कक्षा 5 हिंदी पाठ 21 ॲंधेर नगरी /पाठबहार / भारतेंदु हरिश्चंद्र / कक्षा 5 हिंदी पश्चिम बंगाल बोर्ड

कक्षा 5 हिन्दी पाठबहार (NOTES) पश्चिम बंगाल बोर्ड

पाठ 21 

ॲंधेर नगरी

🌼भारतेन्दु हरिश्चंद्र

जीवन परिचय

   आधुनिक हिन्दी साहित्य के जनक भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का जन्म काशी (बनारस) के प्रसिद्ध वैश्य परिवार में 9 सितम्बर, 1850 ई. को हुआ था। इनके पिता गोपालचन्द (गिरघर दास) प्रतिभा संपन्न कवि थे। 13 वर्ष की उम्र में इन‌का विवाह मत्रो देवी से हुआ। इनमें राष्ट्रीयता कूट-कूट कर भरी हुई थी। देश, समाज, धर्म आदि की रक्षा के लिए ये हमेशा तत्पर रहा करते थे। 1867 ई. से इन्होंने 'कवि-वचन सुधा' और 1873 ई. में 'हरिश्चन्द्र मैगजीन' का प्रकाशन एवं संपादन का कार्य किया। इनके द्वारा रचित रचनाओं में सत्य हरिश्चन्द्र, भारत दुर्दशा, अँधेर नगरी, मुद्राराक्षस, प्रेम माधुरी, प्रेम सरोवर आदि आदि हैं। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र अद्भुत बहुमुखी प्रतिभा संपन्न साहित्यकार थे। उन्होंने साहित्य के माध्यम से समाज की बुराइयो, विकृतियों को दूर करने का प्रयास किया।

 भारतेन्दु जी की भाषा में बड़ा लोच है। इनकी बज भाषा परिष्कृत है। हिन्दी की सजीवता बनाये रखने के लिए घरेलू बोल-चाल के शब्दों का प्रयोग उन्होंने खुले मन से किया है। इस प्रकार हिन्दी साहित्य के सेवा में रत रहते हुए आप 6 जनवरी, 1885 ई. को चल बसे। अपने 35 वर्षों की अल्प आयु में ही इन्होंने मात्रा और गुणवत्ता की दृष्टि से इतना लिखे जिससे इनकी रचनाएँ साहित्य लेखन का पथ-दर्शक बन गईं।


कविता का सारांश

  'अँधेर नगरी' भारतेन्दु हरिश्चन्द्र द्वारा रचित एक व्यंगात्मक नाटक है। इसमें नाटकार ने शासन व्यवस्था की विसंगतियों को उ‌द्घाटित किया है। 'अँधेर नगरी' का तात्पर्य ऐसी नगरी से है जहाँ तानाशाह की सत्ता है। न्याय का आडम्बर होता है तथा जनता का शोषण किया जाता है। ऐसी नगरी में गुणवान और गुणहीन लोगों में कोई भेद नहीं किया जाता है।

प्रस्तुत नाटक में एक राजा की काहनी के माध्यम से अंग्रेजी शासन व्यवस्था पर भी करारी चोट की गई है। राजा अन्यायी शासन व्यवस्था का प्रतीक है। इस चौपट राजा के शासन में सब कुछ टके सेर है, अर्थात् गुणी और गुणहीन का एक ही मोल है। अतः उनके साथ एक जैसा व्यवहार किया जाता है। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने संकेत किया है कि जिस राज्य का राजा ही भ्रष्ट हो, तो उसके सभी सहायक अर्थात् मंत्री, सेट, अधिकारी, पुलिस भ्रष्ट हो जाते हैं। अतः लोभ में पड़कर देशहित को नहीं भलना चाहिए।

शब्दार्थ  :- भिक्षा = भीखः आनंद = खुशी; टका = पुराने समय के सिक्के; संकट = मुसीबतः भिश्ती - चनड़े की थैली में पानी भरकर लाने वाला; मशक = पानी भरने की चमड़े की बड़ी थैली; विश्वास = भरोसाः नाहक = बेकार में; गड़रिए =भेड़ पालने वाला। कसूर = दोषः हुक्म = आदेश: बेकसूर = निर्दोष।

 अभ्यासमाला  


1. संक्षेप में उत्तर दो।

1.1 तुम्हारे पड़ोस में लगने वाले बाजार में क्या-क्या बिकता है?
उ० हमारे पड़ोस में लगने वाले बाजार में विभिन्न प्रकार की ताजा तरकारियां, कपड़े और घर में काम आने वाले विभिन्न प्रकार के सामान बिकते हैं।

1.2 महंत ने अपने चेलों को किस ओर भेजा ?
उ० महंत ने गोवर्धनदास को पश्चिम की ओर और नारायणदास को पूर्व की ओर भेजा।

1.3 गोवर्धनदास क्या लाया ?
उ० गोवर्धनदास साढ़े तीन सेर मिठाई लाया।

1.4 कारीगर के बाद सिपाहियों ने किसे पकड़ कर लाया?
उ० कारीगर के बाद सिपाही चूने वाले को पकड़कर लाए।

1.5 कोतवाल के बदले कैसे आदमी को फाँसी पर चढ़ाने का हुक्म दिया गया?
उ० कोतवाल के बदले मोटे आदमी को फांसी पर चढ़ाने का हुक्म दिया गया।

1.6 महंत जी ने क्या चढ़ाकर सिपाहियों से कहा?
उ० महंत जी ने भौह चढ़ाकर सिपाहियों से कहा।

1.7 राजा फाँसी पर बढ़ने के लिए क्यों लालायित हो उठा ?
उ० राजा को पता चला कि अभी फांसी पर चढ़ने से स्वर्ग मिलेगा। अतः वह फांसी पर चढ़ने के लिए लालायित हो गया।

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर अपनी भाषा में लिखो।

2.1 महंत ने गोवर्धनदास से क्या कहा ?
उ० महंत ने गोवर्धनदास से कहा कि तुम पश्चिम की ओर जाकर भिक्षा लाओ।

2.2 अँधेर नगरी में सभी चीजें किस भाव बिकती थीं?
उ० अंधेर नगरी में सभी चीजें टके सेर बिकती थीं।

2.3 गोवर्धनदास के पास कुल कितने पैसे थे? उसने उन पैसों से क्या खरीदा ?
उ० गोवर्धनदास के पास कुल सात पैसे थे। उसने उन पैसों से मिठाई खरीदी।

2.4 गोवर्धनदास ने उसी नगर में रहने के लिए क्या तर्क दिया?
उ० गोवर्धनदास ने उसी नगर में रखने के लिए यह तर्क दिया कि यहां थोड़ा मांगने पर भी पेट भर जाता है।

2.5 राजा के दरबार में फरियादी क्या शिकायत लेकर आया ?
उ० राजा के दरबार में फरियादी यह शिकायत लेकर आया था कि कल्लू बनिए की दीवार गिरने से उसकी बकरी मर गयी थी।

2.6 गड़रिए ने किस तर्क से स्वयं को बचाने का प्रयास किया?
उ० स्वयं को बचाने का प्रयास करते हुए गड़ेरिया ने तर्क दिया कि उधर से कोतवाल की सवारी आयी और भीड़ भाड़ के कारण वह छोटी-बड़ी भेड़ का ख्याल नहीं कर पाया।

2.7 गोवर्धनदास को फाँसी पर क्यों चढ़ाया जा रहा था?
उ० गोवर्धनदास मोटा था और फांसी का फन्दा उसकी गर्दन में ठीक बैठता था। इसीलिए उसे फांसी पर चढ़ाया जा रहा था।

2.8 अंत में फाँसी पर कौन चढ़ा?
उ० अंत में राजा फांसी पर चढ़ा।


3. निम्नलिखित कथनों को पढ़ो और उत्तर लिखो।

3.1 'नगर तो बहुत सुन्दर है, पर भिक्षा भी सुन्दर मिले तो बड़ा आनन्द हो।' 
किसने कहा - नारायण दास ने;  किससे कहा - महंत से।

3.2 'भिक्षा माँग कर सात पैसे लाया हूँ, साढ़े तीन सेर मिठाई दे दो।' 
किसने कहा - गोवर्धन दास ने;   किससे कहा - हलवाई से

3.3. ऐसी नगरी में रहना उचित नहीं है।

किसने कहा - महंत ने;   किससे कहा - गोवर्धनदास से

3.4 'महाराज, मेरा कुछ दोष नहीं। कारीगर ने ऐसी दीवार बनाई की गिर पड़ी।' 
किसने कहा - कल्लू ने;   किससे कहा - राजा से

3.5 'चल बे चल, मिठाई खाकर खूब मोटा हो गया है। आज मजा मिलेगा।' 
किसने कहा - सिपाही ने;  किससे कहा - गोवर्धनदास से

3.6 'आप फाँसी क्यों चढ़ते हैं?'

किसने कहा - राजा ने;  किससे कहा - महंत से

4. एकांकी में जो घटनाएं घटीं उन पर (✔) लगाइए और जो नहीं घटीं उन पर (x) लगाइए। उत्तर

4.1 महंत जी ने अँधेर नगरी छोड़ने के लिए कहा।       [√]

4.2 कल्लू किसान की दीवार गिर पड़ी थी।      [x]

4.3 कारीगर ने भिश्ती पर आरोप लगाया।       [x]

4.4 नगर में सारी चीजें टके सेर मिलती थीं।      [√]

4.5 सिपाहियों ने फाँसी लगाने के लिए महंत को पकड़ लिया। [x]

4.6 महंत ने गोवर्धनदास को फाँसी से बचाया।  [√]

4.7 लोग राजा को फाँसी पर लटका देते हैं।  [x]

5. दिए गए शब्दों के सही रूप से रिक्त स्थान को भरो।

5.1 गठरी तो बहुत भारी मालूम पड़ती है।   (भार)

5.2 बच्चा, तुझे बाद में पछताना पड़ेगा।   (पछतावा)

5.3 में ही फाँसी पर चढूँगा ।   (चढ़ना)

5.4 महाराज, मैं दोषी नहीं हूँ।   (दोष)

6. कोष्ठक से उपयुक्त शब्द चुनकर वाक्य को पूरा करो।

6.1 नगर तो बड़ा सुन्दर है पर भिक्षा भी सुन्दर मिले तो बड़ा आनन्द हो।  (भोग, रुपये, भिक्षा)

6.2 सात पैसे भीख में मिले थे उसी से तीन सेर  मिठाई मोल ली है। (तीन सेर, साढ़े तीन सेर, तीन किलो)।

6.3 अँधेर नगरी चौपट राजा, टके सेर भाजी, टके सेर खाजा । (मंत्री, मिठाई, खाजा, चौपट)

6.4 इस समय ऐसी शुभ घड़ी में जो मरेगा सीघा स्वर्ग जायेगा। (नरक, सीध शहर, सीघा स्वर्ग, घर)

7. निम्नलिखित शब्दों की वर्तनी शुद्ध करो।

दिवार, गोबर्धनदास, गणेरिया, भिस्ती, फॉसि, हुज्जत, महंथ

उ० दीवार, गोवर्धनदास, गड़ेरिया, भिश्ती, फाँसी, हुज्जत, महंत।


8. कल्पना करो और उत्तर दो।

8.1 यदि तुम राजा होते तो क्या उपाय करते ?
उ० यदि मैं राजा होता तो सभी वस्तुओं का उनके गुण के अनुसार उनका मूल्य निर्धारित करता।

8.2 यदि तुम गोवर्धनदास के स्थान पर होते तो क्या गुरुजी की बात मानते ? क्यों ?
उ० यदि मैं गौवर्धनदास होता तो गुरुजी की बात अवश्य मानता क्योकि गुरुजी हमेशा अपने शिष्य से अधिक समझदार होते हैं।

8.3 आपको राजा किस प्रकार लगा? अपनी सोच का कारण भी बताओ।
उ० मुझे राजा मूर्ख लगा। राजा बिना सोचे-समझे कोई बात बोलता था।

8.4 यदि महंत नहीं लौटते, तो क्या होता ?

उ० यदि महंत नहीं लौटते तो गोवर्धनदास को फांसी पर लटका दिया जाता।

9. टोकरी में दिए गए शब्दों से चुनकर विशेषण-विशेष्य की सही जोड़ी मिलाकर लिखो। सुन्दर, पैस, सात, भेड़, बड़ा, घड़ा, मोटा, नगर, बड़ा फंदा, शुभ, आदमी।

विशेषण : - सुंदर, साथ, बड
विशेष्य :-  पैसे, भेंड़े, घड़ी
विशेषण :- मोटा, बड़ा, शुभ
विशेष्य :- आदमी, फंद, नगर

10. निम्नलिखित वाक्यों से किसी काम को करने या होने का पता चलता है।
जैसे रमा पढ़ती है। सोहन साइकिल चलाता है।
निम्नलिखित वाक्यों में क्रिया-पदों (शब्दों) के नीचे रेखा खींचो।

10.1 तू पश्चिम की ओर जा। मुझे साढ़े तीन सेर मिठाई दे दो
10.2 मैने इसकी बात का विश्वास नहीं किया। मैं तो यहीं रहूँगा
10.3 बकरी दबकर मर गई। गुरुजी, बचाओ

11. दिए गए शब्दों का लिंग बदलकर लिखो।
बकरी-बकरा, घोड़ा-घोड़ी, कुंजड़िन- कुंजड़ा, राजा-रानी, ऊँट-ऊँटनी

12. दिए गए वाक्यों का वचन बदलकर वाक्य पुनः लिखो। (रंगीन शब्दों पर विशेष ध्यान देते हुए।)

उदा० सिपाही ने गोवर्धनदास का हाथ पकड़ा

उ० सिपाहियों ने गोवर्धनदास के हाथ पकड़े

12.1 कसाई ने गड़रिए से भेड़ खरीदी

कसाइयों ने गड़ेरिए से भेड़ें खरीदीं

12.2 मैं नाहक मारा जाता हूँ

हमलोग नाहक मारे जाते हैं

12.3 मैं फाँसी पर चढूँगा

हम फाँसी पर चढ़ेगे

13. वाक्य बनाओः हुक्म, पछताना, स्वर्ग, न्याय, बेकसूर, उपदेश

उ० आप अपना हुक्म दीजिए। अब आपके पछताने से कोई फायदा नहीं होगा। स्वर्ग सबको नहीं मिलता। गरीबों के साथ न्याय अवश्य होना चाहिए। कृपया बेकसूर को छोड़ दीजिए। दूसरों को उपदेश देने वाले बहुत है।

14. दिए गए हमारे सामाजिक मित्रों के काम के बारे में एक-एक वाक्य लिखो।

कुँजड़ा, हलवाई, कारीगर, गड़रिया कोतवाल, डॉक्टर, डाकिया, सिपाही, भिश्ती

उ० कुंजड़ा तरकारी बेचता है।
हलवाई मिठाई बनाता है।
कारीगर सूत कातता है।
गड़रिया भेड़ चराता है।
कोतवाल शहर की रक्षा करता है।
डॉक्टर मरीज देखता है।
डाकिया पत्र पहुंचाता है।
सिपाही सबकी रखवाली करता है।
भिश्ती चूने में पानी डालता है।

15. सही विकल्प पर (✔) का चिह्न लगाओ।

15.1 दिया गया पाठ किस प्रकार की रचना है?
[  ] देशभक्ति;  [ ] मातृभक्ति;  [ ✓ ] हास्य-व्यंग्य;  [ ]  विवेक पूर्ण

15.2 अंत में कौन फाँसी पर चढ़ा?  [ ✓ ] राजा;  [ ] कारीगर;  [ ]कसाई;  [ ] सिपाही

15.3 अँधरे नगरी नाटक के रचनाकार का नाम है-
[ ]जयशंकर प्रसाद [ ]सोहनलाल द्विवेदी [ ✓ ]भारतेन्दु हरिश्चन्द्र [ ] बालमुकुंद गुप्त

16. वाक्यों को पढ़ो और समझकर अर्थ/उत्तर लिखो।

16.1 अँधेर नगरी चौपट राजा, टके सेर भाजी टके सेर खाजा।
उ० जहाँ पर राजा मूर्ख होता है, वहां गुणों की कद्र नहीं होती।

16.2 'राजा चौपट है।' यह साबित करने के लिए दो तर्क लिखो।
उ० (i) चौपट राजा के राज्य में गुण की कद्र नहीं होती है। सभी वस्तुएं एक ही भाव की बिकती है। (ⅱ) राजा कुछ भी कहने के पहले उचित अनुचित का निर्णय नहीं करता। जब बकरी मरती है तो जिसे भी लाया जाता है वह दूसरे को दोषी बनाता है और राजा उसी आदमी को फाँसी की सजा दे देता है और अन्त में स्वयं ही फाँसी पर चढ़ जाता है।

16.3 गुरु की बात न मानने पर शिष्य को कौन से कष्ट सहने पड़े?
उ० गुरु की बात न मानने के कारण शिष्य को फाँसी की सजा मिल गयी। वो तो गुरु ही थे जिन्होंने उसकी जान बचायी।
17. महंत ने नगरी को छोडने की बात की। क्योंकि -

17.1 नगरी सुन्दर नहीं थी।
17.2 नगरी में खाजा टके सेर मिलता था।
17.3 नगरी में सभी चीजें एक ही दाम पर मिलती थीं जो बताता है कि वहाँ कोई नियम नहीं था।
17.4 उन्हें मालूम था कि यहाँ सिपाही गलत आरोप में फँसा सकते हैं।

18. संधि करो।

18.1 शिक्षा + आर्थी = शिक्षार्थी
18.2 हिम + आलय = हिमालय
18.3 देह + अंत = देहांत
18.4 पुस्तक + आलय = पुस्तकालय
18.5 गज + आनन = गजानन
18.6 हर एक = हरेक

19. तुम्हारे समझ से बकरी के मरने का वास्तविक दोषी निम्नलिखित में कौन था? कारण भी दो। (दीवार, बनिया, गड़रिया, कोतवाल, भिश्ती, चूने वाला, कारीगर, कोई नहीं)।
उ० बकरी के मरने के लिए कोई दोषी नहीं है। दीवार पुरानी होने के कारण या किसी अन्य कारण से गिर सकती है।

20. अपने मुहल्ले के बाजार में जाओ और देखो टके सेर खाजा मिल रहा है क्या? अगर नहीं तो माँ द्वारा कहे गए निम्नलिखित सामानों को खरीदो और उनके दाम पास में लिखकर कुल कितने का बाजार किया, उसे जोड़कर बताओ।

1 किलो आलू  ₹ 20 पै 00
1 किलो प्याज ₹ 18 पै 00
1 किलो आटा  ₹ 25 पै 00
1 दर्जन केला   ₹ 30 पै 00
1 दर्जन पेंसिल ₹ 15 पै 00
1 लीटर दूध     ₹ 50 पै 00
  कुल        =   ₹ 158 पै 00

अतः मैने, कुल 158 रुपये × पैसे बाजार में खर्च किए।

21. टके की बात

21.1 टका पुराने जमाने का सिक्का था। अगर आजकल सब चीजें एक रुपया किलो मिलने लगें तो उससे किस तरह के फायदे और नुकसान होंगे?

उ० यह असम्भव है। यदि सभी चीजें एक रुपया किलो मिलने लगे तो अर्थ व्यवस्था ही समाप्त हो जायेगी।

21.2 भारत में कोई चीज खरीदने-बेचने के लिए 'रुपये' का इस्तेमाल होता है और बाग्लादेश में 'टके' का। 'रुपया' और 'टका' क्रमशः भारत और बांग्लादेश की मुद्राएं हैं। नीचे लिखे देशों की मुद्राएँ कौन-सी है?
अमेरिका, जापान, फ्रांस, इटली, इंग्लैण्ड, सऊदी अरब
उ० अमेरिका- डॉलर, जापान- येन, फ्रांस- फ्रैंक, इटली- लीरा, इंग्लैण्ड- पौड, सउदी अरब - डीनार

22. एकांकी को अपनी भाषा में कहानी का रूप दो।
उ० अंधेर नगरी, चौपट राजाः एक महंत अपने दो शिष्यों नारायणदास और गोवर्धनदास के साथ एक नगर में आते हैं। इस नगर का नाम अंधेर नगरी है और यहां के राजा का नाम चौपट राजा है। यहाँ बाजार में सभी चीजें एक टके में एक सेर मिलती है। महंत अपने शिष्यो को नगर में भिक्षा मांगने के लिए भेजते हैं। उनका एक शिष्य भिक्षा में सात पैसे पाता है और उसमें साढ़े तीन सेर मिठाई लेकर आता है। महंत जी अपने शिष्यों से कहते हैं, यह विचित्र नगरी है, यहाँ रहना उचित नहीं है। महंत का शिष्य गोवर्धनदास उनकी बात नहीं मानता है। वह इसी नगरी में रहता है और खा-पीकर मोटा ताजा हो जाता है। जाते समय गुरुजी उससे कहते हैं कभी कष्ट पड़े तो याद करना और चले जाते हैं।

• एक दिन राजा के पास एक फरियादी आता है और अपनी फरियाद सुनाते हुए कहता है कि कल्लू बनिये की दीवाल गिरने से उसकी बकरी मर गयी। राजा कल्लू बनिये को मृत्यु दण्ड देते हैं। कल्लू बनियां कमजोर मकान के लिए करीगर को, करीगर चूने वाला को, चूना वाला भिश्ती को, भिश्ती कसाई को, कसाई गड़रिया को, गड़रिया कोतवाल को दोषी बतलाया। कोतवाल को फांसी की सजा दी जाती है, पर फांसी का फंदा बड़ा और कोतवाल की गर्दन पतली होने के कारण, कोतवाल को छोड़ दिया जाता है और मोटा होने के कारण गोवर्धनदास को पकड़कर फांसी देने के लिए लाया जाता है।

• गोवर्धनदास अपने महंत को याद करता है और फांसी से बचाने की प्रार्थना करता है। महंत आकर अपने शिष्य को कुछ कहते हैं और गोवर्धनदास तुरंत फांसी पर चढ़ने को कहता है, गुरुजी भी फांसी चढ़ने की जिद्द करते हैं। राजा जब यह बात जानता है कि अभी फांसी चढ़ने से स्वर्ग मिलेगा तो राजा स्वर्ग जाने के लालच में स्वयं फांसी पर चढ़ जाता है।

23. एकांकी का अपनी कक्षा में अभिनय करो।
उ० छात्र स्वयं करें।

24. इस पाठ के जैसी एक काव्य रचना की झलक नीचे दी गई है। इस रचना एवं इसके रचयिता की जानकारी लो और खोजकर पढ़ो। (इस कार्य में शिक्षक/शिक्षिका की मदद ली जा सकती है।)
                          गुरु और चेला
गुरु एक थे और था एक चेला, चले घूमने पास में था न घेला। चलते-चलते मिली एक नगरी, चमावम थी सड़कें चमाचम थी डगरी। मिली एक ग्वालिन धरे शीश गगरी, गुरु ने कहा तेज़ ग्वालिन न भग री। बता कौन नगरी, बता कौन राजा, कि जिसके सुयश का यहाँ बजता बाजा।

कहा बढ़के ग्वालिन के महाराज पंडित
पधारे भले हो यहाँ आज पंडित।
यह अँधेर नगरी है अनबूझ राजा,
टके सेर भाजी, टके सेर खाजा।
गुरु ने कहा जान देना नहीं है,
मुसीबत मुझे मोल लेना नहीं है।
न जाने की अंधेर हो कौन छन में?
यहाँ ठीक रहना समझता न मन में।