Path 16 amrit wani Class 5 Hindi Pathbahar West Bengal Board, कक्षा 5 हिंदी पाठ 16 अमृत वाणी पश्चिम बंगाल बोर्ड

कक्षा 5 हिन्दी पाठबहार (NOTES) पश्चिम बंगाल बोर्ड

पाठ  16
अमृत वाणी

कबीर
जीवन-परिचय - कबीरदास भक्तिकाल के निर्गुण काव्यधारा के अंतर्गत ज्ञानमार्गी शाखा के कवि थे। उनका जन्म संवत् 1455 को काशी में एक विधवा बाह्मणी के गर्भ से हुआ था। ये नीरू और नीमा नामक जुलाहे के घर पले थे। इनका विवाह लोई नामक खी से हुआ था। कवीरदास की रूचि बचपन से ही भगवत-भजन की ओर थी। ये रामानन्द को अपना गुरु बनाना चाहते थे। किन्तु उन्होंने मुसलमान होने के कारण इन्हें अपना गुरु बनाने से मना कर दिया। अंत में कबीरदास रात्रि को गंगाघाट की सौड़ियों पर जाकर लेट गये। प्रातः काल के समय जब गंगाघाट पर रामानंद स्नान करने के लिए आए तो अंधेरे में उनका पैर कवीरदास की छाती पर पड़ा और उनके मुख से 'राम-राम' निकला। इसी को कबीर ने गुरुमंत्र मानकर रामानंद जी को अपना गुरु मान लिया। कबीरदास पढ़े-लिखे नहीं थे, परन्तु उनमें अ‌द्भुत काव्य प्रतिभा थी। उनके शिष्यों ने उनकी कविताएँ लिखी और उनका संग्रह किया। कवीर की प्रमुख रचना 'बीजक', है। बीजक के तीन भाग किए गये है साखी सब्द और रमैनी। कवीरदास जाति-पाति, ऊँच-नीच, छुआछूत, तीर्थ-व्रत आदि के कट्टर विरोधी थे। वे अपनी आत्मा की आवाज के अनुसार कार्य करते थे। उन्होंने हिन्दू-मुसलमानों, साधु-संन्यासी सभी को समान रूप से फटकारा। संवत् 1575 को मगहर में इनका निधन हो गया।
बोली एक अमोल है, जो कोउ बोले जानि। 
हिये तराजू तौलि कै, तब मुख बाहर आनि ।।
शब्दार्थ : अमोल = मूल्यवान; हिए = हृदय; तराजू = तौल करने की वस्तुः तौलिकै = तौलकर (यहाँ उचित अनुचित का विचार कर)।

अर्थः कबीरदास जी कहते हैं कि बोली बहुत मूल्यवान वस्तु है यदि कोई समझ बूझ कर बोले तो। अतः हृदय रूपी तराजू पर तौल कर अर्थात् बहुत सोच विचार कर ही कुछ बोलना चाहिए।

काल्ह करै सो आज कर, आज करे सो अब। 
पल में परलै होयगी, बहुरि करैगो कब ।।
शब्दार्थ : काल्ह = कल; परलै = प्रलय, विनाश, मृत्युः बहुरि = फिर, पुनः ।

अर्थ :  कबीरदास जी कहते हैं कि जो कल करना है उसे आज ही करना चाहिए, और जो आज करना है उसे अभी कर लेना चाहिए। मृत्यु का कोई ठिकाना नहीं कब आ जाय। पल भर में ही यदि मृत्यु हो जायेगी तो फिर कब करोगे। कहने का सारांश है कि ईश्वर भजन में आजकल का विचार न करके तुरन्त लग जाना चाहिए।

करत-करत अभ्यास ते, जड़मति होत सुजान। 
रसरी आवत-जात तै, सिल पर परत निसान।।

शब्दार्थ : करत-करत = लगातार काम में लगे रहना; जड़मति मूर्खः सुजान = ज्ञानी; रसरी = रस्सी ।

अर्थ : कबीरदास जी कहते हैं कि लगातार अभ्यास करके मूर्ख व्यक्ति भी ज्ञानी बन सकता है। जिस प्रकार कोमल रस्सी के बार-बार एक ही जगह पर रगड़ खाने से पत्थर जैसे कठोर वस्तु पर भी निशान बन जाता है। (class 5 hindi Solution WBBE) 

तुलसीदास

जीवन-परिचय - तुलसीदास - गोस्वामी तुलसीदास रामभक्ति शाखा के सर्वश्रेष्ठ कवि हैं। उनका जन्म राजापुर में संवत् 1554 में हुआ था। उनके पिता का नाम आत्माराम दूबे और माता का नाम हुलसी था। उनका विवाह दीनबन्धु पाठक की पुत्री रत्नावली के साथ हुआ। रत्नावली के फटकार से उन्होंने वैराग्य ग्रहण किया। गोस्वामी जी ने अयोध्या आकर 'रामचरितमानस' लिखना प्रारंभ किया। अपने जीवन का अधिकांश समय उन्होंने काशी में बिताया। गोस्वामी तुलसीदास की प्रामाणिक रचनाओं में 'रामलला नहछू', 'जानकी मंगल', 'रामचरितमानस', 'गीतावली', 'विनयपत्रिका', 'कवितावली', आदि प्रमुख ग्रंथ हैं। संवत् 1680 में उनका स्वर्गवास हो गया। तुलसीदास भक्त, समाज सुधारक, लोकनायक थे। उन्होंने शाखसम्मत भक्ति का लोक जीवन के साथ मेल कर उसे सरल और सुलभ बनाया। उन्होंने ऊँच-नीच, अकिनारीव आदि सबमें रामत्व की स्थापना की। गोस्वामी जी ने समाज, साहित्य, संस्कृति आदि का कोई कोना नहीं छोड़ा। भाषा शैली की दृष्टि से देखा जाए तो उन्होंने अवधी और बज दोनों भाषाओं का प्रयोग अपनी रचनाओं में किया है। उन्होंने अनेक छंद-दोहा, चौपाई, सोरठा आदि का प्रयोग किया है। उनकी भाषा सर्ल, सरस, सजीव, सुगठित एवं मार्मिक है। तुलसीदास की विद्धता को देखकर प्रियर्सन ने उन्हें बुद्धदेव के बाद का सबसे बड़ा लोकनायक कहा था।


का बरषा जब कृषी सुखाने । 
समय चूकि पुनि का पछिताने ।।
शब्दार्थ : बरखा = वर्षा, चूकि = बीत जाने, पछिताने = पश्चाताप करने।

अर्थ :  तुलसीदास जी कहते हैं कि समय से अपना काम कर लेना चाहिए। जैसे फसल के सूख जाने पर वर्षा का कोई लाभ नहीं होता, उसी प्रकार निर्धारित समय बीत जाने पर पश्चाताप करना व्यर्थ होता है। 


पर उपदेस कुसल बहुतेरे । 
जे आचरहिं ते नर न घनेरे ।।

शब्दार्थ : पर = दूसरे को; बहुतेरे = मनुष्यः घनेरे = कई। बहुत से; आचरहि = आचरण करने वाले, नर = मनुष्य; घनेरे = कई

अर्थ : तुलसीदास जी कहते हैं कि दूसरों को उपदेश देना सरल है। अतः उपदेश देने वाले अनेक लोग होते हैं। पर स्वयं उस तरह का आचरण करना कठिन है, अतः आचरण करने वाले लोग कम मिलते हैं।


परहित सरिस धरम नहिं भाई। 
पर पीड़ा सम नहिं अधमाई ।।

शब्दार्थ : परहित = परोपकार; सरिस = समान; अधमाई = नीच काम, बुरा कार्य। 
अर्थ :  तुलसीदास जी कहते हैं कि परोपकार से बड़ा कोई धर्म नहीं है, और दूसरे को कष्ट देने से बड़ा कोई बुरा कार्य नहीं है।


रहीम

 जीवन-परिचय - रहीम - मध्यकालीन सामंतवादी संस्कृति के कवि रहीम का मूल नाम अब्दुर्ररहीम खानखाना था। उनका जन्म संवत् 1613 में लाहौर में हुआ था। रहीम की शिक्षा समाप्त होने के बाद लगभग 16 वर्ष की उम्र में अकबर ने उनका विवाह मिर्जा अजीज कोका की बहन माहवानी से करवा दिया था। रहीम कलम और तलवार के धनी थे। उन्हें अकबर से मिर्जा खाँ की उपाधि भी मिली थी। रहीम एक ऐसे कवि थे जिन्होंने हिंदू जीवन को भारतीय जीवन का यथार्थ मानते हुए अपने काव्य में रामायण, महाभारत, पुराण और गीता जैसे ग्रंथों के कथानको को उदाहरणस्वरूप चुना। रहीम के ग्रंथों में रहीम दोहावली, नायिका भेद, शृंगार, सोरठा, राग पंचाध्यायी, फुटकर छंद आदि प्रसिद्ध हैं। उन्होने अवधी और ब्रजभाषा दोनों में ही कविता की है जो सरल, स्वाभाविक और प्रवाहपूर्ण है। उनके काव्य में श्रृंगार, शांत एवं हास्य रस मिलते हैं।

  वस्तुतः कहा जा सकता है कि रहीम ने अपनी काव्य रचना द्वारा हिन्दी साहित्य की जो सेवा की उसकी मिसाल विरले ही मिलेगी।

बिगरी बात बनै नहीं, लाख करै किन कोय। 
रहिमन बिगरे दूध को, मथे न माखन होय ।।
शब्दार्थ : बिगरी बात = मुंह से निकली हुयी खराब बात; माखन = मक्खन; मधे = मथने पर। 
अर्थ : कवि रहीमदास जी कहते हैं कि एक बार मुंह से निकली कठोर या खराब बात लाख उपाय करने पर भी ठीक नहीं हो सकती, जैसे लाख प्रयास के बाद भी फटे दूध से मक्खन नहीं बन सकता है।
रहिमन निज मन की व्यथा मन ही राखौ गोय। 
सुनि अठिलैहैं लोग सब बाँटि न लैहें कोय ।।
शब्दार्थ : निज = अपना; व्यथा = कष्ट; गोय = गोपनीय, छिपाकर; सुनि = सुनकर; अठिलैहें = खुश होंगे; बॉटि = बांटना; लैहें = लेंगे।
अर्थ : कवि रहीमदास जी कहते हैं कि हमें अपने मन के कष्ट को मन में ही छिपाकर रखना चाहिए, किसी से कहना नहीं चाहिए क्योंकि इस कहे हुए कष्ट को कोई कम नहीं करेगा, अपितु इसके बारे में में जानकर खुश होगा और हँसी उड़ायेगा।

बड़े बड़ाई न करे, बड़े न बोले बोल। 
रहिमन हीरा कब कहे, लाख टका मो मोल ।।
शब्दार्थ : मोल = मूल्य; लाख टका मो मोल = मेरा मूल्य लाख रुपए, अत्यधिक मूल्यवान।

अर्थ : कवि रहीमदास जी कहते हैं कि जो लोग सही माने में बड़े महान अर्थात् होते हैं वे अपनी बड़ाई स्वयं नहीं करते तथा बड़ी-बड़ी बातें नहीं करते जैसे हीरा मूल्यवान होते हुए भी कभी नहीं कहता कि मेरा मूल्य लाखों रुपया है।

1. संक्षेप में उत्तर दो।

1.1 किसी से कैसे बोलना चाहिए?

उत्तर : किसी से बोलने के पहले उसे अपने हृदय रूपी तराजू में तौलकर अर्थात् सोच-सम कर बोलना चाहिए।

1.2 किसी काम को कल पर क्यों नहीं टालना चाहिए।

उत्तर : मनुष्य का जीवन क्षण मंगुर है। उसकी मृत्यु कभी भी हो सकती है। अतः किसी काम को कल पर नहीं टालना चाहिए।

1.3 अभ्यास करने का क्या लाभ है?

उत्तर : लगातार अभ्यास करके मूर्ख व्यक्ति भी बुद्धिमान हो जाता है।

1.4 वर्षा के बहुत ज्यादा या कम होने से क्या-क्या नुकसान होता है?

उत्तर : वर्षा के बहुत अधिक या कम होने से कृषि नष्ट हो जाती है। 

1.5 दूसरों को उपदेश क्यों नहीं देना चाहिए?

उत्तर : जब तक अपने आचरण में परिवर्तन न लाया जाय दूसरे को उपदेश देने से कोई फायदा नहीं होता अतः दूसरों को उपदेश नहीं देना चाहिए।

1.6 दूसरे की पीड़ा को किसकी पीड़ा समझनी चाहिए?

उत्तर : दूसरे की पीड़ा को अपनी पीड़ा समझनी चाहिए।

1.7 हमारा सच्चा मित्र या शुभचिंतक कौन है? इसका पता कब चलता है?

उत्तर : हमारा सच्चा मित्र या शुभ चितक वही होता है जो हमारे कष्टों को कम करता है।

1.8 बिगड़ी बात क्या बन पाती है?

उत्तर  : नहीं, बिगड़ी बात कभी नहीं बन पाती है।

1.9 मन की व्यथा को मन में ही क्यों छिपाए रखना चाहिए?

उत्तर : हमें अपने मन की व्यथा को मन में ही रखना चाहिए क्योंकि कोई सुनकर व्यथा को कम

नहीं करेगा, अपितु हमारी हंसी उड़ायेगा।

1.10 हमें अपनी बड़ाई क्यों नहीं करनी चाहिए?

उत्तर : हमे अपनी बड़ाई स्वयं नहीं करनी चाहिए क्योकि हीरा मूल्यवान होने पर भी अपना मोल नहीं करता और चुप रहता है।

1.11 किसे सबसे अच्छा कार्य कहा गया है?

उत्तर : परोपकार को सबसे अच्छा काम कहा गया है।

2. निम्नलिखित पंक्तियों के भाव स्पष्ट करो।

2.1 हिये तराजू तौलि कै, तब मुख बाहर आनि।

उत्तर : उपर्युक्त पंक्ति का अर्थ यह है कि बिना विचार किए हुए कोई भी बात तुरन्त नहीं कहनी चाहिए। कोई बात कहने के पूर्व उसके लाभ-हानि, उचित-अनुचित के बारे में सोच विचार कर लेना चाहिए।

2.2 परहित सरसि धरम नहि भाई?

उत्तर : परोपकार अर्थात दूसरों की भलाई के समान कोई धर्म नहीं है।

2.3 सुनि अतिलैहै लोग सब बॉटि न लैहें कोय।।

उत्तर : अपना कष्ट किसी से कहने पर लोग उसकी खिल्ली उड़ायेंगे हमारे कष्ट को बाँट नहीं लेंगे।

3. क्या हानि होगी-

3.1 दूसरों से कठोर बात कहने पर।

उत्तर : वह व्यक्ति नाराज होगा और विरोध बढ़ेगा।

3.2 आज का काम कल पर टालने पर।

उत्तर : काम कभी पूरा नहीं होगा।

3.3 मन की व्यथा हर एक से कहने पर।

उत्तर : अपना कष्ट कम नहीं होगा, अपितु दूसरे मजाक उड़ायेगें।

3.4 अपनी बड़ाई अपने आप करने पर।

उत्तर : अपनी इज्जत कम होती है।

3.5 समय को खोने पर।

उत्तर : पछताना पड़ता है।

4. उन्हें कौन सा दोहा सुनाकर समझाएंगे - जब

4.1 तुम्हारे वे मित्र जो पढ़ाई-लिखाई में पीछे पड़ने के कारण दुखी हो जाते हैं।

उत्तर : का वरषा जब कृषि सुखाने, समय चूकि पुनि का पछिताने।

4.2 तुम्हारे वे मित्र जो दूसरों को पीड़ा पहुँचाते हों।

उत्तर : परहित सरिस धर्म नहि भाई, पर पीड़ा सम नहि अधमाई।

4.3 तुम्हारे वे मित्र जो अपनी बड़ाई खुद करते हैं।

उत्तर : रहिमन हीरा कब कहै, लाख टका मो मोल।

5. निम्नलिखित शब्दों के समान अर्थ वाले शब्द लिखो। 

बरसा = वर्षा, सरसि = समान, रसरी = रस्सी, अधमाई = नीच कार्य, जड़मत = मूर्ख, पुनि = फिर, माखन = मक्खन, मुख = मुंह

6. इन दोहों से मिलने वाली शिक्षाओं की एक सूची बनाओ।

उत्तर : (1) बहुत सोच समझ कर बोलना चाहिए।

(2) काम कभी कल पर नहीं टालना चाहिए।

(3) अभ्यास से कठिन काम सरल हो जाता है।

(4) समय बीत जाने पर पछताना बेकार है।

(5) दूसरे को उपदेश नहीं देना चाहिए।

(6) परोपकार सबसे बड़ा धर्म है।

👉 कक्षा 5 हिन्दी पाठ बहार सम्पूर्ण हल 

👉Daily Use 100000+ English and Hindi Sentences








Path 15 Maine pakshi Uda Diya Class 5 Hindi Pathbahar West Bengal Board, कक्षा 5 हिंदी पाठ 15 मैंने पक्षी उड़ा दिए पश्चिम बंगाल बोर्ड

कक्षा 5 हिन्दी पाठबहार (NOTES) पश्चिम बंगाल बोर्ड

 पाठ 15
मैंने पक्षी उड़ा दिए

🏵️रवीन्द्रनाथ टैगोर

  बात मेरे बचपन की है। मैं उन दिनों आठ-नौ वर्ष का बालक ही था। हमारा घर बहुत बड़ा था। आस-पास के कई घरों की छतें एक-दूसरे से सटी हुई थीं। मोहल्ले के लड़के छतों पर पतंग उड़ाते। आसमान में रंग-बिरंगी पतंगों के साथ-साथ उड़ते पक्षी मुझे बहुत भाते। कई बार तो डार की डार उड़ती दिखाई देतीं। ऐसा लगता मानो पक्षी हमारी पतंगों के साथ होड़ लगा रहे हों कि कौन ऊँचा उड़ता है।

 उन दिनों लोगों को अपने घरों में पक्षी पालने का बहुत शौक था। हर घर के बरामदे में एक-दो पिंजरे तो लटके ही रहते। रंग-बिरंगे पक्षी बंद पिंजरों में चीखते-चिल्लाते, पंख फड़फड़ाते रहते। उनकी आवाजें सुनकर मेरा मन बहुत खिन्न हो जाता। मुझे तो नीले आकाश में उड़ते हुए पक्षी ही अच्छे लगते थे।

मेरी मंझली भाभी को भी अपने पड़ोस की सहेलियों की देखा-देखी पक्षी पालने का शौक हुआ। वे कई दिनों से कुछ पक्षी लाने की बात कह रही थीं। मैंने भी सुना तथा मैंने भाभी से विनती की कि वे पक्षियों को न लाएँ। पिंजरे में कैद पक्षी अच्छे नहीं लगते।

मेरी बात भला कौन सुनता ! मैं ठहरा घर का सबसे छोटा बालक ! भाभी चार रंग-बिरंगी चिड़िया और एक नया पिंजरा खरीदकर ले आई। पिंजरे में बैठे चिड़ियों के जोड़े चीख-चिल्ला रहे थे। भाभी हँस-हँसकर पड़ोस की औरतों को रंग-बिरंगी चिड़िया दिखा रही थीं। वे भी हँस-हँसकर उन छोटी चिड़ियों की प्रशंसा कर रही थीं और कह रही थीं, "वाह! कितनी सुंदर चिड़िया हैं।"

यह सब देख मैं बहुत उदास हो गया।

मैंने भाभी से कहा, "आप इन पक्षियों पर अत्याचार कर रही हैं। इन प्राणियों ने आपका क्या बिगाड़ा है जो इन्हें कैद कर पिंजरे में डाल दिया है?"

भाभी ने मुझे डाँटते हुए कहा, "छोटा मुँह बड़ी बात नहीं करते। अपनी उम्र तो देखो! जाओ, छत पर तुम्हारे मित्र पतंग उड़ा रहे हैं। तुम भी उड़ाओ।"

मैं रुआँसा हो गया। सोचने लगा कि कैसे इन पक्षियों को स्वतंत्र करूँ। एक दिन मुझे अवसर मिल ही गया। भाभी अपनी सहेलियों के साथ बाजार गई थीं। मैं बरामदे में गया। पिंजरे का दरवाजा खोला। पक्षी सहम गए। मैंने उन्हें पकड़ा और आसमान में उड़ा दिया।

जब भाभी घर लौटीं तो पिंजरा खाली देख बहुत गुस्सा हुईं। मुझपर स्वयं तो क्रोध किया ही, परिवार के अन्य लोगों से भी मेरी शिकायत की। सबको मेरा यह काम गलत लगा। सबने मुझे डाँटा। पर मैं चुपचाप सुनता रहा क्योंकि मुझे तो पक्षियों को आजाद कर बहुत खुशी मिल रही थी। मैं सोच रहा था, 'काश मैं उन पक्षियों को भी निकाल पाता जो अन्य लोगों के घरों में लटके पिंजरों में बंद थे।' 

रवीन्द्रनाथ टैगोर 

[ जीवन परिचय : विश्व कवि रवीन्द्रनाथ ठाकुर भारत की एक महान् विभूति थे। उनका जन्म 7 मई, 1861 ई. को कोलकाता के जोड़ासाँकू स्थित ठाकुर परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम महर्षि देवेन्द्रनाथ ठाकुर था। बचपन में रवीन्द्रनाथ ठाकुर की शिक्षा-दीक्षा घर पर हुई। कुछ दिनों तक उन्होंने ओरियण्टल सैमिन सेमिनरी स्कूल, बंगाल एकेडमी और सेट जेवियर आदि स्कूलों में पढ़े, लेकिन स्कूलों में उनकी विरक्ति देखकर उनके पिता ने घर पर ही अंग्रेजी, संस्कृत और बंगला की पढ़ाई की व्यवस्था कर दी। आगे चलकर उन्होंने लंदन विश्वविद्यालय में अंग्रेजी साहित्य का विशेष अध्ययन किया। बचपन से ही रवीन्द्रनाथ की प्रवृत्ति कविता की ओर अधिक थी। धीरे-धीरे उनका रुझान साहित्य के विविध अंर्गों कहानी, उपन्यास, नाटक, निबंध आदि तक पहुँच गया। 1883 ई. में उनका विवाह मृणालिनी देवी के साथ हुआ। 1913 ई. में रवीन्द्रनाथ ठाकुर की प्रसिद्ध काव्य कृति गीतांजली के लिए साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला। रवीन्द्रनाथ ठाकुर की अन्यतम कृतियों में 'बलाका', 'राजा', 'गोरा', आदि प्रमुख है। उनकी कविता 'जन-गण-मन अधिनायक जय हे भारत भाग्य विधाता', आज भारत का राष्ट्रीय गीत है। रवीन्द्रनाथ की विद्वता को देखते हुए कोलकाता, ढाका, और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालयों ने उन्हें डी. लिट् की उपाधि प्रदान की। उनकी अनुपम एवं महान् कीर्ति शंतिनिकेतन विश्वविद्यालय के रूप में परिवर्तित होकर विश्वस्तरीय शिक्षा का केन्द्र बना हुआ है। ]

 शब्दार्थ : भाना = अच्छा लगना, होड़ प्रशंसा = बड़ाई, तारीफ, अन्याय = अत्याचार सहम जाना = डर जाना; अन्य = दूसरा बाजी; खिन्न दुखी विनती प्रार्थना, अनुरोध;   शिकायत = निंदा । ; रूआँसा = रोने जैसा; स्वतंत्र = आजादः  

👉 कक्षा 5 हिन्दी पाठ बहार सम्पूर्ण हल 

अभ्यासमाला 

1. संक्षेप में उत्तर दो। 

1.1 मोहल्ले के लड़के छतों पर क्या करते थे? 

उत्तर : मुहल्ले के लड़के छतों पर पतंग उड़ाते थे। 

1.2 लेखक ने किससे पक्षी न लाने की विनती की थी?

उत्तर : लेखक ने अपनी भाभी से पक्षी न लाने की विनती की थी।

1.3 लेखक का मन खिन्न क्यों हो जाता था?

उत्तर : चिड़ियों को पिंजड़े में बन्द देखकर लेखक का मन खिन्न हो जाता था।

1.4 लेखक ने पिंजरे का दरवाजा किसलिए खोल दिया था?

उत्तर : लेखक ने पिंजरे का दरवाजा इसलिये खोल दिया जिससे कि वे उड़ जाये।

1.5 लेखक को किसने डाँटा ?

उत्तर : लेखक को उनकी भाभी ने डांटा।

1.6 पक्षियों को आजाद कर देने के बाद लेखक को क्या मिला?

उत्तर : पक्षियों को आजाद कर देने के बाद लेखक को खुशी मिली।

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर अपनी भाषा में लिखो

2.1 पक्षियों को उड़ता देखकर लेखक को क्या लगता था?

उत्तर : पक्षियों को उड़ते देखकर लेखक को लगता कि डार के डार उड़ रहे हैं।

2.2 बंद पिंजरे में पक्षी क्या करते रहते थे?

उत्तर : बंद पिंजरे में पक्षी चीखते-चिल्लाते और पंख फड़फड़ाते रहते थे।

2.3 पड़ोस की औरतों ने चिड़ियाँ देखकर क्या कहा?

उत्तर : पड़ोस की स्त्रियों ने चिड़ियों को देखकर कहा 'वाह! कितनी सुन्दर चिड़िया है।'

2.4 भाभी ने लेखक को किस बात के लिए डाँटा?

उत्तर : भाभी ने लेखक को पिंजरा को खोल देने के लिए डांटा।

2.5 अवसर मिलते ही लेखक ने क्या किया ?

उत्तर : अवसर मिलते ही लेखक ने पिंजरें का दरवाजा खोल दिया।

2.6 पक्षियों को आजाद कर लेखक को कैसा लग रहा था?

उत्तर : पक्षियों को आजाद कर लेखक को खुशी हो रही थी।

2.7 लेखक क्या सोच रहे थे?

उत्तर : लेखक सोच रहे थे कि पक्षियों को कैसे आजाद करूँ?

2.8 लेखक ने पक्षी को आजाद कर किस तरह का कार्य किया ?

उत्तर : लेखक ने पक्षी को आजाद कर अच्छा कार्य किया।

2.9 लेखक को पिंजरे में बंद पक्षी अच्छे नहीं लगते थे। इससे लेखक के स्वभाव के बारे में क्या पता चलता है?

उत्तर : लेखक को पिंजरे के बन्द पक्षी अच्छे नहीं लगते थे। इससे लेखक के स्वभाव के बारे में यह पता चलता है कि लेखक स्वतंत्रता प्रेमी थे।

2.10 हमे पशु-पक्षियों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए?

उत्तर : हमें पशु-पक्षियों के साथ दयालुता का व्यवहार करना चाहिए।

3. कोष्ठक में से सही शब्द चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति करो

3.1 आस-पास के घरों की खिड़कियाँ एक-दूसरे से सटी हुई थीं।

3.2 मंझली भाभी को पक्षी पालने का शौक हुआ।

3.3 लेखक अपने घर में सबसे छोटा बालक था।

3.4 लेखक के मित्र छत पर पतंग उड़ा रहे थे।

3.5 भाभी ने परिवार के अन्य लोगों से मेरी शिकायत की।

4. सही विकल्प के सामने (√) का निशान लगाओ।

4.1 हर घर के बरामदे में क्या लटके रहते थे?

(i) पतंगे      (ii) पिंजरे [✓]          (iii) पक्षी

4.2 भाभी किनके साथ बाजार गई थीं?

(i) लेखक के साथ         (ii) अपनी सहेलियों के साथ      

(iii) अकेली [✓]

4.3 निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

(i) भाभी चार चिड़ियाँ खरीदकर ले आई।  [✓]

(ii) भाभी चार चिड़ियाँ पकड़कर ले आई।

(iii) भाभी चार चिड़ियाँ माँग कर ले आई।

5. निम्नलिखित शब्दों का बहुवचन रूप लिखो।

5.1 पतंग - पतंगों, 5.2 छत - छतों, 5.3 औरत - औरतों, 5.4 पिंजरा - पिंजरों, 5.5 चिड़िया - चिड़ियों,  5.6 सहेली - - सहेलियों

👉 कक्षा 5 हिन्दी पाठ बहार सम्पूर्ण हल 

6. निम्नलिखित शब्दों की वर्तनी को शुद्ध करके लिखो।

6.1 वचपन - बचपन,   6.2 जोडा - जोड़ा   6.3 बिनती - विनती    6.4 रूँआसा - रुंआसा   6.5 दरबाजा - दरवाजा 6.6 स्वंय - स्वयं   

7. सही विकल्प के सामने (✔) का निशान लगाओ।

7.1 इनमें से कौन-सा समूह समानार्थी शब्दों का समूह है?

(i) पक्षी, पंख, चिड़िया  (ii) पक्षी, चिड़िया, गौरेया  (iii) पक्षी, पंछी, चिड़िया  [✓]

7.2 'छोटी' का विलोम शब्द है

(i) बड़ा              (ii) बड़े              (iii) बड़ी [✓]

7.3 'आकाश में ......... उड़ रहे थे।' इस वाक्य में रिक्त स्थान में भरा जाने वाला शब्द है -

(1) पक्षी [✓]             (ii) पक्षियों                (iii) पक्षियों

8. बिखरे शब्दों को जोड़कर वाक्य बनाओ

8.1 के/लड़के/पतंग उड़ाते/मोहल्ले/पर/छतों।

उत्तर : मोहल्ले के लड़के छतों पर पतंग उड़ाते हैं।

8.2 सुंदर/चिड़ियाँ/वाह!/कितनी/हैं

उत्तर : वाह! चिड़ियाँ कितनी सुन्दर हैं।

8.3 अत्याचार/पर/कर/रही/इन/हैं/पक्षियों/आप।

उत्तर : आप इन पक्षियों पर अत्याचार कर रही हैं।

8.4 दिन/अवसर/मिल/एक/ही/गया।

उत्तर : एक दिन अवसर मिल ही गया।

9. पाठ के क्रियापद वाले शब्दों से दो वाक्य चुनकर लिखो।

उत्तर : वे कई दिनों से कुछ पक्षी लाने की बात कह रही थीं। आप इन पक्षियों पर अत्याचार कर रही है।

10. पाठ से पाँच सर्वनाम शब्द को चुनकर लिखो।

उत्तर : उन, हमारा, उनकी, मुझे, वे।

11. निम्नलिखित शब्द युग्मों का प्रयोगकर वाक्य बनाओ।

उ० रंग-बिरंगी = रंग-बिरंगी चिड़ियां सब का मन मोह लेती हैं।

एक-दूसरे = वनस्पतियाँ एवं जीव-जन्तु एक-दूसरे पर निर्भर है।

चीखते-चिल्लाते = मार खाकर वह चीखते-चिल्लाते घर भाग गया।

देखा-देखी = देखा-देखी पाप, देखा-देखी पुण्य होता है।

12. निरीक्षण करो।

सुबह जल्दी उठो और अपने आस-पास के किसी बगीचे या पार्क में जाओ। वहाँ देखो कि कितने प्रकार की चिड़ियाँ आती हैं। उनके रूप-रंग आदि के बारे में कक्षा में बताओ।

13. पढ़ो, समझो और जानो।

भाभी ने मुझे डाँटते हुए कहा, "छोटा मुँह बड़ी बात नहीं करते। अपनी उम्र तो देखो। जाओं, छत पर तुम्हारे मित्र पतंग उड़ा रहे हैं। तुम भी उड़ाओ।"
उपरोक्त वाक्य में रंगीन शब्द 'छोटा मुँह बड़ी बात' का अर्थ है अपनी योग्यता से बढ़कर बोलना। यह एक लोकोक्ति है अर्थात् लोक की उक्ति यानी लोगों द्वारा कही गई उक्ति या कथन। मुहावरे वाक्य के अंग होते है. जबकि लोकोक्तियाँ स्वयं में पूर्ण वाक्य होती है। वाक्यों में प्रयोग करते समय इनका रूप नहीं बदलता। इस तरह की कुछ और लोकोक्तियों को जानो। जैसे घर की मुर्गी दाल बराबर, काला अक्षर भैंस बराबर, दूर के बोल सुहावने, साँच को आँच नहीं, बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद आदि।







Class 5 chapter 14 Murkh Magarmacch Ki Kahani hindi Pathbahar West Bengal Board, कक्षा 5 हिंदी पाठबहार पाठ 14 मुर्ख मगरमच्छ की कहानी पश्चिम बंगाल बोर्ड

कक्षा 5 हिन्दी पाठबहार (NOTES) पश्चिम बंगाल बोर्ड

 पाठ 14
मुर्ख मगरमच्छ की कहानी

🏵️उपेन्द्रकिशोर रायचौधरी 
गरमच्छ और सियार दोनों मिलकर खेती करने गए। किसकी खेती करेंगे? आलू की खेती। आलू मिट्टी के नीचे होता है और उसका पौधा रहता है मिट्टी के ऊपर, जो किसी काम नहीं आता। परन्तु मूर्ख मगरमच्छ को इस बात का पता नहीं था। उसने सोचा आलू शायद उस पौधे का फल होगा।
अतः उसने सियार को ठगने की नीयत से कहा कि, "पौधे का ऊपरी हिस्सा लेकिन मेरा, और निचला हिस्सा तुम्हारा।"

सुनकर सियार ने हँसते हुए कहा, "अच्छा, वैसा ही होगा।"
इसके बाद जब आलू पैदा हुआ, तब मगरमच्छ उन पौधों के ऊपरी भाग को काटकर अपने घर ले आया। लाकर उसने देखा कि उनमें एक भी आलू नहीं है। तब वह खेत में गया और देखा कि सियार मिट्टी खोदकर सब आलू निकाल कर अपने घर ले गया है। मगरमच्छ ने सोचा, "अच्छा, तो इस बार तो मैं पूरी तरह से ठगा गया हूँ। चलो अगली बार देखूंगा!"
इसके बाद धान की खेती हुई। मगरमच्छ ने मन ही मन सोचा, अब और ठगा जाऊँगा नहीं। अतः उसने पहले ही सियार से कहा, "भाई, इस बार लेकिन मैं ऊपरी हिस्सा नहीं लूँगा। अबकी बार मुझे निचला हिस्सा देना होगा।"
सुनकर सियार ने हँसते हुए कहा, "अच्छा, वैसा ही होगा!"
इसके बाद जब धान पैदा हुआ, तब सियार धान समेत पौधे के ऊपरी हिस्से को काट कर ले गया। मगरमच्छ के मन में बहुत खुशी हुई। सोचा, मिट्टी खोदकर सब धान निकाल लूँगा।
हाय री किस्मत ! मिट्टी खोदकर देखा, वहाँ तो कुछ भी नहीं है। मुनाफे का पुआल भी गया। तब मगरमच्छ बहुत गुस्से में आया, और कहा, "रूको सियार के बच्चे, मैं तुम्हें दिखाता हूँ। इस बार मैं तुम्हें ऊपरी हिस्सा नहीं लेने दूँगा। पूरा ऊपरी हिस्सा मैं ही ले जाऊँगा!" तीसरी बार गन्ने की खेती हुई।
मगरमच्छ ने तो पहले ही कह रखा है कि इस बार वह ऊपरी भाग लिए बिना नहीं रहेगा। अतएव सियार ने उसे ऊपरी हिस्सा देकर स्वयं गन्नों को लेकर घर में बैठा मौज से खाने लगा।
मगरमच्छ खुश होता हुआ गन्ने के ऊपरी भाग को अपने घर लाया तथा उसने गन्ने को चबाकर देखा, नमकीन ही नमकीन स्वाद, उसमें थोड़ी सी भी मिठास नहीं। तब गुस्से में आकर उसने सब फेंक कर सियार को कहा, "नहीं भाई, तुम्हारे साथ अब मैं और खेती नहीं करूंगा; तुम बहुत ठगते हो !"

 उपेन्द्रकिशोर रायचौधरी 

[ जीवन परिचय -उपेन्द्रकिशोर रायचौधरी का जन्म 10 मई, 1863 ई. को अखण्ड बंगाल के मैमनसिंह जिला के मशुआ नामक ग्राम (वर्तमान बंगलादेश) में हुआ था। उनके पिता का नाम कालीनाथ राय था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा जिला स्कूल में हुई। सत्पश्चात् उच्च शिक्षा के लिए कलकता के प्रेसिडेंसी कॉलेज में दाखिल हुए। उपेन्द्रकिशोर बचपन से ही मेधावी छात्र थे। उन्होंने शिशु साहित्य की रचनाएँ लिखनी प्रारंभ कर दीष। उपेन्द्रकिशोर की रचनाएँ जोड़ासाँकू स्थित ठाकुरबाड़ी से प्रकाशित मासिक पत्रिका 'बालक' में छपती थी। उपेन्द्रकिशोर रायचौधरी द्वारा रचित रचनाओं में छेलेदेर रामायण (बच्चों की रामायण) 'सकालेर कथा', 'टूनटुनीर बोई', 'गुपी-गाइन बाधा बाइन', आदि प्रमुख हैं। उपेन्द्रकिशोर ने 1885 ई. में आधुनिकतम मुद्रण यंत्रों का आयात किया तथा यू स की नींव रखी। यही नहीं बल्कि उन्होंने अपने एस. राय एण्ड सन्स के नाम से आधुनिक प्रेस की द्वारा बनाए गए चित्रों का एक स्टूडियो भी खोला। 20 मई, 1915 ई. को इस महान व्यक्तित्व और प्रतिभावान का निधन हो गया। उपेन्द्रकिशोर रायचौधरी की विरासत को समृद्ध करने में उनके पौत्र सत्यजीत राय ने अग्रणी भूमिका निभाई है। ]

कहानी का सारांश

  प्रस्तुत कहानी काल्पनिक पात्र मगरमच्छ और सियार से संबंधित है। मगरमच्छ और सियार के बीच गहरी मित्रता थी। एक समय की बात है। दोनों मिलकर एक साथ आलू की खेती की। मूर्ख मगरमच्छ ने सियार को ठगने की नीयत से कहा कि, पौधे का ऊपरी हिस्सा मेरा होगा और निचला हिस्सा तुम्हारा होगा। मगरमच्छ की बात सुनकर सियार तैयार हो गया। इसके बाद जब आलू पैदा हुआ, तब मगरमच्छ को पौधे का ऊपरी भाग भाग मिला और सियार को निचला हिस्सा आलू मिला। इसके बाद धान की खेती हुई। इस बार मगरमच्छ ने कहा कि भाई इस बार मैं मिट्टी का निचला हिस्सा लूँगा। मगरमच्छ को पुआल मिला और सियार को धान । इसके बाद गन्ने की खेती हुई। मगरमच्छ ने सियार से कहा कि मैं इस बार एकदम ऊपरी भाग लूँगा। इस बार भी उसे केवल उपरी भाग मिला और चबाकर देखा कि गन्ने में नमकीन स्वाद के अलावा कुछ भी नहीं है। तब गुस्से में आकर उसने सियार से कहा, नहीं भाई, तुम्हारे साथ अब अब मैं और खेती नहीं करूँगा, तुम बहुत ठगते हो। कहने का तात्पर्य है कि स्वार्थ का भाव रखना सबसे बुरी आदत है।
शब्दार्थ - नीयत = इरादा; हिस्सा = भाग; ठगना = धोखा दोना; मूर्ख = बेवकूफ; किस्मत = भाग्य; मौज = मजा।

अभ्यासमाला 

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर अपनी भाषा में लिखो।
1.1 उन उभयचर प्राणियों का नाम लिखों जिन्हें तुम जानते हो?
उत्तर : उभयचर प्राणी मेंढक, घोंघा, कछुआ, मगरमच्छ।

1.2 सरककर चलने वाले कुछ प्राणियों का नाम लिखो जिन्हें तुम जानते हो?
उत्तर : सरककर चलने वाले प्राणी छिपकली, साँप, केचुआ।

1.3 बच्चों हेतु लिखी गई पशु-पक्षियों की कहानियों में सबसे चालाक प्राणी तुम किसे समझते हो ?
उत्तर : बच्चों हेतु लिखी जाने वाली पशु पक्षियों की कहानियों में मैं सियार को सबसे चालाक प्राणी समझता हूँ।

1.4 मिट्टी के नीचे होनेवाली कुछ फसलों के नाम लिखो ?
उत्तर : मिट्टी के नीचे होने वाली फसलें आलू, मूली, हल्दी, चुकन्दर, सूरन।

1.5 धान के पौधे से हमें क्या मिलता है?
उत्तर : धान के पौधे से हमें चावल एवं पुवाल मिलता है।

1.6 मगरमच्छ और सियार से संबंधित और कोई कहानी को कुछ वाक्यों में लिखो।
उत्तर : ऊपर की कहानी में हमने पढ़ा कि मगरमच्छी तीनों बार धोखा खाया था, अतः उसने सोचा कि आलू, चावल और ईख खाकर सियार का कलेजा बहुत स्वादिष्ट हो गया होगा, अतः सियार को ही खाऊं। एक दिन उसने मगरमच्छ से कहा, "अब तो हम मित्र हो गये। नदी के बीच में एक द्वीप है, चलो वहां चलकर हमलोगकुछ दिन आनन्द मनायें। वहां खाने को भी बहुत अच्छी-अच्छी चीजे हैं।" सियार मगरमच्छ की पीठ पर बैठ द्वीप पर जाने को तैयार हो गया। जब सियार मगरमच्छ की पीठ पर बैठ गया तो मगरमच्छ से बोला, "भीतर पानी की धारा तेज होगी, धीरे-धीरे चलना।" मगरमच्छ ने कहा डरो नहीं, पीठ ठीक से पकड़े रहो। किनारे पहुंचने से पहले मगरमच्छ ने कहा, 'सियार मामा' तुमने बहुत आलू, चावल और ईख खाई है। अब मैं तुम्हारा मीठा कलेजा खाऊंगा।' सियार चालाक होता है। उसने एक चाल चली। उसने मगरमच्छ से कहा, 'अरे भांजे तुमने पहले क्यों नहीं बतलाया? मैंने अपना दिल तो उसी पार छोड़ दिया है। चलो उसे ले आता हूँ। फिर हम द्वीप पर चलेंगे, और तुम आनन्द से मेरा कलेजा खाना।' मगरमच्छ सीधा था, वह किनारे की तरह लौट पड़ा। किनारे पहुँचते ही सियार कूदकर यह कहते हुए भाग गया, "अखिर मूर्ख मूर्ख ही होता है।"

2. 'क' स्तम्भ के साथ 'ख' स्तम्भ को मिलाकर देखो।

उत्तर : क               ख
मगरमच्छ ...............नदी
सियार ...................जंगल
आलू ......................खेत
गन्ना ......................चीनी
गाय .....................पुआल

3. कहानी के घटनाक्रमों को सजाकर लिखो -
3.1 अतः उसने सियार को ठगने की नीयत से कहा कि, 'लेकिन पौधे का ऊपरी हिस्सा मेरा
और निचला हिस्सा तुम्हारा।'
3.2 मगरमच्छ और सियार दोनों मिलकर खेती करने गए। किसकी खेती करेंगे? आलू की खेती।
3.3 अब की बार गन्ने की खेती हुई। मगरमच्छ ऊपरी हिस्से को लेकर उसे चबाकर देखा बहुत नमकीन लगा।
3.4 इसके बाद धान की खेती हुई। मगरमच्छ ने निचले हिस्से को पाकर समझा कि वह बहुत ठगा गया है।
3.5 मगरमच्छ ने सियार से कहा, नहीं भाई, तुम्हारे साथ अब मैं और खेती करने नहीं जाऊँगा, तुम बहुत ठगते हो।
उत्तर : 3.2, 3.1, 3.4, 3.3, 3.5 होगा।

4. खाली स्थानों को पूरा करोः
4.1 सियार और मगरमच्छ दोनों मिलकर खेती करने लगे।
4.2 उसने सोचा आलू शायद उस पौधे का ऊपरी हिस्सा होगा।
4.3 सियार धान समेत पौधे के धान को काटकर ले गया।
4.4 अबकी बार गन्ने की खोती हुई।
4.5 सियार मिट्टी से सब आलू निकाल कर अपने घर ले गया।

5. पास वाली टोकरी से शब्दों को खोजकर समान अर्थ वाले शब्दों को बगल में लिखो।
खेती = कृषि
गत्रा = ईख
ऊपरी हिस्सा = शीर्ष भाग
मिट्टी = मृत्तिका

6. वाक्यों को पूरा करो।
6.1 'मूर्ख मगरमच्छ की कहानी' पढ़कर मुझे लग रहा है कि वह  मुर्ख  था।
6.2 कहानी का सियार वास्तव में बहुत चालाक  है।
6.3 मगरमच्छ कहानी में में कुल 3 बार ठगा गया है। पहली बार ठगाया, क्योंकि आलू की खेती हुई । दूसरी बार ठगे जाने का कारण है धान की खेती हुई  उसके बाद फिर ईख के बारे में नहीं जानने के कारण वह ठगा गया। 
6.4 सियार बार-बार (हमेशा) फायदे में रहा, क्योंकि वह चालाक था

7. वाक्यों के रंगीन शब्दों में कौन-किस तरह का शब्द है, लिखो।
7.1 मगरमच्छ और सियार मिलकर खेती करने गए। - संज्ञा
7.2 उसने सोचा आलू शायद उस पौधे का फल होगा। - सर्वनाम
7.3 अच्छा अगली बार देखूँगा। - क्रिया
7.4 सोचा है, मिट्टी खोदकर सब धान निकाल लूँगा। - क्रिया
7.5 इस बार मुझे निचला हिस्सा लेना होगा। - विशेषण

8. सही वाक्यों के आगे (✔) निशान और गलत वाक्यों के आगे (x) निशान दो।

उ० 8.1 कहानी का मगरमच्छ बहुत ही चालक और चतुर था।  [x]
8.2 मगरमच्छ सियार को ठगना चाहता था।  [√]
8.3 आलू की खेती में निचले हिस्से को पाकर सियार ठगा गया।  [x]
8.4 धान की खेती के समय मगरमच्छ को फसल का ऊपरी हिस्सा मिला।  [x]
8.5 मगरमच्छ गन्ने के पौधों को घर ले जाकर आराम से खाने लगा।  [x]

9. वाक्य बनाओ। ऊपरी हिस्सा, निचला हिस्सा, खेती, गन्ना, नमकीन।
उत्तर : गन्ना के पौधे का ऊपरी हिस्सा नीरस होता है। आलू के पौधे का निचला हिस्सा ठीक होता है। खेती से हमें भोजन के लिए अन्न मिलता है। गन्ने से गुण और चीनी बनती है। गन्ना के पौधे का ऊपरी हिस्सा नमकीन होता है।

10. विपरीतार्थक शब्द लिखो। फायदा, मीठा, नीचे, काम, मजा।

उत्तर : फायदा - नुकशान,  मीठा - तीता, नीचे - ऊपर, काम - - बेकाम, मजा - बेमजा

उपेन्द्रिकिशोर रायचौधरी (1863-1915): वर्तमान बांग्लादेश के मयमनसिंह जिले के मशुआ नामक स्थान में इनका जन्म हुआ था। उन्होंने शिशु तथा किशोरों हेतु उपयोगी भाषा में कविताएँ, कहानियाँ, उप-कथाएँ, मनोरंजक तथा वैज्ञानिक कहानियों की बंग्ला भाषा में रचनाएँ की हैं। उनकी रचनाओं में 'बच्चों की रामायण', 'बच्चों का महाभारत', 'सेकालेर कथा', 'टुनटुनीर बोई', 'गुपी-गाइन बाघा बाइन' प्रसिद्ध हैं। 1913 ई. में उन्होंने बाल पत्रिका 'संदेश' प्रकाशित किया। संगीत तथा चित्रकला में भी वे पारंगत थे। उनकी संतानों में सुखलता राव, पुण्यलता चक्रवर्ती, सुकुमार राय, सुविनय राय और पौत्र सत्यजीत राय-सभी बांग्ला शिक्षा बाल साहित्य के प्रतिष्ठित रचनाकारों में से हैं। प्रस्तुत पाठ की कहानी बांग्ला पुस्तक 'टुनटुनीर बोई' से ली गई रचना का हिन्दी अनुवाद है।

11.1 उपेन्द्रिकिशोर राय चौधुरी द्वारा लिखित दो प्रसिद्ध पुस्तकों का नाम लिखो।
उत्तर : बच्चों की रामायण, बच्चों की महाभारत।

11.2 उन्होंने बच्चों की कौन सी पत्रिका प्रकाशित की थी?
उत्तर : उन्होंने बच्चों की संदेश पत्रिका प्रकाशित की थी।

11.3 उनकी संतानों में शिशु बाल-साहित्यकार के रूप में कौन-कौन अति परिचित है?
उत्तर : उनकी संतानों में शिशु बाल-साहित्यकार के रूप में सुखलता राव, पुण्यलता चक्रवर्ती, सुकुमार राय, सुविनय राय अति परिचित हैं।

12. नीचे दिए गए प्रश्नों का उत्तर लिखोः

12.1 कहानी में कौन-कौन खेती करने गए ?
उत्तर : कहानी में मगरमच्छ और सियार खेती करने गये।

12.2 उन्होंने कौन-कौन सी फसलों की खेती की ?
उत्तर : उन्होंने आलू, धान और गन्ना की खेती की।

12.3 खेती करने में किसे फायदा और किसे नुकसान हुआ?
उत्तर : खेती करने में सियार को फायदा और मगरमच्छ को नुकसान हुआ।

12.4 गन्ने की खेती के समय सियार को ठगने के लिए मगरमच्छ ने कौन सा फंदा रचा था?
उत्तर : गन्ने की खेती के समय सियार को ठगने के लिए मगरमच्छ ने अपने ऊपरी हिस्सा लेने को कहा।

12.5 "मूर्ख मगरमच्छ की कहानी में गमरमच्छ ने सियार को 'तुम बहुत ठगते हो' कहकर दोष लगाने के बाद भी, वास्तव में वह अपनी मूर्खता के कारण ही बार-बार ठगा गया।"-कहानी को पढ़ने के बा बाद यदि ऐसा ही ल लगता है, तो क्यों ऐसा लगा, इसे बताने के लिए कहानी से खोजकर तीन वाक्य लिखो।
उत्तर : (i) पौधे का ऊपरी हिस्सा मेरा और निचला हिस्सा तुम्हारा। (ii) लेकिन इस बार मैं ऊपरी हिस्सा नहीं लूँगा। इस बार निचला हिस्सा देना होगा। (iii) इस बार तुम्हें ऊपरी हिस्सा नहीं लेने दूंगा। पूरा ऊपरी हिस्सा मैं ही ले जाऊँगा।














Badal Class 5 chapter 13 hindi Pathbahar West Bengal Board, कक्षा 5 हिंदी पाठबहार पाठ 13 बादल पश्चिम बंगाल बोर्ड

 कक्षा 5 हिन्दी पाठबहार (NOTES) पश्चिम बंगाल बोर्ड

 पाठ 13
बादल 

🏵️डा. परशुराम शुक्ल
जीवन परिचय  : डॉ. परशुराम शुक्ल का जन्म 6 जून, 1947 ई. को कानपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ था। उन्होंने स्नातकोत्तर की शिक्षा ग्रहण करने के पश्चात् पी.एच.डी. की डिग्री हासिल की। भारतीय हिरन और गाय, भारतीय वन्य जीव, भारत का राष्ट्रीय पशु और राज्यों के राज्य पशु सहित दजनों से अधिक पुस्तकें लिखी है। 6 हजार से अधिक स्फुट रचनाएँ भी प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्होंने अनेक रचनाओं का भिन्न-भिन्न भारतीय भाषाओं में अनुवाद भी किया है। डॉ. परशुराम शुक्ल को समाज कल्याण मंत्रालय, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय भारत सरकार, नई दिल्ली, चिल्ड्रेस बुक ट्रस्ट ऑफ इंडिया, हिन्दी अकादमी हैदराबाद आदि संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत एवं सम्मानित किया है। वर्तमान समय में डॉ. शुक्ल पंचशील नगर, दतिया (मध्य प्रदेश) में रहकर लेखन कार्य में संलग्न हैं।]

गोरे बादल, काले बादल, 
नभ पर कितने सारे बादल 
कभी जोर से गर्जन करते 
कभी शांत बेचारे बादल।
गर्मी से तपती धरती पर 
शीतल पवन चलाते बादल 
सूखे वृक्ष हरे हो जाते 
ऐसा जल बरसाते बादल। 
चातक, मोर, पपीहा नाचें 
देख दूर से आते बादल,

जंगल में मंगल हो जाते, 
जब नभ पर छा जाते बादल।
सारे जग की प्यास बुझाते, 
इतना नीर बहाते बादल 
नाले, नदियाँ और समंदर 
ऊपर तक भर जाते बादल।
इन्द्रधनुष के रंग लुटाते 
पहला पाठ पढ़ाते बादल 
करो सदा धरती की सेवा 
हमको ये सिखलाते बादल।

कविता का शब्दार्थ एवं भावार्थ 

1. गोरे बादल,............................. दूर से आते बादल।
शब्दार्थ : गोरे = उज्ज्वल, सफेद; नभ = आकाश गर्जन = गरजनाः शांत = चुप चाप; बेचारे = कमजोर; तपती = गर्म; शीतल= ठण्डा।
अर्थ :  प्रस्तुत पंक्तियों के माध्यम से विभिन्न प्रकार के बादलों का वर्णन किया गया है। आकाश में छाये हुए बादल काले, गोरे अनेक रंगों के होते हैं। ये आकाश में चारों तरह से छाये रहते है। कभी ये जोर से गरजते है और कभी शांत हो जाते हैं। ये बादल गर्म पृथ्वी पर शीतल पवन चलाते हैं और ऐसी वर्षा करते है कि सूखे वृक्ष हरे-भरे हो जाते हैं। बरसने वाले बादलों को आते हुए देख चातक, मोर और पपीहा पक्षी नाचने लगते है। अर्थात् खुश हो जाते हैं। 

2. जंगल में मंगल.................हमको ये सिखलाते बादल।
शब्दार्थ : जंगल = वन; मंगल = आनन्दः नीर = जल; जग = संसार।
अर्थ : प्रस्तुत पंक्तियों के माध्यम से कवि का कहना है कि जब वर्षा होती है तो जंगल में मंगल हो जाता है अर्थात् पौधे हरे-भरे हो जाते हैं और पक्षी-खुश होकर नाचने लगते हैं। बादल इतना पानी बरसाते हैं कि नदी, नाले और समुंदर ऊपर तक भर जाते हैं। आकाश में बादलों के कारण कभी-कभी इन्द्रधनुष चमकता है। बादल अपने कार्यों से हमें यह पाठ पढ़ाते है कि हमें भी सदैव पृथ्वी की सेवा करनी चाहिए।

 अभ्यासमाला 

1. संक्षेप में उत्तर दो।
1.1 तुमने कितने रंगों वाले बादल देखे हैं?
उत्तर : मैंने काले और सफेद बादल और कभी-कभी भूरे बादल भी देखे है।

1.2 बादलों की गरज सुनने में कैसी लगती है?
उत्तर : बादलों की गरज सुनने में शेर के दहाड़ की तरह भय कारक लगती है।

1.3 बादल घरती पर क्या बरसाते हैं?
उत्तर : बादल धरती पर जल बरसाते हैं।

1.4 बादलों को देख कौन नाच उठते हैं?
उत्तर : बादलों को देख चातक, मोर और पपीहा पक्षी नाच उठते हैं।

1.5 बादल जग की प्यास किस तरह बुझाते हैं?
उत्तर : बादल वर्षा कर संसार की प्यास बुझाते हैं।

1.6 बादल हमें क्या-क्या सिखाते हैं?
उत्तर : बादल हमें सदैव धरती की सेवा करना अर्थात परोपकार करना सिखलाते है।
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर अपनी भाषा में लिखो।
2.1 नभ में बादलों की हल-चल के बारे में लिखो।
उत्तर :  आकाश में जब बादल छाते हैं तो वर्षा करते हैं, गरजते हैं और आसमान में उड़ते हुए नजर आते हैं।

2.2 बादल हमारी सहायता किस प्रकार करते हैं?
उत्तर : बादल जब वर्षा करते है तभी पृथ्वी को जल मिलता है जिसका उपयोग हम पीने, भोजन बनाने, सफाई करने और फसलों की सिचाई आदि में करते हैं। जल से ही कृषि की पैदावार होती है तथा जलाशयों एवं नदियों में जल आता है।
2.3 सारे जग की प्यास बुझाने का अर्थ क्या है?
उत्तर : सारे जग की प्यास बुझाने का अर्थ पृथ्वी के सभी मनुष्यों, जीव-जन्तुओं और पौधों तथा वृक्षों के जल की जरूरत को पूरा करना जिससे वे जीवित रहे एवं फलें-फूलें।

2.4 बादल हमें धरती की सेवा किस प्रकार करने के लिए कह रहे हैं?
उत्तर : कवि के अनुसार जिस प्रकार बादल वर्षा कर पृथ्वी की सेवा कर रहे हैं अर्थात् पृथ्वी की प्यास बुझा रहे है उसी प्रकार हमें भी पृथ्वी पर जितने मनुष्य, जीव-जन्तु और पेड़-पौधे हैं उनकी सेवा करनी चाहिए। हम भी अपने सेवा कार्यों से लोगों की भूख प्यास मिटा सकते हैं।

2.5 बादल किस प्रकार बनते हैं, प्रक्रिया को लिखो ?
उत्तर  : तालाब, नदी एवं समुद्र के पानी पर जब सूर्य की किरणें पड़ती है तो इनका पानी गर्म होकर भाप बनती है। भाप हल्की होने के कारण ऊपर आसमान में जाकर ठण्डी होती है और बादल बनते हैं।

2.6 वैसे दृश्य का वर्णन लिखो जब आसमान बादलों से घिरा हो।
उत्तर  : आकाश जब बादलों से घिर जाता है और हवा चलती है तो बादलों को देख कर ऐसा लगता है मानो एक दल दूसरे पर आक्रमण कर रहा है। कभी कोई बादल ऊपर जाता है तो कभी कोई। जब आकाश बादलों से घिरता है तो उस समय सूर्य छिप जाता है और चारों ओर घनघोर घटा छा जाती है।

2.7 बारिश आने वाली है। इस बात का अनुमान तुम किस तरह लगाते हो?
उत्तर  : आकाश में जब काले बादल छा जाते है तो सूर्य का प्रकाश धीमा पड़ जाता है बादल इधर-उधर दौड़ने लगते हैं। इस समय हमें वर्षा होने की संभावना मालूम पड़ती है।

2.8 बादलों के बरसने के बाद तुम्हें आस-पास कैसा बदलाव नजर आता है? लिखो।
उत्तर  : बादलों के बरसने के बाद सूखी भूमि गीली हो जाती है। आस-पास के नदी, नाले तालाब, पोखर सब भर जाते हैं, हवा ठण्डी हो जाती है, मेंढक टरनि लगते है। बिलों से विभिन्न प्रकार के कीड़े मकोड़े तथा अन्य जीव जन्तु बाहर निकलने लगते हैं।

3. कविता की निम्नलिखित पंक्तियों का अर्थ अपने शब्दों में लिखो।
   चातक, मोर, पपीहा नाचे
   देख दूर से आते बादल
   जंगल में मंगल हो जाते,
   जब नभ पर छा जाते बादल।

उत्तर : अर्थ : दूर से काले बादलों को आते देख कर चातक, मोर और पपीहा इस आशा में नाचने लगते हैं कि अब वर्षा होगी तथा जंगल में सर्वत्र आनन्द का साम्राज्य छा जाता है। नभ में छाये बादलो को देख सभी मस्ती से भरकर खुश हो जाते हैं।

4. दिए गए शब्दों का वर्ण विच्छेद करो।
शीतल, धनुष, गोरे, धरती, प्यास
उत्तर  :शीतल - श् + ई + त् + अ + ल् + अ, 
धनुष - ध् + अ + न् + उ + ष् + अ, 
गोरे - ग् + ओ + र् + ए , 
धरती - ध् + अ + र् + अ + त् + ई, 
प्यास - प् + य् + आ + स् + अ।

5. निम्नलिखित शब्दों का वाक्य में प्रयोग करो। मंगल, गर्जन, मोर, प्यास, पाठ

उत्तर  : मंगल वर्षा होने से जंगल में मंगल होने लगता है। 
गर्जन - घोर गर्जन के साथ शेर ने हिरणों पर आक्रमण कर दिया। 
मोर - बादलों की छाया में मोर का नाच सुहाना होता है।
प्यास - प्यास केवल पानी से ही बुझती है। 
पाठ - अपना पाठ नियमित रूप से याद करो।
6. बेमेल को गोल घेरो तथा पास में लिखो।
चातक, पपीहा, बैल, मोर ---   बैल
बादल, घटा, मेघ, घन ---    घटा
द्वीप, नदी, तालाब, समुद्र ---  द्वीप

7. निम्नलिखित शब्दों का तीन-तीन पर्यायवाची लिखो।
उत्तर :
मोर-मयूर, कलापी, शिखी; नभ-आकाश, आसमान, गगन; जग-संसार, विश्व, जगत

8. निम्न शब्द पहली से 'बादल' के पर्यायवाची शब्दों को खोजकर लिखो। एक लिख दिया गया है।


जैसे मेघ, जलध, घन, नीरध, पयोध, अंबुध। 

9. शब्द जाल में विशेषण शब्द को चुनकर घेरो और पास में लिखो

उत्तर  : 
 - शीतल ; गहरा ; गोरा ;  काला ;  नमी ;  घना

10. संज्ञा और विशेषण की तीन जोड़ियाँ पाठ से चुनकर लिखो।
जैसे- हरे वृक्ष

उत्तर : गोरे बादल, काले बादल, शीतल पवन, सूखे वृक्ष।

11. कविता की इन पंक्तियों से क्रिया शब्द चुनकर लिखो।
11.1 शीतल पवन चलाते बादल - चलाते
11.2 जब नभ पर छा जाते बादल - छा जाते
11.3 इतना नीर बहाते बादल - बहाते
11.4 पहला पाठ पढ़ाते बादल - पढ़ाते

















   

Class 6 English Poem Laughing Song Chapter Solution (हँसी प्रदान करने वाला गीत)

Class 6 English 
Laughing Song
(हँसी प्रदान करने वाला गीत)

 When the green woods laugh with the voice of joy, (जब हरे-भरे जंगल खुशी के स्वर के साथ हँसते हैं,।)

And the dimpling stream runs laughing by, (और गड्ढेदार नदी हँसती हुई दौड़ती है,)

When the air does laugh with our merry wit, (जब हवा हमारी परिहासजनक बातों के साथ हँसती है,)

And the green hill laughs with the noise of it. (और हरी पहाड़ी इसके शोर से हँसती है।)

When the meadows laugh with the lively green, (जब चरागाह हरी-भरी हरियाली से हँसते हैं,)

And the grasshopper laugh in the merry scene, (और टिड्डा आनंददायक दृश्य में हँसता है,)

When Mary and Susan and Encily, (जब मेरी और सूसन और एनसिली,)

With their sweet round mouths sing "Ha, Ha, Ha!" (अपने मधुर गोल मुँह से गाती हैं, "हा, हा, हा!”)

When the pointed birds laugh in the shade, (जब पतली चोंच वाली चिड़ियाँ छाया में हँसती हैं,)

Where our table with cherries and nuts is spread, (जहाँ हमारी मेज पर चेरी और मेवे फैले हैं,)

Come live and be merry, and join with me, (आओ और खुश हो जाओ, और मेरे साथ मिल जाओ,)

To sing the sweet chorus of "Ha, Ha, He!"

("हा, हा, ही!" के मधुर गीत गाने के लिए।)


Word Meaning : Voice = स्वर, Joy = खुशी, प्रसन्नता, Dimpling = गड्ढेदार, Stream = नदी, Merry = Meadows = चरागाह, Grasshopper = झींगुर, अँखफोड़वा, Spread = फैलाना। आनंदित, खुशी, Hill = पहाड़ी, Noise = शोर,


EXERICSE (अभ्यास-कार्य)

A. Answer the following questions:

(निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:)

1. How do the green woods laugh?

Answer : The green Woods laugh with the voice of joy.

2. How do the air and the green hill laugh?

Answer : The air laugh with our marry wit. and the green hill laugh with the noise of it

3. How do the children in the poem laugh?

Answer : The children Singing song with their sweet round mouths.. "Ha, Ha, Ha!"

4. Where do the birds laugh?

Answer : The birds laugh in the shade.

5. What does the poet invite us to do?

Answer : The poet invite us to come live and be Mary and joy with him.

GRAMMAR


B. Fill in the proper forms of the Verbs in the following sentence

(निम्नलिखित वाक्यों में उचित 'क्रिया' रूप भरिए : )

1. He has  gone to Delhi.

2. The baby is Sleeping

3. Who has stolen your book?

4. The police caught the thief yesterday.

5. He drives very fast.


ACTIVITY

Read and learn the poem and recite it in the class : (कविता को पढ़िए और याद कीजिए तथा कक्षा में सुनाइए :)


👉Daily Use 100000+ English and Hindi Sentences