प्रिया पाठक गण यहां प्रस्तुत ब्लॉग में दीपावली पर निबंध के कुछ नमूने दिए गए हैं, जिनमें 10 लाइन के निबंध और संक्षिप्त निबंध
दोनों प्रकार के हैं। आगे भी इसमें और निबंध जोड़ दिए जाएंगे। आप इस ब्लॉक पर लिए और विभिन्न प्रकार के निबंध और सामान्य ज्ञान से संबंधित प्रश्नों को देखिए पढ़िए और सीखिए।
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दिवाली/दीपावली
(10 लाइन की निबंध)
• दीपावली या दिवाली हिंदू धर्म की पवित्र पर्व में से एक है।
• कार्तिक मास की अमावस्या को रात्रि के समय घर आंगन में दीप प्रज्वलित किया जाता है।
• दीपावली असत्य पर सत्य की और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है।
• यह हमें अंधकार से प्रकाश की ओर चलने का संदेश देता है।
• इसके आगमन से कुछ दिन पहले घर की लिपाई पुताई की जाती है और उसे सजाया जाता है।
• बाजारों में हर दुकानों में दीपावली के सजावटी सामान बिकने लगते हैं।
• बच्चे और बड़े सभी नए कपड़े पहनते हैं तथा आपस में खुशियां बांटते हैं व मिठाइयों के डिब्बे बांटे जाते हैं।
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दिवाली/दीपावली
(10 लाइन की निबंध)
1. दीपावली को दीपों का त्योहार भी कहा जाता है।
2. दिवाली भारत का सबसे प्रसिद्ध और सबसे बड़ा त्यौहार है।
3. यह त्यौहार भगवान राम की याद में मनाया जाता है जो 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे।
4. इस अवसर पर हिंदू मामबत्तियां जलते हैं और अपने घरों को रंगोली से सजाते हैं।
5. हिंदू बच्चे इस पर्व पर पटाखे जलाकर बहुत प्रसन्न होते हैं।
6. हिंदुओं में इस अवसर पर धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।
7. युवा वयस्क और बूढ़े सभी देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करते हैं।
8. हिंदू अपने दोस्तों और पड़ोसियों के साथ मिठाई और उपहार बनते हैं।
9. भारत में सार्वजनिक अवकाश मनाया जाता है और लोग इस त्यौहार का बड़े उत्साह के साथ आनंद लेते हैं।
10. यह हिंदुओं के सबसे प्रिय और आनंददायक त्योहारों में से एक है।
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दिवाली/दीपावली
हमारे देश में अनेक त्यौहार मनाए जाते हैं। इनमें होली, दिवाली, रक्षाबंधन आदि मुख्य हैं। दीपावली हिंदुओं का बहुत बड़ा त्यौहार है। यह कार्तिक महीने के अमावस्या को बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन लोग लक्ष्मी जी की पूजा करते हैं। बहुत से व्यापारी इसी दिन से अपना वही खाता भी नया शुरू करते हैं।
कहा जाता है कि प्राचीन काल में श्री रामचंद्र जी लंका विजय कर इसी दिन अयोध्या लौटे थे, उनके स्वागत में अयोध्या वासियों ने अपने घरों को दीपों से सजाया था। संपूर्ण नगर दीपों की ज्योति से जगमगा उठा था, तभी से यह पर्व मनाया जाता है। इन दिनों स्कूल में छुट्टी रहती है। बच्चे खूब मिठाई खाते हैं और आतिशबाजी छोड़कर खुशी मनाते हैं।
दीपावली हंसी-खुशी और आनंद का त्यौहार है। दीपावली से पहले लोग अपने घरों और दुकानों आदि की सफाई करते हैं। नए-नए बर्तन खरीदते हैं। लक्ष्मी पूजन के बाद लोग एक दूसरे को मिठाइयां बांटते हैं।
इस दिन कुछ लोग जुआ भी खेलते हैं। कभी-कभी आतिशबाजी से आग भी लग जाती है और बच्चे भी जल जाते हैं।
दीपावली हमारे जीवन में प्रेम और आनंद का भाव जागती है किंतु इसे हमें बुराइयों से मुक्त करना चाहिए।
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दिवाली/दीपावली
दीपावली कार्तिक महीने की अमावस्या को मनाया जाता है। इस त्यौहार पर रात में विशेष रूप से दीपक जलाकर प्रकाश किया जाता है इसलिए इसे दीपावली या दीप मलिका के नाम से पुकारते हैं।
दीपावली का त्यौहार किस कारण से मनाया जाता है? इस विषय में अनेक मत प्रचलित है। कुछ लोग मानते हैं कि श्री रामचंद्र जी रावण का विनाश करके माता सीता जी तथा लक्ष्मण जी के साथ 14 वर्ष के बाद अयोध्या लौटे तो अयोध्या वासियों ने अपनी खुशी प्रकट करने के लिए अयोध्या को दीपकों से सजाया था बस तभी से दीपावली का पर्व मनाया जाने लगा। लोगों का एक अन्य मत है कि इस दिन धन की देवी लक्ष्मी जी भूमि पर यह देखने के लिए आती हैं कि मेरी मान्यता कहां किसके यहां कैसी है। कौन मेरा सम्मान व पूजा करता है! इसलिए हर एक आदमी अपने घर को लक्ष्मी जी के आगमन की संभावना से सजाता है और लक्ष्मी जी की कृपा की आशा करता है।
इस त्यौहार की तैयारी कई दिन पूर्व से ही की जाने लगती है। प्रत्येक व्यक्ति मकान, दुकान आदि को अच्छी तरह से सजाता है। दीपावली से दो दिन पूर्व धनतेरस होती है। इस दिन बाजार से नए बर्तन खरीद कर लाने का प्रचलन है। अगले दिन छोटी दीपावली होती है। इस दिन को नरक चतुर्दशी भी कहते हैं। इसके अगले दिन दीपावली का मुख्य त्यौहार होता है। इस दिन नर-नारी, बालक, बच्चे सभी प्रसन्न व व्यस्त दिखाई पड़ते हैं। सायंकल होने पर श्रीगणेश, लक्ष्मी जी की पूजन दीप जलाकर चावल, खीर-पतासे, मिठाई व फल - फूलों से किया जाता है। इसके बाद मनुष्य अपने घरों दुकानों को वह अन्य भवनों को दीप मोमबत्तियां व बिजली के बल्बों से सजाते हैं। बाजारों में भी बहुत अधिक रोशनी व सजावट की जाती है। दीपावली से अगले दिन गोवर्धन पूजा होती है तथा उससे अगले दिन भैया दूज का पर्व मनाया जाता है। इस त्यौहार की प्रतीक्षा सभी नर - नारी किया करते हैं। बच्चों के लिए तो यह मिठाई का त्योहार माना जाता है।
यह त्यौहार खुशी व उमंग का त्यौहार है। इस पर्व के बहाने घरों की सफाई हो जाती है। वर्षा के दिनों में जो गंदगी, सीलन हो जाती है। वह सब लिपाई पुताई के कारण दूर हो जाती है। कुछ लोग इस अवसर पर जुआ भी खेलते हैं। जुआ खेलने से पर्व की वैद्यता एवं सजावट, समाज के सुखद वातावरण को दूषित कर देता है। इस अवसर पर हमें बुरे काम नहीं करने चाहिए। दीपावली वास्तव में एक अद्वितीय पर्व है।
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दिवाली/दीपावली
'दीपावली' को दिवाली भी कहते हैं। 'दीपावली' का अर्थ है - दीपों की पंक्तियां। दीपों की पंक्तियों के साथ दिवाली अपने साथ कई पर्वों के लिए आती है। दीपावली के दो दिन पहले 'धनतेरस' होता है। इस दिन सभी लोग नए-नए बर्तन खरीदते हैं। फिर 'यमदियारी' आती है। इस रात यम को प्रसन्न करने के लिए दिया जलाया जाता है।
दीपावली के तीसरे दिन 'भैया दूज' आता है। इस दिन विवाहित एवं अविवाहित सभी स्त्रियां अपने भाइयों को मिठाई खिलानी हैं। इसी दिन चित्रगुप्त भगवान की पूजा होती है, जिसे 'चित्रगुप्त पूजा' अथवा 'दावत पूजा' कहा जाता है। कायस्थ लोग इस दिन चित्रगुप्त की पूजा के साथ-साथ कलम और दावत की पूजा करते हैं। दीपावली की रात में दीयों, मोमबत्तियों एवं बल्बों से पूरा घर सजाया जाता है। सरसों या अंडी के तेल से दिये जलाए जाते हैं। अमावस्या की कालीमामयी रात्रि प्रकाश की सेना देखते ही भाग जाती है। रात भर प्रकाश की वर्षा होती रहती है। इस दिन पूरी रात प्रकाशपुंजों से पुंजित और दीपमालाओं से सज्जित रहती है। दीपावली की रात अंधकार पर प्रकाश की विजयपताका फहराती रहती है।
इस दिन सबसे पहले लक्ष्मी और गणेश की पूजा होती है। पूजा के बाद लावा, फरही, बुंदिया और मिठाइयां खिलाई जाती हैं। दीपावली को धन का त्यौहार भी माना जाता है। पौराणिक कथा है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने अपने पत्नी लक्ष्मी को राजा बलि के कैद से मुक्त किया था। इसीलिए इस दिन लक्ष्मी की पूजा होती है। दूसरी कथा के अनुसार श्रीरामचंद्र लंका-विजय कर सीता जैसी लक्ष्मी को इसी दिन अयोध्या लाए थे। इस खुशी में उसे दिन अयोध्या में दिए जलाए गए और दिवाली मनाई गई तभी से दिवाली मनाने की परंपरा चल पड़ी।
वर्षाऋतु के बाद घर - बाहर गंदगी पसर जाती है। दिवाली के बहाने घर - बाहर की साफ - सफाई और लिपाई - पुताई हो जाती है। साल भर का कूड़ा - कचरा हटा दिया जाता है। बच्चे - बच्चियां मिट्टी के बर्तनों से खेलते हैं। वे मिट्टी के बर्तनों में भोजन बनाते बनाने का बनावटी अनुकरण करते हैं। इससे उनका मनोरंजन होता है, उन्हें भविग्रस्त - जीवन का प्रशिक्षण भी मिल जाता है।
दीपावली का एकमात्र संदेश है- 'तमसो मा ज्योतिर्गमय' अर्थात' हम अंधकार से प्रकाश की ओर चलें।
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