण योगदान रहता है।
- एक छात्रा को उसके जीवन की सही दिशा तय करने का मार्ग शिक्षक ही दिखता है।
- इस दिन छात्र अपने गुरुओं के सम्मान में उन्हें उपहार देते हैं।
- स्कूल व कॉलेज में छात्र मिलकर शिक्षकों के लिए कार्यक्रम आयोजित करते हैं।
- यह समझ शिक्षकों के समर्पण और उपलब्धियों का प्रतीक है।
- विश्व भर में 100 से अधिक देश अपने निर्धारित समय पर शिक्षक दिवस मनाते हैं।
नमूना : 4
- शिक्षक दिवस एक महत्वपूर्ण अवसर है, जो हर साल 5 सितंबर को मनाया जाता है।
- यह दिन भारत के दूसरे राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन पर उनकी शिक्षकीय सेवाओं को सम्मानित करने के लिए मनाया जाता है।
- शिक्षक हमारे जीवन के मार्गदर्शक होते हैं, जो हमें ज्ञान के साथ-साथ जीवन के महत्वपूर्ण मूल्य सीखते हैं।
- शिक्षक हमें न केवल शिक्षा देते हैं बल्कि हमारे व्यक्तित्व का भी निर्माण करते हैं।
- शिक्षक दिवस के माध्यम से हम उनके अथक प्रयासों और योगदान के प्रति के तायता व्यक्त करते हैं।
- यह दिन हमें हमारे शिक्षकों के महत्व और उनके द्वारा निभाई गई भूमिका की याद दिलाता है।
- विद्यार्थी इस दिन विभिन्न कार्यक्रमों और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से अपने शिक्षकों को सम्मानित करते हैं।
- शिक्षक हमारी सोच को आकार देते हैं और हमारे सपनों को साकार करने में हमारी मदद करते हैं।
- वे हमें जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना करने और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने की प्रेरणा देते हैं।
- शिक्षक दिवस का उद्देश्य शिक्षकों के प्रति सम्मान और आभार प्रकट करना है, जो समाज के निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं।
नमूना : 5
- शिक्षक दिवस भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन के उपलक्ष में मनाया जाता है।
- यह उत्सव डॉक्टर राधाकृष्णन के सम्मान में मनाया जाता है, जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
- शिक्षक दिवस शिक्षकों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करने का एक विशेष अवसर है।
- इस दिन छात्र अपने शिक्षकों के सम्मान में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करते हैं।
- शिक्षक राष्ट्र के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- शिक्षक छात्रों को ज्ञान प्रदान करते हैं और उन्हें सही मार्गदर्शन देते हैं।
- शिक्षक छात्रों को प्रेरित करते हैं और उन्हें जीवन में सफल होने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
- यह दिन छात्रों और शिक्षक के बीच एक मजबूत बंधन को दर्शाता है।
- शिक्षक छात्रों के लिए मार्गदर्शन और प्रेरणा के स्रोत होते हैं।
- विश्व भर में विभिन्न देश अपने निर्धारित तारीख को शिक्षक दिवस मनाते हैं।
नमूना : 6
- भारत में हर साल 5 सितंबर को विद्यार्थियों द्वारा अपने शिक्षकों को सम्मान देने के लिए शिक्षक दिवस मनाया जाता है।
- इसी दिन हमारे पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 1888 ई को हुआ था।
- डॉक्टर सर्वपल्ली रधाकृष्णन भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति रहने के साथ-साथ एक महान शिक्षक भी थे।
- शिक्षक और विद्यार्थी के बीच के रिश्तों की खुशी को मनाने के लिए शिक्षक दिवस एक बड़ा अवसर है।
- देश में रहने वाले नागरिकों के भविष्य निर्माण के द्वारा शिक्षक राष्ट्र निर्माण का कार्य करते हैं।
- शिक्षक हमारे व्यक्तित्व विश्वास और कौशल स्तर को भी सुधारते हैं।
- इस दिन को शिक्षकों को सम्मान और आभार प्रकट करने के लिए समर्पित किया गया है।
- इस दिन छात्र-छात्राएं अपने शिक्षकों के लिए ग्रीटिंग कार्ड, फूल और तमाम तरह के कई उपहार आदि हैं।
- इस प्रकार के कार्यक्रम और सम्मान द्वारा छात्रों और शिक्षकों के रिश्तों को और अधिक मजबूती मिलती है।
- शिक्षक के योगदान के लिए 5 सितंबर या शिक्षक दिवस ही नहीं, हमें हमेशा उनका आभारी होना चाहिए और उनका आदर देना चाहिए।
नमूना : 7
शिक्षक दिवस पर निबंध 500 शब्द
शिक्षक दिवस - 5 सितंबर
समाज को सही दिशा देने में शिक्षक की अहम भूमिका होती है। वह देश के भाभी नागरिकों अर्थात बच्चों के व्यक्तित्व सवारने के साथ-साथ उन्हें शिक्षित भी करता है। इसलिए शिक्षकों द्वारा किए गए श्रेष्ठ कार्यों का मूल्यांकन कर उन्हें सम्मानित करने का दिन ही शिक्षक दिवस कहलाता है। हालांकि डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन जो की 1962 से 1967 तक भारत के राष्ट्रपति भी रहे। उनके जन्मदिवस के अवसर पर ही शिक्षक दिवस मनाया जाता है। वे संस्कृतज्ञ, दार्शनिक होने के साथ-साथ शिक्षा शास्त्री भी थे। राष्ट्रपति बनने से पूर्व वे शिक्षा के क्षेत्र में से ही संबंध रखते थे। 1920 से 1921 तक इन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र के किंग जॉर्ज पंचम पद को सुशोभित किया। 1939 से 1948 तक वे विश्वविख्यात काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति पद पर रहे। राष्ट्रपति बनने के बाद जब लोगों ने उनका जन्म दिवस सार्वजनिक रूप से आयोजित करना चाहा तो उन्होंने जीवन का अधिकतर समय शिक्षक रहने के नाते इस दिवस को शिक्षकों का सम्मान करने हेतु शिक्षक दिवस मनाने की बात कही। उसी समय, 1962 से प्रतिवर्ष यह दिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है।
शिक्षकों द्वारा किए गए श्रेष्ठ कार्यों का मूल्यांकन कर उन्हें सम्मानित करने का भी यही दिन है। इस दिन स्कूलों कॉलेजों में शिक्षक का कार्य छात्र खुद ही संभालते हैं। इस दिन राज्य सरकारों द्वारा अपने स्तर पर शिक्षक के प्रति समर्पित और छात्र-छात्राओं के प्रति अनुराग रखने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया जाता है। शिक्षक राष्ट्रनिर्माण में मददगार साबित होते हैं वहीं वे राष्ट्रीय संस्कृत के रक्षक भी हैं। वे बालकों में सुसंस्कार तो डालते ही हैं साथ ही उनके अज्ञानता रूपी अहंकार को दूर कर उन्हें देश का श्रेष्ठ नागरिक बनाने का दायित्व भी वहन करते हैं। शिक्षक राष्ट्र के बालकों को न केवल साक्षर ही बनाते हैं बल्कि अपने उपदेश द्वारा उनके ज्ञान का तीसरा चक्षु भी खोलते हैं। वे बालक में हित-अहित, भला बुरा सोचने की शक्ति उत्पन्न करते हैं। इस तरह वे राष्ट्र के समग्र विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
शिक्षक उस दीपक के समान हैं जो अपनी ज्ञान ज्योति से बालकों को प्रकाशमान करते हैं। महर्षि अरविंद ने अपनी एक पुस्तक जिसका शीर्षक 'महर्षि अरविंद के विचार' है में शिक्षक के संबंध में लिखा है - अध्यापक राष्ट्र की संस्कृति के माली होते हैं। वे संस्कार की जड़ो में खाद देते हैं और अपने श्रम से उन्हें सींच-सींच कर महाप्राण शक्तियां बनाते हैं। इटली के एक उपन्यासकार ने शिक्षक के बारे में कहा है कि शिक्षक उस मोमबत्ती के समान है जो स्वयं जलकर दूसरों को प्रकाश देती है। संत कबीर ने तो गुरु को ईश्वर से भी बड़ा मन है। उन्होंने गुरु को ईश्वर से बड़ा मानते हुए कहा है कि -
गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागू पाय।
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो मिलाय।।
शिक्षक को आदर देना समाज और राष्ट्र में उनकी कीर्ति को फैलाना केंद्र व राज्य सरकारों का कर्तव्य ही नहीं दायित्व भी है। इस दायित्व को पूरा करने का शिक्षक दिवस एक अच्छा दिन है।
गुरु से आशीर्वाद लेने की भारत की अत्यंत प्राचीन परिपाटी है। आषाढ़ माह में पड़ने वाली पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा या व्यास पूर्णिमा नाम इसी के निमित्त दिया गया है। स्कूलों-कॉलेजों के अतिरिक्त सरकार की ओर से भी इस दिन समारोह आयोजित किए गए जाते हैं। दिल्ली सरकार द्वारा आयोजित एक बड़े समारोह में राजधानी के स्कूलों से चयनित श्रेष्ठ शिक्षकों को सम्मानित किया जाता है। इसके अलावा स्थानीय निकायों मसलन दिल्ली नगर निगम, नई दिल्ली नगर पालिका परिषद, दिल्ली छावनी परिषद द्वारा भी समारोह आयोजित कर अपने अधीन आने वाले स्कूलों के श्रेष्ठ शिक्षकों को सम्मानित किया जाता है।
शिक्षक दिवस पर भाषण
नमूना : 1
शिक्षक दिवस क्यों मनाया जाता है ?
गुरु बिन होत न ज्ञान, गुरु बिन दिशा अजान।
गुरु बिन इंद्रिय न सधे, गुरु बिन बढ़े न शान।।
हमारे सभी शिक्षक गणों को सुप्रभात। आज जब हम सब यहां शिक्षक दिवस के अवसर पर एकत्रित हुए हैं, मैं हर उस शिक्षक को धन्यवाद देना चाहता हूॅं, जो हमेशा हमारा मार्गदर्शक बनते रहे हैं। आपने हमें न केवल सीखने का नया तरीका सिखाया है बल्कि कोरोना जैसे महामारी और लॉकडाउन के दौरान भी पढ़ते रहने और सीखने रहने के लिए प्रेरित किया है।
शिक्षक दवस हर साल 5 सितंबर को मनाया जाता है, इसलिए मैं इस अवसर पर शिक्षक दिवस के इतिहास और इसे मनाने के क्रम के बारे में बात करना चाहूंगा;
मेहनत की राह पर जो चलना सीखाते हैं,
जुनून की आग में जो जलन सीखाते हैं।
जिनको कितना भी सता लो , नहीं रूठते,
वही हम बच्चों के शिक्षक कहलाते हैं।
हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। क्या आप जानते हैं कि यह तारीख क्यों चुनी गई ? यह दिन डॉक्टर सर्वपल्ली रधाकृष्णन जी की जयंती है, जो एक भारतीय विद्वान थे। वे 1962 से 1967 तक भारत के दूसरे राष्ट्रपति भी रहे।
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक महान विद्वान थे, जिन्होंने अपना जीवन शिक्षा के लिए समर्पित कर दिया। एक बार उनके छात्रों ने उनसे उनका जन्मदिन मनाने के लिए कहा। इस पर उन्होंने सरलता से उत्तर दिया और कहा 'मेरा जन्मदिन मनाने के बजाय अगर 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाए तो यह मेरे लिए गर्व की बात होगी।'
तब सभी शिक्षकों को सम्मानित करने के लिए उनके जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में घोषित किया गया था। 1962 से भारत में हर वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है।
अंत में, मैं अपना भाषण डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम के उदाहरण के साथ समाप्त करना चाहूंगा, शिक्षा का उद्देश्य कौशल और विशेषज्ञ वाले अच्छे इंसान बनना है। प्रबुद्ध इंसान शिक्षकों द्वारा ही बनाए जा सकते हैं।
मेरे सभी शिक्षकों को धन्यवाद जो हमेशा हमारे मार्गदर्शक और सहयोगी रहे हैं। मैं आपके आशीर्वाद को जीवन के हर पड़ाव पर याद रखूंगा। धन्यवाद! हैप्पी टीचर्स डे! जय हिंद!
शिक्षक दिवस पर भाषण - नमूना : 2
"हजारो फूल चाहिए एक माला बनाने के लिए
हजारों रंग चाहिए एक रंगोली बनाने के लिए
पर एक शिक्षक ही अकेला काफी है।
बच्चों के जिंदगी को स्वर्ग बनाने के लिए।"
माननीय मुख्य अतिथि, आदरणीय शिक्षक वर्ग और मेरे प्यारे दोस्तों...
जैसा कि हम सब जानते हैं कि आज 5 सितंबर को हम सब शिक्षक दिवस का जश्न मनाने के लिए यहां उपस्थित हुए हैं आज मैं आपको शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षक के महत्व पर छोटा सा भाषण देने जा रहा हूं। मेरी आपसे विनती है कि कृपया करके आप मेरा यह भाषण ध्यान पूर्वक और शांतिपूर्वक सुने ।
आज 5 सितंबर है और हम सभी को पता है कि आज शिक्षक दिवस है। हम सब हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस का उत्सव मनाते हैं। आज डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन है। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन हमारे देश के प्रथम उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति रह चुके थे। वे पहले ऐसे महान प्रतिष्ठित शिक्षक थे जो हमारे देश के राष्ट्रपति भी बने। इस दिन शिक्षा के जगत में उनके अतुलनीय योगदान और उपलब्धियों को याद किया जाता है। सर्वपल्ली राधाकृष्णन विख्यात विद्वान, भारतीय संस्कृति के संवाहक और महान दार्शनिक भी थे। यह दिन शिक्षकों के प्रति प्यार और सम्मान व्यक्त करने का दिन है। इस दिन हम अपने शिक्षकों के अथक समर्पण और अटूट प्रयासों के लिए अपनी कृतिका व्यक्त करते हैं। शिक्षक दिवस के दिन स्कूल और कॉलेज में विशेष कार्यक्रम आयोजित होते हैं जिनमें विद्यार्थी शिक्षक से संबंधित भाषण देते हैं। कई स्कूलों में निबंध प्रतियोगिताएं भी होती हैं जिसके माध्यम से विद्यार्थी अपने मनपसंद शिक्षक के प्रति अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हैं। शिक्षक ही हमारे प्रेरणा स्रोत हैं जो हमें हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहते हैं। मैं अपने भाषण का समापन एक दोहे के साथ करना चाहूंगा
गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागू पाय।
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो मिलाय।।
धन्यवाद! जय हिंद! जय भारत!
शिक्षक दिवस पर भाषण - नमूना : 3
आदरणीय प्रधानाध्यापक महोदय, सभी शिक्षक गण और मेरे प्यारे सहपाठी गण, आप सभी को मेरा प्रणाम!
आज 5 सितंबर को हम सब यहां शिक्षक दिवस से अवसर पर एकत्रित हुए हैं। आप सभी को शिक्षक दिवस की ढेर सारी शुभकामनाएं। शिक्षक हमारे जीवन का स्तंभ और मार्गदर्शक होते हैं। वह अपना समय देकर हमारे जीवन को सजते-सवारते हैं और आगे बढ़ते हैं। जिस प्रकार मिट्टी को तरास कर कलाकृति तैयार करने का कार्य कुम्हार करता है। वैसे ही शिक्षक हम बच्चों में निखार लाते हैं। हमें सवारते हैं और जीवन में आने वाली कठिनाइयों का सामना करने का साहस देते हैं। शिक्षक न सिर्फ हमें शिक्षा देते हैं बल्कि वह हमेशा हमें एक अच्छा इंसान बनाने की कोशिश में लगे रहते हैं। उनकी कहीं बातें ही हमारे जीवन में निखार लाती हैं। साथियों इस दिन हमें डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को याद कर उन्हें नमन करना चाहिए जिनकी जयंती 5 सितंबर के दिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। 5 सितंबर शिक्षक दिवस का दिन उन्हें ही समर्पित है। डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन देश के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति होने के साथ-साथ एक महान शिक्षाविद, भारतीय संस्कृति के सवाहक, प्रख्यात शिक्षाविद् और महान दार्शनिक भी थे।
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन स्वयं एक बहुत अच्छे शिक्षक थे। 5 सितंबर 1888 को तमिलनाडु के एक छोटे से गांव तिरूमानी में जन्मे डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को 27 बार नोबेल पुरस्कार के लिए नामित किया गया था। 1954 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
अब मैं बताता हूं। उसे किस के बारे में जिसकी वजह से उनके जन्मदिन को शिक्षक दिवस के तौर पर चुना गया। एक बार जब उनके छात्रों ने आदर सम्मान से उनसे पूछा कि क्या वह उन्हें उनके जन्मदिन पर कोई गिफ्ट दे सकते हैं और उनका जन्मदिन मना सकते हैं। इस पर डॉ. राधाकृष्णन जी ने छात्रों से उपहार लेने से मना कर दिया और कहा कि वह इस दिन को शिक्षक दिवस के रूप में मान सकते हैं। जब बाद में उनका निधन हुआ तो उन्हें श्रद्धांजलि व सम्मान देने के लिए उनके जन्मदिन 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने का फैसला लिया गया।
शिक्षक हमारे समाज का निर्माण करते हैं। वे ही हमारे मार्गदर्शक होते हैं। शिक्षक का स्थान माता-पिता से भी ऊंचा होता है। माता-पिता बच्चों को जन्म जरूर देते हैं। लेकिन शिक्षक उसके चरित्र को आकार देकर उज्जवल भविष्य का नीव तैयार करते हैं। इसलिए हम चाहे कितने भी बड़े क्यों ना हो जाए, हमें अपने शिक्षकों को कभी नहीं भूलना चाहिए।
यकीन मानिए, हमें जीवन के हर मुश्किल और अच्छे मोड़ पर शिक्षकों के द्वारा सिखाई गई बातें याद आती रहेगी। एक कुम्हार जैसे मिट्टी के बर्तन को आकर देता है वैसे ही शिक्षक हमारे जीवन को सवारते हैं। शिक्षक ही हमारे प्रेरणा के स्त्रोत हैं जो हमेशा हमें आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करते हैं।
अब मैं अपने भाषण को यही दो पंक्तियों के साथ विराम देना चाहूंगा-
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु: गुरुर्देवो महेश्वर: ,
गुरु: साक्षात् परम् ब्रम्ह तस्मै श्री गुरुवे नमः ।।
धन्यवाद! जय हिंद!









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