इस पोस्ट में सरस्वती पूजा पर निबंध के कुछ नमूने दिए गए हैं। जिन्हें आप पढ़कर लाभान्वित हो सकते हैं, और निबंध लिखना सीख सकते हैं। आई शुरू करते हैं सरस्वती पूजा परनबंध..
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नमूना 1 (10 लाईन)
'सरस्वती पूजा'
- बसंत पंचमी या सरस्वती पूजा हिंदुओं का प्रसिद्ध त्योहार है।
- माँ सरस्वती का वस्त्र श्वेत और उनके वाहन हंस का रंग भी श्वेत होता है।
- यह त्योहार माघ माह में मनाया जाता है।
- यह त्योहार बसंत ऋतु के आगमन को दर्शाता है।
- इस दिन माँ सरस्वती का जन्मदिन होता है।
- माँ सरस्वती ज्ञान तथा विद्या की देवी है।
- विद्यार्थी ज्ञान तथा बुद्धि के लिए देवी से प्रार्थना करते हैं।
- इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व होता है अतः सभी पीले वस्त्र पहनते हैं।
- सभी लोग खुशी से त्योहार मनाते हैं।
- बसंत पंचमी हमें आनंद देती है।
नमूना 2 (10 लाईन)'सरस्वती पूजा'
- सरस्वती पूजा हिंदूओं का एक प्रमुख त्योहार है, जिसे बसंत पंचमी अथवा सरस्वती पूजा के नाम से जाना जाता है।
- बसंत पंचमी एक मौसमी त्योहार है जो हर साल माघ महीने के पांचवें दिन (पंचमी) को हिंदू कैलंडर के अनुसार मनाया जाता है, जो अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार जनवरी अथवा फरवरी में पड़ता है।
- विद्या की देवी मां सरस्वती का पूजन पूरे भारत में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।
- मां सरस्वती का वस्त्र और उनके वाहन हंस का रग भी श्वेत होता है जो शांति का प्रतीक है।
- बसंत पंचमी सर्दियों के मौसम के अंत का और बसंत के आगमन का प्रतीक है।
- इस त्योहार पर लोग आमतौर पर पीले वस्त्र पहनते हैं।
- बसंत पंचमी का त्योहार ज्ञान की देवी सरस्वती को समर्पित है।
- विद्यालयों एवं शिक्षण संस्थानों में सरस्वती पूजा के साथ-साथ इस दिन विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाता है।
- यह विशेष रूप से शिक्षण संस्थानों में मनाया जाता है।
- सरस्वती विद्या की देवी हैं इसीलिए छात्र एवं कला प्रेमी माँ सरस्वती से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
नमूना 3
'सरस्वती पूजा'
सरस्वती पूजा प्रगति विद्या की अधिष्ठात्री देवी हैं। बसंत पंचमी की तिथि को सरस्वती की पूजा की जाती है। इसलिए विद्यालयों में सरस्वती पूजा का आयोजन किया जाता है। सरस्वती पूजा की तैयारी लगभग 15 दिन पहले से शुरू हो जाती है। इस दिन अत्यंत भक्ति भाव से सरस्वती की प्रतिमा स्थापित की जाती है। देवी सरस्वती की पूजा, आराधना, अर्चना आदि की जाती है। विद्यार्थीगण भक्ति भाव से माॅं शारदा की पूजा करते हैं। पूजा के उपरांत प्रसाद का वितरण होता है ।
वसंत पंचमी की संध्या एवं रात्रि में विद्यालयों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है। इस अवसर पर नाटक, संगीत, नृत्य, कवि सम्मेलन आदि अनेकानेक सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। इन कार्यक्रमों में बहुत उत्साह के साथ छात्र गण भाग लेते हैं।
सरस्वती विद्या और विवेक की देवी हैं। विवेक का रंग सफेद होता है। श्वेत रंग एवं शांति का प्रतीक है। सरस्वती का वस्त्र भी श्वेत रहता है। सरस्वती के वाहन हंस का पंख स्वेत होता है। इससे स्त्री की पवित्रता एवं निष्ठा का पता चलता है। सरस्वती का वाहन हंस नीर-क्षीर विवेकी होता है। इससे पता चलता है कि सरस्वती ज्ञान और विवेक की देवी है। सरस्वती के एक हाथ में पुस्तक और एक हाथ में वीणा रहती है। इसका अर्थ है कि सरस्वती कला की देवी है। काव्य संगीत आदि सभी कलाओं की देवी हैं।
विद्या और कला के प्रेमी सरस्वती की पूजा आराधना अवश्य करते हैं। देवी सरस्वती की पूजा करने से मन में विद्या के प्रति श्रद्धा एवं समर्पण का भाव जगता है।
इसी कारण छात्र गण सरस्वती की पूजा करते हैं। और आज सरस्वती पूजा के अवसर पर लाउडस्पीकर द्वारा सिनेमा के गंदे एवं भद्दे गीत सुनाए जाते हैं। इससे पूजा में पवित्रता की जगह अश्लीलता आ जाती है। छात्रों को सिनेमा के गीतों की जगह भक्ति-गीत, भजन और राष्ट्रगीत उचित है। ना कि लोगों को अश्लील फिल्मी संगीत सुनाना। इस पवित्र एवं धार्मिक अवसर पर फूहड़ प्रदर्शन करना अशोभनीय है ।
हमें आनंद और इस उत्साह के साथ विद्या की देवी सरस्वती की पूजा करनी चाहिए।

